Murmu – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Wed, 26 Nov 2025 15:55:12 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Murmu – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 संविधान राष्ट्रीय अस्मिता का ग्रंथ, इसे आत्मसात कर संसद ने जन आकांक्षाओं को अभिव्यक्त किया: मुर्मु https://demo.theshikshanews.com/sanvidhaan-raashtreey-asmita-ka-granth-ise-aatmasaat-kar-sansad-ne-jan-aakaankshaon-ko-abhivyakt-kiya-murmu/ https://demo.theshikshanews.com/sanvidhaan-raashtreey-asmita-ka-granth-ise-aatmasaat-kar-sansad-ne-jan-aakaankshaon-ko-abhivyakt-kiya-murmu/#respond Wed, 26 Nov 2025 15:55:12 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5858 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संविधान को राष्ट्रीय अस्मिता और पहचान का ग्रंथ बताते हुए कहा है कि बीते दशक में हमारी संसद ने इसके मूल्यों पर चलते हुए जन आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने के अनेक कार्य किये हैं।
श्रीमती मुर्मु ने बुधवार को यहां संविधान दिवस के अवसर पर संविधान सदन के केन्द्रीय कक्ष में अपने अभिभाषण में कहा कि संविधान सभा ने संसदीय प्रणाली को अपनाने के पक्ष में जो ठोस तर्क दिये गए थे वे आज भी प्रासंगिक हैं। विश्व के विशालतम लोकतन्त्र में जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने वाली भारतीय संसद, विश्व के अनेक लोकतंत्रों के लिए आज एक उदाहरण के रूप में प्रतिष्ठित है। उन्होंंने कहा ,” हमारे संविधान निर्माता चाहते थे कि संविधान के माध्यम से हमारा सामूहिक और व्यक्तिगत स्वाभिमान सुनिश्चित रहे। मुझे यह कहते हुए बहुत प्रसन्नता होती है कि बीते दशक में हमारी संसद ने जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने के अत्यंत प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। ”
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि संविधान निर्माताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए वह सभी सांसदों को बधाई देती हैं और कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से संविधान सभा के परम सम्माननीय सदस्यों की स्मृति में सादर नमन करती हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की अंतरात्मा सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता जैसे आदर्शों में अभिव्यक्त होती है।
उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि इन सभी आयामों पर संसद सदस्यों ने संविधान निर्माताओं की परिकल्पनाओं को यथार्थ स्वरूप प्रदान किया है। संसदीय प्रणाली की सफलता के ठोस प्रमाण के रूप में, आज भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेज गति से अग्रसर है। भारत में लगभग 25 करोड़ लोगों के गरीबी की सीमारेखा से बाहर आने से आर्थिक न्याय के पैमाने पर विश्व की सबसे बड़ी सफलता अर्जित हुई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में सामाजिक न्याय के आदर्श के अनुरूप देश में समावेशी विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लागू होने से महिलाओं के नेतृत्व में विकास के एक नए युग का आरंभ होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सात नवंबर से राष्ट्र-गीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में देशव्यापी स्मरणोत्सव मनाए जा रहे हैं। यह स्मरणोत्सव भारत माता को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प का अवसर है। उन्होंने कहा ,” मुझे विश्वास है कि इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि के लिए आप सभी सदस्यगण देशवासियों को दिशा और प्रेरणा प्रदान करेंगे। ”
उन्होंने कहा कि देश का संविधान, हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का ग्रंथ है। यह हमारी राष्ट्रीय पहचान का ग्रंथ है। यह औपनिवेशक मानसिकता का परित्याग करके राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ देश को आगे बढ़ाने का मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि इसी भावना के अनुरूप, सामाजिक और तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए, आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण अधिनियम लागू किए गए हैं।
राष्ट्रपति ने संविधान संशोधन के प्रावधानों के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि संविधान में ही ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसके बल पर भावी पीढ़ियां आवश्यकतानुसार समयानुकूल संशोधन कर सकें। इस प्रकार संविधान निर्माताओं ने हमारे संविधान को गतिशीलता और जीवंतता प्रदान की।
इस अवसर पर उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू , राज्यसभा मेंं सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सभी सांसद मौजूूद थे।

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मुर्मु और शाह ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की, शाह ने एकता दौड़ को झंडी दिखाई https://demo.theshikshanews.com/murmu-aur-shaah-ne-saradaar-patel-ko-shraddhaanjali-arpit-kee-shaah-ne-ekata-daud-ko-jhandee-dikhaee/ https://demo.theshikshanews.com/murmu-aur-shaah-ne-saradaar-patel-ko-shraddhaanjali-arpit-kee-shaah-ne-ekata-daud-ko-jhandee-dikhaee/#respond Fri, 31 Oct 2025 15:43:09 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5560 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150 वीं जयंती पर शुक्रवार को यहां पटेल चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
