modi – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Tue, 20 Jan 2026 15:59:53 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg modi – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 भाजपा में नेतृत्व बदलता है, संगठन की दिशा नहीं : मोदी https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-mein-netrtv-badalata-hai-sangathan-kee-disha-nahin-modee/ https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-mein-netrtv-badalata-hai-sangathan-kee-disha-nahin-modee/#respond Tue, 20 Jan 2026 15:59:53 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6139 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संगठन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक परिवार बताया है और कहा है कि पार्टी में नेतृत्व तो बदलता है, लेकिन इसकी दिशा नहीं बदलती।
श्री मोदी ने भाजपा के नये अध्यक्ष के चुनाव के उपलक्ष्य में पार्टी मुख्यालय पर मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। प्रधानमंत्री ने भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नबीन को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल का अध्यक्ष चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई और ‘शुभकामनाएं’ दीं और यह भी कहा कि खुद उनके लिए भाजपा का कार्यकर्ता होना बड़े गर्व की बात है। श्री मोदी ने कहा, “हमारी पार्टी में अध्यक्ष बदलते हैं, लेकिन आदर्श नहीं बदलते। नेतृत्व बदलता है, लेकिन दिशा नहीं बदलती।”
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा एक संस्कार है, भाजपा एक परिवार है। हमारे यहां ‘मेंबरशिप’ से भी ज्यादा ‘रिलेशनशिप’ होती है। भाजपा एक ऐसी परंपरा है, जो पद से नहीं, प्रक्रिया से चलती है। हमारे यहां पदभार एक व्यवस्था है और कार्यभार जीवन भर की जिम्मेदारी है।” श्री मोदी ने कहा, ‘‘हमारा नेतृत्व परंपरा से चलता है, अनुभव से समृद्ध होता है और जनसेवा एवं राष्ट्रसेवा के भाव से संगठन को आगे बढ़ाता है। भाजपा की शून्य से लेकर शिखर तक की यात्रा में यह सदैव प्रतिबिंबित होता रहा है।”
श्री मोदी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं का चरित्र और संस्कार ऐसा है कि उनके लिए ‘खुद से बड़ा दल और दल से बड़ा देश’ होता है। उन्होंने इसे भाजपा के हर कार्यकर्ता का संस्कार और जीवनमंत्र बताया और कहा, ‘‘इसी भाव के साथ बीते 11 वर्षों में हमने अनेक चुनौतियों पर विजय पाई है।” उन्होंने गत 11 वर्षों की भाजपा की यात्रा को जन-विश्वास अर्जित करने की अद्भुत यात्रा बताया और कहा कि पार्टी पर जनता-जनार्दन का भरोसा किस प्रकार सुदृढ़ हुआ है, यह हाल के विधानसभा चुनावों से लेकर स्थानीय निकाय चुनावों में भी देखने को मिला है।
इस दौरान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाये जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन बातों को कभी असंभव माना जाता था, आज ये हकीकत बन चुके हैं। श्री मोदी ने कहा, ‘‘दशकों तक हमारे आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक से जोड़कर देखा गया। लेकिन भाजपा की संवेदनशीलता, संस्कार और समानता की भावना ने आदिवासियों में भी सबसे पिछड़ी जनजातियों की पीड़ा तक को समझा और उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनायीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा के संगठनात्मक चुनाव एक व्यापक प्रक्रिया शत-प्रतिशत लोकतांत्रिक तरीके और भाजपा के संविधान की भावना के साथ आज विधिपूर्वक सम्पन्न हुए हैं। ‘संगठन पर्व’ का आज का यह विशाल आयोजन पार्टी की लोकतांत्रिक आस्था, संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ता केंद्रित सोच का प्रतीक है।
श्री मोदी ने कहा, लोगों को लगता होगा कि नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, 50 साल की छोटी आयु में मुख्यमंत्री बन गये। 25 साल से ये लगातार सरकार के प्रमुख रहे हैं। ये सब अपनी जगह है, लेकिन इन सबसे भी बड़ी चीज मेरे जीवन में है, मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूं। ये सबसे बड़ा गर्व है। जब बात पार्टी के विषयों पर आती है, तब मैं एक कार्यकर्ता हूं और माननीय नितिन नबीन जी मेरे बॉस हैं।”
श्री मोदी ने मंगलवार को कहा कि देश के लिए एक महत्वपूर्ण काल खंड के प्रारंभ में भाजपा का नेतृत्व नितिन नबीन जैसा युवा नेता संभाल रहा है, जिसमें भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री नबीन एक तरह से ‘मिलेनियल जेनरेशन’ के हैं और उन्होंने अपने आंखों के सामने भारत में बहुत बड़े बदलाव होते देखा है। उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्ष भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कालखंड है। इसमें विकसित भारत का निर्माण होना तय है।
पार्टी के निवर्तमान अध्यक्ष जे पी नड्डा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि श्री नबीन मूलत: कार्यकर्ता हैं, वैचारिक पृष्ठभूमि पर परिपक्व हैं और बहुत ही छोटी उम्र में पांच बार विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में भी विधायक हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे नौजवान, ऊर्जावान, प्रतिभावान व्यक्तित्व ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला है।” कार्यक्रम के मंच पर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सर्वश्री राजनाथ सिंह, अमित शाह और नितिन गडकरी तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी डॉ के लक्षमण उपस्थित थे।

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भारतीय लोकतंत्र एक विशाल वृक्ष, विविधता इसकी सबसे बड़ी ताकत : मोदी https://demo.theshikshanews.com/bhaarateey-lokatantr-ek-vishaal-vrksh-vividhata-isakee-sabase-badee-taakat-modee/ https://demo.theshikshanews.com/bhaarateey-lokatantr-ek-vishaal-vrksh-vividhata-isakee-sabase-badee-taakat-modee/#respond Thu, 15 Jan 2026 13:11:48 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6122 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विविधता को भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा है कि भारत ने यह साबित किया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं लोकतंत्र को स्थिरता, गति और व्यापक स्तर प्रदान करती हैं और इसी का परिणाम है कि देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं तथा भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढती अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि भारत इस विविधता का उत्सव मनाता है क्योंकि लोकतंत्र की नींव मजबूत है। भारतीय लोकतंत्र एक विशाल वृक्ष की तरह है, जिसे गहरी जड़ें सहारा देती हैं।
श्री मोदी ने गुरुवार को यहां राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्षों तथा पीठासीन अधिकारियों के 28 वें सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सम्मेलन के मुख्य विषय ‘संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी परिणति’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब भारत आजाद हुआ तो उस दौर में यह आशंका व्यक्त की गई थी कि इतनी विविधता में, भारत में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा लेकिन भारत ने इसी विविधता को लोकतंत्र की ताकत बना दिया।
