mohan bhaagavat – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Thu, 28 Aug 2025 16:29:46 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg mohan bhaagavat – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 जनसंख्या नियंत्रण पर तीन बच्चों की सीमा जरूरी : मोहन भागवत https://demo.theshikshanews.com/janasankhya-niyantran-par-teen-bachchon-kee-seema-jarooree-mohan-bhaagavat/ https://demo.theshikshanews.com/janasankhya-niyantran-par-teen-bachchon-kee-seema-jarooree-mohan-bhaagavat/#respond Thu, 28 Aug 2025 16:29:46 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4886 नई दिल्ली, 28 अगस्त (वेब वार्ता)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण और संतुलन समाज तथा राष्ट्र के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर परिवार को अधिकतम तीन बच्चों तक सीमित रहना चाहिए ताकि जनसंख्या पर्याप्त और नियंत्रित बनी रहे।
डॉ. भागवत विज्ञान भवन में गुरुवार को तीन दिवसीय व्याख्यान शृंखला ‘100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज’ के तीसरे दिन जिज्ञासा समाधान सत्र में प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि केवल संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसके पीछे का इरादा भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा, “जनसंख्या से ज्यादा इरादा क्या है, यह महत्वपूर्ण है। जनसंख्या में असमानता कभी-कभी गंभीर परिणाम देती है, यहां तक कि विभाजन जैसी परिस्थितियां भी पैदा कर सकती है। हमें इस पर गहराई से विचार करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि भारत में जनसंख्या असंतुलन का एक कारण जबरन या लालच देकर किए गए मतांतरण भी हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “धर्म व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन यदि किसी को बलपूर्वक बदला जाता है तो यह गलत है। इसे रोकना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।”
घुसपैठ के विषय पर सरसंघचालक ने कहा कि हर देश की तरह भारत के भी अपने कानून और सीमित संसाधन हैं। ऐसे में अवैध प्रवास स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है, लेकिन समाज को भी सजग होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अवैध प्रवासियों की पहचान करनी होगी, शिकायत करनी होगी और उन्हें रोजगार नहीं देना चाहिए। यदि रोजगार देना है तो सबसे पहले अपने ही देश के नागरिकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”
डॉ. भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत में सभी नागरिकों को रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि कोई व्यक्ति कानूनी रूप से अनुमति लेकर आता है तो उसे काम मिल सकता है, लेकिन अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने जन्म दर को नियंत्रित रखने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि 2.1 का आंकड़ा सभ्यता को बनाए रखने के लिए आदर्श माना जाता है, जो व्यवहारिक रूप से तीन बच्चों के बराबर है। उन्होंने कहा, “बच्चे तीन होने चाहिए और उससे ज्यादा नहीं। यह विचार सभी को स्वीकार करना होगा। संसाधनों का संतुलित उपयोग और समाज में स्थिरता बनाए रखने के लिए जनसंख्या का नियंत्रित रहना आवश्यक है।”
डॉ. भागवत ने भाषा और संस्कृति पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जन्मी सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। उन्होंने कहा कि व्यवहार और संपर्क के लिए एक सामान्य भारतीय भाषा होनी चाहिए, पर वह विदेशी भाषा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अंग्रेजी सीखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन अपनी मातृभाषा और संस्कृति का त्याग नहीं करना चाहिए।”

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