President of India Draupadi Murmu – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Wed, 10 Dec 2025 15:21:49 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg President of India Draupadi Murmu – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 हमारे संविधान की दृष्टि में निहित हैं मानवाधिकार : राष्ट्रपति https://demo.theshikshanews.com/hamaare-sanvidhaan-kee-drshti-mein-nihit-hain-maanavaadhikaar-raashtrapati/ https://demo.theshikshanews.com/hamaare-sanvidhaan-kee-drshti-mein-nihit-hain-maanavaadhikaar-raashtrapati/#respond Wed, 10 Dec 2025 14:56:01 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5993 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को यहां कहा कि मानवाधिकार हमारे संविधान की दृष्टि में निहित हैं और भारत ने मानवाधिकारों के वैश्विक ढांचे को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
श्रीमति मुर्मू ने यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा आयोजित मानवाधिकार दिवस समारोह को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार दिवस हमें यह याद दिलाने का अवसर है कि सार्वभौमिक मानवाधिकार अविभाज्य हैं और वह एक न्यायपूर्ण, समान और दयालु समाज की नींव तैयार करते हैं। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने मानव गरिमा, समानता और न्याय पर आधारित दुनिया की कल्पना की थी।
उन्होंने कहा कि मानवाधिकार सामाजिक लोकतंत्र को बढ़ावा देने के साथ बिना किसी डर के जीने का अधिकार, बिना किसी बाधा के सीखने का अधिकार, बिना किसी शोषण के काम करने का अधिकार और गरिमा के साथ वृद्धावस्था बिताने का अधिकार प्रदान करता है। श्रीमती मुर्मू ने कहा, ‘हमने दुनिया को याद दिलाया है कि मानवाधिकारों को विकास से अलग नहीं किया जा सकता। साथ ही, भारत ने हमेशा इस शाश्वत सत्य का पालन किया है: न्याय के बिना शांति नहीं है और शांति के बिना न्याय नहीं है।’
श्रीमति मुर्मू ने इस बात पर जोर दिया कि अंत्योदय के दर्शन के अनुरूप, अंतिम व्यक्ति सहित सभी के लिए मानवाधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में राष्ट्र की विकास यात्रा में प्रत्येक नागरिक को सक्रिय भागीदार होना चाहिए। तभी विकास को सही मायने में समावेशी कहा जा सकता है।
राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, न्यायपालिका और नागरिक समाज के साथ मिलकर संवैधानिक विवेक के सतर्क प्रहरी के रूप में काम करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लोगों, साथ ही महिलाओं और बच्चों से जुड़े कई मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि मानावधिकार आयोग ने इस साल अपने स्थापना दिवस समारोह के दौरान जेल में बंद कैदियों के मानवाधिकारों के विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विश्वास जताया कि इन चर्चाओं से उपयोगी नतीजे निकलेंगे।
श्रीमति मूर्मू ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण और उनका कल्याण मानवाधिकारों के मुख्य स्तंभ हैं। उन्होंने सार्वजनिक जगहों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा पर एक सम्मेलन के आयोजन करने पर प्रसन्न्ता जताते हुये कहा कि ऐसे सम्मेलन से निकले निष्कर्ष महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि एनएचआरसी राज्य और समाज के कुछ आदर्शों को व्यक्त करता है। भारत सरकार ऐसे भावों को पहले कभी न देखे गए पैमाने पर अमल में ला रही है। पिछले एक दशक में, हमने देखा है कि हमारा देश एक अलग सोच के साथ आगे बढ़ा है – हक से सशक्तिकरण की ओर और दान से अधिकारों की ओर। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि स्वच्छ पानी, बिजली, खाना पकाने की गैस, स्वास्थ्य सेवा, बैंकिंग सेवा, शिक्षा और बेहतर स्वच्छता जैसी रोज़मर्रा की ज़रूरी सेवाएं सभी को मिलें। इससे हर घर का उत्थान होता है और गरिमा सुरक्षित होती है।
श्रीमति मुर्मू ने कहा कि हाल ही में, सरकार ने वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थितियों से संबंधित चार लेबर कोड के माध्यम से एक बड़े सुधार को लागू करने की अधिसूचना जारी की है। यह परिवर्तनकारी बदलाव भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और अधिक लचीले उद्योगों की नींव रखता है।