उन्होंने कहा कि एक बड़ी आशंका यह भी थी कि भारत किसी भी हालत में विकास नहीं कर पाएगा लेकिन भारत ने साबित किया कि लाेकतांत्रिक संस्थान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही लोकतंत्र की स्थिरता , गति और पैमाना तीनों आते हैं। भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढती अर्थव्यवस्था बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न क्षेत्रों में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा,” हम लोक कल्याण की भावना से हर व्यक्ति के लिए बिना किसी भेदभाव के काम कर रहे हैं। और इसी लोक कल्याण की भावना के कारण बीते कुछ वर्षों में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। भारत में लोकतंत्र सार्थक परिणाम देता है। ”
उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र से इसलिए परिणाम मिलता है क्योंकि सरकार के लिए देश की जनता ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, ” हमने जनता की आकांक्षाओं को, जनता-जनार्दन के सपनों को प्राथमिकता बनाया है। उसके रास्ते में कोई बाधा ना आए, इसके लिए प्रक्रिया से लेकर प्रौद्योगिकी तक, हर चीज का लोकतांत्रिकरण किया है और यह लोकतांत्रिक भावना हमारी रगों में, हमारे मन में है, हमारे संस्कार में है। ” इस संदर्भ में उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान चुनौतियों के बीच भारत द्वारा डेढ़ सौ से ज्यादा देशों को दवाइयां और वैक्सीन पहुंचाने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ” लोगों का हित, लोगों की भलाई और उनका कल्याण, ये हमारा संस्कार है, और ये संस्कार हमें हमारे लोकतंत्र ने दिए हैं।”
प्रधानमंत्री ने देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किये जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में महिलाएं केवल भागीदार ही नहीं बल्कि नेतृत्व की भूमिका में हैं। उन्होंने कहा कि यह सशक्तिकरण आप को शीर्ष पद राष्ट्रपति से लेकर गांवों में निम्न स्तर तक दिखाई देगा।
श्री मोदी ने भारतीय लोकतंत्र की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं। विभिन्न भाषाओं में नौ सौ से अधिक टेलीविजन चैनल हैं। हजारों समाचार पत्र और पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं। बहुत कम समाज इतने बड़े स्तर पर विविधता का प्रबंधन कर पाते हैं।
भारत इस विविधता का उत्सव मनाता है क्योंकि हमारे लोकतंत्र की नींव मजबूत है। हमारा लोकतंत्र एक विशाल वृक्ष की तरह है, जिसे गहरी जड़ें सहारा देती हैं।
उन्होंने कहा कि यहां वाद-विवाद, संवाद और सामूहिक निर्णय-निर्माण की एक लंबी परंपरा रही है। भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। हमारे पवित्र ग्रंथ वेद पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। उनमें ऐसी सभाओं का उल्लेख है, जहां लोग मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एकत्र होते थे। विचार-विमर्श और सहमति के बाद निर्णय लिए जाते थे। उन्होंने कहा, ” हम भगवान बुद्ध की भूमि हैं। बौद्ध संघ में खुले और सुव्यवस्थित विचार-विमर्श होते थे। निर्णय सहमति या मतदान के माध्यम से लिए जाते थे।”

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तलवारों की जगह दूसरे तरीकों से भारत के खिलाफ हो रहे षड्यंत्र : मोदी https://demo.theshikshanews.com/talavaaron-kee-jagah-doosare-tareekon-se-bhaarat-ke-khilaaph-ho-rahe-shadyantr-modee/ https://demo.theshikshanews.com/talavaaron-kee-jagah-doosare-tareekon-se-bhaarat-ke-khilaaph-ho-rahe-shadyantr-modee/#respond Sun, 11 Jan 2026 15:57:32 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6107 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Somnath। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां रविवार को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वह ताकतें मौजूद और पूरी तरह सक्रिय हैं, जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निर्माण का विरोध किया। आज तलवारों की जगह दूसरे तरीके से भारत के खिलाफ षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्य स्थल हैं। ये स्थल हमारे सामर्थ्य, प्रतिरोध और परंपरा के पर्याय रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने इनसे पल्ला झाड़ने की कोशिश की। उस इतिहास को भुलाने के कुत्सित प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, आज भी हमारे देश में वो ताकते मौजूद हैं, जो पूरी तरह सक्रिय हैं, जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निर्माण का विरोध किया। आज तलवारों की जगह दूसरे कुत्सित तरीकों से देश के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे या फिर रचे जा रहे हैं। इसलिए हमें ज्यादा सावधान रहना है, हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है। हमें एक रहना है, एकजुट रहना है, ऐसी हर ताकत को हराना है जो हमें बांटने की साजिशें रच रही हैं।
उन्होंने कहा कि जब हम अपनी आस्था से जुड़े रहते हैं, अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, पूरे स्वाभिमान के साथ अपनी विरासत का संरक्षण करते हैं, अपनी विरासत के प्रति सजग रहते हैं, तो हमारी सभ्यता की जड़ें भी मजबूत होती हैं। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर, मैंने भारत के लिए हजार साल का विराट स्वप्न सामने रखा था। मैंने ‘देव से देश’ के विजन के साथ आगे बढ़ने की बात कही थी। आज देश का सांस्कृतिक पुनर्जागरण करोड़ों देशवासियों में नया विश्वास भर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हर देशवासी के मन में विकसित भारत को लेकर एक भरोसा है। आज 140 करोड़ भारतीय भविष्य के लक्ष्यों को लेकर संकल्पित हैं। भारत अपने गौरव को नई बुलंदी देगा, हम गरीबी के खिलाफ अपनी लड़ाई में जीतेंगे, हम विकास की नई ऊंचाइयों को छुएंगे। पहले दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य, फिर उसके आगे का सफर, देश अब इसके लिए तैयार हो चुका है। और सोमनाथ मंदिर की ये ऊर्जा, हमारे इन संकल्पों को आशीर्वाद दे रही है।
उन्होंने कहा कि आज का भारत विरासत से विकास की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ में विकास भी विरासत भी ये भावना निरंतर साकार हो रही है। आज एक ओर, सोमनाथ मंदिर का सांस्कृतिक विस्तार, सोमनाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी की स्थापना, माधवपुर मेले की लोकप्रियता और उसके रंग, इनसे हमारी विरासत मजबूत हो रही है, गिर लायन के संरक्षण से इस क्षेत्र का प्राकृतिक आकर्षण बढ़ रहा है, तो वहीं, प्रभास पाटन क्षेत्र विकास के नए आयाम भी गढ़े जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केशोद एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। इससे देश-विदेश से श्रद्धालु सीधे सोमनाथ तक पहुंच सकेंगे। अहमदाबाद से वेरावल वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का समय कम हुआ है। इस क्षेत्र में यात्राधाम सर्किट का विकास भी किया जा रहा है। यानी, आज का भारत आस्था को स्मरण करने के साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और टेक्नॉलॉजी के जरिए उसे भविष्य के लिए सशक्त भी कर रहा है।
