newspaper – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Tue, 20 Jan 2026 16:42:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg newspaper – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 समाचारपत्र ‘पंजाब केसरी’ के प्रिंटिंग प्रेस निर्बाध रूप से काम करते रहेंगे : न्यायालय https://demo.theshikshanews.com/samaachaarapatr-panjaab-kesaree-ke-printing-pres-nirbaadh-roop-se-kaam-karate-rahenge-nyaayaalay/ https://demo.theshikshanews.com/samaachaarapatr-panjaab-kesaree-ke-printing-pres-nirbaadh-roop-se-kaam-karate-rahenge-nyaayaalay/#respond Tue, 20 Jan 2026 16:42:38 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6147 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि ‘‘समाचारपत्रों को रोका नहीं जा सकता’’ और पंजाब सरकार तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया कि वे प्रदेश में ‘पंजाब केसरी’ अख़बार के प्रकाशन के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाएं।
न्यायालय ने मौखिक रूप से उल्लेख किए जाने के बाद समाचारपत्र समूह की याचिका पर तत्काल सुनवाई की और आदेश दिया कि हिंदी दैनिक के प्रिंटिंग प्रेस निर्बाध रूप से काम करते रहेंगे, भले ही पंजाब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कथित उल्लंघनों के कारण बिजली आपूर्ति बंद करने का निर्णय लिया हो।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि राज्य की कार्रवाई को चुनौती देने वाले समाचार पत्र समूह द्वारा दायर याचिका पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद भी उसका अंतरिम आदेश एक सप्ताह तक प्रभावी रहेगा।
⁠पीठ ने अखबार समूह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘दोनों पक्षों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना और मामले के गुण दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, यह निर्देश दिया जाता है कि पंजाब केसरी के प्रिंटिंग प्रेस निर्बाध रूप से काम करते रहेंगे और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, जैसे होटल आदि के संबंध में यथास्थिति बरकरार रहेगी।’’
संक्षिप्त सुनवाई के बाद पीठ ने आदेश दिया, ‘यह अंतरिम व्यवस्था उच्च न्यायालय का फैसला आने तक और पीड़ित पक्ष को उचित मंच पर जाने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय देने के लिए की गई है।’
मामले की सुनवाई की शुरुआत में, समाचार पत्र समूह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने स्थिति को एक ‘असाधारण मामला’ बताया और आरोप लगाया कि पंजाब सरकार की आलोचना करने वाले लेखों के प्रकाशन के बाद राज्य ने समन्वित तरीके से उत्पीड़न अभियान चलाया।
रोहतगी ने कहा कि लेख के प्रकाशन के बाद, प्रबंधन के खिलाफ विभिन्न दंडात्मक कार्रवाइयां शुरू की गईं, जिसमें बिजली आपूर्ति बंद करना, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रेस को नोटिस जारी करना, अखबार मालिकों द्वारा संचालित होटलों को बंद करना और प्राथमिकी दर्ज करना आदि शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘यह सब दो दिनों के भीतर हुआ, क्योंकि हमने पंजाब की मौजूदा सरकार के लिए प्रतिकूल लेख प्रकाशित किए थे।’
पिछले कुछ दशकों से कार्यरत प्रेस को कथित जल प्रदूषण के मुद्दे पर तत्काल बंद करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने बताया कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया। हालांकि, अंतरिम राहत नहीं दी गई है।
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी कदम कानून के अनुरूप उठाए। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है और आज या कल तक फैसला आने की उम्मीद है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, “यह मामला निश्चित रूप से प्रतीक्षा कर सकता है। प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत उठाए गए कदम बिल्कुल नियमों के अनुसार हैं। लोग इसे कुछ और ही रूप दे रहे हैं। जो भी कार्रवाई आवश्यक थी, वह पहले ही की जा चुकी है; हम आगे कोई कार्रवाई नहीं करने वाले हैं।”
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘कोई बात नहीं। अखबारों को रोका नहीं जा सकता’’ और अंतरिम राहत प्रदान की।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/samaachaarapatr-panjaab-kesaree-ke-printing-pres-nirbaadh-roop-se-kaam-karate-rahenge-nyaayaalay/feed/ 0
