NASA – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Wed, 21 Jan 2026 15:47:05 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg NASA – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 27 वर्ष के सेवाकाल के बाद हुईं सेवानिवृत्त https://demo.theshikshanews.com/naasa-antariksh-yaatree-suneeta-viliyams-27-varsh-ke-sevaakaal-ke-baad-hueen-sevaanivrtt/ https://demo.theshikshanews.com/naasa-antariksh-yaatree-suneeta-viliyams-27-varsh-ke-sevaakaal-ke-baad-hueen-sevaanivrtt/#respond Wed, 21 Jan 2026 15:47:05 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6154 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Washington। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता “सुनी” विलियम्स 27 वर्षों की सेवा के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी से सेवानिवृत्ति हो गयी हैं। यह उनके एक अत्यंत सफल मानव अंतरिक्ष उड़ान करियर का अंत है। नासा ने बताया कि उनकी सेवानिवृत्ति 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी हुयी है।
सुश्री विलियम्स अपने रिकॉर्ड-तोड़ उपलब्धियों और नेतृत्व भूमिकाओं के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने आधुनिक अंतरिक्ष अन्वेषण को नया आकार देने में मुख्य भूमिका निभायी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस ) के तीन मिशनों में भाग लिया। अपने करियर के दौरान सुश्री विलयम्स ने कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए और वह समय बिताने के मामले में विश्व में दूसरे नंबर की नासा अंतरिक्षयात्री हैं।
नासा के प्रशासक जारेड आइजैकमैन ने कहा, “सुनी विलियम्स मानव अंतरिक्ष उड़ान में एक मार्गदर्शक रही हैं।” श्री आइजैकमैन ने अंतरिक्ष स्टेशन पर उनके नेतृत्व और चंद्रमा के लिए भविष्य की आर्टेमिस मिशनों तथा मंगल के मिशनों के लिए आवश्यक विज्ञान और तकनीक को आगे बढ़ाने में उनके योगदान की प्रशंसा की।
सुश्री विलयम्स की कई उपलब्धियों में वह अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों में सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष उड़ान के मामले में छठे स्थान पर हैं, उन्होंने 286 दिन का रिकॉर्ड बनाया, जो नासा के बोइंग स्टारलाइनर और स्पेस एक्स क्रू-9 मिशनों के दौरान हासिल हुआ और यह रिकॉर्ड उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बच विलमोर के साथ साझा किया।
सुश्री विलियम्स ने नौ स्पेसवॉक किए, जिनका कुल समय 62 घंटे छह मिनट था, जो किसी महिला द्वारा सबसे अधिक है और इतिहास में कुल ईवीए समय के मामले में चौथा सबसे अधिक है। वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति भी बनीं। उन्होंने पहली बार दिसंबर 2006 में स्पेस शटल डिस्कवरी के साथ एसटीएस-116 मिशन में उड़ान भरी और एसटीएस-117 क्रू के साथ स्पेस शटल अटलांटिस से वापस लौटीं।
उन्होंने लम्बी यात्रा अभियान में फ्लाइट इंजीनियर के रूप में कार्य किया और उस मिशन के दौरान रिकॉर्ड तोड़ चार स्पेसवॉक किए।
सुश्री विलियम्स ने कहा, “जो कोई भी मुझे जानता है, वह जानता है कि अंतरिक्ष मेरा सबसे पसंदीदा स्थान है। अंतरिक्ष में तीन बार उड़ान भरने का अवसर मिला, यह मेरे लिए एक अद्भुत सम्मान है। मैंने नासा में 27 साल का शानदार करियर जिया, और यह मुख्य रूप से मेरे सहयोगियों के प्रेम और समर्थन के कारण संभव हुआ।”
उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, वहाँ के लोग, इंजीनियरिंग और विज्ञान वास्तव में प्रेरणादायक हैं और चंद्रमा व मंगल की ओर अगला कदम संभव बनाया है। मुझे उम्मीद है कि हमने जो आधार स्थापित किया है, उसने इन साहसिक कदमों को थोड़ा आसान बनाया होगा। मैं नासा और उसके साझेदार संस्थानों के लिए बहुत उत्साहित हूँ और इंतजार नहीं कर सकती कि एजेंसी इतिहास बनाए।”