श्री मोदी ने कहा कि हमारी सभ्यता का संदेश कभी किसी को पराजित करने का नहीं रहा, बल्कि जीवन को संतुलन में रखने का रहा है। हमारे यहां आस्था की राह हमें घृणा की तरफ नहीं ले जाती। हमारे यहाँ शक्ति हमें विनाश करने का अहंकार नहीं देती। सोमनाथ जैसे तीर्थ ने हमें सिखाया है कि, सृजन का मार्ग लंबा होता है, लेकिन वही स्थायी होता है, चिरंजीव होता है।
उन्होंने कहा कि तलवार की नोक पर कभी दिलों को नहीं जीता जा सकता, जो सभ्यताएं दूसरों को मिटाकर आगे बढ़ना चाहती हैं, वे स्वयं समय में खो जाती हैं। इसीलिए, भारत ने दुनिया को ये नहीं सिखाया कि दूसरे को हराकर कैसे जीता जाए, बल्कि ये सिखाया कि कैसे दिलों को जीतकर जिया जाए। ये विचार आज दुनिया की जरूरत हैं। सोमनाथ की हजार वर्षों की गाथा पूरी मानवता को ये सीख दे रही है। इसलिए आइए, हम संकल्प करें, हम विकास की ओर आगे बढ़ें, कदम से कदम मिलाकर चलें, कंधे से कंधा मिलाकर चलें, मन से मन को जोड़कर चलें, लक्ष्य को ओझल दिए हुए बिना हम चलते चलें, और साथ ही अपने अतीत और अपनी विरासत से भी जुड़े रहें।
श्री मोदी ने कहा कि हम आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी चेतना को संभाले रखें। आइए, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व जैसे आयोजनों से प्रेरणा लेते हुए, विकसित होने के मार्ग पर तेजी से चलें। हर चुनौती को पार करते हुए, हम अपने लक्ष्य तक पहुंचें और ये कार्यक्रम आज तो शुरू हो रहा है, हमें हजार साल का स्मरण देश के कोन-कोने में करना है, दुनिया को हमारी विरासत का परिचय करवाना है, हमें 75 साल का ये नया पर्व भी मनाना है। हम 2027 मई तक इसको मनाते रहें, जन-जन को जगाते रहें , जगा हुआ देश सपनों को साकार करने के लिए चलता रहे, इसी कामना के साथ, एक बार फिर समस्त देशवासियों को मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

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उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच मोदी से मिले योगी,भेंट की राम मंदिर की प्रतिकृति https://demo.theshikshanews.com/uttar-pradesh-mein-mantrimandal-vistaar-kee-charchaon-ke-beech-modee-se-mile-yogeebhent-kee-raam-mandir-kee-pratikrti/ https://demo.theshikshanews.com/uttar-pradesh-mein-mantrimandal-vistaar-kee-charchaon-ke-beech-modee-se-mile-yogeebhent-kee-raam-mandir-kee-pratikrti/#respond Mon, 05 Jan 2026 11:49:36 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6064 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति भेंट की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मुलाकात की जानकारी दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें साझा की हैं। एक तस्वीर में श्री योगी प्रधानमंत्री को अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति भेंट कर रहे हैं।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक साल का समय शेष रह गया है और राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने भी इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए इसे शिष्टाचार भेंट बताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘आज नई दिल्ली में आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिष्टाचार भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। आपका पाथेय ‘नये उत्तर प्रदेश’ की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करने हेतु सदैव नवीन ऊर्जा का संचार करता है। अपना बहुमूल्य समय प्रदान करने हेतु हार्दिक आभार प्रधानमंत्री जी।’
प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक अन्य पोस्ट में बताया कि लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने भी श्री मोदी से मुलाकात की। श्री गुप्ता ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ ‘शिष्टाचार भेंट’ में लद्दाख में जन कल्याण, मुख्य विकास प्राथमिकताओं, अवसंरचना, कनेक्टिविटी, पर्यटन और समावेशी विकास पर चर्चा की।

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भारत सरकार प्रवासियों के कल्याण को प्रतिबद्धः :प्रधानमंत्री https://demo.theshikshanews.com/bhaarat-sarakaar-pravaasiyon-ke-kalyaan-ko-pratibaddhah-pradhaanamantree/ https://demo.theshikshanews.com/bhaarat-sarakaar-pravaasiyon-ke-kalyaan-ko-pratibaddhah-pradhaanamantree/#respond Thu, 18 Dec 2025 14:05:37 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6034 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विविधता को भारतीय संस्कृति की नींव बताते हुए गुरुवार को कहा कि यह एक ऐसा मूल्य जो उन्हें किसी भी समाज में घुलमिल जाने में मदद करता है। ओमान में भारतीय समुदाय के प्रति सम्मान का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सह-अस्तित्व और सहयोग भारतीय प्रवासी समुदाय की पहचान रहे हैं। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों के कल्याण के प्रति भारत की गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि जब भी और जहां भी हमारे लोगों को मदद की जरूरत होती है, सरकार उनका हाथ थामने के लिए तत्पर रहती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और ओमान के बीच मांडवी से लेकर मस्कट तक सदियों पुराने संबंध हैं और प्रवासी समुदाय कड़ी मेहनत और एकजुटता के माध्यम से इसे पोषित कर रहा है। प्रधानमंत्री ने समुदाय के कल्याण के लिए सुल्तान हैथम बिन तारिक के समर्थन के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री ने आज मस्कट (ओमान) में भारतीय समुदाय की विशाल सभा को संबोधित किया। श्रोताओं में विभिन्न भारतीय स्कूलों के 700 से अधिक छात्र शामिल थे। ओमान में भारतीय स्कूलों के लिए यह वर्ष विशेष महत्व रखता है। यह देश में उनकी स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत केवल बाजार नहीं बल्कि वस्तुओं और सेवाओं से लेकर डिजिटल समाधानों तक, दुनिया के लिए एक आदर्श है। उन्होंने पुष्टि की कि भारत-ओमान साझेदारी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहयोग, डिजिटल शिक्षा, नवाचार साझेदारी और उद्यमिता आदान-प्रदान के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार हो रही है। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, गहन ज्ञान प्राप्त करने और साहसिक नवाचार करने का आह्वान किया ताकि वे मानवता के लिए सार्थक योगदान दे सकें।
प्रधानमंत्री ने भारत की परिवर्तनकारी वृद्धि, परिवर्तन की गति और व्यापकता तथा पिछली तिमाही में 8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि से परिलक्षित अर्थव्यवस्था की मजबूती के बारे में बात की। उन्होंने पिछले 11 वर्षों में सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अवसंरचना विकास, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, हरित विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में परिवर्तनकारी बदलाव हुए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व स्तरीय नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करके 21वीं सदी के लिए खुद को तैयार कर रहा है। भारत की यूपीआई (जो वैश्विक स्तर पर किए गए सभी डिजिटल भुगतानों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है) गर्व और उपलब्धि का विषय है।
उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की हालिया उत्कृष्ट उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिनमें चंद्रमा पर उतरना और गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन की योजना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिक्ष भारत और ओमान के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और छात्रों को इसरो के युवा कार्यक्रम ‘युविका’ में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

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आजादी का प्रेरणास्रोत रहा वंदे मातरम् आजाद भारत का भी है विजन : मोदी https://demo.theshikshanews.com/aajaadee-ka-preranaasrot-raha-vande-maataram-aajaad-bhaarat-ka-bhee-hai-vijan-modee/ https://demo.theshikshanews.com/aajaadee-ka-preranaasrot-raha-vande-maataram-aajaad-bhaarat-ka-bhee-hai-vijan-modee/#respond Wed, 10 Dec 2025 03:36:26 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5980 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आजादी के दीवानों का मंत्र बने ‘वंदे मातरम्’ गीत की गूंज ने न सिर्फ अंग्रेजों की नींद उड़ा दी थी और पूरे भारत में उत्साह का ऐसा माहौल तैयार किया था जो न सिर्फ स्वतंत्रता का मंत्र बना बल्कि आजाद भारत के लिए भी विजन बनकर सामने आया।
श्री मोदी ने सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् गीत के 150वें वर्ष पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि यह गीत आजादी का उद्गार बन गया था और हर देशवासी इस गीत से प्रेरित होकर अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ रहा था। इस गीत से देश में बने नये माहौल को देखकर अंग्रेज बौखला गये थे इसलिए उन्होंने इस गीत पर प्रतिबंध लगा दिया और इसे गाने को अपराध मानकर लोगों पर जुल्म ढहाने शुरु कर दिए थे।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का एक ऐसा कालखंड रहा है जिसमें इतिहास के कई प्रेरक उदाहरण देश के सामने मौजूद है। वंदे मातरम् के जब सौ साल पूरे हो गये थे तो उस समय इसकी शताब्दी का उत्तम पर्व मनाया जाना था लेकिन तब देश को आपातकाल में धकेल दिया गया था और देश के नागरिकों का गला घोंटा जा रहा था। देश की आजादी के आंदोलन को ऊजा देने वाले वंदे मातरम् के सौ साल पूरे होने के समय देश को आपाताकाल के काले कालखंड में धकेल दिया गया था।
प्रधानमंत्री ने कहा “वंदे मातरम् पर चर्चा में कोई पक्ष और प्रतिपक्ष नहीं है क्योंकि इसी गीत से मिली प्रेरणा के कारण हम सब यहां बैठे हैँ और यह हम सबके लिए पावन पर्व है। वंदे मातरम् की भावना के साथ देश की आजादी की लड़ाई लड़ी गयी और इस गीत के भाव में आजादी के दीवाने देश के लिए प्राण न्यौछावर कर रहे थे।”
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् गीत ऐसे समय लिखा गया था जब अंग्रेज सल्तनत 1857 की क्रांति से बौखलाई थी और देश की महान विभूतियों को मजबूर किया जा रहा था। जब चारों तरफ वंदे मातरम़ की आवाज गूंज रही थी, देश को गुलाम बनाए रखने के लिए बड़ा षडयंत्र चल रहा था तो उस स्थिति को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय चुनौती दे रहे थे। उन्होंने 1882 में ‘आनंदमठ’ उपन्यास की रचना की तो देश में आजादी की अलख जगा रहा वंदे मातरम् गीत इसमें रखा गया। देश के लोगों में जो भाव था, जो संस्कृति थी उसे वंदे मातरम् गीत के जरिए देश को बहुत बड़ी सौगात दी गई। वंदे मातरम् केवल आजादी की लड़ाई का मंत्र नहीं था, मात्र अंग्रेजों को भगाने का मंत्र नहीं था बल्कि यह इस भूमि को बेड़ियों से मुक्ति दिलाने की एक पवित्र जंग भी थी।
प्रधानमंत्री ने कहा “वंदे मातरम् देश की प्राचीन पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक अवतार है। बंकिमदा ने जब वंदे मातरम् की रचना की थी तो यह गीत स्वाभाविक रूप से आजादी की लड़ाई का स्वर बना और पूरे देश के आजादी के योद्धाओं को मुग्ध करने का मंत्र बन गया। वंदे मातरम् हजारों वर्ष की सांस्कृतिक ऊर्जा थी, इसमें आजादी का जज्बा भी था और आजाद भारत की दृष्टि भी थी। इस गीत के हर शब्द देशवासियों को हौसला देने वाले थे। उसमें संदेश दिया गया था कि लड़ाई जमीन हथियाने की नहीं और सिर्फ आजादी पाने की नहीं है बल्कि यह देश की समृद्धि का भी संकल्प है। इस गीत का सिर्फ जन जन से जुड़ाव नहीं रहा है बल्कि यह गीत हमारी आजादी की लंबी गाथा की अभिव्यक्ति भी है।”
श्री मोदी ने कहा, “वंदे मातरम् जनजीवन की धारा प्रवाह यात्रा का नाम है और इस गीत के सामने आने के बाद से अंग्रेज समझ गये थे कि अब भारत में रहना आसान नहीं है इसलिए उन्होंने देश को टुकड़ों में बांटने की चाल चली और ‘बांटो तथा राज करो’ की नीति को चुना। बंगाल के विभाजन को इसकी प्रयोगशाला बनाया गया। बंगाल की बौद्धिक शक्ति तब पूरे देश को ताकत देती थी। बंगाल पूरे देश को प्रभावित करता था। अंग्रेजों का मानना था कि अगर बंगाल को तोड़ दिया तो देश में आसानी से राज किया जा सकता है और 1905 में उन्होंने बंगाल विभाजन का पाप किया तो वंदे मातरम् बंगाल की एकता के लिए चट्टान की तरह खड़ा रहा। गली गली में इस गीत की गूंज सुनाई दे रही थी। वंदे मातरम् देश के लिए चट्टान और अंग्रेजों के लिए संकट बन गया था।”
उन्होंने कहा कि अंग्रेज समझ गये थे कि बंगाल से निकला वंदे मातरम् का भाव पूरे देश में जिस भाव के साथ फैल गया है उससे देश में आजादी के वेग को रोकना आसान नहीं है इसलिए उन्होंने वंदे मातरम् बोलने पर भी सजा का प्रावधान कर दिया। इस गीत को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। इसके बावजूद वंदे मातरम् गीत गाते हुए प्रभात फेरियां बंगाल की गली गली में निकलती थी और बंगाल की गलियों से निकली यह आवाज पूरे देश की आवाज बन गई थी। छोटे छोटे बच्चों को वंदे मातरम् गाने पर उनके साथ जुल्म किया गया। बच्चों ने वंदे मातरम् मंत्र को अपनी ताकत सिद्ध कर दिया था। जांबाज वंदे मातरम् जय घोष के साथ फांसी पर चढ़ गये।

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संसद को चुनावी हार-जीत की निराशा, अहंकार का अखाड़ा न बनने दें : मोदी https://demo.theshikshanews.com/sansad-ko-chunaavee-haar-jeet-kee-niraasha-ahankaar-ka-akhaada-na-banane-den-modee/ https://demo.theshikshanews.com/sansad-ko-chunaavee-haar-jeet-kee-niraasha-ahankaar-ka-akhaada-na-banane-den-modee/#respond Mon, 01 Dec 2025 14:40:44 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5907 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि उन्हें चुनावी हार-जीत के परिणामों से बाहर निकलकर इसकी निराशा या अहंकार का अखाड़ा संसद को नहीं बनाना चाहिए और जनता की आकांक्षाओं तथा लोकतंत्र की मर्यादाओं के अनुरूप संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि संसद का महत्वपूर्ण शीतकालीन सत्र शांतिपूर्ण ढंग से चलेगा और सभी सदस्य देश की प्रगति के लिए तथा चुने हुये प्रतिनिधियों को अपनी अभिव्यक्ति का अवसर देने के लिए सदन को चलाने में अपना सहयोग करेंगे।
