NHAI – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Tue, 06 Jan 2026 13:49:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg NHAI – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 फर्जी वेबसाइट नकली फास्टैग वार्षिक पास बेच रहीं, एनएचएआई ने किया अलर्ट https://demo.theshikshanews.com/pharjee-vebasait-nakalee-phaastaig-vaarshik-paas-bech-raheen-enecheaee-ne-kiya-alart/ https://demo.theshikshanews.com/pharjee-vebasait-nakalee-phaastaig-vaarshik-paas-bech-raheen-enecheaee-ne-kiya-alart/#respond Tue, 06 Jan 2026 13:49:19 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6071 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। एनएचएआई का फास्टैग वार्षिक पास खरीदते वक्त सावधान रहें। कुछ लोग फर्जी वेबसाइट बनाकर नकली पास बेचने की कोशिश रहे हैं। सावधानी हटते ही आप ठगी का शिकार हो सकते हैं। यह अलर्ट एनएचएआई ने जारी किया है। एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि वह केवल अपनी ”राजमार्गयात्रा” एप के माध्यम से ही वार्षिक पास की बिक्री करता है। यह एप गूगल प्ले स्टोर और एप्पल स्टोर से डाउनलोड की जा सकती है। इस पास में एक साल की वैधता होती है और तीन हजार रुपये में 200 ट्रिप की सुविधा मिलती है। एनएचएआई ने चेतावनी जारी कर बताया है कि कुछ फर्जी वेबसाइट और प्लेटफार्म यह वार्षिक पास बनाने का दावा कर हैं। वह अधिकृत नहीं हैं। इस पास को कोई बाहरी एजेंसी नहीं बेच सकती। एनएचएआई ने कहा है कि फर्जी वेबसाइटें लोगों से पैसे लेकर ठगी कर सकती हैं। वार्षिक पास के कुछ प्लेटफार्म लिंक भेज रहे हैं, जो निजी जानकारियां मांग रहे हैं। इनकाे कोई जानकारी न दें, ये उनका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इंटरफेस असली जैसा एक फर्जी वेबसाइट का इंटरफेस एनएचएआई की आधिकारिक ”राजमार्गयात्रा” एप जैसा ही बनाया गया है, जिससे लोग आसानी से धोखा खा सकते हैं।इस फर्जी वेबसाइट पर एनएचएआई के लोगो का इस्तेमाल किया गया है। पहली नजर में देखने पर वह असली प्रतीत होती है। एनएचएआई के एक अधिकारी ने बताया कि वह इनके खिलाफ कार्रवाई भी कराएंगे।

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एक्सप्रेस वे पर लोगों को चलना सिखाना होगा https://demo.theshikshanews.com/eksapres-ve-par-logon-ko-chalana-sikhaana-hoga/ https://demo.theshikshanews.com/eksapres-ve-par-logon-ko-chalana-sikhaana-hoga/#respond Mon, 22 Dec 2025 07:56:05 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6044 अशोक मधुप/वरिष्ठ पत्रकार
विकास की रफ़्तार तभी सुखद है जब वह सुरक्षित हो। भारत सरकार ने पिछले 10 वर्षों में जो बुनियादी ढांचा खड़ा किया है, विशेषकर सड़क तंत्र में जो क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं, वे अभूतपूर्व हैं। जहाँ पहले दो शहरों के बीच का सफर घंटों और दिनों में तय होता था, आज वह समय काफी कम हो गया है। लेकिन इस भौतिक प्रगति के बीच एक गंभीर प्रश्न खड़ा होता है। क्या हम इन आधुनिक सड़कों पर चलने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार हैं? अब समय आ गया है कि हम ईंट और डामर की सड़कों से आगे बढ़कर ‘मानव व्यवहार’ में सुधार पर निवेश करें। याद रखिए, एक्सप्रेसवे केवल मंजिल तक जल्दी पहुँचने के लिए नहीं हैं, बल्कि सुरक्षित पहुँचने के लिए हैं। यदि हम गति के साथ गरिमा और अनुशासन नहीं अपना सकते, तो ये चमचमाती सड़कें हमारे लिए वरदान के बजाय अभिशाप सिद्ध होंगी। अब जरूरत है कि”हाईवे और एक्सप्रेसवे बनाने से पहले लोगों को उन पर चलना सिखाना चाहिए”—यह केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि समय की मांग है। केवल कंक्रीट के जाल बिछाने से राष्ट्र का कल्याण नहीं होगा, बल्कि उन सड़कों पर सुरक्षित सफर सुनिश्चित करना भी सरकार और नागरिक दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
