Nitish Kumar – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Sun, 11 Jan 2026 10:41:11 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Nitish Kumar – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 नीतीश ने ऐतिहासिक गोलघर परिसर का भ्रमण कर वर्तमान स्थिति का लिया जायजा, अधिकारियों को दिये निर्देश https://demo.theshikshanews.com/neeteesh-ne-aitihaasik-golaghar-parisar-ka-bhraman-kar-vartamaan-sthiti-ka-liya-jaayaja-adhikaariyon-ko-diye-nirdesh/ https://demo.theshikshanews.com/neeteesh-ne-aitihaasik-golaghar-parisar-ka-bhraman-kar-vartamaan-sthiti-ka-liya-jaayaja-adhikaariyon-ko-diye-nirdesh/#respond Sun, 11 Jan 2026 10:41:11 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6098 NCR TODAY. Khabariya. New Patna।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को गोलघर परिसर का भ्रमण किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि इसका सौंदर्गीकरण एवं इसके रखरखाव को अच्छे ढंग से कराएं जिससे यह देखने में मनोरम लगे। मुख्यमंत्री श्री कुमार ने आज ऐतिहासिक गोलघर परिसर का भ्रमण कर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।
श्री कुमार ने भ्रमण के दौरान गोलघर परिसर पार्क, गोलघर के स्ट्रक्चर की स्थिति, लाइट एंड साउंड एवं लेजर शो आदि का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री श्री कुमार ने अधिकारियों को निर्देश देते हुये कहा कि गोलघर एक ऐतिहासिक धरोहर है, काफी संख्या में लोग इसे देखने आते हैं।
उन्होंने निर्देश दिया कि गोलघर परिसर के सौंदर्गीकरण एवं इसके रखरखाव को अच्छे ढंग से कराएं जिससे यह देखने में मनोरम लगे। वर्ष 2013 में यहाँ शुरू किए गए लाइट एंड साउंड तथा लेजर शो का नियमित रूप से संचालन हो, इससे लोगों को इतिहास के संबंध में जनकारी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि गोलघर की ऐतिहासिक महत्ता से यहां आनेवाले लोग अवगत हो सकें, इसके लिए यहां डिस्प्ले बोर्ड भी लगाकर प्रदर्शित करायें। गोलघर वास्तु कला का एक अदभुत नमूना है इसलिए इसके स्ट्रक्चर के रखरखाव का विशेष रूप से ख्याल रखें ताकि इसे और बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सके।
भ्रमण के दौरान जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद संजय कुमार झा, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. सहित सहत अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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भाजपा की बैसाखी के साथ नीतीश दसवीं बार बने बिहार के मुख्यमंत्री https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-kee-baisaakhee-ke-saath-neeteesh-dasaveen-baar-bane-bihaar-ke-mukhyamantree/ https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-kee-baisaakhee-ke-saath-neeteesh-dasaveen-baar-bane-bihaar-ke-mukhyamantree/#respond Fri, 21 Nov 2025 04:56:38 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5807 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna। दो दशक में दसवीं बार! श्री नीतीश कुमार ने लोकतंत्र की जननी कहीं जाने वाली भूमि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में गुरुवार को लगभग दो दशक में दसवीं बार शपथ लेकर देश की राजनीति में एक नया कीर्तिमान बनाया है।
ढ़लती उम्र, थकान और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के साथ-साथ लंबे समय तक शासन में रहने से लोकप्रियता में कमी की अटकलों को दरकिनार करते हुए हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में श्री कुमार ने राज्य की राजनीति में अपने निरंतर प्रभाव और जनता के भरोसे की एक बार फिर पुष्टि की। लगभग दो दशकों तक सत्ता में रहने के बाद इस चुनाव में वह अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे थे।
जातीय खानाजंगी और राजनीति के अपराधीकरण के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले बिहार प्रांत में ‘सुशासन बाबू’ के रूप में पहचान बनाने वाले और बिहार में अपनी स्वच्छ एवं ईमानदार छवि के कारण वह गठबंधन की राजनीति में एक मुख्य धुरी बने हुए हैं। हाल के समय में मीडिया से नीतीश से दूरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा ‘अचेत मुख्यमंत्री’ कहे जाने और प्रशासन पर नौकरशाही के हावी होने के आरोपों के बावजूद बिहार के मतदाताओं ने उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को इस बार एक ऐतिहासिक जनादेश दिया है।