श्री मोदी ने सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले संसद भवन परिसर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र तेज गति से आगे बढ़ रहा है और इसे और आगे बढ़ने की ऊर्जा देने का काम शीतकालीन सत्र करेगा, उन्हें ऐसा उन्हें विश्वास है। चुनावी हार जीत लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन संसदीय लोकतंत्र की मजबूती का दायित्व हम सबकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि निजी एजेंडे के लिए संसद की कार्यवाही बाधित नहीं होनी चाहिए। नये सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए और सदन के कार्यवाही बाधित कर उनके अवसर को छीना नहीं जाना चाहिए। इस नए सांसदों को अभिव्यक्ति का अवसर दीजिए अपनी निराशा और अपनी पराजय में सांसदों को बली मत बनने दिजिये।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के प्रति विश्वास मजबूत होता रहता है और ऐसा समय-समय पर कुछ न कुछ देखने को मिलता है। उन्होंने बिहार विधानसभा में हए भारी मतदान का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा के चुनाव में मतदान जिस रिकॉर्ड के साथ हुआ वह लोकतंत्र में नया विश्वास पैदा करता है। बड़ी बात यह है कि चुनाव में माता बहने ज्यादा हिस्सा ले रही हैं।
श्री मोदी ने कहा कि इस सत्र में यह पता चलना है कि संसद और संसद सदस्य देश के लिए क्या सोचते हैं। वे देश के लिए क्या करने वाले हैं और क्या कर रहे हैं। विपक्ष भी अपना दायित्व निभाए और मजबूत मुद्दे उठाकर लोकतंत्र को मजबूत बनाए। उसे पराजय की निराशा से बाहर आकर लोकतंत्र की मजबूती के लिए काम करना है लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि एकाध दल तो निराशा से बाहर ही नहीं आ पा रहे हैं, उनके बयानों से यही लगता है। पराजय से निराश होकर संसद को उसका अखाड़ा नहीं बनाना है और नहीं विजय के अहंकार में डूब कर अपने दायित्व को भूलना है।
उन्होंने कहा कि देश के लिए सबको मिलकर बेहतर काम करना चाहिए और सदन में इसका परिचय देना चाहिए। संसद में जब हंगामा होता है तो सदस्यों को अपनी बात कहने का मौका नहीं मिलता है। नये सांसदों को मौका देना चाहिए और उनके अनुभव और नयी पीढ़ी का जो जोश है उसका लाभ देश को मिलना चाहिए। संसद में ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए। नारे लगाने हैं तो पूरा देश खाली पड़ा है वहां नारे लगाए लेकिन संसद में नारे नहीं नीति पर बल देना चाहिए। नकारात्मकता भले ही किसी के काम कभी आ जाय है लेकिन देश के लिए सकारात्मक रूप से सोचना होगा और मर्यादा में रहकर काम करना होगा।
श्री मोदी ने कहा कि राज्यसभा के नए सभापति सीपी राधाकृष्णन पहली बार सदन की कार्यवाही का संचालन करेंगे उनके अनुभव का लाभ सबको मिलेगा ऐसा उनको विश्वास है।
उन्होने ने कहा कि पिछले कुछ समय से सदन को पराजय की बौखलाहट के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। सत्ता में रहने की बौखलाहट संसद में दिख रही है। जनता को अपनी बात नहीं बता पा रहे हैं और सारा गुस्सा सदन में उतार रहे हैं। यह नयी परंपरा शुरू की जा रही है और यह ठीक नहीं है। पिछले 10 सालों से जो खेल चल रहा है वह देश को स्वीकार नहीं है इसलिए रणनीति बदलने की उन्हें जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से शांतिपूर्ण तरीके से सदन को चलाने में सहयोग करने की अपील की और उन्हें उम्मीद है कि सभी सांसदों को सदन में अभिव्यक्ति का अवसर देंगे और अपनी पराजय की निराशा को सदन नारे लगाकर व्यक्त नहीं करेंगे।

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संविधान राष्ट्रीय अस्मिता का ग्रंथ, इसे आत्मसात कर संसद ने जन आकांक्षाओं को अभिव्यक्त किया: मुर्मु https://demo.theshikshanews.com/sanvidhaan-raashtreey-asmita-ka-granth-ise-aatmasaat-kar-sansad-ne-jan-aakaankshaon-ko-abhivyakt-kiya-murmu/ https://demo.theshikshanews.com/sanvidhaan-raashtreey-asmita-ka-granth-ise-aatmasaat-kar-sansad-ne-jan-aakaankshaon-ko-abhivyakt-kiya-murmu/#respond Wed, 26 Nov 2025 15:55:12 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5858 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संविधान को राष्ट्रीय अस्मिता और पहचान का ग्रंथ बताते हुए कहा है कि बीते दशक में हमारी संसद ने इसके मूल्यों पर चलते हुए जन आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने के अनेक कार्य किये हैं।
श्रीमती मुर्मु ने बुधवार को यहां संविधान दिवस के अवसर पर संविधान सदन के केन्द्रीय कक्ष में अपने अभिभाषण में कहा कि संविधान सभा ने संसदीय प्रणाली को अपनाने के पक्ष में जो ठोस तर्क दिये गए थे वे आज भी प्रासंगिक हैं। विश्व के विशालतम लोकतन्त्र में जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने वाली भारतीय संसद, विश्व के अनेक लोकतंत्रों के लिए आज एक उदाहरण के रूप में प्रतिष्ठित है। उन्होंंने कहा ,” हमारे संविधान निर्माता चाहते थे कि संविधान के माध्यम से हमारा सामूहिक और व्यक्तिगत स्वाभिमान सुनिश्चित रहे। मुझे यह कहते हुए बहुत प्रसन्नता होती है कि बीते दशक में हमारी संसद ने जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने के अत्यंत प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। ”
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि संविधान निर्माताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए वह सभी सांसदों को बधाई देती हैं और कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से संविधान सभा के परम सम्माननीय सदस्यों की स्मृति में सादर नमन करती हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की अंतरात्मा सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता जैसे आदर्शों में अभिव्यक्त होती है।
उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि इन सभी आयामों पर संसद सदस्यों ने संविधान निर्माताओं की परिकल्पनाओं को यथार्थ स्वरूप प्रदान किया है। संसदीय प्रणाली की सफलता के ठोस प्रमाण के रूप में, आज भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेज गति से अग्रसर है। भारत में लगभग 25 करोड़ लोगों के गरीबी की सीमारेखा से बाहर आने से आर्थिक न्याय के पैमाने पर विश्व की सबसे बड़ी सफलता अर्जित हुई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में सामाजिक न्याय के आदर्श के अनुरूप देश में समावेशी विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लागू होने से महिलाओं के नेतृत्व में विकास के एक नए युग का आरंभ होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सात नवंबर से राष्ट्र-गीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में देशव्यापी स्मरणोत्सव मनाए जा रहे हैं। यह स्मरणोत्सव भारत माता को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प का अवसर है। उन्होंने कहा ,” मुझे विश्वास है कि इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि के लिए आप सभी सदस्यगण देशवासियों को दिशा और प्रेरणा प्रदान करेंगे। ”