बाद में श्री शाह ने सरदार पटेल की जयंती ‘एकता दिवस’ के अवसर पर लोगों को देश की एकता और अखंडता के संकल्प की शपथ दिलाई और ‘एकता दिवस दौड़’ को झंडी दिखाकर रवाना किया। श्रीमती मुर्मु और श्री शाह ने सुबह साढे छह बजे यहां पटेल चौक स्थित सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
राष्ट्रपति ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद अपने संदेश में कहा, ‘‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्म दिवस पर मैं सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। सरदार पटेल एक महान देशभक्त, दूरदर्शी नेता और राष्ट्र-निर्माता थे, जिन्होंने अपने अटूट संकल्प, अदम्य साहस और कुशल नेतृत्व से देश के एकीकरण का ऐतिहासिक कार्य किया। उनकी कर्मनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की भावना हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आइए, ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के अवसर पर हम सब एकजुट होकर, एक सशक्त, समरस और श्रेष्ठ भारत के निर्माण का संकल्प लें।’’
श्री शाह ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय एकता, अखंडता और किसानों के सशक्तीकरण के प्रतीक लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी का उनकी जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से वंदन करता हूं।
सरदार साहब ने रियासतों का एकीकरण कर देश की एकता और सुरक्षा को सुदृढ़ बनाया और किसानों, पिछड़ों और वंचितों को सहकारिता से जोड़कर देश को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया। उनका दृढ़ विश्वास था कि देश के विकास की धुरी किसानों की समृद्धि में निहित है। वे आजीवन किसानों के कल्याण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रहे।
सरदार साहब ने जिस न्यायप्रधान और एकता के सूत्र में बंधे राष्ट्र का निर्माण किया, उसकी रक्षा करना हर एक राष्ट्रभक्त का दायित्व है।”
बाद में श्री शाह ने यहां मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में उपस्थित लोगों को देश की एकता और अखंडता के संकलप की शपथ दिलाई और एकता दिवस दौड़ को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर केन्द्रीय शहरी आवास मंत्री मनोहर लाल, खेल और युवा मामलों के मंत्री मनसुख मांडविया, गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार, दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, अनेक जाने माने खिलाड़ी और कई गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
श्री शाह ने इस अवसर पर कहा कि इस वर्ष सरदार पटेल की जयंती को देश भर में विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर सरदार पटेल की गुजरात के केवड़िया स्थित प्रतिमा स्थल ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर गणतंत्र दिवस की तर्ज पर भव्य परेड का आयोजन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा ले रहे हैं।
उन्होंने कहा, “आज सरदार पटेल की 150वीं जयंती है और यह बहुत खास दिन है। 2014 से हर साल 31 अक्टूबर को हम सरदार पटेल के सम्मान में रन फॉर यूनिटी इवेंट ऑर्गनाइज़ करते हैं। सरदार पटेल की 150वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे बड़े धूमधाम से मनाने का फैसला किया। सरदार पटेल ने आज के भारत को बनाने और एक यूनाइटेड देश बनाने में आज़ादी के बाद देश को एक करने में बहुत बड़ा योगदान दिया।”
श्री शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने अंग्रेजों की देश को 562 रियासतों में बांटने की रणनीति को नाकाम करते हुए सभी 562 रियासतों को एक करने का बहुत बड़ा काम पूरा किया और आज का आधुनिक भारत का नक्शा सरदार पटेल की विज़न और कोशिशों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाकर कश्मीर को भारत में मिलाकर सरदार पटेल के संकल्प को पूरा किया है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस सरकारों पर सरदार पटेल की उपेक्षा किये जाने का आरोप लगाया और कहा, “उस समय की कांग्रेस सरकार ने सरदार वल्लभभाई पटेल को सही सम्मान नहीं दिया। सरदार पटेल को 41 साल की देरी के बाद भारत रत्न दिया गया। देश में कहीं भी न तो कोई मेमोरियल बनाया गया और न ही कोई स्मारक। यह तभी हुआ जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, उन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का आइडिया सोचा और सरदार पटेल के सम्मान में एक शानदार स्मारक बनाया।” श्री शाह ने सरदार पटेल के किसानोंं के हितों की रक्षा करने के लिए चलाये गये बारडाेली सत्याग्रह का भी उल्लेख किया और कहा कि सरदार पटेल ने अपने इरादों से अंग्रेजों को झुकने के लिए मजबूर कर दिया।

 