बिहार में जनादेश की बहार में ‘नीतीशे कुमार’ पर जनता ने एक बार फिर ऐतबार जता दिया। छह महीने पहले तक जहां नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे और विपक्षी दल महागठबंधन मजबूत दिख रहा था, चुनाव नतीजों ने उनके खिलाफ तमाम अटकलें को हवा-हवाई साबित कर दिया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब भी बिहार के राजनीतिक रंगमंच के सबसे दमदार और सरदार अदाकार हैं। राजग की इस बार की जीत सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि बिहार की जनता की निरंतरता और स्थिरता की चाहत का प्रमाण है। जनता ने फिर से कहा है ,“बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार हैं…” नीतीश कुमार अपनी जनसभाओं, रैलियों में कहते , “2005 से पहले कुछ था… कोई काम किया है, ऊ लोग (राजद)….कोई शाम के बाद निकल पाता था… ।” नीतीश कहते रहे कि ‘सब हम लोग कितना काम किए जी…।’ श्री नीतीश कुमार का लगातार पांचवां विधानसभा चुनाव जीतना और 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना, भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है, खासकर हिंदी भाषी राज्यों में, जहां भारतीय लोकतंत्र में बदलाव की उम्मीद की जाती है, वहीं बिहार ने बार-बार दोहराये जाने वाले चेहरे पर अपना विश्वास दिखाया है।
इस बार राजग में भाजपा और जदयू ने बराबर-बराबर 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा और राजग ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में आगे रख कर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्री नीतीश कुमार की छवि का फायदा मिला। राजग ने 2010 के 200 से अधिक सीटों को जीतने के प्रदर्शन को दोहराया।
कभी बिहार में भाजपा के बड़े भाई की भूमिका में रहे जदयू को इस बार छोटे भाई की भूमिका में देखा जा रहा था। चुनाव से पहले यह व्यापक रूप से माना जा रहा था कि श्री मोदी की स्थायी लोकप्रियता और भाजपा का राष्ट्रीय प्रभुत्व ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सबसे बड़ी ताकत होगी, जो श्री नीतीश कुमार की घटती लोकप्रियता की भरपाई कर सकती है। इस बार चुनाव परिणाम ने भाजपा-जदयू को बराबर का सहभागी साबित किया है।
इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार ने महिला मतदाताओं के बीच एक मजबूत सद्भावना अर्जित की है। बिहार की ‘दीदियों’ ने मजबूती से उनका हाथ थामे रखा। यह बात लंबे समय से मानी जाती रही है कि बिहार की महिलाएं 2005 से चली आ रही श्री नीतीश कुमार नेतृत्व वाली राजग सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं की वजह से उनसे खूब जुड़ी हुई हैं, लेकिन इस बार गेम-चेंजर बना चुनावी सीजन के दौरान 1.4 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को दिया गया, 10 हजार रुपये का नकद भुगतान।
‘दस-हजारिया’ लाभार्थी और जीविका दीदियां राजग की बड़ी जीत का असली इंजन बन गयीं। सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाली महिलाएं बड़ी संख्या में हैं और वे हर जाति, समुदाय और वर्ग से आती हैं। इस बार 71.6 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाला, जो पुरुषों (62.8 प्रतिशत) से करीब नौ प्रतिशत ज्यादा है।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी कल्याणकारी पहलों के माध्यम से महिला मतदाताओं ने उनके नेतृत्व के लिए एक स्थिर बल के रूप में काम किया है, जिससे उन्हें अन्य वर्गों के झटकों से बचाव मिला है। वर्ष 2020 के विपरीत, जहां जदयू के कैडर में भ्रम दिखा था, इस बार पार्टी की संगठनात्मक शक्ति अधिक प्रभावी ढंग से सक्रिय हुई। ग्रामीण नेताओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों पर आधारित उसके पारंपरिक कैडर ढांचे ने निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर भाजपा के साथ बेहतर समन्वय के साथ काम किया।नतीजों ने श्री नीतीश कुमार की उस क्षमता को भी दिखाया, जिसमें वे गठबंधन को अपना वोट ट्रांसफर कर सकते हैं। चाहे वह किसी भी गठबंधन में हों। उनके कई उलटफेरों के बावजूद, उनके निर्वाचन क्षेत्रों से संदेश साफ था, “आप जहां जाएंगे, हम भी वहीं जाएंगे।” विरोधियों की ओर से उनके स्वास्थ्य और शासन क्षमता पर लगातार हमलों ने उनके समर्थकों को पहले से कहीं ज्यादा मतदान केंद्रों तक पहुंचाया। ‘सुशासन बाबू’ होने के अलावा, नीतीश ‘मिस्टर क्लीन’ भी हैं। उनके मंत्रियों पर आरोप लगते हैं, लेकिन किसी ने भी नीतीश पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया है।
इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार के लिए, ‘टाइगर अभी ज़िंदा है’ का नारा सिर्फ एक राजनीतिक उद्घोष नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक वजूद और विश्वसनीयता का प्रमाण भी साबित हुआ।
बिहार में पटना जिले के बख्तिायारपुर में एक मार्च 1951 को एक साधारण परिवार में जन्मे नीतीश कुमार के पिता दिवंगत कविराज राम लखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और वैद्य थे। श्री कुमार बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज पटना में पढ़ायी के दौरान ही लोक नायक जयप्रकाश नारायण से प्रभावित होकर वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन में कूद पड़े थे। श्री कुमार पहली बार सियासत में 1977 में उतरे, जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन चुका था। इस दौर में जनता पार्टी मजबूती से उभरी और लगभग पूरे देश में वर्चस्व बनाया। श्री नीतीश कुमार हालांकि चुनावी राजनीति में बेहतर शुरुआत नहीं कर पाये। वर्ष 1977 का चुनाव हुआ तब वह जनता पार्टी के टिकट पर नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इसके बाद 1980 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा, तब उनके परिवार वालों ने उन पर राजनीति छोड़कर नौकरी के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया, लेकिन श्री कुमार नहीं माने और राजनीति में डटे रहे।
इसके बाद श्री कुमार को पहली बार 1985 के विधानसभा चुनाव में हरनौत सीट से ही सफलता मिली और उसके बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में वह बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनकर लोकसभा पहुंचे। श्री कुमार 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बने। वर्ष 1991 के मध्यावधि चुनाव में वह फिर से लोकसभा के सदस्य चुने गये।
यही वह दौर था, जब इंजीनियर से नेता बने श्री नीतीश कुमार उभार पर आये। कभी पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के ‘छोटे भाई’ के तौर पर उनके विश्वासपात्र माने जाने वाले श्री नीतीश कुमार ने धीरे-धीरे पिछड़ी जातियों, खासकर कुर्मी-कुशवाहा समाज को अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया। इसके अलावा उन्होंने अति-पिछड़ा समाज (ईबीसी) के बीच भी पैठ बनायी। इस जातीय समीकरण को बिठाकर उन्होंने लालू यादव के समर्थन में खड़े यादव समुदाय की एकजुटता की काट खोजी।
श्री लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक मतभेद के कारण वर्ष 1994 में जनता दल से अलग होकर श्री कुमार ने जार्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में समता पार्टी बनाकर 1995 का विधानसभा चुनाव लड़ा तब उनकी पार्टी मात्र सात सीट पर ही जीत हासिल कर सकी। श्री कुमार ने इस हार से सबक लेते हुए लालू विरोधी मतों के विभाजन को रोकने के इरादे से वर्ष 1996 में भाजपा के साथ गठजोड़ कर लिया। उनका यह फार्मूला कामयाब रहा और उसका फायदा उन्हें आज तक मिल रहा है।
श्री कुमार वर्ष 1996 ,1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में विजयी हुए। श्री कुमार ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 1998 में रेल मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री का कार्य भार संभाला। 1999 में फिर बनी वाजपेयी सरकार में वह भूतल परिवहन और कृषि मंत्री बनाये गये। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा में उन्होंने राजग विधायक दल के नेता के रूप में मुख्यमंत्री पद की पहली बार शपथ ली, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले ही सात दिनों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। श्री कुमार के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका था।उसके बाद वह फिर से केन्द्र की राजनीति में लौट गये और वर्ष 2000 से लेकर 2004 तक वाजपेयी सरकार में मंत्री और रेल मंत्री रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में श्री कुमार ने दो सीटों से चुनाव लड़ा जिसमें वह बाढ़ से चुनाव हार गये लेकिन नालंदा सीट से विजयी हुए। उस साल केन्द्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार बनने के बाद श्री कुमार ने अपने आप को पूरी तरह बिहार की राजनीति पर केन्द्रित कर लिया। फरवरी 2005 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ तब किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और कोई भी दल सरकार बनाने में सफल नहीं रहा। नवम्बर 2005 में दुबारा हुए चुनाव में श्री कुमार के नेतृत्व वाले राजग को स्पष्ट बहुमत मिल गया और वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
