petition against – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Tue, 20 Jan 2026 16:24:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg petition against – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 उन्नाव रेप केस: पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की जमानत के खिलाफ याचिका पर 27 जनवरी को अगली सुनवाई https://demo.theshikshanews.com/unnaav-rep-kes-poorv-vidhaayak-kuladeep-sengar-kee-jamaanat-ke-khilaaph-yaachika-par-27-janavaree-ko-agalee-sunavaee/ https://demo.theshikshanews.com/unnaav-rep-kes-poorv-vidhaayak-kuladeep-sengar-kee-jamaanat-ke-khilaaph-yaachika-par-27-janavaree-ko-agalee-sunavaee/#respond Tue, 20 Jan 2026 16:24:38 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6143 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत के खिलाफ याचिका पर 27 जनवरी को अगली सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख निर्धारित की है।
दिल्ली हाईकोर्ट से कुलदीप सिंह सेंगर को रेप केस में मिली जमानत याचिका का सीबीआई ने विरोध किया है। केंद्रीय एजेंसी ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी, जिस पर 27 जनवरी को फिर से सुनवाई होगी।
कुलदीप सिंह सेंगर को हाईकोर्ट से जमानत दिए जाने पर कड़ा विरोध हुआ था। हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर को जमानत देने के साथ उसकी उम्रकैद की सजा पर भी रोक लगाई थी। रेप पीड़िता और उसके परिवार के अलावा कई राजनीतिक दलों ने जमानत के विरोध में विरोध प्रदर्शन किए थे। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कुलदीप सेंगर की जमानत को रद्द किया।
वहीं, सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका को खारिज किया। कुलदीप सिंह सेंगर इस मामले में 10 साल की सजा काट रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को अपने आदेश में कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए कुलदीप सेंगर को जमानत नहीं दी जा सकती है।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी के पूर्व आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अगर दोषसिद्धि के विरुद्ध दायर अपील पर शीघ्रता से फैसला किया जाता है तो यह सेंगर के हित में होगा।
हाईकोर्ट के अनुसार, कुलदीप सिंह सेंगर 10 साल की कुल सजा में से करीब 7.5 साल हिरासत में बिता चुका है। उसकी अपील पर अंतिम निर्णय नहीं होने पर हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में अपील के निपटारे में हुई देरी के लिए आंशिक रूप से स्वयं कुलदीप सिंह सेंगर जिम्मेदार है, क्योंकि उन्होंने समय-समय पर कई याचिकाएं दायर कीं।

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न्यायालय ने नामांकन पत्र रद्द किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर विचार से किया इनकार https://demo.theshikshanews.com/nyaayaalay-ne-naamaankan-patr-radd-kie-jaane-ke-khilaaph-daakhil-yaachika-par-vichaar-se-kiya-inakaar/ https://demo.theshikshanews.com/nyaayaalay-ne-naamaankan-patr-radd-kie-jaane-ke-khilaaph-daakhil-yaachika-par-vichaar-se-kiya-inakaar/#respond Fri, 07 Nov 2025 17:52:55 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5696 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार श्वेता सुमन की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मोहनिया सुरक्षित विधानसभा सीट के वास्ते दाखिल अपना नामांकन पत्र खारिज किये जाने को चुनौती दी थी। सुमन के नामांकन को ‘‘फर्जी’’ जाति प्रमाणपत्र के आधार पर खारिज किया गया था।
प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद अदालतें इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘चुनाव याचिका दायर करें।’’ ⁠राजद नेता के वकील ने याचिका वापस लेने की बात कही और चुनाव याचिका दायर करने का जिक्र किया।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘कानून में उपलब्ध विकल्पों का उपयोग करने की छूट के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाती है।’’
इससे पहले तीन नवंबर को पटना उच्च न्यायालय ने कैमूर जिले के मोहनिया सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से उनके नामांकन पत्र की अस्वीकृति के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी।
सुमन ने निर्वाचन अधिकारी के 22 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उनका नामांकन इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि उनके द्वारा पेश जाति प्रमाणपत्र वास्तविक नहीं हो सकता है जो कि सर्किल अधिकारी दुर्गावती की एक रिपोर्ट पर आधारित था।
न्यायमूर्ति ए अभिषेक रेड्डी की एकल पीठ ने अनुच्छेद 329(बी) के तहत संवैधानिक प्रतिबंध और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत प्रदत्त वैधानिक उपायों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत ऐसी याचिकाओं पर विचार नहीं कर सकती।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद चुनाव याचिकाओं के अलावा किसी भी रिट याचिका या मामले पर विचार नहीं किया जा सकता है।’
न्यायालय ने साथ ही कहा कि इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप ‘‘जारी चुनाव प्रक्रिया को सीधे प्रभावित करेगा और उसमें देर करेगा।’’ मोहनिया निर्वाचन क्षेत्र में 11 नवंबर को मतदान होगा। पहले चरण का मतदान बृहस्पतिवार को हुआ था।

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