SIR – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Mon, 05 Jan 2026 11:45:08 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg SIR – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में एसआईआर पर ‘गंभीर चिंताएं’ जतायी https://demo.theshikshanews.com/mamata-ne-mukhy-chunaav-aayukt-ko-likhe-patr-mein-esaeeaar-par-gambheer-chintaen-jataayee/ https://demo.theshikshanews.com/mamata-ne-mukhy-chunaav-aayukt-ko-likhe-patr-mein-esaeeaar-par-gambheer-chintaen-jataayee/#respond Mon, 05 Jan 2026 11:45:08 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6062 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Kolkata। कोलकाता, 04 जनवरी (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कड़ा पत्र लिखा है।
सुश्री बनर्जी ने एसआईआर को ‘एक गंभीर और महत्वपूर्ण चिंता’बताते हुए पत्र में लिखा कि जिस अनुचित जल्दबाजी में बिना पर्याप्त तैयारी या ग्राउंडवर्क के यह काम किया जा रहा है, वह मौलिक रूप से गलत है तथा भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और उसके राज्य-स्तरीय अधिकारियों की ओर से पूरी तरह से स्पष्टता और योजना की कमी है।


उन्होंने अपने पत्र में एसआईआर के तर्क और उसके कार्यान्वयन दोनों पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया ने मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों के बीच व्यापक भ्रम पैदा किया है।
उन्होंने “तार्किक विसंगतियों” के तहत चिह्नित बड़ी संख्या में प्रविष्टियों पर यह तर्क देते हुए चिंता जतायी कि ऐसे वर्गीकरण बिना पर्याप्त पारदर्शिता या मतदाताओं को स्पष्ट संचार के किए गए थे। उन्होंने कहा, “तथाकथित तार्किक विसंगतियों जैसे वर्तनी की त्रुटियों, उम्र से संबंधित भिन्नताओं आदि को दूर करने के नाम पर ईसीआई ने ऐसे सभी मतदाताओं के दस्तावेजों के सत्यापन का निर्देश दिया है। ऐसे मामलों में जहां ये प्रमाण पत्र अन्य जिलों या राज्यों के अधिकारियों द्वारा जारी किए गए हैं, सत्यापन संबंधित जारी करने वाले अधिकारियों द्वारा किया जाना आवश्यक है। ऐसा लगता है कि इस दृष्टिकोण का उद्देश्य इस प्रक्रिया में देरी करना है, क्योंकि ऐसे अंतर-जिला या अंतर-राज्य सत्यापन कई मामलों में निर्धारित समय के भीतर पूरा करना संभव नहीं होगा। इससे वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने और उनके मताधिकार से वंचित होने की संभावना है।”
ईसीआई के निर्देशों की स्पष्टता पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “चौंकाने वाली बात यह है कि महत्वपूर्ण निर्देश लगभग दैनिक आधार पर अक्सर व्हाट्सएप संदेशों और टेक्स्ट संदेशों जैसे अनौपचारिक माध्यमों से जारी किए जा रहे हैं। ऐसी अनौपचारिकता और मनमानी सटीकता, पारदर्शिता या जवाबदेही के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ती है। इस प्रक्रिया में कोई भी त्रुटि, अस्पष्टता या अनिश्चितता गंभीर विसंगतियों को जन्म दे सकती है, जिसमें वास्तविक मतदाताओं के संभावित मताधिकार से वंचित होना शामिल है।
चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा, “आईटी सिस्टम के गलत इस्तेमाल से और ईआरओ की जानकारी या मंज़ूरी के बिना मतदाताओं के नाम हटाने के गंभीर आरोप भी हैं, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सक्षम वैधानिक अधिकारी हैं। इससे गंभीर सवाल उठते हैं कि ऐसे कामों को किसने मंज़ूरी दी और किसके सुपरविज़न या निर्देश पर ये किए गए हैं तथा इसके सुपरविज़न या निर्देश के तहत किए गए किसी भी गैर-कानूनी काम के लिए किसे पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने इस काम की ‘असामान्य जल्दबाजी’पर भी चिंता जताई और कहा कि यह संशोधन 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय के करीब किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि मतदाता सूची संशोधन में किसी भी मनमानी से चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा कम हो सकता है और आयोग से आग्रह किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रक्रियात्मक कमियों के कारण किसी भी योग्य मतदाता को वोट देने के अधिकार से वंचित न किया जाए।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/mamata-ne-mukhy-chunaav-aayukt-ko-likhe-patr-mein-esaeeaar-par-gambheer-chintaen-jataayee/feed/ 0