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सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन ही नहीं बल्कि सशक्तिकरण और समावेशी विकास का माध्यम: मुर्मु https://demo.theshikshanews.com/saur-oorja-keval-bijalee-utpaadan-hee-nahin-balki-sashaktikaran-aur-samaaveshee-vikaas-ka-maadhyam-murmu/ https://demo.theshikshanews.com/saur-oorja-keval-bijalee-utpaadan-hee-nahin-balki-sashaktikaran-aur-samaaveshee-vikaas-ka-maadhyam-murmu/#respond Wed, 29 Oct 2025 05:01:32 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5514 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सौर ऊर्जा को केवल बिजली उत्पादन ही नहीं बल्कि सशक्तिकरण और समावेशी विकास का माध्यम बताते हुए कहा है कि इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हुए पारिस्थितिक संतुलन पर ध्यान दिये जाने की भी जरूरत है। श्रीमती मुर्मु ने मंगलवार को यहां अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन सभा (आईएसए) के आठवें सत्र के उद्घाटन सत्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि आईएसए मानवता की साझा आकांक्षा – समावेशिता, सम्मान और सामूहिक समृद्धि के स्रोत के रूप में सौर ऊर्जा का उपयोग करने का प्रतीक है। राष्ट्रपति ने जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता बताई और कहा कि भारत इस संकट से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इस दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि आईएसए सौर ऊर्जा को अपनाने और इसके इस्तेमाल को प्रोत्साहित करके इस वैश्विक चुनौती से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
श्रीमती मुर्मु ने समावेशिता की भारत की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि सुदूर क्षेत्रों में घरों को रोशन कर सरकार ने सामाजिक समानता के अनुरूप कार्य किया है। उन्होंने कहा कि सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच समुदायों को सशक्त बनाती है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है, और ऐसे अवसरों के द्वार खोलती है जिनका प्रभाव बिजली की आपूर्ति से कहीं आगे तक है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि सशक्तिकरण और समावेशी विकास का भी प्रतीक है।
राष्ट्रपति ने सभी सदस्य देशों से बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर लोगों के जीवन पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया और कहा कि इस सभा को सामूहिक कार्य योजना विकसित करनी चाहिए जो सौर ऊर्जा को रोज़गार सृजन, महिला नेतृत्व, ग्रामीण आजीविका और डिजिटल समावेशन से जोड़े। उन्होंने कहा, हमारी प्रगति केवल मेगावाट से नहीं, बल्कि जीवन में रोशनी, मज़बूत परिवारों और समुदायों के जीवन में बदलाव से मापी जानी चाहिए। प्रौद्योगिकी विकास और नवीनतम एवं उन्नत तकनीकों को सभी के साथ साझा करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए ताकि अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हमें बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा संयंत्रों का विस्तार करते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बना रहे क्योंकि पर्यावरण संरक्षण ही हरित ऊर्जा की ओर रुख़ का मूल कारण है।
श्रीमती मुर्मु ने कहा, ”हमें न केवल अपने देशों के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए, न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अधिक समर्पण के साथ काम करना चाहिए।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस सभा के विचार-विमर्श और निर्णय सौर ऊर्जा के उत्पादन में मील का पत्थर साबित होंगे जो एक समावेशी और समतामूलक विश्व के निर्माण में योगदान देगा।

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राष्ट्रपति मुर्मू ने श्री नारायण गुरु की शिक्षाओं को समानता और एकता का शाश्वत संदेश बताया https://demo.theshikshanews.com/raashtrapati-murmoo-ne-shree-naaraayan-guru-kee-shikshaon-ko-samaanata-aur-ekata-ka-shaashvat-sandesh-bataaya/ https://demo.theshikshanews.com/raashtrapati-murmoo-ne-shree-naaraayan-guru-kee-shikshaon-ko-samaanata-aur-ekata-ka-shaashvat-sandesh-bataaya/#respond Thu, 23 Oct 2025 14:36:16 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5434 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Thiruvananthapuram। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि श्री नारायण गुरु भारत के महानतम आध्यात्मिक नेताओं और समाज सुधारकों में से एक थे, जिनकी समानता, एकता और सार्वभौमिक प्रेम की शिक्षाएं आज भी अत्यधिक प्रासंगिक हैं।
केरल के वर्कला में शिवगिरि मठ में गुरु की महा समाधि के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु ने लोगों को अज्ञानता और अंधविश्वास से मुक्त करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और पीढ़ियों को हर इंसान में दिव्यता देखने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रपति ने श्री नारायण गुरु को भारत के महानतम आध्यात्मिक नेताओं और समाज सुधारकों में से एक बताया, जिन्होंने देश के सामाजिक और आध्यात्मिक परिदृश्य को बदल दिया। ⁠मुर्मू ने कहा, “उन्होंने पीढ़ियों को समानता, एकता और मानवता के प्रति प्रेम के आदर्शों में विश्वास करने के लिए प्रेरित किया। गुरु ने लोगों को अज्ञानता और अंधविश्वास के अंधेरे से मुक्त करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने सभी अस्तित्वों की एकता में विश्वास किया और हर जीवित प्राणी में ईश्वर को दिव्य उपस्थिति के रूप में देखा।”