मुख्यमंत्री के रूप में विकास पुरुष की छवि बना चुके श्री कुमार के नेतृत्व में जब राजग ने 2010 का विधानसभा चुनाव लड़ा तो उसे दो-तिहाईबहुमत हासिल हुआ। श्री कुमार ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेवारी संभाली। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए श्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश किये जाने की कोशिशों के विरोध में भाजपा से 17 साल पुराना अपना नाता तोड़कर एक बड़ा राजनीतिक जोखिम उठाया। भाजपा से नाता टूटने के बाद अल्पमत में आयी अपनी सरकार को उन्होंने निर्दलीय और अन्य दलों के बाहर से समर्थन के बल पर किसी तरह से बचा कर रखा। इसके बाद जब वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ तो श्री कुमार की पार्टी जदयू को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए उन्होंने 17 मई 2014 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और अपने भरोसेमंद नेता जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनवा दिया, लेकिन छह माह के अंदर ही श्री कुमार को लगने लगा कि उन्होंने श्री मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ी राजनीतिक भूल कर दी। करीब 15 दिनों के राजनीतिक ड्रामे के बाद श्री मांझी ने इस्तीफा दिया और 22 फरवरी 2015 को श्री कुमार ने चौथी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला।
बिहार में 2015 का विधानभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था। वर्षों के सहयोगी भाजपा और जदयू इस बार फिर जुदा हो गये थे और 20 साल बाद दो पुराने दोस्त लालू प्रसाद यादव और श्री नीतीश कुमार साथ आ गये थे। श्री लालू प्रसाद और श्री नीतीश कुमार के इस महागठबंधन में कांग्रेस भी शामिल थी। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव चुनाव के नतीजे आने पर राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनी और श्री नीतीश कुमार पांचवी बार मुख्यमंत्री बने। इस बार श्री कुमार की सरकार करीब 20 महीने ही चल पाई। दरअसल सरकार के कार्यों में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का बढ़ते हस्तक्षेप की वजह से पहले से ही असहज महसूस कर रहे श्री कुमार को राजद से नाता तोड़ने का तब बहाना मिल गया जब लालू परिवार के खिलाफ मंत्री पद और सरकारी नौकरी के बदले जमीन-फ्लैट लिखवाने का मामला भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने उजागर किया तथा रेलवे टेंडर घोटाला की जांच शुरू हुई। इस पर श्री कुमार ने उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने को कहा, लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो श्री कुमार ने 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा भी दे दिया। इसके बाद तुरंत भाजपा ने श्री कुमार को समर्थन देने की घोषणा कर दी और 24 घंटे के अंदर ही श्री कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही फिर से बिहार में राजग सरकार की वापसी हो गयी।
वर्ष 2020 में एक बार फिर श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी। श्री नीतीश सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। अगस्त 2022 में हालांकि घटनाक्रम तेजी से बदले और श्री नीतीश कुमार ने राजग से अलग होने का फैसला कर लिया। श्री कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो गये और उनके नेतृत्व में नयी सरकार बनी। श्री कुमार आठवीं बार मुख्ममंत्री बने। श्री नीतीश कुमार महागठबंधन में गये लेकिन 17 माह में ही असहज महसूस करने लगे। जनवरी 2024 के आते-आते स्थितियां फिर से बदलने लगीं और नीतीश फिर से राजग में वापस लौट आये। श्री कुमार नवीं बार मुख्यमंत्री बने।