उत्तर प्रदेश सहित छह राज्यों, केंद्र शासित क्षेत्रों में एसआईआर की तिथियां दोबारा बढ़ायी गयीं https://demo.theshikshanews.com/uttar-pradesh-sahit-chhah-raajyon-kendr-shaasit-kshetron-mein-esaeeaar-kee-tithiyaan-dobaara-badhaayee-gayeen/ https://demo.theshikshanews.com/uttar-pradesh-sahit-chhah-raajyon-kendr-shaasit-kshetron-mein-esaeeaar-kee-tithiyaan-dobaara-badhaayee-gayeen/#respond Fri, 12 Dec 2025 04:14:30 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6008 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और तमिलनाडु तथा केंद्र शासित अंडमान निकोबार की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्यक्रम में गुरुवार को संशोधन की घोषणा की।
आयोग ने इन पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश अंडमान निकोबार के मुख्य चुनाव अधिकारियों के अनुरोध पर वहाँ मतगणना प्रपत्र जमा कराने और संशोधित मतदाता सूची के मसौदों के प्रकाशन की तिथियां बढ़ा दी हैं।
आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तर प्रदेश में मतगणना प्रपत्र जमा करने की तिथि 11 दिसंबर से बढ़ाकर 26 दिसंबर कर दी गयी है और राज्य की संशोधित मतदाता सूची का मसौदा 31 दिसंबर को प्रकाशित किया जाएगा।
इसी तरह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ और केंद्र शासित अंडमान में मतगणना प्रपत्र जमा कराने की तिथि 18 दिसंबर और संशोधित मतदाता सूची के मसौदे के प्रकाशन की तिथि 23 दिसंबर कर दी गयी है।
गुजरात और तमिलनाडु में मतगणना प्रपत्र को जमा करने की अंतिम तारीख 14 दिसंबर कर दी गयी है और इन दोनों राज्यों की संशोधित सूची का मसौदा 19 दिसंबर को जारी किया जाएगा।
इससे पहले के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, इन सभी जगहों पर मतगणना प्रपत्र जमा करने की तिथि आज ही समाप्त हो रही थी, जबकि इनमें संशोधित सूची का मसौदा 16 दिसंबर को प्रकाशित किया जाना था।
आयोग ने इससे पहले केरल में मतगणना प्रपत्र जमा करने की अंतिम तिथि संशोधित कर 18 दिसंबर कर दी थी और वहां संशोधित सूची का मसौदा 23 दिसंबर को प्रकाशित किया जाना था।
आयोग ने कहा है कि यह फैसला यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि नयी सूची में किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम नहीं छुटे। आयोग ने यह भी कहा है कि नये मतदाताओं को सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 और घोषणा पत्र भरने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें आयोग की वेबसाइट और ऐप के माध्यम से अपना फॉर्म और घोषणा पत्र जमा कराने की सुविधा भी है।
उल्लेखनीय है कि निर्वाचन आयोग ने बिहार के बाद 12 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए आयोग ने 27 अक्टूबर को आदेश जारी किया था। इसके अलावा, असम की सूची की भी विशेष संक्षिप्त समीक्षा करने का काम चल रहा है। इन संशोधित सूचियों की संदर्भ की तिथि एक जनवरी 2026 रखी गयी है।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/uttar-pradesh-sahit-chhah-raajyon-kendr-shaasit-kshetron-mein-esaeeaar-kee-tithiyaan-dobaara-badhaayee-gayeen/feed/ 0
केरल और यूपी में हो रहे एसआईआर पर चुनाव आयोग को ‘सुप्रीम’ नोटिस, 26 नवंबर को अगली सुनवाई https://demo.theshikshanews.com/keral-aur-yoopee-mein-ho-rahe-esaeeaar-par-chunaav-aayog-ko-supreem-notis-26-navambar-ko-agalee-sunavaee/ https://demo.theshikshanews.com/keral-aur-yoopee-mein-ho-rahe-esaeeaar-par-chunaav-aayog-ko-supreem-notis-26-navambar-ko-agalee-sunavaee/#respond Sat, 22 Nov 2025 05:48:47 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5815 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। केरल और उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर उठते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले पर अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा लागू की जा रही वह कवायद है जिसके तहत मतदाता सूची की गुप्त तरीके से पहचान और सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को लेकर कानूनी और नैतिक दोनों स्तरों पर सवाल खड़े हुए हैं और इसी को चुनौती देते हुए कई याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं।
