United Nations – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Tue, 06 Jan 2026 13:52:36 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg United Nations – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 उद्देश्यहीन संयुक्त राष्ट्र संघ को भंग क्यों नही करते? https://demo.theshikshanews.com/uddeshyaheen-sanyukt-raashtr-sangh-ko-bhang-kyon-nahee-karate/ https://demo.theshikshanews.com/uddeshyaheen-sanyukt-raashtr-sangh-ko-bhang-kyon-nahee-karate/#respond Tue, 06 Jan 2026 13:52:36 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6073 अशोक मधुप/वरिष्ठ पत्रकार

संयुक्त राष्ट्र संघ (यूनाइटेड नेशनस) का मुख्य औचित्य अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना, मानव अधिकारों की रक्षा करना, और विभिन्न राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करना है। इसका गठन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में 51 देशों द्वारा किया गया था।
इसका उद्देश्य था कि भावी युद्धों को रोका वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। आज 193 देश इसके सदस्य हैं। इतने बड़े संगठन का लगता है कि आज कोई देश कहना मानने को तैयार नहीं। सबकी अपनी ढपली अपना राग है। संयुक्त राष्ट्र संघ तमाशबीन बन कर रह गया है।
हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला पर कब्जाकर लिया। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंदी बना लिया गया। उन्हें न्यूयॉर्क ले जाया गया है । वहां ड्रग्स तस्करी के आरोपों में उन पर मुक़दमा चलाया जा रहा है।
अमेरिका इस पर भी वे चुप नही बैठा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में सैन्य अभियान के बाद कई देशों को धमकी दी है।
उन्होंने इशारा किया है कि कोलंबिया में कभी भी सैन्य कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने मेक्सिको को भी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि वह वेनेजुएला के बेपटरी हो चुके तेल उद्योग को उबारने के लिए अमेरिकी कंपनियों पर भरोसा कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इशारा किया कि वह कोलंबिया में सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेक्सिको को ड्रग्स के मामले में ठीक से काम करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है। उधर वेनेज़ुएला की मौजूदा स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी बैठक में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के बयान में कहा गया कि वेनेज़ुएला में अमेरिका की कार्रवाई के मामले में “अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का पालन नहीं किया गया है”, इस बात से वे “बहुत चिंतित” हैं। रोज़मेरी डिकार्लो ने गुटेरेस का बयान पढ़ते हुए इस बात पर चिंता जताई कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए क्या मिसाल कायम कर सकती है। उन्होंने कहा कि वेनेज़ुएला में हालात नाज़ुक हैं, लेकिन अभी भी एक बड़े टकराव को रोका जा सकता है। वहीं रूस के प्रतिनिधि ने निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ़्लोरेस को तुरंत रिहा करने की मांग की।
ईरान के भी हालात ठीक नही है। वहां भी कभी भी तख्ता पल्ट हो सकता है। ईरान में बढ़ती महंगाई और देश की बिगड़ती आर्थिक हालत को लेकर सरकार के ख़िलाफ़ लगभग एक हफ़्ते से प्रदर्शन जारी है।ये पिछले तीन साल में देश में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल पर पोस्ट में ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों को मदद का भरोसा भी दिया है।
उन्होंने लिखा, “अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है और उन्हें बेरहमी से मारता है, जो कि उनकी आदत है, तो अमेरिका उनको (प्रदर्शनकारियों को) बचाने के लिए आएगा.”अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों’ की मदद के लिए ‘पूरी तरह तैयार’ है।