चौहत्तर साल के श्री नीतीश कुमार अपनी राजनीति का उफान देख चुके हैं। मुख्यमंत्री पद की दसवीं बार जिम्मेवारी संभालने जा रहे श्री कुमार ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन में अब तक अपनी शर्तों पर ही राजनीति की है।

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नीतीश को डुबाने की चाल चल रहे हैं प्रधानमंत्री, अपने किसी ‘चेले’ को मुख्यमंत्री बना देंगे: खरगे https://demo.theshikshanews.com/neeteesh-ko-dubaane-kee-chaal-chal-rahe-hain-pradhaanamantree-apane-kisee-chele-ko-mukhyamantree-bana-denge-kharage/ https://demo.theshikshanews.com/neeteesh-ko-dubaane-kee-chaal-chal-rahe-hain-pradhaanamantree-apane-kisee-chele-ko-mukhyamantree-bana-denge-kharage/#respond Mon, 03 Nov 2025 15:12:55 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5599 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna/Vaishali। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को डुबाने की चाल रहे हैं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की फिर से सरकार बनने पर वह अपने किसी ‘चेले’ को मुख्यमंत्री बना देंगे तथा नीतीश को घर बैठा देंगे।


उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में यह कटाक्ष भी किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नीतीश को इस तरह ‘‘गायब’’ कर दिया है कि अब उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का नाम ही नहीं लिया जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने पटना में रविवार को हुए प्रधानमंत्री के रोडशो का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘नीतीश जी कहां थे, नहीं दिखे। राजग सरकार बनाने की बात करने वालों ने उन्हें गायब कर दिया। इतना गायब कर दिए, उनको मुख्यमंत्री बनाने का नाम नहीं लेते।’’
⁠खरगे ने आरोप लगाया, ‘‘चुनाव के बाद क्या होगा, मैं नहीं कह सकता। मोदी जी नीतीश जी को डुबाने की चाल चल रहे हैं।’’ उन्होंने बाद में एक बयान में कहा कि नीतीश कुमार को ‘हाईजैक’ कर लिया गया है और चुनाव के बाद उन्हें दूध से मक्खी की तरह बाहर निकाल दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री के रोडशो में जनता दल (यू) की तरफ से पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह शामिल हुए थे।
इससे पहले, खरगे ने वैशाली में एक जनसभा में कहा, ‘‘अब ये (नीतीश) मोदी की गोद में बैठे हैं। यह लिखकर रख लो वह (प्रधानमंत्री) नीतीश को मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे। वह अपने किसी चेले को बना देंगे और कहेंगे कि नीतीश जी, आपकी तबियत ठीक नहीं है, आप घर बैठकर आराम करिए, हम आपकी औषधि का इंतजाम करते हैं।’’
राजद द्वारा कांग्रेस की कनपटी पर ‘कट्टा रखकर’ मुख्यमंत्री पद छीनने संबंधी प्रधानमंत्री के आरोपों पर खरगे ने संवाददाता सम्मेलन में तंज कसा, ‘‘क्या जब राजद ने कांग्रेस की कनपट्टी पर कट्टा रखा, तो नरेन्द्र मोदी वहां मौजूद थे? ’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री कैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। न कांग्रेस को कोई डरा सकता है न कांग्रेस किसी से डरने वाली है। हमारा महागठबंधन सम्मान और दोस्ती के साथ आगे बढ़ रहा है।’’
कांग्रेस अध्यक्ष ने राजग के घोषणापत्र को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘ये लोग घोषणापत्र जारी करने आए तो सिर्फ 36 सेकंड में प्रेस वार्ता ख़त्म कर दी। 20 साल से शासन में हैं दो मिनट तो रुक जाते।’’
खरगे ने कहा, ‘‘दो दशकों से बिहार में भाजपा-जद(यू) की सरकार है और 11 वर्ष से मोदी जी केंद्र में हैं। आज अगर मुद्दों की बात करें तो बिहार के लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्याएं, महंगाई, बेरोज़गारी, बढ़ता पलायन और आर्थिक असमानता है।’’
उन्होंने महागठबंधन के चुनावी वादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार बनने पर इन पर पूरी तरह अमल किया जाएगा।
खरगे ने कहा, ‘‘बिहार में चुनाव आते ही नीतीश जी ने महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये डाल दिए और सोचा कि महिलाएं इनको वोट दे देंगी। लेकिन बिहार के लोग इतने होशियार हैं कि कोई अगर उनके खाते में 10 लाख रुपये भी डालेगा, तब भी वह सोच-समझकर ही वोट देंगे।’’
उन्होंने सवाल किया कि 10 हजार रुपये देने की बात भाजपा-जद (यू) को 20 साल में याद क्यों नहीं आई?