उन्होंने कहा कि देश का संविधान, हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का ग्रंथ है। यह हमारी राष्ट्रीय पहचान का ग्रंथ है। यह औपनिवेशक मानसिकता का परित्याग करके राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ देश को आगे बढ़ाने का मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि इसी भावना के अनुरूप, सामाजिक और तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए, आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण अधिनियम लागू किए गए हैं।
राष्ट्रपति ने संविधान संशोधन के प्रावधानों के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि संविधान में ही ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसके बल पर भावी पीढ़ियां आवश्यकतानुसार समयानुकूल संशोधन कर सकें। इस प्रकार संविधान निर्माताओं ने हमारे संविधान को गतिशीलता और जीवंतता प्रदान की।
इस अवसर पर उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू , राज्यसभा मेंं सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सभी सांसद मौजूूद थे।

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कांग्रेस का तंज : जी-20 शिखर बैठक में शामिल नहीं होंगे ट्रम्प तो मोदी जाएंगे https://demo.theshikshanews.com/kaangres-ka-tanj-jee-20-shikhar-baithak-mein-shaamil-nahin-honge-tramp-to-modee-jaenge/ https://demo.theshikshanews.com/kaangres-ka-tanj-jee-20-shikhar-baithak-mein-shaamil-nahin-honge-tramp-to-modee-jaenge/#respond Sat, 08 Nov 2025 15:59:06 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5708 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। कांग्रेस ने जी-20 शिखर बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शामिल नहीं होने की खबर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब इस बैठक में प्रधानमंत्री के जाने की संभावना है।
जी-20 देशों की शिखर बैठक 22 तथा 23 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका में हो रही है। माना जा रहा है कि अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के बीच चल रही अनबन के मद्देनजर श्री ट्रम्प इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने श्री मोदी के बैठक में शामिल होने को लेकर सोशल मीडिया एक्स पर तंज करते हुए लिखा “अब जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने घोषणा की है कि वह 22-23 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका में जी20 शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेंगे, तो हम निश्चिंत हो सकते हैं कि स्वयंभू विश्वगुरु स्वयं व्यक्तिगत रूप से भाग लेंगे। कभी न कभी, कहीं न कहीं…”
श्री मोदी की यात्रा पर कांग्रेस की यह टिप्पणी उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा जा रहा है कि श्री ट्रम्प इस बैठक का बहिष्कार कर सकते हैं। जी-20 शिखर सम्मेलन आर्थिक और भूराजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार करने का एक प्रमुख वैश्विक मंच है, जिसमें श्री मोदी की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर सबकी नजर रहती है। गौरतलब है कि श्री मोदी इस महीने की शुरुआत में मलेशिया में क्षेत्रीय नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हुए जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प उसमें आये थे। कांग्रेस सूत्र कहते हैं कि श्री मोदी जानबूझकर ट्रम्प का सामना करने से बचना चाहते थे इसलिए वह इस सम्मेलन में नहीं गये। उनका यह भी कहना था कि श्री ट्रम्प लगातार दावा कर रहे हैं कि टैरिफ का डर दिखाकर उन्होंने पाकिस्तान के साथ भारत की सैन्य कार्रवाई को रुकवाया था लेकिन श्री मोदी ने संसद में कहा कि किसी बाह्य व्यक्ति या संस्था के दबाव में सैन्य कार्रवाई नहीं रोकी गई। श्री मोदी के इस बयान के बाद भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हो गए और अगस्त में ट्रम्प प्रशासन ने यह कहते हुए भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद करने के कारण यह शुल्क लगाया गया है।

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मोदी ने चार नयी वंदे भारत ट्रेनों को दिखायी हरी झंडी https://demo.theshikshanews.com/modee-ne-chaar-nayee-vande-bhaarat-trenon-ko-dikhaayee-haree-jhandee/ https://demo.theshikshanews.com/modee-ne-chaar-nayee-vande-bhaarat-trenon-ko-dikhaayee-haree-jhandee/#respond Sat, 08 Nov 2025 15:50:37 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5702 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Varanasi। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को चार नयी वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। श्री मोदी ने यहां बनारस रेलवे स्टेशन पर एक कार्यक्रम में बनारस-खजुराहो ट्रेन को हरी झंडी दिखायी। इसके अलावा उन्होंने वर्चुअल माध्यम से लखनऊ-सहारनपुर, बेंगलुरु-एर्नाकुलम और फिरोजपुर कैंट – दिल्ली वंदे भारत प्रीमियम ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
श्री मोदी के साथ केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भी थे।
विशेष पास पर ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों में काफी उत्साह दिखा। बड़ी संख्या में स्कूलों के बच्चे भी ट्रेन में थे। प्रधानमंत्री ने ट्रेन में बच्चों और ड्राइवर से भी बात की।
इसके साथ ही अब देश में वंदे भारत ट्रेनों की संख्या 78 से बढ़कर 82 हो गयी है। उल्लेखनीय है कि 15 फरवरी 2019 को पहली वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन किया गया था जो नयी दिल्ली से वाराणसी के लिए चली थी। अब तक देश भर में विभिन्न मार्गों पर वंदे भारत ट्रेनों में सवा सात करोड़ से अधिक यात्री सफर कर चुके हैं। इसका विस्तार 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हो चुका है। श्री मोदी ने दुल्हन की तरह सजे बनारस रेलवे स्टेशन से खजुराहो जाने वाली उद्घाटन ट्रेन को हरी झंडी दिखायी। खास बात यह है कि यह प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र से खजुराहो के लिए पहली नियमित ट्रेन है।
आम दिनों में वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत (26422) सुबह 5:25 बजे वाराणसी से रवाना होगी और दोपहर बाद 1:10 बजे खजुराहो पहुंचेगी। वापसी की ट्रेन (26421) दोपहर बाद 3:20 पर रवाना होगी और रात 11 बजे वाराणसी आयेगी। यह ट्रेन गुरुवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी। इसका ठहराव ब्लॉक हट ‘के’, विंध्याचल, प्रयागराज, बांदा, महोबा और खजुराहो में होगा।
लखनऊ-सहारनपुर वंदे भारत (26504) सुबह पांच बजे लखनऊ से खुलेगी और दोपहर बाद 12:45 बजे सहारनपुर पहुंचेगी। वापसी की ट्रेन (26503) दोपहर बाद तीन बजे चलकर रात 11 बजे लखनऊ पहुंचेगी। इसका ठहराव सीतापुर, सीतापुर सिटी, शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद, नजीबाबाद, रुड़की और सहारनपुर में होगा। यह सोमवार को छोड़कर सभी छह दिन चलेगी।
केएसआर बेंगलुरु-एर्नाकुलम वंदे भारत (26651) सुबह 5:10 बजे बेंगलुरु से चलकर दोपहर बाद 1:50 बजे एर्नाकुलम पहुंचेगी। वापसी में यह (26652) 2:20 बजे एर्नाकुलम से रवाना होगी और रात 11 बजे केएसआर बेंगलुरु पहुंचेगी। इसके ठहराव कृष्णराजपुरम्, जेटीजे-ए, सलेम, इरोड, तिरुपपुर, कोयम्बटूर, पलक्कड़ और त्रिशूर में होंगे। यह बुधवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी।
