President of India – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Thu, 18 Dec 2025 13:59:41 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg President of India – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने मशहूर मूर्तिकार राम सुतार के निधन पर जताया दुख https://demo.theshikshanews.com/raashtrapati-murmoo-aur-peeem-modee-ne-mashahoor-moortikaar-raam-sutaar-ke-nidhan-par-jataaya-dukh/ https://demo.theshikshanews.com/raashtrapati-murmoo-aur-peeem-modee-ne-mashahoor-moortikaar-raam-sutaar-ke-nidhan-par-jataaya-dukh/#respond Thu, 18 Dec 2025 13:59:41 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6030 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को डिजाइन करने वाले मशहूर मूर्तिकार राम सुतार के निधन पर दुख प्रकट किया। विश्व प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार का निधन सौ साल की उम्र में हो गया। उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर बुधवार की रात अंतिम सांस ली। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”पद्म भूषण से सम्मानित और जाने-माने मूर्तिकार राम सुतार जी के निधन से दुखी हूं, जिन्होंने अपने असाधारण योगदान से भारत की कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है। उनकी शानदार कृतियां, जिनमें ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ भी शामिल है, भारत की स्थायी विरासत के महान प्रतीक हैं। उनकी कला आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों को प्रेरित करती रहेगी। मैं उनके परिवार के सदस्यों और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।”
पीएम मोदी ने कहा कि राम सुतार जी एक असाधारण मूर्तिकार थे, जिनकी निपुणता ने भारत को केवडिया स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ सहित कई प्रतिष्ठित स्मारक प्रदान किए। उन्होंने कहा कि उनकी कृतियों को भारत के इतिहास, संस्कृति और सामूहिक भावना की सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में हमेशा सराहा जाएगा और उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रीय गौरव को अमर कर दिया है। उनकी कृतियां कलाकारों और नागरिकों को समान रूप से प्रेरित करती रहेंगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फोटो शेयर करते हुए लिखा, ”राम सुतार जी के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। वे एक असाधारण मूर्तिकार थे, जिनकी कलात्मकता ने भारत को केवडिया स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ सहित कई प्रतिष्ठित स्मारक प्रदान किए। उनकी कृतियों को भारत के इतिहास, संस्कृति और सामूहिक भावना की सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में हमेशा सराहा जाएगा। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रीय गौरव को अमर कर दिया है। उनकी कृतियां कलाकारों और नागरिकों को समान रूप से प्रेरित करती रहेंगी। उनके परिवार, प्रशंसकों और उनके अद्भुत जीवन और कार्यों से प्रभावित सभी लोगों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पोस्ट में लिखा, ”स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आर्किटेक्ट, महान मूर्तिकार राम सुतार जी का निधन अत्यंत दुखद है। भारतीय संस्कृति व विरासत को युवा पीढ़ी के बीच चिरस्मरणीय बनाने हेतु ऐतिहासिक मूर्तियों का निर्माण करने वाले राम सुतार जी ने अजंता-एलोरा की मूर्तियों के जीर्णोद्धार में भी अहम भूमिका निभाई। उनका निधन भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों व प्रशंसकों को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”

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हमारे संविधान की दृष्टि में निहित हैं मानवाधिकार : राष्ट्रपति https://demo.theshikshanews.com/hamaare-sanvidhaan-kee-drshti-mein-nihit-hain-maanavaadhikaar-raashtrapati/ https://demo.theshikshanews.com/hamaare-sanvidhaan-kee-drshti-mein-nihit-hain-maanavaadhikaar-raashtrapati/#respond Wed, 10 Dec 2025 14:56:01 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5993 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को यहां कहा कि मानवाधिकार हमारे संविधान की दृष्टि में निहित हैं और भारत ने मानवाधिकारों के वैश्विक ढांचे को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
