Waqf properties – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Mon, 03 Nov 2025 14:59:56 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Waqf properties – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण के लिए समय सीमा बढ़ाने संबंधी ओवैसी की याचिका पर सुनवाई करेगा न्यायालय https://demo.theshikshanews.com/vakph-sampattiyon-ke-panjeekaran-ke-lie-samay-seema-badhaane-sambandhee-ovaisee-kee-yaachika-par-sunavaee-karega-nyaayaalay/ https://demo.theshikshanews.com/vakph-sampattiyon-ke-panjeekaran-ke-lie-samay-seema-badhaane-sambandhee-ovaisee-kee-yaachika-par-sunavaee-karega-nyaayaalay/#respond Mon, 03 Nov 2025 14:59:20 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5592 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। उच्चतम ने ऑल इंडिया मजलिस -ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी की याचिका को सुनवाई के लिए फिर से सूचीबद्ध करने पर सोमवार को सहमति जताई, जिसमें ‘वक्फ बाय यूजर’ समेत सभी वक्फ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकृत करने की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।
याचिका को पहले 28 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी। सोमवार को ओवैसी के वकील निजाम पाशा ने प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष मामले को तुरंत सुनवाई के लिए रखने का अनुरोध किया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हम एक नई तारीख तय करेंगे।”
⁠वकील ने बताया कि वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के लिए निर्धारित छह महीने की अवधि समाप्त होने के करीब है।
उच्चतम न्यायालय ने 15 सितंबर को अंतरिम आदेश के तहत वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के कुछ प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगा दी थी। इनमें यह प्रावधान शामिल था कि केवल पिछले पांच साल से इस्लाम का पालन करने वाले व्यक्ति ही वक्फ बना सकते हैं। हालांकि, पूरे कानून को रद्द नहीं किया गया था।
अदालत ने कहा था कि नए संशोधित कानून में ‘वक्फ बाय यूजर’ प्रावधान हटाने का केंद्र सरकार का आदेश प्रथम दृष्टया मनमाना नहीं था और इस दलील का कोई आधार नहीं है कि सरकार वक्फ भूमि जब्त कर लेगी।
औपचारिक दस्तावेज के बिना लंबे समय तक धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाए जाने के कारण वक्फ के रूप में मान्यता हासिल करने वाली संपत्ति को ‘वक्फ बाय यूजर’ कहा जाता है।
ओवैसी के वकील ने अदालत से कहा कि संशोधित कानून के अनुसार, वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण के लिए छह महीने का समय दिया गया था और “पांच महीने न्यायालय के निर्णय के दौरान निकल गए, अब केवल एक महीना बाकी है।”
केंद्र ने यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (उम्मीद) पोर्टल छह जून को लॉन्च किया था ताकि सभी वक्फ संपत्तियों के डिजिटल दस्तावेज तैयार करके उनकी जियो टैगिंग की जा सके। उम्मीद पोर्टल के अनुसार, भारत में सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों का विवरण अनिवार्य रूप से छह महीने के अंदर अपलोड करना होगा।

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वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण के लिए समय बढ़ाने की मांग वाली याचिकाओं पर 28 अक्टूबर को सुनवाई https://demo.theshikshanews.com/vakph-sampattiyon-ke-panjeekaran-ke-lie-samay-badhaane-kee-maang-vaalee-yaachikaon-par-28-aktoobar-ko-sunavaee/ https://demo.theshikshanews.com/vakph-sampattiyon-ke-panjeekaran-ke-lie-samay-badhaane-kee-maang-vaalee-yaachikaon-par-28-aktoobar-ko-sunavaee/#respond Wed, 15 Oct 2025 05:59:51 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5353 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। उच्चतम न्यायालय ने एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी की उस याचिका पर सुनवाई 28 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध की है जिसमें ‘वक्फ बाय यूजर’ सहित सभी वक्फ संपत्तियों के ‘उम्मीद’ पोर्टल में अनिवार्य पंजीकरण के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ से वकील निजाम पाशा ने आग्रह किया कि याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की आवश्यकता है क्योंकि छह महीने की अनिवार्य समय अवधि समाप्त होने वाली है। मंगलवार को एक और ऐसी ही याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया। पीठ ने कहा कि वह नई याचिका को भी सूचीबद्ध करने पर विचार करेगी।
⁠न्यायालय ने 15 अक्टूबर को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के कुछ प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगा दी, जिसमें एक खंड यह भी शामिल है कि केवल पिछले पांच वर्षों से इस्लाम का पालन करने वाले लोग ही वक्फ बना सकते हैं लेकिन इसके पक्ष में संवैधानिकता की धारणा को रेखांकित करते हुए पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
न्यायालय ने केंद्र सरकार को राहत देते हुए कहा था कि नये संशोधित वक्फ कानून में ‘‘वक्फ बाय यूजर’’ प्रावधान को हटाना प्रथम दृष्टया मनमाना नहीं था और सरकार द्वारा वक्फ की जमीनें हड़प लेने संबंधी दलीलें ‘अमान्य’ हैं।
‘वक्फ बाय यूजर’ से आशय ऐसी संपत्ति से है, जहां किसी संपत्ति को औपचारिक दस्तावेज के बिना भी धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए उसके दीर्घकालिक उपयोग के आधार पर वक्फ के रूप में मान्यता दी जाती है, भले ही मालिक द्वारा वक्फ की औपचारिक, लिखित घोषणा न की गई हो।
यह प्रावधान नये कानून को चुनौती देने में विवाद का मुख्य कारण बन गया। इससे पहले नौ अक्टूबर को ओवैसी की ओर से पेश हुए पाशा ने कहा था कि वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण के लिए समय बढ़ाने की मांग वाली विविध अर्जी पर सुनवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि संशोधित कानून में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण के लिए छह महीने का समय दिया गया था और ‘फैसले में पांच महीने बीत गए, अब हमारे पास केवल एक महीना बचा है।’ ‘उम्मीद’ पोर्टल में भारत भर में सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों का विवरण छह महीने के भीतर अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाने का प्रावधान है।

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