फिरोजपुर कैंट-दिल्ली वंदे भारत (26462) बुधवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी। यह सुबह 7:55 बजे फिरोजपुर कैंट से खुलेगी और दोपहर बाद 2:35 बजे दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 26461 शाम चार बजे दिल्ली से चलकर रात 10:35 बजे फिरोजपुर कैंट पहुंचेगी।
वंदे भारत देश में निर्मित पहली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन है। इसका निर्माण इंटीग्रेटेड कोच फैक्टरी, चेन्नई में किया जाता है। यह अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है। इसमें इंटेलिजेंट ब्रेकिंग सिस्टम, स्वचालित दरवाजे, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली और बायो वैक्यूम शौचालय जैसे कुछ खास फीचर हैं। एक्सक्लुजिव श्रेणी में रोटेटिंग सीटें लगी हुई हैं। इसकी विशेष ब्रेकिंग प्रणाली 30 प्रतिशत तक बिजली की बचत भी करती है। इसमें लगायी गयी सुविधाओं को दिव्यांगों के अनुकूल बनाया गया है ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो।

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मोदी आठ नवंबर को चार नई वंदे भारत ट्रेनों को दिखाएंगे हरी झंडी https://demo.theshikshanews.com/modee-aath-navambar-ko-chaar-naee-vande-bhaarat-trenon-ko-dikhaenge-haree-jhandee/ https://demo.theshikshanews.com/modee-aath-navambar-ko-chaar-naee-vande-bhaarat-trenon-ko-dikhaenge-haree-jhandee/#respond Thu, 06 Nov 2025 16:45:28 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5681 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ नवंबर को चार नई वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बताया कि ये नई ट्रेनें बनारस-खजुराहो, लखनऊ-सहारनपुर, फिरोजपुर-दिल्ली और एर्नाकुलम बेंगलुरु मार्गों पर चलेंगी। श्री मोदी शनिवार सुबह लगभग 8:15 बजे वाराणसी में एक समारोह के दौरान वाराणसी-खजुराहो ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।
अन्य तीन ट्रेनों को वह वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। पीएमओ ने बताया कि यह विश्वस्तरीय रेल सेवाओं के माध्यम से नागरिकों को आसान, तेज और अधिक आरामदायक यात्रा प्रदान करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने में एक और मील का पत्थर है। इन ट्रेनों से संबंधित प्रमुख शहरों के बीच यात्रा में लगने वाला समय कम होगा और पर्यटन तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
बनारस-खजुराहो वंदे भारत ट्रेन से वर्तमान में चल रही विशेष ट्रेनों की तुलना में यात्रा समय में लगभग दो घंटे 40 मिनट की बचत होगी। बनारस-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस प्रयागराज और चित्रकूट होते हुए गुजरेगी। यह संपर्क धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मजबूत करेगा। लखनऊ-सहारनपुर वंदे भारत सात घंटे 45 मिनट में यात्रा पूरी करेगी, जिससे यात्रा समय में लगभग एक घंटे की बचत होगी। यह ट्रेन लखनऊ, सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद और बिजनौर होती हुई गुजरेगी। यात्रियों के लिए सहारनपुर से आगे रुड़की होते हुए हरिद्वार आसान हो जायेगा।
फिरोजपुर-दिल्ली वंदे भारत इस रूट की सबसे तेज ट्रेन होगी। यह केवल छह घंटे 40 मिनट में यात्रा पूरी करेगी। यह ट्रेन बठिंडा और पटियाला होती हुई दिल्ली आयेगी। इस ट्रेन से व्यापार, पर्यटन और रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा मिलने, सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान और राष्ट्रीय बाज़ारों के साथ बेहतर एकीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। दक्षिण भारत में, एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत ट्रेन से यात्रा समय में दो घंटे से अधिक की बचत होगी और यह यात्रा आठ घंटे 40 मिनट में पूरी हो जायेगी। प्रमुख आईटी और वाणिज्यिक केंद्र को जोड़ने वाली यह ट्रेन पेशेवरों, छात्रों और पर्यटकों के लिए अच्छा विकल्प बनेगी। यह मार्ग केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन को बढ़ावा देगा।

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सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लें देशवासी: मोदी https://demo.theshikshanews.com/saradaar-patel-kee-150veen-jayantee-par-aayojit-ran-phor-yoonitee-mein-bhaag-len-deshavaasee-modee/ https://demo.theshikshanews.com/saradaar-patel-kee-150veen-jayantee-par-aayojit-ran-phor-yoonitee-mein-bhaag-len-deshavaasee-modee/#respond Sun, 26 Oct 2025 11:35:11 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5476 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समस्त देशवासियों से 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने की अपील की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को आकाशवाणी पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात” की 127 वीं कड़ी में अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक काल में राष्ट्र की सबसे महान विभूतियों में से एक सरदार पटेल की 150वीं जयंती का दिन पूरे देश के लिए एक बहुत विशेष अवसर है। उनके विराट व्यक्तित्व में अनेक गुण एक साथ समाहित थे।
श्री मोदी ने कहा ” वह एक अत्यंत प्रतिभाशाली छात्र थे जिन्होंने भारत और ब्रिटेन में अपनी पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन किया। वह अपने समय के सबसे सफल वकीलों में से भी एक थे। श्री पटेल वकालत में और नाम कमा सकते थे, लेकिन महात्मा गांधी से प्रेरित होकर उन्होंने खुद को स्वतंत्रता आंदोलन में पूरी तरह समर्पित कर दिया।”
श्री मोदी ने कहा कि सरदार पटेल के ‘खेड़ा सत्याग्रह’ से लेकर ‘बोरसद सत्याग्रह’ तक अनेक आंदोलनों में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद नगर निगम के प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल भी ऐतिहासिक रहा था। उन्होंने स्वच्छता और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के रूप में उनके योगदान के लिए हम सभी सदैव उनके ऋणी रहेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने भारत के प्रशासनिक ढांचे की एक मजबूत नींव भी रखी और देश की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अद्वितीय प्रयास किए। मेरा आप सबसे आग्रह है कि 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती देश-भर में होने वाली ‘रन फॉर यूनिटी’ में आप सभी अपने लोगों के साथ शामिल हों।
श्री मोदी ने कहा कि यह एक प्रकार से युवा चेतना का अवसर बनना चाहिए जो देश की एकता को मजबूती देगा। यह उस महान विभूति के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने भारत को एकता के सूत्र में पिरोया था ।