श्रीमति मुर्मू ने यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा आयोजित मानवाधिकार दिवस समारोह को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार दिवस हमें यह याद दिलाने का अवसर है कि सार्वभौमिक मानवाधिकार अविभाज्य हैं और वह एक न्यायपूर्ण, समान और दयालु समाज की नींव तैयार करते हैं। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने मानव गरिमा, समानता और न्याय पर आधारित दुनिया की कल्पना की थी।
उन्होंने कहा कि मानवाधिकार सामाजिक लोकतंत्र को बढ़ावा देने के साथ बिना किसी डर के जीने का अधिकार, बिना किसी बाधा के सीखने का अधिकार, बिना किसी शोषण के काम करने का अधिकार और गरिमा के साथ वृद्धावस्था बिताने का अधिकार प्रदान करता है। श्रीमती मुर्मू ने कहा, ‘हमने दुनिया को याद दिलाया है कि मानवाधिकारों को विकास से अलग नहीं किया जा सकता। साथ ही, भारत ने हमेशा इस शाश्वत सत्य का पालन किया है: न्याय के बिना शांति नहीं है और शांति के बिना न्याय नहीं है।’
श्रीमति मुर्मू ने इस बात पर जोर दिया कि अंत्योदय के दर्शन के अनुरूप, अंतिम व्यक्ति सहित सभी के लिए मानवाधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में राष्ट्र की विकास यात्रा में प्रत्येक नागरिक को सक्रिय भागीदार होना चाहिए। तभी विकास को सही मायने में समावेशी कहा जा सकता है।
राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, न्यायपालिका और नागरिक समाज के साथ मिलकर संवैधानिक विवेक के सतर्क प्रहरी के रूप में काम करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लोगों, साथ ही महिलाओं और बच्चों से जुड़े कई मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि मानावधिकार आयोग ने इस साल अपने स्थापना दिवस समारोह के दौरान जेल में बंद कैदियों के मानवाधिकारों के विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विश्वास जताया कि इन चर्चाओं से उपयोगी नतीजे निकलेंगे।
श्रीमति मूर्मू ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण और उनका कल्याण मानवाधिकारों के मुख्य स्तंभ हैं। उन्होंने सार्वजनिक जगहों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा पर एक सम्मेलन के आयोजन करने पर प्रसन्न्ता जताते हुये कहा कि ऐसे सम्मेलन से निकले निष्कर्ष महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि एनएचआरसी राज्य और समाज के कुछ आदर्शों को व्यक्त करता है। भारत सरकार ऐसे भावों को पहले कभी न देखे गए पैमाने पर अमल में ला रही है। पिछले एक दशक में, हमने देखा है कि हमारा देश एक अलग सोच के साथ आगे बढ़ा है – हक से सशक्तिकरण की ओर और दान से अधिकारों की ओर। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि स्वच्छ पानी, बिजली, खाना पकाने की गैस, स्वास्थ्य सेवा, बैंकिंग सेवा, शिक्षा और बेहतर स्वच्छता जैसी रोज़मर्रा की ज़रूरी सेवाएं सभी को मिलें। इससे हर घर का उत्थान होता है और गरिमा सुरक्षित होती है।
श्रीमति मुर्मू ने कहा कि हाल ही में, सरकार ने वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थितियों से संबंधित चार लेबर कोड के माध्यम से एक बड़े सुधार को लागू करने की अधिसूचना जारी की है। यह परिवर्तनकारी बदलाव भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और अधिक लचीले उद्योगों की नींव रखता है।
राष्ट्रपति ने हर नागरिक से यह पहचान करने का आह्वान किया कि मानवाधिकार केवल सरकारों, एनएचआरसी, नागरिक समाज संगठनों और ऐसे अन्य संस्थानों की ज़िम्मेदारी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमारे साथी नागरिकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना हम सभी का साझा कर्तव्य है। यह कर्तव्य हम सभी पर एक दयालु और ज़िम्मेदार समाज के सदस्यों के रूप में है।

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राष्ट्रपति मुर्मू ने श्री नारायण गुरु की शिक्षाओं को समानता और एकता का शाश्वत संदेश बताया https://demo.theshikshanews.com/raashtrapati-murmoo-ne-shree-naaraayan-guru-kee-shikshaon-ko-samaanata-aur-ekata-ka-shaashvat-sandesh-bataaya/ https://demo.theshikshanews.com/raashtrapati-murmoo-ne-shree-naaraayan-guru-kee-shikshaon-ko-samaanata-aur-ekata-ka-shaashvat-sandesh-bataaya/#respond Thu, 23 Oct 2025 14:36:16 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5434 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Thiruvananthapuram। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि श्री नारायण गुरु भारत के महानतम आध्यात्मिक नेताओं और समाज सुधारकों में से एक थे, जिनकी समानता, एकता और सार्वभौमिक प्रेम की शिक्षाएं आज भी अत्यधिक प्रासंगिक हैं।