उन्होंने कहा कि गुरु के ‘मानव जाति के लिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर’ के संदेश ने आस्था, जाति और पंथ की सभी बाधाओं को पार कर लिया।
राष्ट्रपति ने कहा, “उनका मानना था कि वास्तविक मुक्ति अंधविश्वास से नहीं, बल्कि ज्ञान और करुणा से आती है। उन्होंने आत्म-शुद्धि, सादगी और सार्वभौमिक प्रेम पर भी जोर दिया।” गुरु के शिक्षा और सामाजिक उत्थान में योगदान पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने मंदिरों, स्कूलों और संस्थानों की स्थापना की, जो सीखने और नैतिक विकास के केंद्र के रूप में कार्य करते है।
मुर्मू ने कहा, “इन संस्थानों के माध्यम से, उन्होंने उत्पीड़ित समुदायों के बीच साक्षरता, आत्मनिर्भरता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया। उनके कार्य मानव जीवन और आध्यात्मिकता की उनकी गहन समझ को दर्शाते हैं।” उन्होंने कहा कि गुरु ने मानवता के साथ शाश्वत आदर्शों को साझा किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अपनी शिक्षाओं के माध्यम से बताया कि दुनिया एक आदर्श निवास स्थान है जहां सभी लोग जाति या धर्म के भेद के बिना भाईचारे से रहते हैं। मुर्मू ने कहा कि गुरु का संदेश आधुनिक दुनिया में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा, “एकता, समानता और आपसी सम्मान के लिए उनका आह्वान मानवता के सामने आने वाले संघर्षों का एक कालातीत समाधान प्रदान करता है। उनकी शिक्षाएं हमें याद दिलाती हैं कि सभी मनुष्य एक ही दिव्य सार को साझा करते हैं।” राष्ट्रपति ने लोगों से उनके आदर्शों पर जीने का प्रयास करने, हर व्यक्ति के साथ गरिमा के साथ व्यवहार करने, निःस्वार्थ भाव से सेवा करने और हर व्यक्ति में दिव्यता देखने की आकांक्षा रखने का आग्रह किया।
राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने कहा, “गुरु केवल एक आध्यात्मिक प्रतीक नहीं हैं; वह अपनी आशीषों और शिक्षाओं के माध्यम से आज भी जीवित हैं। मानवता और समानता का उनका संदेश हर दिन अधिक प्रासंगिक होता जा रहा है।”
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के इस दर्शन में गुरु के विश्वास को भी याद किया कि ‘मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है।’ मुर्मू ने महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक नेता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और दो साल तक चलने वाले शताब्दी समारोहों का उद्घाटन हो गया। श्री नारायण धर्म संगम ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी सच्चिदानंद ने राष्ट्रपति को एक शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट किया। स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि दो साल तक चलने वाले शताब्दी समारोहों में आध्यात्मिक प्रवचन, सामाजिक सेवा पहल और शैक्षिक कार्यक्रम शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य गुरु के एकता और सार्वभौमिक भाईचारे के संदेश को फैलाना है।
इस कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर, सांसद अडूर प्रकाश, राज्य के मंत्री वी एन वासन, वी शिवनकुट्टी और विधायक वी जॉय सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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मुर्मु , मोदी और शाह ने डा. कलाम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की https://demo.theshikshanews.com/murmu-modee-aur-shaah-ne-da-kalaam-ko-unakee-jayantee-par-shraddhaanjali-arpit-kee/ https://demo.theshikshanews.com/murmu-modee-aur-shaah-ne-da-kalaam-ko-unakee-jayantee-par-shraddhaanjali-arpit-kee/#respond Wed, 15 Oct 2025 16:14:34 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5365 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। राष्ट्रपति सचिवालय ने बताया कि श्रीमती मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में डॉ. अब्दुल कलाम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. कलाम को एक दूरदर्शी व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने युवा मन को प्रज्वलित किया और राष्ट्र को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन हमें याद दिलाता है कि सफलता के लिए विनम्रता और कड़ी मेहनत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताइ कि डॉ. कलाम की कल्पना के अनुरूप मजबूत, आत्मनिर्भर और करुणामय भारत का निर्माण जारी रखेंगे।
श्री मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ” डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने युवा मन को प्रज्वलित किया और हमारे देश को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि सफलता के लिए विनम्रता और कड़ी मेहनत बेहद ज़रूरी है। हम उनके द्वारा देखे गए भारत का निर्माण जारी रखें… एक ऐसा भारत जो मज़बूत, आत्मनिर्भर और करुणामय हो।”