केरल सरकार, राज्य की राजनीतिक पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और अन्य की तरफ से दायर याचिका में एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि केरल में स्थानीय निकाय चुनाव की अधिसूचना 9 और 11 दिसंबर के लिए पहले ही जारी की जा चुकी है। ऐसे में इस दौरान एसआईआर की प्रक्रिया चलाना न तो व्यावहारिक है और न ही निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था के अनुकूल है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षक चुनाव की ड्यूटी में व्यस्त हैं, ऐसे में उनसे एसआईआर का कार्य करवाया जाना संभव नहीं है।
केरल सरकार ने याचिका में यह भी कहा था कि लोकल बॉडी इलेक्शन के लिए सरकार को 1 लाख 76 हजार से ज्यादा सरकारी और क्वासी-गवर्नमेंट कर्मचारियों और 68 हजार सिक्योरिटी स्टाफ चाहिए। पिटीशन में कहा गया है कि एसआईआर के तहत 25,668 और अधिकारियों की जरूरत है, जिनमें से कई ट्रेंड इलेक्शन स्टाफ के उसी लिमिटेड पूल से लिए गए हैं।
केरल पंचायत राज एक्ट, 1994 और केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट, 1994 के तहत कानूनी डेडलाइन का जिक्र करते हुए राज्य सरकार की अर्जी में कहा गया कि 21 दिसंबर से पहले एलएसजीआई चुनाव पूरे करना कानूनी तौर पर जरूरी है। साथ ही एसआईआर कराने से एडमिनिस्ट्रेशन पर दबाव पड़ेगा और चुनाव आसानी से होने पर बुरा असर पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश में चल रही इसी प्रक्रिया को कांग्रेस के बाराबंकी से सांसद तनुज पूनिया ने चुनौती दी है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया मतदाता सूची को प्रभावित करने और चुनावी निष्पक्षता पर संदेह पैदा करने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने तनुज पूनिया की याचिका पर भी चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/keral-aur-yoopee-mein-ho-rahe-esaeeaar-par-chunaav-aayog-ko-supreem-notis-26-navambar-ko-agalee-sunavaee/feed/ 0
बिहार के बाद अब UP में भी SIR, राजनीतिक हलचल तेज https://demo.theshikshanews.com/bihaar-ke-baad-ab-up-mein-bhee-sir-raajaneetik-halachal-tej/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-ke-baad-ab-up-mein-bhee-sir-raajaneetik-halachal-tej/#respond Tue, 18 Nov 2025 07:22:06 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5805 बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी SIR को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लखनऊ में 17 नवम्बर 2025 को बाकायदा एक प्रेस कांफ्रेंस करके इसकी जानकारी , मुख्य निर्वाचन अधिकारी के प्रेस वार्ता के तुरंत बाद ही प्रदेश में राजनीतिक पार्टियों का बयान आना शुरू हो गया, इस रिपोर्ट के जरिये हम आपो बताएंगे की आने वाले चुनाव में वोट देने के लिए आपको क्या सावधानियां बरतनी होगी और इस पर राजनीतिक पार्टियों का क्या बयान है
एक रिपोर्ट – विजय मिश्र
आपको बता दे कि उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रदेश में कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर प्रगति की समीक्षा की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि, सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा राजनैतिक दलों के साथ बैठक कर उन्हें SIR की प्रक्रिया और आयोग के निर्देशों की जानकारी दे दी गई है। राजनैतिक दलों भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजनसमाज पार्टी तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा अपने जिला प्रतिनिधियों की सूची उपलब्ध करा दी गयी है। इनसे सम्पर्क कर बूथ लेबल एजेंट (BLA) नियुक्त करने का अनुरोध किया जाए, जो पुनरीक्षण कार्यों में बीएलओ का सहयोग करेंगे।
इस दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा समस्त जनपदों को निर्देशित किया गया कि, गणना प्रपत्रों को भरे जाने में BLO अपने बूथ के मतदाताओं की मदद करें साथ ही भरे हुए गणना प्रपत्र यथाशीघ्र एकत्र किया जाए तथा उसे बीएलओ एप के माध्यम से डिजिटाइज भी कराया जाए। एकत्रीकरण तथा डिजिटाइजेशन कार्य में कम प्रगति वाले जनपदों को विशेष अभियान चलाकर गणना प्रपत्र एकत्र कराने तथा उसको डिजिटाइज कराकर प्रगति में अपेक्षित सुधार लाने का निर्देश दिया गया। किसी भी परिस्थिति में तय समय सीमा के अंदर कार्य को सम्पन्न कराया जाए।