पिछले साल जून में अमेरिक ने ईरान पर हमले किए। दावा किया गया कि उसने इरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए है। इस्राइल भी हमले कर चुका है। इस्राइल और अमेरिका की नजर में बहुत समय ये इरान खटक रहा है।
एक ओर अमेरिक की दादागिरी का ये हाल है। उधर चीन ताइवान पर कब्जा करने को तैयार बैठा है। वह समय− समय पर अपनी वायु और जल सेना भेजकर ताइवान को धमकाता रहता है।
कभी भी चीन सैनिक कार्रवाई कर ताइवान पर कब्जा कर सकता है। इज़रायल और हमास के बीच सात अक्टूबर 2023 को शुरू हुए युद्ध को चलते हुए दो साल और तीन महीने हो चुके हैं। अक्टूबर 2025 में एक संघर्ष विराम समझौता हुआ था। इसके बाद बड़े पैमाने पर बमबारी में कमी आई है, लेकिन तनाव और छिटपुट सैन्य कार्रवाई अभी भी जारी है।
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अब तक इस युद्ध में 70,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इसमें हमास के लड़ाके और बड़ी संख्या में नागरिक (महिलाएं और बच्चे) शामिल हैं। 1,71,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
इज़रायल पक्ष की ओर से सात अक्टूबर 2023 के हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे। इसके बाद सैन्य अभियान के दौरान लगभग 1,000+ इज़रायली सैनिक मारे गए हैं। इस युद्ध में गाजा पट्टी की लगभग 80 प्रतिशत इमारतें और बुनियादी ढांचा (अस्पताल, स्कूल, सड़कें) पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो चुके हैं।
युद्ध के कारण इज़रायल को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है तो गाजा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। इस्राइल से ईरान पर भी हमला किया। इसमें बैलिस्टिक मिजाइल प्रयोग हुआ। इतना ही नही इस्राइल ने कतर पर भी पिछले दिनों हमला किया।
24 फरवरी 2022 को शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन साल 10 माह बीत गए। युद्ध निरंतर जारी है। यूक्रेन के जनरल स्टाफ और पश्चिमी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, रूस के 12 लाख से अधिक सैनिक या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं।
स्वतंत्र रूसी मीडिया समूहों ने ओपन-सोर्स डेटा के आधार पर कम से कम 1,53,000+ रूसी सैनिकों की मौत की होना माना है। विभिन्न पश्चिमी अनुमानों (जैसे दिसंबर 2024-25 की रिपोर्ट) के अनुसार, यूक्रेन के लगभग 4,00,000 से 5,00,000 सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं।
इतना सब हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ मानव जीवन की बरबादी देख रहा है। यह असहाय बना बैठा है। मानव जीवन का विनाश रोकने के लिए वह कुछ नहीं कर पा रहा। उसकी भूमिका शून्य होकर रह गई है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब संयुक्त राष्ट्र संघ कुछ नहीं कर सकता।
कोई देश उसकी मानने को तैयार नही। युद्ध रोकने की उसकी शक्ति नहीं तो उसका औचित्य क्या है? दुनिया के देश क्यों इस सफेद हाथी को पाले हैं। क्यों इसका खर्च वहन कर रह हैं। इसे भंग क्यों नही कर दिया जाता।
लगभग दो साल पूर्व हमास- इस्राइल युद्ध को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रयास हुए। कई बार प्रस्ताव के प्रयास हुए पर वीटो पावर वाले देशों के अडंगे के कारण कुछ नहीं हो सका। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस युद्ध को रोकने के लिए सर्वसम्मत प्रस्ताव स्वीकार किया, किंतु इस्राइल ने इसे स्वीकार करने से मना कर इतना सब होने के बाद भी संयुक्त राष्ट्र इस युद्ध को नहीं रोक पाया।
न रोक पा रहा है। इस युद्ध से युद्धरत देशों के विकास तो रुका ही, मानव कल्याण के लिए भवन, पुल, स्कूल और उद्योग खंडहर बन गए। हमास −इस्राइल युद्ध के बीच हुति विद्रोहियों ने इस्राइल पर मिजाइल से हमले किए। इस्राइल समर्थक देशों के मालवाहक जहाजों पर मिजाइल दागीं। इस सब के बावजूद संयुक्त राष्ट्र संघ की नींद नही खुली।
आज संयुक्त राष्ट्र महासभा कुछ देश के हाथों की कठपुतली बन गया है। अन्य देश न अपनी ताकत का प्रयोग कर सकता है ना अपनी क्षमता का । आज के हालात को देखते हुए लगता है कि अपने सबसे बड़े कार्य का दायित्व निभाने में वह सक्षम नहीं है। पांच वीटो पावर देश उसे अपनी मर्जी से नचा रहे हैं। उनके एकजुट हुए बिना संयुक्त राष्ट्र महासभा कुछ नहीं कर सकता।
