Technology – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Wed, 31 Dec 2025 04:12:43 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Technology – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 जनजातीय समाज सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाए: राष्ट्रपति मुर्मू https://demo.theshikshanews.com/janajaateey-samaaj-saanskrtik-jadon-se-jude-rahakar-aadhunik-shiksha-aur-takaneek-ko-apanae-raashtrapati-murmoo/ https://demo.theshikshanews.com/janajaateey-samaaj-saanskrtik-jadon-se-jude-rahakar-aadhunik-shiksha-aur-takaneek-ko-apanae-raashtrapati-murmoo/#respond Wed, 31 Dec 2025 04:12:43 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6053 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को झारखंड के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में अंतरराज्यीय जन-सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की अस्मिता और विरासत को संरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि शिक्षा विकास की सबसे बड़ी पूंजी है और इसके विस्तार-प्रसार से ही समाज तथा राज्य का समग्र विकास संभव है।
झारखंड के गुमला निवासी महान जनजातीय नायक पंखराज साहेब कार्तिक उरांव की स्मृति को नमन करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे सभी के लिए प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने विदेश में शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद अपनी सोच को अपनी माटी और अपने लोगों के लिए समर्पित रखा और शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम माना। आज उसी भावना के साथ ‘कार्तिक जतरा’ के माध्यम से लोग उन्हें याद कर रहे हैं, जो अपने आप में एक सार्थक पहल है।
राष्ट्रपति ने कहा कि गुमला जिले में विश्वविद्यालय की स्थापना पंखराज उनका सपना था, जिसे शीघ्र साकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को जोड़ने वाला यह क्षेत्र नदियों, पहाड़ों, पठारों और जंगलों से समृद्ध है और देश की प्राचीनतम परंपराओं का साक्षी रहा है। भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि और कर्मभूमि झारखंड में आकर उन्हें तीर्थ यात्रा जैसा अनुभव होता है। बिरसा मुंडा आज पूरे देश में सामाजिक न्याय और जनजातीय गौरव के महान प्रतीक के रूप में सम्मानित हैं।
गुमला जिले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी जतरा टाना भगत का जन्म भी इसी धरती पर हुआ था। उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों के अनुरूप ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया।
इसके अलावा, उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में अद्वितीय वीरता का परिचय देने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद एल्बर्ट एक्का को भी श्रद्धापूर्वक याद किया, जिनकी जन्मस्थली गुमला जिला है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने जनजातीय समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की संगीत, नाटक, नृत्य और कला परंपराएं अत्यंत समृद्ध हैं। यही कारण है कि देशभर से 100 से अधिक आदिवासी कलाकारों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है।
कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आई आदिवासी पारंपरिक नृत्य मंडलियों ने अपनी लोक कला और संस्कृति का आकर्षक और रंगारंग प्रदर्शन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला।
पंखराज साहेब कार्तिक उरांव चौक बैरियर बगीचा, मांझाटोली में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव, एसटी-एससी विषयक संसदीय समिति के अध्यक्ष फगन सिंह कुलस्ते और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार भी मौजूद रहे।

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तकनीकी और आधुनिकता का शिक्षा से कोई विरोध नहीं : मोहन भागवत https://demo.theshikshanews.com/takaneekee-aur-aadhunikata-ka-shiksha-se-koee-virodh-nahin-mohan-bhaagavat/ https://demo.theshikshanews.com/takaneekee-aur-aadhunikata-ka-shiksha-se-koee-virodh-nahin-mohan-bhaagavat/#respond Thu, 28 Aug 2025 16:33:32 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4891 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि तकनीकी और आधुनिकता का शिक्षा से कोई विरोध नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को संस्कारित कर संपूर्ण मनुष्य बनाना है।
डॉ. भागवत विज्ञान भवन में गुरुवार को तीन दिवसीय व्याख्यान शृंखला ‘100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज’ के तीसरे दिन जिज्ञासा समाधान सत्र में प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। तकनीक और आधुनिकीकरण के युग में संस्कार और परंपराओं के संरक्षण से जुड़े सवाल पर सरसंघचालक ने कहा कि तकनीक मनुष्य की भलाई के लिए आती है, उसका उपयोग करना और उसके दुष्परिणामों से बचना मनुष्य का काम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक का मालिक मनुष्य ही रहना चाहिए, तकनीक मनुष्य पर हावी न हो।
उन्होंने कहा, “शिक्षा का अर्थ केवल लिटरेसी या जानकारी नहीं, बल्कि ऐसा संस्कार है जो व्यक्ति को विवेकशील बनाता है। वही शिक्षा है जो विष का भी उपयोग औषधि में करने की बुद्धि दे।” भागवत ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत की परंपरागत शिक्षा व्यवस्था को नष्ट कर दिया और देश पर शासन करने के उद्देश्य से ऐसी शिक्षा प्रणाली लागू की जो गुलामी की मानसिकता को पोषित करती रही। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल शासन चलाना नहीं, बल्कि समाज का पालन-पोषण करना और भावी पीढ़ी में आत्मगौरव का निर्माण करना भी है। उन्होंने कहा, “नई शिक्षा नीति-2020 इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पंचकोशीय शिक्षा का प्रावधान है और यह बच्चों को उनके गौरवशाली अतीत से जोड़ने का प्रयास करती है।”
संस्कृत भाषा से जुड़े प्रश्न के उत्तर में सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि भारत को सही अर्थों में समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन आवश्यक है। इसे अनिवार्य बनाने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसके प्रति आग्रह और रुचि पैदा करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है, लेकिन शिक्षा का मूल उद्देश्य भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े सार्वभौमिक मूल्यों का प्रसार करना होना चाहिए।
डॉ. भागवत ने जोर देकर कहा कि शिक्षा धार्मिक शिक्षा नहीं है, बल्कि वह सार्वभौमिक मूल्य प्रदान करती है जो समाज को जोड़ती है और व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाती है। उन्होंने कहा, “बड़ों का आदर करना, अहंकार से दूर रहना और अच्छे संस्कार अपनाना— ये ऐसे मूल्य हैं जो हर समाज में समान रूप से लागू होते हैं। इन्हीं मूल्यों से शिक्षा की वास्तविक दिशा तय होती है।”

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