जनपदों को निर्देशित किया गया कि अपने बूथ लेवल अधिकारी को यह निर्देश जारी कर दें कि, वे बीएलओ ऐप का एडवांस वर्जन 8.75 प्ले स्टोर से डाउनलोड कर लें तथा जिन मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किया जा रहा है, उनको बीएलओ ऐप पर मार्क करते रहें, जिससे वितरण की प्रगति ऑनलाइन अपडेट हो सके। मतदाता voters.eci.gov.in पोर्टल पर जाकर अपने पंजीकृत मोबाइल नम्बर के माध्यम से अपना मतदाता पहचान पत्र संख्या डालकर गणना प्रपत्र ऑनलाईन भी भर सकते हैं। ऑनलाइन माध्यम से गणना प्रपत्र भरे जाने के संबध में वीडियो के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में व्यापक जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाने के निर्देश दिए गए। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
एंव सोशल मीडिया के माध्यम से भी इसका प्रचार प्रसार कराते हुए जनसामान्य को जानकारी उपलब्ध कराया जाए।
सबसे खास बात अब आपको अपने जिले में यह सुविधा मिलेगी , प्रत्येक जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय तथा निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण कार्यालय में हेल्प डेस्क की स्थापना के निर्देश निर्गत किए गए। इसका उद्देश्य मतदाताओं को विशेष प्रकार पुनरीक्षण के संबंध में सहायता प्रदान करना तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करना है। इन हेल्प डेस्क पर अनुभवी तथा दक्ष कार्मिकों को तैनात करने के भी निर्देश दिए हैं।
मतदाताओं को गणना प्रपत्र भरने में सहायता करने के लिए जनपद में एनएसएस, एनसीसी तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें मतदाताओं के बीच भेजकर गणना प्रपत्र भरे जाने में मतदाताओं की सहायता कराए जाने के भी निर्देश दिए।
सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) के दौरान दिन-प्रतिदिन की प्रगति को मीडिया के साथ साझा किया जाए तथा अपने सोशल मीडिया हैण्डल्स से भी इसको प्रसारित किया जाए। किसी भी भ्रामक/नकारात्मक पोस्ट का तत्काल संज्ञान लेते हुए तथ्यपरक उत्तर दिया जाय।
सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि, विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) के दौरान किसी भी स्तर पर कार्य में लापरवाही तथा दिये गये निर्देशों की अवहेलना पाये जाने पर कठोर कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने सभी राजनैतिक दलों और मतदाताओं से विशेष प्रगाड पुनरीक्षण अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की है।
वही निर्वाचन आयोग द्वारा SIR बनाने मे तेजी किये जाने के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है समाजवादी पार्टी की तरफ से उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस पर बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान कहा की “बीजेपी के लोग आधे घंटे के आधार बना देते हैं, हमारी मांग है इलेक्शन कमीशन और भारत सरकार से कि जो आधार कार्ड बने वो नकली न बन सके।”
राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव बेंगलुरु
वही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह सशक्त लोकतंत्र की नींव हैं ‘सत्यापित मतदाता’…आज विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतर्गत गोरखपुर में अपना गणना प्रपत्र स्वयं भरकर उपलब्ध कराया।
और साथ ही जनता से आवाहन भी किया ,आप सभी SIR फॉर्म अवश्य भरें। आपका यह छोटा सा प्रयास भारत के लोकतंत्र को मजबूत करेगा।
बहुजन समाज पार्टी भी SIR को लेकर विशेष सतर्क है एक बैठक में एसआईआर अभियान पर भी विस्तार से चर्चा हुई ।पार्टी को डर है कि इस अभियान में मुस्लिम और दलित वोटरों के नाम काटे जा सकते हैं। इसलिए कमेटियों को निर्देश दिया गया है कि वे बीएलओ पर नजर रखें और लोगों को फॉर्म भरने में मदद करें। बसपा का मानना है कि २००७ में जिस तरह दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम समाज के गठजोड़ से पूर्ण बहुमत मिला था, वही फॉर्मूला २०२७ में दोहराया जाएगा।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय ने SIR को लेकर कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने सभी धर्म व जाति के लोगों को एकजुट कर समाज को गुलदस्ते के रूप में स्थापित करने का काम किया था।उस गुलदस्ते को भाजपा उजाड़ने का काम कर रही है. भाजपा हर तरह से देश को तोड़ने में लगी है. प्रदेश प्रभारी ने कहा कि SIR पूरी तरह से बहकाने वाला और छलावा है. भाजपाई विपक्ष और जनता की बात नहीं सुनते। न्यायालय के आदेशों की भी अनदेखी हो रही है।मतदाताओं को उनके अधिकार से भी वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
