police stations – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Sun, 14 Sep 2025 15:00:42 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg police stations – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी पर स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई सोमवार को https://demo.theshikshanews.com/suo-motu-cognizance-on-lack-of-cctv-cameras-in-police-stations/ https://demo.theshikshanews.com/suo-motu-cognizance-on-lack-of-cctv-cameras-in-police-stations/#respond Sun, 14 Sep 2025 15:00:42 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5037 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। सप्रीम कोर्ट पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत ने मानवाधिकारों के हनन पर रोक लगाने के लिए साल 2018 में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ सोमवार को इस मामले पर सुनवाई कर सकती है।
पीठ ने चार सितंबर को मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था, “…हम ‘पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी’ शीर्षक से एक स्वत: संज्ञान जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दे रहे हैं, क्योंकि ऐसी खबरें आई हैं कि साल 2025 के शुरुआती सात-आठ महीनों में पुलिस हिरासत में करीब 11 मौतें हुई हैं।”
दिसंबर 2020 में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) सहित अन्य जांच एजेंसियों के कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था।
न्यायालय ने कहा था कि राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर पुलिस थाने में सभी प्रवेश और निकास द्वारों, मुख्य द्वार, हवालात, गलियारों, लॉबी और स्वागत कक्षों के साथ-साथ बाहर के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि कोई भी हिस्सा अछूता न रह जाए।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि सीसीटीवी प्रणाली ‘नाइट विजन’ से लैस होनी चाहिए और इसमें वीडियो के साथ-साथ ऑडियो रिकॉर्ड करने भी सुविधा होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा था कि केंद्र, राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की सरकारों के लिए ऐसी प्रणालियां खरीदना अनिवार्य होगा, जो कम से कम एक साल के लिए डेटा सहेजने की सुविधा प्रदान करें।

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