भारत में सड़क निर्माण की गति पिछले दस वर्षों (2014-2024) में सांख्यिकीय और भौगोलिक दोनों दृष्टि से ऐतिहासिक रही है। 2014 के आसपास देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 91,287 किलोमीटर थी, जो 2024 तक बढ़कर 1,46,000 किलोमीटर से अधिक हो गई है। 2014-15 में सड़क निर्माण की दर लगभग 12 किलोमीटर प्रतिदिन थी, जो वर्तमान में बढ़कर औसतन 28 से 37 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुँच चुकी है।
भारत ने ‘भारतमाला परियोजना’ के तहत विश्व स्तरीय एक्सप्रेसवे का जाल बिछाया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे यमुना एक्सप्रेसवे और समृद्धि महामार्ग जैसे गलियारे भारत की नई पहचान बन चुके हैं। अटल टनल और चेनाब ब्रिज जैसे इंजीनियरिंग के चमत्कार इसी दशक की देन हैं, जिन्होंने दुर्गम क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा है।
इतना सब हुआ। सड़कों की चौड़ाई तो बढ़ी है, लेकिन सुरक्षा के मोर्चे पर हम अब भी संघर्ष कर रहे हैं। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि हमारी लापरवाही की कीमत बहुत भारी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2019 में हुई 4,49,002 दुर्घटनाओं 1,51,113मौत हुईं। 2020 में हुई 3,66,138 दुर्घटनाओं में 1,31,714 व्यक्ति मरे। 2021 में हुए 4,12,432 एक्सीडेंट में 1,53,972 व्यक्ति मौत के मुंह में समा गए। 2022 में हुई 4,61,312 दुर्घटनाओं मे 1,68,491 जान गईं। 2023 हुई 4,80,000+ (अनुमानित) में 1,70,000 व्यक्ति मौत के शिकार हुए। ये आंकड़े बताते हैं कि दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। घायलों की संख्या तो मरने वालों से काफी ज्यादा होनी चाहिए। अभी यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में 19 लोग मरे। 100 से ज्यादा घायल हुए।
आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि लगभग 70 प्रतिशत से अधिक दुर्घटनाएं ‘ओवरस्पीडिंग’ यानी अत्यधिक गति के कारण होती हैं। एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की गंभीरता सामान्य सड़कों से कहीं अधिक होती है क्योंकि यहाँ वाहनों की गति बहुत तेज़ होती है। एक्सप्रेसवे सामान्य सड़कें नहीं हैं। यहाँ ड्राइविंग के अपने नियम हैं, जिन्हें भारतीय चालकों को सीखना होगा। इन पर चलते समय लेन का अनुशासन का पालन करना होगा । भारत में सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग भारी वाहन सबसे दाईं ओर चलाते हैं, जबकि वह लेन केवल ओवरटेकिंग के लिए होती है। तेज़ रफ़्तार वाली सड़कों पर गलत लेन में वाहन चलाना आत्महत्या के समान है।
एक्सप्रेसवे पर केवल अधिकतम गति ही नहीं, बल्कि न्यूनतम गति का पालन भी जरूरी है। धीमी गति से चल रहे वाहन तेज़ रफ्तार वाहनों के लिए अवरोध बन जाते हैं, जिससे टक्कर की संभावना बढ़ जाती है। एक्सप्रेसवे की सीमेंट वाली सड़कों पर टायर बहुत जल्दी गर्म होते हैं। यदि टायर पुराने या घिसे हुए हैं, तो वे फट सकते हैं। लोगों को यह सिखाना जरूरी है कि लंबी यात्रा से पहले अपने वाहनों की तकनीकी जांच कैसे करें। एक्सप्रेसवे पर चढ़ने और उतरने के लिए बने रास्तों (रैम्प) का सही उपयोग करना अधिकांश लोगों को नहीं आता। अचानक मुख्य मार्ग पर वाहन मोड़ देना घातक होता है।
वाहनों की संख्या और लाइसेंस धारकों के बीच का यह अंतर यह दर्शाता है कि हमारी सड़कों पर ‘अकुशल’ चालकों की फौज मौजूद है। एक्सप्रेसवे जैसी तेज़ रफ़्तार वाली सड़कों पर यह स्थिति और भी घातक हो जाती है। एक आदर्श स्थिति में, सड़क पर चल रहे हर वाहन के अनुरूप कम से कम एक वैध लाइसेंस होना चाहिए। हालांकि, भारत में स्थिति काफी चिंताजनक है। राष्ट्रीय रजिस्टर के अनुसार, देश में कुल ड्राइविंग लाइसेंसों की संख्या लगभग 21 से 23 करोड़ के बीच है। यदि हम 35 करोड़ पंजीकृत वाहनों की तुलना 23 करोड़ लाइसेंसों से करें, तो स्पष्ट होता है कि वाहनों और चालकों के बीच 12 करोड़ का भारी अंतर है।