श्री शाह ने डा. कलाम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा ,”डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी को उनकी जयंती पर नमन। एक वैज्ञानिक प्रतिभा, कलाम जी ने अपनी अटूट देशभक्ति और भारत प्रथम के सिद्धांत के साथ विज्ञान, रक्षा और तकनीकी नवाचारों में हमारे देश की प्रगति को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुँचाया।”
परमाणु वैज्ञानिक के रूप में मिसाइल मैन के नाम से विख्यात हुए डा. कलाम 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक देश के राष्ट्रपति रहे। इससे पहले वह सरकार के वैज्ञानितक सलाहकार भी रहे।

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मुर्मु ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी https://demo.theshikshanews.com/murmu-ne-vijayaadashamee-kee-poorv-sandhya-par-deshavaasiyon-ko-shubhakaamanaen-dee/ https://demo.theshikshanews.com/murmu-ne-vijayaadashamee-kee-poorv-sandhya-par-deshavaasiyon-ko-shubhakaamanaen-dee/#respond Wed, 01 Oct 2025 14:55:54 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5210 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा है, ” विजयादशमी के पावन अवसर पर, मैं सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देती हूँ।
अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व हमें सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। देश के विभिन्न भागों में रावण दहन और दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व हमारे राष्ट्रीय मूल्यों को दर्शाता है। यह पर्व हमें क्रोध और अहंकार जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग करके साहस और दृढ़ संकल्प जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियों को अपनाने की शिक्षा भी देता है।”
उन्होंने कहा, ” मेरी कामना है कि यह पर्व हमें एक ऐसे समाज और देश के निर्माण के लिए प्रेरित करे जहाँ सभी लोग न्याय, समानता और सद्भाव के विचारों से प्रेरित होकर एक साथ आगे बढ़ें।”

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राष्ट्रपति मुर्मू ने किये बांके बिहारी के दर्शन https://demo.theshikshanews.com/raashtrapati-murmoo-ne-kiye-baanke-bihaaree-ke-darshan/ https://demo.theshikshanews.com/raashtrapati-murmoo-ne-kiye-baanke-bihaaree-ke-darshan/#respond Thu, 25 Sep 2025 14:47:03 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5155
The President of India, Smt Droupadi Murmu visits Nidhivan at Vrindavan, in Uttar Pradesh on September 25, 2025.

NCR TODAY. Khabariya. Mathura। महाराजा एक्सप्रेस से गुरुवार सुबह मथुरा के वृंदावन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद वह निधिवन पहुंचीं। यहां वृक्षों की पूजा की। इस बीच उनके दौरे को लेकर स्थानीय पुलिस पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद और सतर्क है।
राष्ट्रपति मुर्मू गुरुवार सुबह 8 बजे दिल्ली से रवाना हुईं थीं। करीब डेढ़ घंटे बाद यानी 10 बजे वृंदावन रोड रेलवे स्टेशन पहुंचीं। ट्रेन के 18 में से 12 कोच राष्ट्रपति और उनके स्टाफ के लिए रिजर्व रखे गए थे। इनमें प्रेसिडेंशियल सुइट, डीलक्स सुइट, रेस्टोरेंट, लाउंज और पावर कार शामिल हैं। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने शहरभर में प्रतिबंधित मार्गों पर दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक दुकानों को बंद रखने की अपील की है। 12वीं तक के स्कूल-कॉलेज भी बंद रखा गया है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मू 7 घंटे मथुरा-वृंदावन में रुकेंगी। इस दौरान वह कई धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए जाएंगी। द्रौपदी मुर्मू श्रीकृष्ण जन्मस्थान जाने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति हैं। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान के दर्शन किए थे।

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मुर्मु, राजनाथ, शाह, नड्डा, योगी, नीतीश सहित विभन्न नेताओं ने दी मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं https://demo.theshikshanews.com/murmu-rajnath-shah-nadda-yogi-neetish-sahit-vibhann-netao-ne-di-modi-ko-janmdin-ki-shubhakamnaen/ https://demo.theshikshanews.com/murmu-rajnath-shah-nadda-yogi-neetish-sahit-vibhann-netao-ne-di-modi-ko-janmdin-ki-shubhakamnaen/#respond Wed, 17 Sep 2025 16:15:09 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5081 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित विभिन्न नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म की 75वीं वर्षगाठ पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
श्रीमती मुर्मु ने बुधवार अपने संदेश में कहा, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। परिश्रम की पराकाष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने असाधारण नेतृत्व से आपने देश में बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने की संस्कृति का संचार किया है। आज विश्व समुदाय भी आपके मार्गदर्शन में अपना विश्वास प्रकट कर रहा है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि आप सदा स्वस्थ और सानंद रहें तथा अपने अद्वितीय नेतृत्व से राष्ट्र को प्रगति के नए शिखरों पर पहुंचाएं।”
