Society – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Wed, 29 Oct 2025 03:50:56 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Society – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 अगर हम अपने चिकित्सकों का ध्यान नहीं रखेंगे तो समाज हमें माफ नहीं करेगा: न्यायालय https://demo.theshikshanews.com/agar-ham-apane-chikitsakon-ka-dhyaan-nahin-rakhenge-to-samaaj-hamen-maaph-nahin-karega-nyaayaalay/ https://demo.theshikshanews.com/agar-ham-apane-chikitsakon-ka-dhyaan-nahin-rakhenge-to-samaaj-hamen-maaph-nahin-karega-nyaayaalay/#respond Wed, 29 Oct 2025 03:48:45 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5509 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। सुप्रीम कोर्ट ने निजी क्लीनिक, औषधालयों और गैर-मान्यता प्राप्त अस्पतालों में कोविड-19 से लड़ते हुए जान गंवाने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को बीमा पॉलिसी में शामिल नहीं किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए मंगलवार को कहा कि यदि न्यायपालिका चिकित्सकों का ध्यान नहीं रखेगी और उनके लिए खड़ी नहीं होगी तो समाज उसे माफ नहीं करेगा।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा कंपनियां वैध दावों का निपटारा करें और यह धारणा सही नहीं है कि निजी चिकित्सक मुनाफा कमाने के लिए काम कर रहे हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘अगर हम अपने चिकित्सकों का ध्यान नहीं रखेंगे और उनके लिए खड़े नहीं होंगे तो समाज हमें माफ नहीं करेगा…।’’ उसने कहा, ‘‘अगर आपके अनुसार यह शर्त पूरी होती है कि वे कोविड-19 से निपटने के लिए काम कर रहे थे और कोविड के कारण उनकी मौत हुई है तो आपको बीमा कंपनी को भुगतान करने के लिए बाध्य करना चाहिए। सिर्फ इसलिए कि वे सरकारी ड्यूटी पर नहीं थे, यह धारणा सही नहीं है कि वे मुनाफा कमा रहे थे।’’
शीर्ष अदालत ने केंद्र को प्रधानमंत्री बीमा योजना के अलावा उपलब्ध अन्य समान या समानांतर योजनाओं के बारे में प्रासंगिक आंकड़े और जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘हमें आंकड़े और प्रधानमंत्री योजना के अलावा उपलब्ध अन्य समानांतर योजनाओं के बारे में कुछ जानकारी दीजिए। हम सिद्धांत निर्धारित करेंगे और उसके आधार पर बीमा कंपनी से दावे किए जा सकेंगे। बीमा कंपनी को हमारे फैसले के आधार पर विचार करना और आदेश पारित करना है।’’
शीर्ष अदालत मुंबई उच्च न्यायालय के नौ मार्च 2021 के आदेश के खिलाफ दायर प्रदीप अरोड़ा और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मुंबई उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि निजी अस्पताल के कर्मचारी बीमा योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के हकदार नहीं हैं, जब तक कि राज्य या केंद्र सरकार द्वारा उनकी सेवाओं की मांग न की जाए।
किरण भास्कर सुरगड़े नाम की महिला ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी जिनके पति – जो ठाणे में एक निजी क्लिनिक चलाते थे – की 2020 में कोरोना वायरस के कारण मौत हो गई थी। बीमा कंपनी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (पीएमजीकेपी) के तहत किरण के दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उनके पति के क्लिनिक को कोविड-19 अस्पताल के रूप में मान्यता नहीं दी गई थी। पीएमजीकेपी की घोषणा मार्च 2020 में की गई थी और तब से इसका दायरा बढ़ा दिया गया है।
इसे स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोरोना वायरस के कारण पैदा हुई विपत्ति की स्थिति में उनके परिवारों की देखभाल की जा सके। पीएमकेजीपी योजना के तहत स्वास्थ्य कर्मियों को 50 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान किया जाता है जो संक्रमण से जान गंवाने वाले कोविड योद्धाओं के आश्रितों के लिए एक सुरक्षा कवच बन गया है।

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