जाहिर है बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी SIR को लेकर चर्चा तेज हों गई हैं , जिसे अपने राजनीतिक पार्टियां अपने अनुसार उसका विश्लेषण कर अपनी तैयारी में जुट रही है , प्रदेश में चुनाव तो 2027 में है लेकिन SIR ने इसकी हलचल अभी से शुरू कर दी है
लखनऊ से विजय मिश्र की रिपोर्ट

]]>
https://demo.theshikshanews.com/bihaar-ke-baad-ab-up-mein-bhee-sir-raajaneetik-halachal-tej/feed/ 0
पश्चिम बंगाल की जीत का दावा भाजपा कितनी मजबूत https://demo.theshikshanews.com/pashchim-bangaal-kee-jeet-ka-daava-bhaajapa-kitanee-majaboot/ https://demo.theshikshanews.com/pashchim-bangaal-kee-jeet-ka-daava-bhaajapa-kitanee-majaboot/#respond Tue, 18 Nov 2025 07:05:36 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5802 पश्चिम बंगाल में अभी चुनाव होने में एक साल है ,लेकिन जिस तरह से बिहार चुनाव के रिजल्ट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में पश्चिम बंगाल का नाम क्या लिया अब चर्चा पश्चिमी बंगाल की छिड़ गई है सबसे बड़ा सवाल यही है , भाजपा इसके लिए कितना तैयार है, भजपा के लिए बिहार विजय का समीकरण पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरण से कितना मेल खाता है।

विजय मिश्र

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कई राज्यों में चुनाव होने हैं । उन राज्यों के लिए बीजेपी ने अपने राजनीतिक आधार के मजबूत होने का दावा करना शुरू कर दिया है. बिहार चुनाव के बाद प्रधानमंत्री का इशारा मिलते ही भारतीय जनता पार्टी के नेता अब पश्चिम बंगाल जीतने का दावा कर रहे हैं. बिहार में जिस तरह के चुनाव परिणाम आए हैं वह भारतीय जनता पार्टी के लिए नई रणनीति का नया स्वरूप जरूर खड़ा कर रहे हैं. यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी 2026 के मार्च अप्रैल महीने में होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर अभी से जीत का दावा करना शुरू कर चुकी है।
लंबे समय से इंतजार कर रही भाजपा का इस बार बिहार विजय चुनाव ने कई नए राजनीतिक समीकरण गढ़ दिए अब तक राजनीतिक समीक्षक इस बात को मानते रहे थे कि देश में जो शहरी विधानसभा सीटे हैं उनको बीजेपी आसानी से जीत लेती है. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी बीजेपी की उतनी मजबूत पकड़ नहीं है. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड ने गठबंधन के नए आधार को खड़ा कर दिया. बिहार में जिस वोट बैंक पर परंपरागत वोट बैंक की बात होती थी वो दावा भी टूट गया।
उदाहरण के तौर पर देखे तो इस बार बिहार कब शहरी क्षेत्र के तीस में 29 सीट जीती , सेमी अर्बन में 12 सीट में 8 सीट पर जीत हासिल हुई, वही 201 ग्रामीण सीट में 167 सीट एनडीए के खाते में गई। कुल 243 में 202 सीट एनडीए के खाते में रही । और सबसे खास बात यह जेडीयू के साथ रहने के कारण उन सीट पर भी जीत मिली जिसमे जातीय समीकरण में मुस्लिम वोटर थे , आंकड़ो की बात करे तो पसमांदा समाज के करीब 5 प्रतिशत वोट भी इस बार एनडीए के खाते में रहा तो वही सामान्य मुसलमान के भी 5 प्रतिशत से ज्यादा वोट एनडीए खिंचने में सफल रही जिसका श्रेय नीतीश का साथ रहना बताया गया। अब बात करते है पश्चिम बंगाल का बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच चल रही चुनावी लड़ाई ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को एक चुनावी जंग में तब्दील कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी में से किसका पलड़ा भारी यह तो 2026 के चुनाव ही बताएंगे लेकिन जो चुनावी समीकरण इससे पहले रहे उसकी बात करते है।
बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच चल रही चुनावी लड़ाई ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को एक चुनावी जंग में तब्दील कर दिया है। एक तरफ़ जहाँ बीजेपी की तरफ़ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में बीजेपी अपनी पूरी ताक़त झोंकने की बात कह रही है तो , वहीं दूसरी ओर टीएमसी की सबसे जुझारू नेता ममता बनर्जी ने अपनी रणनीति के सहारे अपनी सत्ता बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।
अब सवाल है क्या बंग की जंग में बीजेपी टीएमसी के क़िले में सेंध लगा पाएगी या सिर्फ़ हवा बनाने की कोशिश कर रही है और क्या अंत में तृणमूल कांग्रेस की ही बड़ी जीत होने वाली है?