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘जनता जानती है कि यह चुनावी घोषणा है।’’
खरगे ने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी युवाओं के लिए गंभीर नहीं हैं।
उनका कहना था, ‘‘रोजगार के नाम पर मोदी पहले कहते थे कि ‘पकौड़ा तलो’ और अब कहते हैं ‘रील बनाओ’। नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। उन्हें ठोस कदम उठाना चाहिए और लोगों को बताना चाहिए कि वे आगे क्या करने वाले हैं।’’
महागठबंधन की तरफ से उप मुख्यमंत्री पद के लिए सिर्फ एक नाम घोषित करने से जुड़े सवाल पर खरगे ने कहा कि सरकार बनने पर इस बारे में फैसला होगा कि कितने उप मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे।

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क्या महाराष्ट्र को दोहराएगा बिहार चुनाव? https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be/ https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be/#respond Thu, 17 Jul 2025 07:25:13 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4303 अर्जुन देशप्रेमी
बिहार में अक्टूबर-नवम्बर में चुनाव होने हैं। इस बीच चुनाव आयोग ने सघन मतदाता पुनरीक्षण अभियान चलाना आरम्भ किया जिसे लेकर विपक्ष की तरफ से भारी विरोध और हो-हल्ला मचाया जा रहा है। इसे लेकर अबतक जो कुछ देखने में आ रहा है, उसमे ऐसा लगता है कि कहीं विपक्ष अपने ही जाल में तो नहीं उलझ गया है। या भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने उसे फंसा दिया है। हो ये रहा है कि विपक्ष जितना इस मुद्दे को उठा रहा है, सनातनी वोट उतना ही सत्तापक्ष की ओर मुड़ता दिख रहा है। सनातनी के मन में यह बात बैठ रही है कि विपक्ष को सिर्फ मुसलमानों, बांग्लादेशियों, रोहिंगियाओं के वोट की चिंता है। तेजस्वी, राहुल गाँधी इनके वोटों के लिए लड़ रहे हैं, पर इनको सनातनियों की कोई चिंता नहीं है। ऐसे में जैसे महाराष्ट्र में चुनावों से पहले इंडी गठवंधन को लग रहा था कि वह आसानी से चुनाव जीत जायेगा, पर हुआ इसका उल्टा। विपक्ष का वहां सफाया जैसा हो गया जिसकी टीस आज भी राहुल गाँधी को उठती रहती है और जिसके लिए वह चुनाव आयोग पर हार का ठिकड़ा फोड़ते रहते हैं। पर क्या इस बार बिहार में कुछ ऐसा ही तो नहीं होने जा रहा है जिसका भान विपक्ष को हो नहीं पा रहा है, या उसे अभी से इसका भान हो गया है और वह कुछ कर नहीं पा रहा है सिवाय हल्ला मचाने के। और यह हल्ला भी उसके विरुद्ध ही तो नहीं जा रहा है। जिस तरह से अभी दोनों ओर से मोर्चाबंदी हो रही है, उसमें अगर लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी, राहुल गाँधी की पार्टी कांग्रेस और उनके सहयोगी दल 50 सीटों से भी नीचे सिमट जायें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए जबकि हाल के दिनों में हुए कई सर्वे उसे बहुमत दिलाते दिख रहे हैं।