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उपग्रहों की सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष में तैनात होंगे ‘बॉडीगार्ड https://demo.theshikshanews.com/upagrahon-kee-suraksha-ke-lie-antariksh-mein-tainaat-honge-bodeegaard/ https://demo.theshikshanews.com/upagrahon-kee-suraksha-ke-lie-antariksh-mein-tainaat-honge-bodeegaard/#respond Tue, 23 Sep 2025 04:07:30 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5120 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। भारत अंतरिक्ष में उपग्रहों की सुरक्षा के लिए ‘बॉडीगार्ड उपग्रह बनाने की योजना बना रहा। मामले से जुड़े जानकारों ने ये दावा किया है। ‘बॉडीगार्ड उपग्रह अंतरिक्ष में अहम मिशन से जुड़े उपग्रहों को किसी भी हमले से बचाने में मदद करेंगे। योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाना है।
जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि एक ऐसा ‘बॉडीगार्ड उपग्रह बनाया जाए जो खतरों को भांप कर अंतरिक्ष में घूम रहे दूसरे उपग्रहों की रक्षा करने का काम करें। जानकारों का दावा है कि उपग्रह- सुरक्षा परियोजना मोदी सरकार की एक बड़ी योजना है। केंद्र सरकार इस योजना के तहत उपग्रहों की सुरक्षा के लिए 50 सुरक्षा उपग्रहों तैयार करने के लिए 270 अरब रुपये खर्च कर सकती है। इस श्रेणी का पहला उपग्रह अगले साल लॉन्च हो सकता है।
भारत इस कार्यक्रम के लिए लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग सैटेलाइट (एलआईडीआर) लॉन्च कर सकता है। ये अंतरिक्ष में मौजूद खतरों का तुरंत पता लगाएगा जिससे पृथ्वी पर उपग्रह के लिए काम करने वाले लोगों को इससे निपटने के लिए पूरा मौका मिलेगा। तकनीक और रडार से वैज्ञानिक मिशन से जुड़े उपग्रह को सुरक्षित करने का इंतजाम कर सकते हैं। अंतरिक्ष में पाकिस्तान के सिर्फ आठ, भारत के 100 से अधिक जबकि चीन के पास 930 उपग्रह भ्रमण कर रहे हैं। ये मामला बेहद संवेदनशील जानकारों का कहना है कि ये मामला संवेदनशील है क्योंकि उपग्रहों ने पाकिस्तान के खिलाफ हाल ही में हुए संघर्ष में अहम भूमिका निभाई थी।
एक पड़ोसी देश का उपग्रह भारतीय उपग्रह से करीब एक किलोमीटर दूर था जो जमीन से जुड़ी मैपिंग और निगरानी में जुटा था। हालांकि अधिकारियों ने ये नहीं बताया कि ये उपग्रह किस देश का था। इसी घटना के बाद भारत सरकार ने उपग्रहों की सुरक्षा पर जोर देना शुरू किया है। आशंका है कि इस तरह से दूसरे देशों की क्षमता पता लगाने की कोशिश हो सकती है।
एकसाथ दो देशों के उपग्रह इसरो का उपग्रह पृथ्वी से 500 से 600 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में परिक्रमा कर रहा था। इसी क्षेत्र में एलन मस्क का संचार उपग्रह स्टारलिंक का बड़ा बेड़ा परिक्रमा कर रहा था। इसरो के कैपासिटी बिल्डिंग प्रोग्राम ऑफिस के पूर्व निदेशक सुधीर कुमार एन का कहना है कि हमारे पास अभी इस स्तर के निगरानी उपग्रह नही हैं जो परिक्रमा कर रहे उपग्रहों की रक्षा कर सकें। कुछ स्टार्टअप जरूर काम कर रहे हैं। चीन बड़ा खतरा बन रहा भारत और अमेरिका के अधिकारी बार-बार चेता रहे हैं कि चीन की सेना अंतरिक्ष में बड़ा खतरा बनकर उभर रही है।
बीजिंग ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को तेज कर दिया है।
भारतीय वायुसेना के एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने जून में एक सेमिनार में ये दावा किया था। इसी को देखते हुए भारत सरकार अब अंतरिक्ष में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में जुटी हुई है।

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