कई ऐसे पहलू हैं जिससे ऐसा लगता है कि बीजेपी के लिए बंगाल चुनाव उतना आसान नहीं होने जा रहा है। आइए, बारी-बारी से विश्लेषण करते हैं- पिछले चुनाव की बात करे तो भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति यहाँ पर फेल हो गई थी आपको बता दे
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में सीएए लागू करने का वादा कर साफ़ कर दिया है कि वह राज्य में अपने एजेंडे पर पूरी तरह क़ायम है और उसमें कोई बदलाव नहीं आया है।
इस बार भी पार्टी के चुनाव प्रचारक भी अपने अभियान में इस पर जोर दे रहे हैं। पर बीजेपी का ब्रह्मास्त्र (ध्रुवीकरण) अब तक यहाँ पर ज़मीनी स्तर पर उतना कारगर होता नहीं दिख रहा है जितना बीजेपी के थिंक टैंक को उम्मीद है।
कुछ क्षेत्रों को छोड़ दें (मुर्शिदाबाद, मालदा, ब्रह्मपुर, हुगली) तो मुसलमान तबक़े का समर्थन ममता बनर्जी को एकतरफ़ा मिलता हुआ दिख रहा है। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण नंदीग्राम है जहाँ ममता को मुसलमान तबक़े का मत एकतरफ़ा मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ हिंदू तबक़े में विभाजन साफ़ देखा जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि अभी भी स्थानीय बंगालियों में ममता के प्रति झुकाव बना हुआ है। वही दूसरा सबसे बड़ा कारण है विपक्षी दलों का ममता को सहयोग मिलना आपने देखा होगा।
कांग्रेस और लेफ्ट उसी क्षेत्रों में ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहाँ उन्हें जीतने की उम्मीद सबसे ज़्यादा है। कांग्रेस नहीं चाहती है कि उसके कारण ममता के मतों में विभाजन हो, खासकर अल्पसंख्यक तबक़े का, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि राहुल गांधी या कांग्रेस के किसी भी बड़े राष्ट्रीय नेताओं का बंगाल की तरफ रुख न करना। यह साफ दिख है कि कांग्रेस ने पिछले चुनाव में अधीर रंजन चौधरी, गनी खान चौधरी के सहारे मालदा, मुर्शिदाबाद ब्रह्मपुर और दिनाजपुर तक अपने आप को सीमित कर रखा है। जबकि हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस अभी भी बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी है जिनके 44 विधायक हैं।
वही भाजपा की बात करे तो ज्यादातर चुनाव में वह बगैर कप्तान के ही चुनाव में उतरती है , फिर वह चाहे मध्यप्रदेश हो या फिर राजस्थान जहाँ उन्हें भारी सफलता भी मिली लेकिन वही बात पश्चिम बंगाल में खतरा बन जाता है , यहाँ पर बीजेपी के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित न करना सबसे बड़ा नकारात्मक फ़ैक्टर साबित हो जाता है।
यदि बीजेपी के पास ममता के मुक़ाबले कोई लोकप्रिय चेहरा होता तो मुक़ाबला और दिलचस्प होने की संभावना रहती । बंगाल के लोगों के मानस में यह बात है कि ममता नहीं तो कौन? यह कौन ही भाजपा के लिए मुश्किल खड़ा करता है।
बंगाल की बात करे तो यहाँ पर बीजेपी का अंतरकलह किसी से छिपा हो ,बंगाल बीजेपी की अंदरूनी कलह पार्टी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होता दिख रहा है। पिछली बार पार्टी ने टीएमसी से आए क़रीब 150 नेताओं को इ टिकट दिया है जिससे पुराने कार्यकर्ताओं में रोष कायम रहा जो साफ तौर पर देखने को मिला।
वही अन्य राज्यो के मुकाबले यहाँ पर भाजपा का संगठन उतना मजबूत नही है , उत्तरी बंगाल की तुलना में बीजेपी दक्षिण बंगाल में अभी भी संगठनात्मक रूप से बहुत कमजोर है। 2019 लोकसभा चुनाव के परिणाम को भी देखेंगे तो दक्षिण बंगाल में बीजेपी का प्रदर्शन उतना बेहतर नहीं था जितना उत्तर बंगाल में। क़रीब 60 से 65 फ़ीसदी विधानसभा क्षेत्र दक्षिण बंगाल से आते हैं और वहाँ टीएमसी अभी भी अपनी पैठ बनाए हुए है। यदि बीजेपी दक्षिण के क़िले को फतह कर पाती है तो फिर परिणाम बीजेपी के पक्ष में हो सकते हैं।
देखा जाय तो बिहार चुनाव के बाद भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए अपनी चुनावी बिगुल फूंक दी है , लेकिन यहाँ जीत हासिल करना उतना सरल नही है ,क्योकि जो जातीय समीकरण अन्य राज्यो में है वह पश्चिम बंगाल में नही है वही बाहर से आये नेता और संगठन का पूरी तरह से प्रदेश में स्थापित न हो पाना इससे भी भाजपा को पार पाना होगा हालांकि अगर बंगाल के समीकरण में भाजपा के पक्ष की बात करे तो S I R लागू होना जरूर वोट के समिकरण को बदलेगा।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/pashchim-bangaal-kee-jeet-ka-daava-bhaajapa-kitanee-majaboot/feed/ 0