प्रेस के लिए एकजुटता के साथ खड़े होने की जरूरत https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be/ https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be/#respond Mon, 21 Jul 2025 04:01:12 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4383 संजय कुमार शर्मा/विशेष संपादकीय
युट्यूबर अजित अंजुम के खिलाफ FIR क्या दर्ज हुई सारे और अतिक्रमणकरी युट्यूबर एक जुट हो गए। कोई यह पूछने वाला नहीं कि किस अधिकार के साथ यूट्यूबर कहीं भी घुस जाते है। कैसे इनको प्रवेश दिया जाता है।
मैंने पहले भी लिखा था कि यूट्यूबर के लिए कोई कानून भारत मे नही है। यह ठेले पटरी वाले कि तरह है जो कहीं भी अपनी दुकान सजा लेते है। सरकार या सिस्टम जब इनपर कार्यवाही करता है तो प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा उठता है। पहले तो यह समझना होगा कि प्रेस क्या है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) ( जी) में प्रेस को सूचना संकलन करने और उसका प्रसारण करने की बात की गई है। जिस समय भारतीय संविधान बनकर हुआ तो किसी ने खबरिया चैनलों, यूट्यूब, पोर्टल और सोशल मीडिया की कल्पना नही की थी। खबरिया चैनल आने के बाद केबल टीवी अधिनियम व अन्य कानून बने। अखबारों यानि प्रेस के लिए पहले से प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम मौजूद था। लेकिन सोशल मीडिया युट्यूब को लेकर कोई कानून नही है। कोई भी व्यक्ति 5 -10 हजार खर्च कर युट्यूब पर एक आई बनाकर कर खड़ा हो जाता है जिसे वह चैनल का नाम दे देता है। आजकल खबरिया चैनलों से निकले बेरोजगार पत्रकारों ने भी यही काम कर रहे। 5- 10 हजार खर्च किया और बन गए चैनल के मालिक। मेरा इन युट्यूबरों से सवाल है कि ऐसी नौबत क्यो आई‍?  इन्हें खबरिया चैनल से निकाल दिया गया अथवा चैनल की नौकरी छोड़ने को विवश होना पड़ा। मोदी सरकार ने वर्ष 2016 के बाद से भारतीय प्रेस और पत्रकारों की गर्दन मरोड़ना शुरू कर दिया था, जिसको लेकर मैंने और मेरे कई साथियों ने आंदोलन किया। प्रेस यानि अखबार बचाओ की मुहिम में किसी भी तथाकथित बड़े पत्रकार यानि आज के युट्यूबर ने सहयोग नही किया। हमे तभी अंदाज हो गया था कि आने वाले दिन प्रेस के लिए अच्छे नही है। इसी दौरान एक प्रतिष्टित और बड़े मीडिया हाऊस से सरकार ने ब्लैकमेलिंग करने का प्रयास किया। इसके तहत डीएवीपी ने मीडिया हाऊस से संबंधित समाचार पत्र को ब्लॉक कर विज्ञापन रोक दिए। करीब 6 महिने के बाद भाजपा और उपरोक्त मीडिया हाऊस में समझौता हुआ। तब जाकर विज्ञापन शुरू हुए। इसके बाद से भारतीय प्रेस या यूं कहें मीडिया के ‘गोदी मीडिया’ बनने की प्रक्रिया शुरू हुई। जो अब गोदी मीडिया के रूप में स्थापित हो चुकी है।
यहां मरहूम राहत इंदौरी साहब को एक शेर दोहराना चाहूंगा ‘लगेगी आग शहर में तो आएंगे और भी कई घर जद में यहां सिर्फ मेरा ही मकान थोड़े है’ यही हुआ। 2016 में शुरू हुई आग में कोई मीडिया हाऊसों के प्रकाशन, चैनल और छोटे मझोले अखबार बंद हुए। सैकड़ों प्रतिष्ठित पत्रकारों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। अखबारों की विकास दर न केवल थम गई बल्कि नेगेटिव हो गई। हालांकि सरकार ने इसे करोना के नाम पर ढकने का प्रयास किया। वर्तमान में बेरोजगारी की मार झेल रहे बेरोजागरों को पत्रकारिता में जिंदा रखने के लिए ठेली पटरी की तरह यूट्यूब का सहारा लेना पड़ा। हालांकि अब यूटयूब उनकी जीविका का प्रमुख साधन बन गया है। अगर 2016 के बाद तथाकथित बड़े पत्रकारों और मीडिया हाउसो ने लघु और मझोले अखबारों का साथ देकर केंद्र सरकार की प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति 2016 और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विज्ञापन नीति का खुलकर विरोध किया होता तो शायद आज यह हालत नही है।
शायद पत्रकारों का उत्पीड़न भी नहीं होता। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पत्रकारों के संबंध में किसी भी उत्पीड़न का हर स्तर पर विरोध होना चाहिए। इसका मतलब यह कतई नहीं कि सरकार मनमानी करें और पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे लिखवाए। देशभर के प्रेस और मीडिया हाउसहो को इस पर विचार करना चाहिए की इस सब का जिम्मेदार कौन है। इस सब को लेकर हमारी चेतना आज भी शून्य है। जरूरत है एकजुटता के साथ सरकारों के खिलाफ उठ खड़े होने की। वरना आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be/feed/ 0