श्री सिंह ने कहा, “भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। अपने दूरदर्शी नेतृत्व, राष्ट्र के प्रति समर्पण और अथक परिश्रम से मोदीजी ने भारत को नई ऊर्जा, नई दिशा दी है। उन्होंने भारत का सामर्थ्य और सम्मान, पूरे विश्व पटल पर बढ़ाया है।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपनी अद्भुत नेतृत्व क्षमता, कल्पनाशीलता के साथ-साथ अपनी संवेदनशीलता का भी परिचय दिया है। गरीब कल्याण और लोक कल्याण के प्रति जो उनकी प्रतिबद्धता है, वह अपने आप में एक मिसाल है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के साथ मोदी जी देश को आत्मनिर्भरता, विकास और समृद्धि की दृष्टि से मज़बूती दे रहे हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर ऊर्जा प्राप्त हो ताकि वह भारत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में लगातार सफल सिद्ध हों।
श्री शाह ने कहा, ” समस्याओं को दूरदृष्टि से देखना और उनका पूरी निष्ठा से समाधान करना मोदी जी के व्यक्तित्व की खासियत है। पूरा विश्व उन्हें प्रॉब्लम-सॉल्विंग लीडर मानता है। युद्धों, तनावों और ग्लोबल लॉबी के दौर में मोदी जी पूरी दुनिया के सामने संवाद-सेतु बनकर उभरे हैं। इसी कारण दुनिया के 27 देशों ने विश्व-मित्र मोदी जी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। यह उनकी वैश्विक लीडरशिप का द्योतक है।”
श्री नड्डा ने कहा, “विश्व के सबसे लोकप्रिय राजनेता, नये भारत के शिल्पकार, यशस्वी प्रधानसेवक श्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिवस की आत्मीय बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के ध्येय के साथ श्री मोदी ने सभी वर्ग के उत्थान और ‘आत्मनिर्भर व विकसित भारत’ निर्माण के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में कई युगांतरकारी कदम उठाये हैं। आपके दूरदर्शी नेतृत्व में हमारे राष्ट्र की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक प्रतिष्ठा मिली है। आपका कुशल मार्गदर्शन हम सभी कोटिश: भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणापुंज है। ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य और सुदीर्घ जीवन प्रदान करें। स्वस्तिकामनाएँ!” योगी आदित्यानाथ ने कहा, “140 करोड़ भारतीयों की आशाओं-आकांक्षाओं के संवाहक, वैश्विक मंच पर ‘नए भारत’ को अग्रिम पंक्ति में प्रतिष्ठित करने वाले, विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता, हम सभी के मार्गदर्शक, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करने वाले यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई!” उन्होंने कहा, “राष्ट्र सर्वोपरि और लोक-कल्याण की भावना को जीवन-साधना में उतारने वाले आपके अप्रतिम पुरुषार्थ, संवेदनशील नेतृत्व और अखण्ड कर्मनिष्ठा ने ‘नए भारत’ को आशा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। 25 करोड़ प्रदेश वासियों की ओर से प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन प्रदान करें, जिससे राष्ट्र को आपका सशक्त नेतृत्व और हम सभी को आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहे।”
वहीं, नीतीश ने श्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। उनके स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना है।”
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 में गुजरात के वड़नगर में हुआ था और भाजपा उनके जन्मदिन को सेवा पखवाड़ा के तौर पर मना रही है और आज से लेकर 02 अक्टूर तक देश के अलग-अलग हिस्सों में कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।

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देश के शिक्षकों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए: मुर्मु https://demo.theshikshanews.com/teachers-of-the-country-should-be-recognized-as-the-best-teachers-in-the-world-murmu/ https://demo.theshikshanews.com/teachers-of-the-country-should-be-recognized-as-the-best-teachers-in-the-world-murmu/#respond Fri, 05 Sep 2025 14:47:44 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4993 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को शिक्षक दिवस पर आयोजित समारोह में देश भर के शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किये। श्रीमती मुर्मु ने इस मौके पर कहा कि भोजन, वस्त्र और आवास की तरह शिक्षा भी व्यक्ति के सम्मान और सुरक्षा के लिए आवश्यक है। समझदार शिक्षक बच्चों में सम्मान और सुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। उन्होंने एक शिक्षक के रूप में अपने वक्त को याद किया और उस समय को अपने जीवन का एक बहुत ही सार्थक काल बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को सक्षम बनाती है। शिक्षा की शक्ति से गरीब से गरीब पृष्ठभूमि के बच्चे भी उन्नति के आसमान को छू सकते हैं। बच्चों की उड़ान को बल देने में स्नेही और समर्पित शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों का सबसे बड़ा पुरस्कार यही है कि उनके विद्यार्थी उन्हें जीवन भर याद रखें और परिवार, समाज और देश के लिए सराहनीय योगदान दें।