ये पांचों विटो पावर देश खुद खेमों में बंटे है। ऐसे में सर्वसम्मत प्रस्ताव पास होना एक प्रकार से नामुमकिन हो गया है। म्यांमार में पिछले दिनों सेना का जुल्म देखने को मिला। चीन में उइगर मुसलमानों पर जुल्म जग जाहिर हैं। पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है।
आज आतंकवाद पूरे विश्व की बड़ी समस्या है। सब जानते हैं कि कौन देश इसे पालपोस रहे हैं। इस आंतकवाद के खात्मे के लिए कोई संयुक्त प्रयास नही हो रहे। कभी इस बारे में प्रस्ताव आता है तो पांच विटो पावर दादाओं में से कोई न कोई उस प्रस्ताव को विटो कर देता है।
आज जरूरत आ गई है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की उपयोगिता पर विचार किया जाए। इसे उपयोगी बनाने पर कार्य किया जाए। ऐसा ढांचा खड़ा किया जाए कि एक देश दूसरे देश का मददगार बने। मुसीबत में उसके साथ खड़े हो, उसकी रक्षा कर सकें। ऐसा नहीं कि लाठी के बूते कोई किसी देश की चुनी सरकार को अपदस्थ कर दे।
सब दुनिया के सभी देश बराबर हैं तो पूरी दुनिया के पांच देशों को ही वीटो पावर का अधिकार क्यों? उनकी ही पूरी दुनिया पर दादागिरी क्यों? इस पर विचार किए जाने की जरूरत है।आज के हालात में सामूहिकता बढ़ाने ,सामूहिक निर्णय पर चलने, सामूहिक विकास का सोचने की सबसे बडी जरूरत है। एक ऐसे संगठन की दुनिया को जरूरत है जो निष्पक्ष और तटस्थ होकर पूरी दुनिया में शांति स्थापना के लिए काम कर सके।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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तूफान मेलिसा के कारण 30 लोगों की मौत, 15 लाख प्रभावित – संयुक्त राष्ट्र https://demo.theshikshanews.com/toophaan-melisa-ke-kaaran-30-logon-kee-maut-15-laakh-prabhaavit-sanyukt-raashtr/ https://demo.theshikshanews.com/toophaan-melisa-ke-kaaran-30-logon-kee-maut-15-laakh-prabhaavit-sanyukt-raashtr/#respond Thu, 06 Nov 2025 04:03:48 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5668 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. United Nations। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि जमैका और आसपास के इलाकों में आए भीषण चक्रवाती तूफान मेलिसा ने भारी तबाही मचायी है और इसके कारण 30 लोगों की मौत हो गयी और 15 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने बताया कि जमैका में सड़कें, बिजली और संचार व्यवस्था बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। लगभग एक सौ तीस सड़कें अवरुद्ध हैं और कई क्षेत्रों में बिजली तथा मोबाइल नेटवर्क ठप पड़े हैं। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है क्योंकि कई अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम का अनुमान है कि जमैका में लगभग साढ़े तीन लाख लोगों को खाद्य पदार्थों की सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी के साथ संयुक्त राष्ट्र की आपदा मूल्यांकन और समन्वय टीम राहत कार्यों का संचालन कर रही है और जमैका सरकार के साथ मिलकर सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
हैती में भी स्थिति बेहद गंभीर है। तूफान ने कृषि और मछली पालन, दोनों क्षेत्रों को गहरी क्षति पहुंचाई है। खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार राजमा, मक्का और फलों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। इसके अलावा मछली पकड़ने के ढांचे को भी नुकसान हुआ है जिससे देश में भुखमरी की समस्या और बढ़ने की आशंका है। पहले से ही हैती की आधी आबादी खाद्य असुरक्षा से जूझ रही है और अब यह तूफान उस संकट को और गहरा कर सकता है।
संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार संगठन राहत और पुनर्वास के प्रयासों को तेज कर रहे हैं ताकि जरूरतमंद लोगों तक शीघ्र सहायता पहुंच सके।

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