केरल के वर्कला में शिवगिरि मठ में गुरु की महा समाधि के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु ने लोगों को अज्ञानता और अंधविश्वास से मुक्त करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और पीढ़ियों को हर इंसान में दिव्यता देखने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रपति ने श्री नारायण गुरु को भारत के महानतम आध्यात्मिक नेताओं और समाज सुधारकों में से एक बताया, जिन्होंने देश के सामाजिक और आध्यात्मिक परिदृश्य को बदल दिया। ⁠मुर्मू ने कहा, “उन्होंने पीढ़ियों को समानता, एकता और मानवता के प्रति प्रेम के आदर्शों में विश्वास करने के लिए प्रेरित किया। गुरु ने लोगों को अज्ञानता और अंधविश्वास के अंधेरे से मुक्त करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने सभी अस्तित्वों की एकता में विश्वास किया और हर जीवित प्राणी में ईश्वर को दिव्य उपस्थिति के रूप में देखा।”
उन्होंने कहा कि गुरु के ‘मानव जाति के लिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर’ के संदेश ने आस्था, जाति और पंथ की सभी बाधाओं को पार कर लिया।
राष्ट्रपति ने कहा, “उनका मानना था कि वास्तविक मुक्ति अंधविश्वास से नहीं, बल्कि ज्ञान और करुणा से आती है। उन्होंने आत्म-शुद्धि, सादगी और सार्वभौमिक प्रेम पर भी जोर दिया।” गुरु के शिक्षा और सामाजिक उत्थान में योगदान पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने मंदिरों, स्कूलों और संस्थानों की स्थापना की, जो सीखने और नैतिक विकास के केंद्र के रूप में कार्य करते है।
मुर्मू ने कहा, “इन संस्थानों के माध्यम से, उन्होंने उत्पीड़ित समुदायों के बीच साक्षरता, आत्मनिर्भरता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया। उनके कार्य मानव जीवन और आध्यात्मिकता की उनकी गहन समझ को दर्शाते हैं।” उन्होंने कहा कि गुरु ने मानवता के साथ शाश्वत आदर्शों को साझा किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अपनी शिक्षाओं के माध्यम से बताया कि दुनिया एक आदर्श निवास स्थान है जहां सभी लोग जाति या धर्म के भेद के बिना भाईचारे से रहते हैं। मुर्मू ने कहा कि गुरु का संदेश आधुनिक दुनिया में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा, “एकता, समानता और आपसी सम्मान के लिए उनका आह्वान मानवता के सामने आने वाले संघर्षों का एक कालातीत समाधान प्रदान करता है। उनकी शिक्षाएं हमें याद दिलाती हैं कि सभी मनुष्य एक ही दिव्य सार को साझा करते हैं।” राष्ट्रपति ने लोगों से उनके आदर्शों पर जीने का प्रयास करने, हर व्यक्ति के साथ गरिमा के साथ व्यवहार करने, निःस्वार्थ भाव से सेवा करने और हर व्यक्ति में दिव्यता देखने की आकांक्षा रखने का आग्रह किया।
राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने कहा, “गुरु केवल एक आध्यात्मिक प्रतीक नहीं हैं; वह अपनी आशीषों और शिक्षाओं के माध्यम से आज भी जीवित हैं। मानवता और समानता का उनका संदेश हर दिन अधिक प्रासंगिक होता जा रहा है।”
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के इस दर्शन में गुरु के विश्वास को भी याद किया कि ‘मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है।’ मुर्मू ने महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक नेता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और दो साल तक चलने वाले शताब्दी समारोहों का उद्घाटन हो गया। श्री नारायण धर्म संगम ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी सच्चिदानंद ने राष्ट्रपति को एक शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट किया। स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि दो साल तक चलने वाले शताब्दी समारोहों में आध्यात्मिक प्रवचन, सामाजिक सेवा पहल और शैक्षिक कार्यक्रम शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य गुरु के एकता और सार्वभौमिक भाईचारे के संदेश को फैलाना है।
इस कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर, सांसद अडूर प्रकाश, राज्य के मंत्री वी एन वासन, वी शिवनकुट्टी और विधायक वी जॉय सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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