हाल ही में अलग-अलग एजेंसियां और मीडिया संस्थान सर्वेक्षण (ओपिनियन पोल) जारी किये हैं। कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार, महागठबंधन (राजद, कांग्रेस और लेफ्ट) को बहुमत मिल सकता है, जबकि एनडीए (जदयू-भाजपा गठबंधन) को कुछ सीटों का नुकसान होने का अनुमान है। पोल ट्रैकर के सर्वे के मुताबिक, महागठबंधन को 44.2% वोटों के साथ 126 सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के आंकड़े को पार करता है। वहीं, एनडीए को 112 सीटें मिल सकती हैं। नवभारत टाइम्स के एक सर्वे में भी मुख्यमंत्री पद की पहली पसंद के तौर पर तेजस्वी यादव को आगे दिखाया गया है (3.3% लोगों की पसंद), जबकि नीतीश कुमार 35.6% लोगों की पसंद हैं। इस सर्वे में यह भी सामने आया है कि 51.2% लोगों के लिए बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। सी-वोटर के अलग-अलग सर्वे में भी तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। पर ये सारे सर्वे साफ लिख रहे हैं हैं कि चुनाव से पहले ये सिर्फ अनुमान होते हैं और वास्तविक परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं।
वर्तमान में वोटर लिस्ट का वेरिफिकेशन चल रहा है, जिससे लगभग 35 लाख नामों के कटने का अनुमान है। दरअसल ये ऐसे लोग हैं जो या तो बांग्लादेशी हैं, या रोहिंगिया या नेपाली जिनके आधार कार्ड फर्जी तरीके से बने हैं। इनमें बड़ी संख्या में वैसे लोग भी हैं जो घुसपैठ करके आते हैं, यहाँ की मतदाता सूचियों में येन केन प्रकारें नाम शामिल कराते हैं और फिर इन पहचान पत्रों के आधार पर देश के दूसरे हिस्सों में जाकर बस जाते हैं। बड़ी संख्या में ऐसे लोग दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, गुजरात आदि में देखे जाते हैं जहाँ अवैध कब्जे कर ये घर बना लेते हैं। पर वोट के समय वे बिहार में पहुंचते हैं और वोट कर देते हैं। इनको उन नेताओं की मदद करनी होती है, जिन्होंने इनको आधार कार्ड, राशन कार्ड या दूसरे पहचान पत्र बनवाने में मदद की होती है। साथ ही इससे इनको दूसरे सरकारी लाभ लेने में भी मदद मिलती है। इसका भी नतीजों पर असर पड़ सकता है। यानि फिलहाल, कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि कौन जीतेगा, क्योंकि राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदलता रहता है।
पर इनमें से किसी ने भी इसका आंकलन नहीं किया है कि बिहार में महाराष्ट्र की तर्ज पर ही सनातन धर्मावलम्बी एकजुट हो रहे हैं और उनका ध्रुवीकरण हो रहा है। इसका साफ कारण यह है कि इंडी गठबंधन की तरफ से जिस तरह की बयानबाजी हो रही है, उससे साफ है कि वे फिर से मुस्लिम वोटों पर ही नज़र गड़ाए हुए हैं। न तो ये सनातनी वोटों के लिए कोई बात कर रहे हैं, न ही उनको इनकी चिंता है। वे मानकर चल रहे हैं कि इनका एक बड़ा वर्ग तो इन्हें वोट करेगा ही। खासकर यादव वोट। यादव और मुस्लिम वोटों के जरिये ये सत्ता पा जायेंगे। अगर आप बिहार के गावों में इमानदारी से लोगों का मन टटोलें तो साफ दिखता है कि सनातनी लोग ठीक उसी तरह से गोलबंद हो रहे हैं जिस तरह मुस्लिम लोग। ऐसा मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में साफ दिखा भी है। अब यह बिहार में भी दिख रहा है जिसे विपक्ष के नेता देखना नहीं चाहते हैं। बागेश्वर बाबा की रैली इसकी एक बानगी थी, जिसे देखकर भी विपक्ष अनदेखा कर रहा है।
और ऊपर से तुर्रा यह कि बिहार के वोटर लिस्ट से 35 लाख लोगों के नाम कट रहे हैं, कुल संख्या एक करोड़ से भी ऊपर भी जा सकती है। यह वोट बैंक मना जाता है कि विपक्षी दलों का ही है, खासकर मुसलमानों के वोट। अगर ऐसा हुआ तो लगभग 50 से 60 वैसे सीटों पर विपक्ष का खेल बिगड़ सकता है। और कुल मिलाकर विपक्ष के सत्ता में आने के सपने पर पानी फेर सकता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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