विभिन्न क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) और पुलिस द्वारा चलाए गए जांच अभियानों के अनुसार, बिना लाइसेंस वाहन चलाने वालों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एक अनुमान के अनुसार, देश में लगभग 25से 30 प्रतिशत लोग बिना किसी वैध ड्राइविंग लाइसेंस के सड़कों पर वाहन चला रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि हादसों में जान गंवाने वाले या दोषी पाए जाने वाले चालकों में से लगभग 65 प्रतिशत युवाओं के पास वैध लाइसेंस नहीं होता। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यह प्रतिशत और भी अधिक है, जहाँ लगभग 40 प्रतिशत दोपहिया चालक बिना लाइसेंस के गाड़ी दौड़ा रहे हैं।
एक पुरानी रिपोर्ट (सेव लाइफ फाउंडेशन) यह भी बताती है कि जिनके पास लाइसेंस है, उनमें से भी 10 में से छह लोगों ने बिना किसी व्यावहारिक ड्राइविंग टेस्ट के इसे प्राप्त किया है, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा है।
इसलिए बिना ड्राइविंग लाइसेंस पकड़े जाने पर केवल जुर्माना नहीं, बल्कि वाहन को लंबे समय के लिए ज़ब्त करना होगा। नाबालिगों द्वारा गाड़ी चलाने पर अभिभावकों को जेल की सजा का प्रावधान में कड़ाई जरूरी है। डिजिटल तकनीक का उपयोग कर हर मोड़ पर बिना लाइसेंस वाले पर कार्रवाई अमल में लानी होगी।
इन एक्सप्रेसवे पर चलना सिखाने के लिए सिर्फ शिक्षा पर्याप्त नहीं है; अनुशासन के लिए कानून का भय भी आवश्यक है। गलत वाहन चलाने वालों, शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों और उल्टी दिशा (रॉन्ग साइड) में चलने वालों पर इतनी सख्ती होनी चाहिए कि वे दोबारा नियम तोड़ने की हिम्मत न करें। बार-बार नियम तोड़ने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाना चाहिए। हर कुछ किलोमीटर पर कैमरे और रडार होने चाहिए जो नियम तोड़ते ही चालान सीधे चालक के पते पर भेजें। नियम पन मानने वालों पर जुर्माना केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि दंडात्मक होना चाहिए ताकि वह व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डाले।
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई दुर्घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस एक्सप्रेसवे पर प्रत्येक किलोमीटर पर कैमरे लगाने का निर्णय लिया है। यह तो पूरे देश के महत्वपूर्ण मार्ग पर करना होगा, तभी दुर्घटनाएं रूकेंगी।
सड़क सुरक्षा को केवल पुलिस का विषय न मानकर इसे शिक्षा का हिस्सा बनाना होगा। विद्यालयों में बच्चों को बचपन से ही सड़क के संकेतों, लेन अनुशासन और जीवन के मूल्य के बारे में सिखाया जाना चाहिए। जब तक सुरक्षा की भावना हमारे संस्कार में नहीं आएगी, तब तक आधुनिक सड़कें केवल मृत्यु के गलियारे बनी रहेंगी।

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अगले साल के अंत तक पूरे देश में शुरू हो जायेगा एमएलएफएफ: गडकरी https://demo.theshikshanews.com/agale-saal-ke-ant-tak-poore-desh-mein-shuroo-ho-jaayega-emelepheph-gadakaree/ https://demo.theshikshanews.com/agale-saal-ke-ant-tak-poore-desh-mein-shuroo-ho-jaayega-emelepheph-gadakaree/#respond Wed, 17 Dec 2025 16:53:08 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6023 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को संसद में बताया कि टोल भुगतान की नयी प्रणाली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) साल 2026 के अंत तक पूरे देश में लागू हो जायेगी।
श्री गडकरी ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि नयी प्रणाली लागू होने के बाद टोल नाकों पर कर्मचारियों की जरूरत नहीं रहेगी। कैमरों के माध्यम से वाहन का नंबर कैप्चर होगा, उपग्रह के माध्यम से जानकारी केंद्रीकृत प्रणाली में जायेगी और संबंधित बैंक खाते से पैसा कट जायेगा। इससे टोल नाकों पर 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी वाहन गुजर सकते हैं और टोल का भुगतान भी हो जायेगा।