एसआईआर : निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मुलाकात की https://demo.theshikshanews.com/esaeeaar-nirvaachan-aayog-ke-sheersh-adhikaariyon-ne-raajy-ke-mukhy-nirvaachan-adhikaariyon-se-mulaakaat-kee/ https://demo.theshikshanews.com/esaeeaar-nirvaachan-aayog-ke-sheersh-adhikaariyon-ne-raajy-ke-mukhy-nirvaachan-adhikaariyon-se-mulaakaat-kee/#respond Thu, 23 Oct 2025 03:25:45 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5422 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारी बुधवार को यहां राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं, ताकि मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए अखिल भारतीय स्तर पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कवायद शुरू करने की अपनी योजना को अंतिम रूप दिया जा सके।
दो दिवसीय यह बैठक सितम्बर के बाद से दूसरी बार हो रही है।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों एसएस संधू तथा विवेक जोशी सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ यहां बैठक कर रहे हैं। यह बैठक बृहस्पतिवार तक जारी रहेगी।
⁠निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों में एक मजबूत राय यह है कि एसआईआर को चरणों में आयोजित किया जाना चाहिए, जिसकी शुरुआत उन राज्यों से की जानी चाहिए जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। पहले चरण में और भी राज्य शामिल किए जा सकते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इसके साथ ही, जिन राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं या होने वाले हैं, वहां इस कवायद को अभी नहीं किया जायेगा, क्योंकि जमीनी स्तर पर चुनाव तंत्र इसमें व्यस्त है और वह एसआईआर पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पायेगा।
असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं।
इन पांच राज्यों के अलावा, पहले चरण में कुछ अन्य राज्यों में भी एसआईआर कवायद की जा सकती है।
बिहार में एसआईआर का काम पूरा हो गया है, जहां 30 सितंबर को लगभग 7.42 करोड़ नामों वाली अंतिम सूची प्रकाशित की गई।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि सभी राज्यों में मतदाता सूचियों की एसआईआर शुरू करने का काम प्रगति पर है और इसे शुरू करने पर अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग द्वारा लिया जाएगा।
बिहार विधानसभा चुनावों की घोषणा के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा था कि निर्वाचन आयोग ने 24 जून को बिहार में एसआईआर की शुरुआत करते समय अखिल भारतीय एसआईआर की अपनी योजना की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में काम जारी है और तीनों आयुक्त राज्यों द्वारा एसआईआर शुरू करने की तारीखों पर निर्णय लेने के लिए बैठक करेंगे।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/esaeeaar-nirvaachan-aayog-ke-sheersh-adhikaariyon-ne-raajy-ke-mukhy-nirvaachan-adhikaariyon-se-mulaakaat-kee/feed/ 0
बिहार में एसआईआर के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 7.42 करोड़ मतदाता डालेंगे वोट https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-esaeeaar-ke-baad-phainal-votar-list-jaaree-7-42-karod-matadaata-daalenge-vot/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-esaeeaar-ke-baad-phainal-votar-list-jaaree-7-42-karod-matadaata-daalenge-vot/#respond Tue, 30 Sep 2025 16:16:50 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5199 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी। अंतिम मतदाता सूची में लगभग 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। निर्वाचन आयोग इस कार्य को सफल बनाने के लिए बिहार के सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त करता है। अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित हुई, जिसमें लगभग 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
ईसीआई के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची की भौतिक और डिजिटल प्रतियां राजनीतिक दलों के साथ साझा की जा रही हैं। कोई भी मतदाता इसे वोटर्स डॉट ईसीआई डॉट गॉव डॉट इन पर ऑनलाइन देख सकता है। यह एसआईआर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) बिहार, सभी 38 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ), 243 निर्वाचक निबंधन अधिकारियों (ईआरओ), 2,976 सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारियों (एईआरओएस), लगभग 1 लाख बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ), लाखों स्वयंसेवकों और सभी 12 प्रमुख राजनीतिक दलों की पूर्ण भागीदारी, जिसमें उनके जिला अध्यक्ष और उनके द्वारा नियुक्त 1.6 लाख से अधिक बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) शामिल हैं, के ईमानदार प्रयासों से सफल हुआ।