राष्ट्रपति ने हर नागरिक से यह पहचान करने का आह्वान किया कि मानवाधिकार केवल सरकारों, एनएचआरसी, नागरिक समाज संगठनों और ऐसे अन्य संस्थानों की ज़िम्मेदारी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमारे साथी नागरिकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना हम सभी का साझा कर्तव्य है। यह कर्तव्य हम सभी पर एक दयालु और ज़िम्मेदार समाज के सदस्यों के रूप में है।

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देश के शिक्षकों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए: मुर्मु https://demo.theshikshanews.com/teachers-of-the-country-should-be-recognized-as-the-best-teachers-in-the-world-murmu/ https://demo.theshikshanews.com/teachers-of-the-country-should-be-recognized-as-the-best-teachers-in-the-world-murmu/#respond Fri, 05 Sep 2025 14:47:44 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4993 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को शिक्षक दिवस पर आयोजित समारोह में देश भर के शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किये। श्रीमती मुर्मु ने इस मौके पर कहा कि भोजन, वस्त्र और आवास की तरह शिक्षा भी व्यक्ति के सम्मान और सुरक्षा के लिए आवश्यक है। समझदार शिक्षक बच्चों में सम्मान और सुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। उन्होंने एक शिक्षक के रूप में अपने वक्त को याद किया और उस समय को अपने जीवन का एक बहुत ही सार्थक काल बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को सक्षम बनाती है। शिक्षा की शक्ति से गरीब से गरीब पृष्ठभूमि के बच्चे भी उन्नति के आसमान को छू सकते हैं। बच्चों की उड़ान को बल देने में स्नेही और समर्पित शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों का सबसे बड़ा पुरस्कार यही है कि उनके विद्यार्थी उन्हें जीवन भर याद रखें और परिवार, समाज और देश के लिए सराहनीय योगदान दें।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण एक शिक्षक का प्राथमिक कर्तव्य है। नैतिक आचरण का पालन करने वाले संवेदनशील, जिम्मेदार और समर्पित विद्यार्थी उन विद्यार्थियों से बेहतर होते हैं, जो केवल प्रतिस्पर्धा, किताबी ज्ञान और स्वार्थ में रुचि रखते हैं। एक अच्छे शिक्षक में भावनायें और बुद्धि दोनों होती हैं। भावनाओं और बुद्धि का समन्वय विद्यार्थियों पर भी प्रभाव डालता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्मार्ट ब्लैकबोर्ड, स्मार्ट कक्षायें और अन्य आधुनिक सुविधाओं का अपना महत्व है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है, स्मार्ट शिक्षक। उन्होंने कहा कि स्मार्ट शिक्षक वे शिक्षक होते हैं जो अपने विद्यार्थियों के विकास की आवश्यकताओं को समझते हैं। स्मार्ट शिक्षक स्नेह और संवेदनशीलता के साथ अध्ययन की प्रक्रिया को रोचक और प्रभावी बनाते हैं। ऐसे शिक्षक छात्रों को समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए। बालिकाओं की शिक्षा में निवेश करके, हम अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में एक अमूल्य निवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को सर्वोत्तम संभव शिक्षा प्रदान करना महिला-नेतृत्व विकास को बढ़ावा देने का सबसे प्रभावी तरीका है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार और वंचित वर्ग की बालिकाओं को विशेष शिक्षा सुविधायें प्रदान करने पर ज़ोर देती है, लेकिन शिक्षा से जुड़ी किसी भी पहल की सफलता मुख्यतः शिक्षकों पर निर्भर करती है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे बालिकाओं की शिक्षा में जितना अधिक योगदान देंगे, शिक्षक के रूप में उनका जीवन उतना ही सार्थक होगा। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बालिकाओं सहित उन सभी विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दें, जो अपेक्षाकृत शर्मीले हैं, या कम सुविधा प्राप्त पृष्ठभूमि से आते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। उन्होंने कहा, “इसके लिए हमारे शिक्षकों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। हमारे संस्थानों और शिक्षकों को शिक्षा के तीनों क्षेत्रों – स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल शिक्षा – में सक्रिय रूप से योगदान देना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारे शिक्षक अपने महत्वपूर्ण योगदान से भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में स्थापित करेंगे।”
इस मौके पर शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी और कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

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