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण एक शिक्षक का प्राथमिक कर्तव्य है। नैतिक आचरण का पालन करने वाले संवेदनशील, जिम्मेदार और समर्पित विद्यार्थी उन विद्यार्थियों से बेहतर होते हैं, जो केवल प्रतिस्पर्धा, किताबी ज्ञान और स्वार्थ में रुचि रखते हैं। एक अच्छे शिक्षक में भावनायें और बुद्धि दोनों होती हैं। भावनाओं और बुद्धि का समन्वय विद्यार्थियों पर भी प्रभाव डालता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्मार्ट ब्लैकबोर्ड, स्मार्ट कक्षायें और अन्य आधुनिक सुविधाओं का अपना महत्व है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है, स्मार्ट शिक्षक। उन्होंने कहा कि स्मार्ट शिक्षक वे शिक्षक होते हैं जो अपने विद्यार्थियों के विकास की आवश्यकताओं को समझते हैं। स्मार्ट शिक्षक स्नेह और संवेदनशीलता के साथ अध्ययन की प्रक्रिया को रोचक और प्रभावी बनाते हैं। ऐसे शिक्षक छात्रों को समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए। बालिकाओं की शिक्षा में निवेश करके, हम अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में एक अमूल्य निवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को सर्वोत्तम संभव शिक्षा प्रदान करना महिला-नेतृत्व विकास को बढ़ावा देने का सबसे प्रभावी तरीका है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार और वंचित वर्ग की बालिकाओं को विशेष शिक्षा सुविधायें प्रदान करने पर ज़ोर देती है, लेकिन शिक्षा से जुड़ी किसी भी पहल की सफलता मुख्यतः शिक्षकों पर निर्भर करती है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे बालिकाओं की शिक्षा में जितना अधिक योगदान देंगे, शिक्षक के रूप में उनका जीवन उतना ही सार्थक होगा। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बालिकाओं सहित उन सभी विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दें, जो अपेक्षाकृत शर्मीले हैं, या कम सुविधा प्राप्त पृष्ठभूमि से आते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। उन्होंने कहा, “इसके लिए हमारे शिक्षकों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। हमारे संस्थानों और शिक्षकों को शिक्षा के तीनों क्षेत्रों – स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल शिक्षा – में सक्रिय रूप से योगदान देना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारे शिक्षक अपने महत्वपूर्ण योगदान से भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में स्थापित करेंगे।”
इस मौके पर शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी और कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

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ऑपरेशन सिन्दूर में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के योगदान की सराहना की राष्ट्रपति मुर्मु ने https://demo.theshikshanews.com/opareshan-sindoor-mein-kendreey-saarvajanik-upakramon-ke-yogadaan-kee-saraahana-kee-raashtrapati-murmu-ne/ https://demo.theshikshanews.com/opareshan-sindoor-mein-kendreey-saarvajanik-upakramon-ke-yogadaan-kee-saraahana-kee-raashtrapati-murmu-ne/#respond Fri, 29 Aug 2025 13:46:14 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4900 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ऑपरेशन सिन्दूर को आतंकवाद के विरुद्ध मानवता की विजय का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए इस अभियान में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के योगदान की सराहना की है।श्रीमती मुर्मु ने शुक्रवार को राजधानी में केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के फोरम ‘स्कोप’ द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक उपक्रम ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने और ‘मेक इन इंडिया’ के राष्ट्रीय अभियान में केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रम महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
राष्ट्रपति ने रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों का विशेष रूप से योगदान करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने और भारत पर हमले के प्रयासों को पूरी तरह नाकाम कर दिया गया। इस अभियान के दौरान पूरी तरह भारत में विनिर्मित आकाश-तीन नामक वायुरक्षा नियंत्रण एवं रिपोर्टिंग प्रणाली की अचूक क्षमता के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “ इस सिस्टम के निर्माण में सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका रही है। यह सभी सार्वजनिक उपक्रमों के लिए विशेष गर्व की बात है।”
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में आत्मनिर्भर नवाचार तथा तकनीक के क्षेत्र में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता में सार्वजनिक उपक्रमों ने अपना योगदान सिद्ध किया है। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के सिद्धांत को सार्वजनिक उपक्रमों का मूल मंत्र बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करने में केंन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से, सार्वजनिक क्षेत्र आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशन का एक सशक्त माध्यम रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों ने औद्योगीकरण, अवसंरचना विकास, सामाजिक उत्थान और संतुलित क्षेत्रीय विकास की नींव रखी है।