आयोग नियमित रूप से जागरूकता फैलाने और पूरी प्रक्रिया के दौरान अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑनलाइन मीडिया को भी धन्यवाद देता है। एसआईआर प्रक्रिया को समझाने और उन्हें पूरी जानकारी रखने के लिए राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की गईं। 20 जुलाई तक सीईओ, डीईओएस, ईआरओएस और बीएलओ ने पात्र मतदाताओं की पहचान करने के उद्देश्य से, मृत घोषित किए गए, जिनके गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुए, जो स्थायी रूप से पलायन कर गए, या जिनका पता नहीं लगाया जा सका, ऐसे मतदाताओं की बूथ-स्तरीय सूचियां राजनीतिक दलों के साथ साझा कर दी थीं।
ड्राफ्ट मतदाता सूची भी सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा की गई थी। साथ ही, ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल न किए गए नामों की सूची डीईओ या डीएम (जिलावार) के साथ-साथ सीईओ बिहार की वेबसाइट पर भी जनता के अवलोकन के लिए प्रदर्शित की गई थी।
एसआईआर प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और भारत के निर्वाचन आयोग के आदर्श वाक्य ‘कोई भी पात्र मतदाता छूटे नहीं और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो’ के अनुरूप की गई थी। अगर कोई पात्र व्यक्ति अभी भी मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने के लिए आवेदन करना चाहता है तो वह चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि से दस दिन पहले तक आवेदन जमा कर सकता है।
अगर कोई व्यक्ति फाइनल वोटर लिस्ट में प्रविष्टि के संबंध में ईआरओ के निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के तहत जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रथम अपील और सीईओ के समक्ष द्वितीय अपील दायर कर सकते हैं।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-esaeeaar-ke-baad-phainal-votar-list-jaaree-7-42-karod-matadaata-daalenge-vot/feed/ 0
‘पिक्चर अभी बाकी है’, राहुल गांधी ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर फिर बोला हमला https://demo.theshikshanews.com/pikchar-abhee-baakee-hai-raahul-gaandhee-ne-esaeeaar-ko-lekar-chunaav-aayog-par-phir-bola-hamala/ https://demo.theshikshanews.com/pikchar-abhee-baakee-hai-raahul-gaandhee-ne-esaeeaar-ko-lekar-chunaav-aayog-par-phir-bola-hamala/#respond Tue, 12 Aug 2025 15:45:28 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4730 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ संविधान का आधार है और चुनाव आयोग की ड्यूटी है कि वे ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ को लागू करें, मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया।
राहुल गांधी ने बिहार की 124 साल की मिंता देवी का जिक्र करते हुए बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (एसआईआर) की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे अनगिनत मामले सामने आए हैं। अभी पिक्चर बाकी है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए एसआईआर के मुद्दे पर कहा, “केवल एक सीट नहीं है, बहुत सारी सीटें हैं।
यह राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है और व्यवस्थित ढंग से किया जा रहा है। चुनाव आयोग जानता है और हम भी जानते हैं। पहले हमारे पास सबूत नहीं थे, लेकिन अब हमारे पास सबूत हैं। हम संविधान की रक्षा कर रहे हैं। ‘एक मतदाता एक मत’ संविधान का आधार है और चुनाव आयोग की ड्यूटी है कि वे ‘एक व्यक्ति एक मत’ को लागू करें, मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। हम (विपक्ष) केवल संविधान की रक्षा कर रहे हैं और करते रहेंगे, रुकेंगे नहीं।”
चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर के दौरान बिहार में महिला मिंता देवी की उम्र 124 साल बताए जाने पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “ऐसे बहुत अनगिनत मामले सामने आए हैं। अभी पिक्चर बाकी है।” वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि हम वोट चोरी का विरोध कर रहे हैं। राहुल गांधी ने बताया है कि वोटर लिस्ट में सारे फर्जी नाम और पते हैं।
बता दें कि विपक्षी दलों के गठबंधन इंडी ब्लॉक के संसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने ‘मिंता देवी’ नाम की एक कथित 124 साल की मतदाता की तस्वीर वाली सफेद टी-शर्ट पहनी थी, जिसमें लिखा था, ‘124 नॉट आउट’। इसके जरिए विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/pikchar-abhee-baakee-hai-raahul-gaandhee-ne-esaeeaar-ko-lekar-chunaav-aayog-par-phir-bola-hamala/feed/ 0