Weapons of the past cannot be used to win today’s war: CDS – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Thu, 17 Jul 2025 04:43:37 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Weapons of the past cannot be used to win today’s war: CDS – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 बीते दौर के हथियारों से नहीं जीत सकते आज की जंग : सीडीएस https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/ https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/#respond Thu, 17 Jul 2025 04:43:37 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4289 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बुधवार को कहा कि आज की जंग बीते दौर के हथियारों से नहीं जीती जा सकती। आज के युद्ध अब भविष्य की तकनीकों से ही संभव है। ऐसे में मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) और काउंटर-यूएवी (सी-यूएएस) तकनीकों में आत्मनिर्भरता भारत के लिए बेहद जरूरी है। जनरल चौहान मानेकशॉ सेंटर में यूएवी और सी-यूएएस की प्रदर्शनी के उद्घाटन पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, हमें अब फैसला करना होगा कि हम अपनी रणनीति, तकनीक और दिशा खुद तय करेंगे या दूसरों पर निर्भर रहेंगे। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारत को भविष्य की तकनीकों में आत्मनिर्भर बनना होगा। सीडीएस ने कहा, भारत को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी तकनीकों में निवेश करना होगा। रक्षात्मक और आक्रामक अभियानों में आत्मनिर्भरता आज की रणनीतिक जरूरत है। इस प्रदर्शनी का आयोजन इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय द्वारा सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज के सहयोग से किया गया। इसका विषय ‘यूएवी और सी-यूएएस के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों से आयातित महत्वपूर्ण तकनीकों का स्वदेशीकरण था। विदेशी तकनीकों पर निर्भरता हमें कमजोर बना रही सीडीएस ने कहा, आत्मनिर्भर भारत की सोच केवल नारा नहीं, बल्कि जरूरत है। हम विदेशी तकनीकों पर निर्भर नहीं रह सकते। विदेशी तकनीकों पर निर्भरता हमारी तैयारियों को कमजोर करती है। इससे न केवल हमारी तैयारियों पर असर पड़ता है, बल्कि हथियारों की उत्पादन क्षमता भी सीमित होती है और जरूरी स्पेयर पार्ट में दिक्कत आती है।
जनरल चौहान ने कहा कि विदेशी हथियारों और सेंसर की क्षमताएं सभी को पता होती हैं, जिससे दुश्मन हमारे अभियान और रणनीति को पहले ही भांप सकता है। लेकिन अगर तकनीक हमारी अपनी होगी, तो हम दुश्मन को आश्चर्य में डाल सकते हैं। पाक के ड्रोन नुकसान नहीं पहुंचा सके सीडीएस चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा, यह ऑपरेशन इस बात का सबूत है कि भारत की स्वदेशी यूएएस और सी-यूएएस तकनीकें हमारे भूगोल और जरूरतों के अनुसार बेहद प्रभावी हैं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान ने 10 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अनआर्म्ड ड्रोन और लूटर म्यूनिशन का इस्तेमाल किया था, लेकिन ये भारत के सैन्य या नागरिक ढांचे को कोई क्षति नहीं पहुंचा सके। इनमें से अधिकतर ड्रोन को भारतीय सुरक्षा बलों ने निष्क्रिय कर दिया था। बता दें कि पाकिस्तान ने तुर्की और चीन निर्मित ड्रोन का इस्तेमाल किया था।
भारत की जरूरत के हिसाब से बनें हथियार : ब्रिगेडियर नारंग कार्यक्रम के पहले सत्र में सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर अंशुमान नारंग ने ‘ऑपरेशन सिंदूर : स्वदेशीकरण का महत्व और उससे मिली सीख विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा, स्वदेशीकरण केवल ड्रोन या किसी एक तकनीक तक सीमित न रहे, बल्कि सभी हथियार प्रणालियों को भारत की जरूरतों के हिसाब से विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया, रूस-यूक्रेन और ईरान-इजरायल संघर्षों में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों ने निर्णायक भूमिका निभाई है। ये युद्ध अब अत्याधुनिक तकनीकों के बीच चल रही बिल्ली और चूहे की दौड़ बन चुके हैं, जहां हर पक्ष अपनी प्रणाली को लगातार बेहतर बनाने की होड़ में है।

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