समय के साथ, इन उद्यमों का विकास और परिवर्तन हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से सरकार और समाज की अपेक्षायें भी बदली हैं। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इन सभी परिवर्तनों के बीच, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम अपने प्रदर्शन के माध्यम से आर्थिक और राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों ने कृषि, खनन और अन्वेषण, विनिर्माण, प्रसंस्करण और उत्पादन तथा सेवाओं के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि उनके निर्णय राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित होंगे, कार्य नैतिकता पर आधारित होंगे और सोच संवेदनशीलता और समाज सेवा से प्रेरित होगी।
श्रीमती मुर्मु ने आज यहां वर्ष 2022-23 के लिए स्कोप एमिनेंस पुरस्कार प्रदान किये। उन्होंने सतत विकास, कॉर्पोरेट प्रशासन, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और नवाचार जैसे विविध आयामों में अच्छे प्रदर्शन को सम्मानित करने के लिए स्कोप की सराहना की। पुरस्कृत इकाइयों का चयन उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता में गठित निर्णायक मंडल ने किया। राष्ष्ट्रपति ने चयन समिति के काम की सराहना की।

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प्रतिभाशाली युवाओं को भारत के भविष्य को आकार देना चाहिए: आईआईटी-आईएसएम के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a4%be/ https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a4%be/#respond Sat, 02 Aug 2025 03:57:52 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4653 NCR TODAY. Khabariya. Ranchi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को देश के प्रतिभाशाली युवाओं से अपनी तकनीकी शिक्षा का उपयोग समाज की भलाई के लिए करने का आह्वान किया और आग्रह किया कि वे अपनी उपलब्धियों को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित ना रखें।
राष्ट्रपति धनबाद स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-भारतीय खनि विद्यापीठ (आईआईटी-आईएसएम) के 45वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। इस मौके पर उन्होंने संस्थान के एक विशेष लिफाफे सहित एक विशेष डाक टिकट जारी किया जो संस्थान के 100 गौरवशाली वर्षों की याद दिलाएगा।
मुर्मू ने कहा, ”प्रतिभाशाली युवा मस्तिष्क को भारत के भविष्य को आकार देना चाहिए और सामाजिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों को सुलझाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। एक न्यायपूर्ण भारत, एक हरित भारत के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करें जहां विकास पर्यावरण और प्रकृति की कीमत पर ना हो।”
वर्ष 2024-25 बैच के कुल 1,880 छात्रों को विभिन्न विषयों में उपाधि (1,055 स्नातक और 711 स्नातकोत्तर) प्रदान की गईं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक तकनीकी महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार और ‘स्टार्टअप’ पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। उन्होंने ‘आदिवासी विकास उत्कृष्टता केंद्र’ जैसी पहलों के माध्यम से आदिवासी युवाओं और वंचित महिलाओं को सशक्त करने के लिए आईआईटी-आईएसएम के प्रयासों की सराहना की।
दीक्षांत समारोह के दौरान मुर्मू ने कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले बी.टेक स्नातक प्रियांशु शर्मा को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक प्रदान किया। मुर्मू आईआईटी-आईएसएम के दीक्षांत समारोह में शामिल होने वालीं दूसरी राष्ट्रपति हैं। इसके पहले तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 10 मई, 2014 को आयोजित इस संस्थान के 36वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।
एक अधिकारी ने कहा, ”दीक्षांत समारोह का विशेष महत्व है क्योंकि यह संस्थान के शताब्दी समारोह का एक अहम हिस्सा है, जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए 100 वर्षों के अटूट समर्पण का प्रतीक है।” वर्ष 1926 में नौ दिसंबर को स्थापित इस संस्थान ने अपनी यात्रा भारतीय खान एवं अनुप्रयुक्त भूविज्ञान विद्यालय के रूप में शुरू की थी।
लंदन स्थित रॉयल स्कूल ऑफ माइंस की तर्ज पर इस संस्थान की स्थापना भारत के तेजी से बढ़ते खनन उद्योग के लिए उच्च कुशल पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के विशिष्ट उद्देश्य से की गई थी। संस्थान की नींव इसके प्रथम प्रधानाचार्य डेविड पेनमैन के दूरदर्शी मार्गदर्शन में रखी गई थी और इसका औपचारिक उद्घाटन भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था।

Talented youth should shape India’s future: President Murmu at IIT-ISM convocation

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