उन्होंने कहा कि इससे 1,500 करोड़ रुपये का ईंधन बचेगा और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की आमदनी कम से कम 6,000 करोड़ रुपये बढ़ने का अनुमान है। उन्होंने सदन को बताया कि कुछ जगहों पर यह प्रणाली शुरू की गयी है। इस संबंध में पहले 10 ठेके आवंटित किये जा चुके हुए हैं और 10 का आवंटन प्रक्रिया में है। अगले साल के अंत तक राष्ट्रीय राजमार्गों पर पूरे देश में इसे शुरू कर दिया जायेगा।
एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में श्री गडकरी ने कहा कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार को हुए हादसे में एम्बुलेंस का एक घंटे बाद पहुंचना दुःखद है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों को पूरी तरह अत्याधुनिक एम्बुलेंस प्रदान करने की योजना पर काम कर रही है। उनके परिचालन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी, शर्त बस इतनी होगी कि दुर्घटना के 10 मिनट के भीतर मौके पर एम्बुलेंस पहुंच जाये।

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मोदी दिल्ली में आज करेंगे 11 हजार करोड़ की दो राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन https://demo.theshikshanews.com/modee-dillee-mein-aaj-karenge-11-hajaar-karod-kee-do-raajamaarg-pariyojanaon-ka-udghaatan/ https://demo.theshikshanews.com/modee-dillee-mein-aaj-karenge-11-hajaar-karod-kee-do-raajamaarg-pariyojanaon-ka-udghaatan/#respond Sun, 17 Aug 2025 05:08:55 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4785 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को यहां रोहिणी क्षेत्र में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने शनिवार को यहां बताया कि ये परियोजनाएँ – द्वारका एक्सप्रेसवे का दिल्ली खंड और शहरी विस्तार सड़क- दो (यूईआर-दो) राजधानी को भीड़भाड़ से मुक्त करने की सरकार की व्यापक योजना के तहत विकसित की गई हैं। इनका उद्देश्य कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार, यात्रा समय में कटौती और दिल्ली तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में यातायात को कम करना है। यह पहल प्रधानमंत्री के विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे के निर्माण के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
द्वारका एक्सप्रेसवे का 10.1 किलोमीटर लंबा दिल्ली खंड लगभग 5,360 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। यह खंड यशोभूमि, डीएमआरसी ब्लू लाइन और ऑरेंज लाइन, आगामी बिजवासन रेलवे स्टेशन और द्वारका क्लस्टर बस डिपो को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी भी प्रदान करेगा। इस खंड में पैकेज- एक : शिव मूर्ति चौराहे से द्वारका सेक्टर-21 स्थित रोड अंडर ब्रिज तक 5.9 किमी। पैकेज -दो : द्वारका सेक्टर-21 से दिल्ली-हरियाणा सीमा तक 4.2 किमी, जो शहरी विस्तार मार्ग- दो से सीधा संपर्क प्रदान करता है। द्वारका एक्सप्रेसवे के 19 किमी लंबे हरियाणा खंड का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने मार्च 2024 में किया था।
प्रधानमंत्री लगभग 5,580 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बहादुरगढ़ और सोनीपत के लिए नए संपर्क मार्गों के साथ-साथ शहरी विस्तार मार्ग-दो (यूईआर-दो) के अलीपुर से दिचाऊ कलां खंड का भी उद्घाटन करेंगे। इससे दिल्ली के आंतरिक और बाहरी रिंग रोड और मुकरबा चौक, धौला कुआं और एन एच नौ जैसे व्यस्त स्थानों पर यातायात सुगम होगा। नए पुल बहादुरगढ़ और सोनीपत तक सीधी पहुँच प्रदान करेंगे, औद्योगिक संपर्क में सुधार करेंगे, शहर के यातायात को कम करेंगे और एनसीआर में माल की आवाजाही में तेजी लाएंगे।

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