News Channel – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Mon, 21 Jul 2025 05:31:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg News Channel – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 प्रेस के लिए एकजुटता के साथ खड़े होने की जरूरत https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be/ https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be/#respond Mon, 21 Jul 2025 04:01:12 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4383 संजय कुमार शर्मा/विशेष संपादकीय
युट्यूबर अजित अंजुम के खिलाफ FIR क्या दर्ज हुई सारे और अतिक्रमणकरी युट्यूबर एक जुट हो गए। कोई यह पूछने वाला नहीं कि किस अधिकार के साथ यूट्यूबर कहीं भी घुस जाते है। कैसे इनको प्रवेश दिया जाता है।
मैंने पहले भी लिखा था कि यूट्यूबर के लिए कोई कानून भारत मे नही है। यह ठेले पटरी वाले कि तरह है जो कहीं भी अपनी दुकान सजा लेते है। सरकार या सिस्टम जब इनपर कार्यवाही करता है तो प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा उठता है। पहले तो यह समझना होगा कि प्रेस क्या है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) ( जी) में प्रेस को सूचना संकलन करने और उसका प्रसारण करने की बात की गई है। जिस समय भारतीय संविधान बनकर हुआ तो किसी ने खबरिया चैनलों, यूट्यूब, पोर्टल और सोशल मीडिया की कल्पना नही की थी। खबरिया चैनल आने के बाद केबल टीवी अधिनियम व अन्य कानून बने। अखबारों यानि प्रेस के लिए पहले से प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम मौजूद था। लेकिन सोशल मीडिया युट्यूब को लेकर कोई कानून नही है। कोई भी व्यक्ति 5 -10 हजार खर्च कर युट्यूब पर एक आई बनाकर कर खड़ा हो जाता है जिसे वह चैनल का नाम दे देता है। आजकल खबरिया चैनलों से निकले बेरोजगार पत्रकारों ने भी यही काम कर रहे। 5- 10 हजार खर्च किया और बन गए चैनल के मालिक। मेरा इन युट्यूबरों से सवाल है कि ऐसी नौबत क्यो आई‍?  इन्हें खबरिया चैनल से निकाल दिया गया अथवा चैनल की नौकरी छोड़ने को विवश होना पड़ा। मोदी सरकार ने वर्ष 2016 के बाद से भारतीय प्रेस और पत्रकारों की गर्दन मरोड़ना शुरू कर दिया था, जिसको लेकर मैंने और मेरे कई साथियों ने आंदोलन किया। प्रेस यानि अखबार बचाओ की मुहिम में किसी भी तथाकथित बड़े पत्रकार यानि आज के युट्यूबर ने सहयोग नही किया। हमे तभी अंदाज हो गया था कि आने वाले दिन प्रेस के लिए अच्छे नही है। इसी दौरान एक प्रतिष्टित और बड़े मीडिया हाऊस से सरकार ने ब्लैकमेलिंग करने का प्रयास किया। इसके तहत डीएवीपी ने मीडिया हाऊस से संबंधित समाचार पत्र को ब्लॉक कर विज्ञापन रोक दिए। करीब 6 महिने के बाद भाजपा और उपरोक्त मीडिया हाऊस में समझौता हुआ। तब जाकर विज्ञापन शुरू हुए। इसके बाद से भारतीय प्रेस या यूं कहें मीडिया के ‘गोदी मीडिया’ बनने की प्रक्रिया शुरू हुई। जो अब गोदी मीडिया के रूप में स्थापित हो चुकी है।
यहां मरहूम राहत इंदौरी साहब को एक शेर दोहराना चाहूंगा ‘लगेगी आग शहर में तो आएंगे और भी कई घर जद में यहां सिर्फ मेरा ही मकान थोड़े है’ यही हुआ। 2016 में शुरू हुई आग में कोई मीडिया हाऊसों के प्रकाशन, चैनल और छोटे मझोले अखबार बंद हुए। सैकड़ों प्रतिष्ठित पत्रकारों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। अखबारों की विकास दर न केवल थम गई बल्कि नेगेटिव हो गई। हालांकि सरकार ने इसे करोना के नाम पर ढकने का प्रयास किया। वर्तमान में बेरोजगारी की मार झेल रहे बेरोजागरों को पत्रकारिता में जिंदा रखने के लिए ठेली पटरी की तरह यूट्यूब का सहारा लेना पड़ा। हालांकि अब यूटयूब उनकी जीविका का प्रमुख साधन बन गया है। अगर 2016 के बाद तथाकथित बड़े पत्रकारों और मीडिया हाउसो ने लघु और मझोले अखबारों का साथ देकर केंद्र सरकार की प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति 2016 और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विज्ञापन नीति का खुलकर विरोध किया होता तो शायद आज यह हालत नही है।
शायद पत्रकारों का उत्पीड़न भी नहीं होता। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पत्रकारों के संबंध में किसी भी उत्पीड़न का हर स्तर पर विरोध होना चाहिए। इसका मतलब यह कतई नहीं कि सरकार मनमानी करें और पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे लिखवाए। देशभर के प्रेस और मीडिया हाउसहो को इस पर विचार करना चाहिए की इस सब का जिम्मेदार कौन है। इस सब को लेकर हमारी चेतना आज भी शून्य है। जरूरत है एकजुटता के साथ सरकारों के खिलाफ उठ खड़े होने की। वरना आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है।

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