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भारत की नदियां केवल विरासत का प्रतीक नहीं बल्कि प्रगति की राजमार्ग हैं: मोदी https://demo.theshikshanews.com/bhaarat-kee-nadiyaan-keval-viraasat-ka-prateek-nahin-balki-pragati-kee-raajamaarg-hain-modee/ https://demo.theshikshanews.com/bhaarat-kee-nadiyaan-keval-viraasat-ka-prateek-nahin-balki-pragati-kee-raajamaarg-hain-modee/#respond Fri, 17 Oct 2025 14:24:44 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5398 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के जल परिवहन तंत्र में हो रहे बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि भारत की नदियां आज केवल विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रगति के मुख्य माध्यम बन गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल के जलमार्गों पर लिखे लेख को साझा करते हुए यह टिप्पणी की। प्रधानमंत्री ने लिखा, “भारत की नदियां केवल विरासत का प्रतीक नहीं हैं, वे प्रगति के राजमार्ग हैं। पुनर्जीवित जलमार्गों के लिए केंद्रीय मंत्री सोनोवाल के दृष्टिकोण और विकसित भारत की ओर उनके योगदान को जानना महत्त्वपूर्ण है।”
केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने अपने लेख में कहा कि एक समय था जब भारतीय नदियां मालवहन का मुख्य स्रोत थीं, पर रेल और सड़कों के आगमन के बाद उनका महत्व कम होता गया। अब सरकार इंटरनल वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईडब्लूएआई) के सहयोग से नदियों का पुनर्जीवन कर रही है। मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2014 तक केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, वहीं आज 111 को राष्ट्रीय जलमार्गों का दर्जा दिया गया है, जिनमें से 32 चालू हैं। यह परिवर्तन केवल संख्यात्मक नहीं बल्कि लॉजिस्टिक्स दर्शन और कनेक्टिविटी के व्यापक विस्तार का प्रतीक है।
लेख में स्पष्ट किया गया है कि जलमार्गों द्वारा परिवहन से ईंधन व उत्सर्जन कम होता है तथा यह आर्थिक दृष्टि से अधिक लाभकारी है। 2013-14 में माल ढुलाई 18 मिलियन टन थी जो 2024-25 तक 145 मिलियन टन तक पहुंच गई है। सरकार ने 2030 तक 200 मिलियन टन तथा 2047 तक 250 मिलियन टन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सोनोवाल ने आगे कहा कि नदी पर्यटन भी तेज़ी से बढ़ रहा है। जहां एक दशक पहले केवल पांच क्रूज़ चालू थे, अब 13 जलमार्गों पर 25 से अधिक क्रूज़ जहाज संचालन में हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र एवं केरल के बैकवाटर्स में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। आधुनिक टर्मिनलों, इलेक्ट्रिक शोर लिंक व चौबीस घंटे नेविगेशन जैसी सुविधाओं से यह उम्मीद की जा रही है कि नदी मार्ग पर आवागमन सुरक्षित, आरामदायक और टिकाऊ बनेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने नदियों के संरक्षण और उनके योजनाबद्ध विकास पर प्रशासनिक प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि “हमें बस नदी का सम्मान करना है – समझदारी से ड्रेजिंग करनी है, उसे सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ाना है तथा उसे नवजीवन देना है।” इस कार्य से न केवल परिवहन, पर्यटन व व्यापार को नई गति मिल रही है, बल्कि नदी सभ्यता की विरासत भी सुरक्षित हो रही है।

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मुर्मु , मोदी और शाह ने डा. कलाम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की https://demo.theshikshanews.com/murmu-modee-aur-shaah-ne-da-kalaam-ko-unakee-jayantee-par-shraddhaanjali-arpit-kee/ https://demo.theshikshanews.com/murmu-modee-aur-shaah-ne-da-kalaam-ko-unakee-jayantee-par-shraddhaanjali-arpit-kee/#respond Wed, 15 Oct 2025 16:14:34 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5365 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। राष्ट्रपति सचिवालय ने बताया कि श्रीमती मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में डॉ. अब्दुल कलाम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. कलाम को एक दूरदर्शी व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने युवा मन को प्रज्वलित किया और राष्ट्र को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन हमें याद दिलाता है कि सफलता के लिए विनम्रता और कड़ी मेहनत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताइ कि डॉ. कलाम की कल्पना के अनुरूप मजबूत, आत्मनिर्भर और करुणामय भारत का निर्माण जारी रखेंगे।
श्री मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ” डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने युवा मन को प्रज्वलित किया और हमारे देश को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि सफलता के लिए विनम्रता और कड़ी मेहनत बेहद ज़रूरी है। हम उनके द्वारा देखे गए भारत का निर्माण जारी रखें… एक ऐसा भारत जो मज़बूत, आत्मनिर्भर और करुणामय हो।”
श्री शाह ने डा. कलाम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा ,”डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी को उनकी जयंती पर नमन। एक वैज्ञानिक प्रतिभा, कलाम जी ने अपनी अटूट देशभक्ति और भारत प्रथम के सिद्धांत के साथ विज्ञान, रक्षा और तकनीकी नवाचारों में हमारे देश की प्रगति को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुँचाया।”
परमाणु वैज्ञानिक के रूप में मिसाइल मैन के नाम से विख्यात हुए डा. कलाम 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक देश के राष्ट्रपति रहे। इससे पहले वह सरकार के वैज्ञानितक सलाहकार भी रहे।

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मंगोलिया के नागरिकों को निशुल्क ई-वीजा देगा भारत: पीएम https://demo.theshikshanews.com/mangoliya-ke-naagarikon-ko-nishulk-ee-veeja-dega-bhaarat-peeem/ https://demo.theshikshanews.com/mangoliya-ke-naagarikon-ko-nishulk-ee-veeja-dega-bhaarat-peeem/#respond Wed, 15 Oct 2025 05:07:45 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5338 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को मंगोलिया के विकास में मजबूत और विश्वसनीय साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के मौके पर मंगोलिया के नागरिकों के लिए निशुल्क ई-वीजा की घोषणा की है।
श्री मोदी ने भारत की यात्रा पर आए मंगोलिया के राष्ट्रपति हुरेलसुख उखना के साथ यहां द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य में कहा कि भारत मंगोलिया के विकास में एक दृढ़ और विश्वसनीय साझेदार रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति हुरेलसुख की यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष और रणनीतिक भागीदारी के 10 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि छह वर्ष के बाद मंगोलिया के राष्ट्रपति का भारत आना अपने आप में एक बहुत विशेष अवसर है।
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि भारत मंगोलिया के नागरिकों को निःशुल्क ई-वीजा देगा और हर वर्ष मंगोलिया से युवा ‘कल्चरल एम्बेसडर्स’ की भारत यात्रा की भी व्यवस्था करेगा। श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच दस वर्ष पहले हुई रणनीतिक साझेदारी का विस्तार हुआ है और यह प्रगाढ हुई है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत और मंगोलिया के संबंध केवल राजनयिक नहीं है यह हमारे बीच आत्मीय और आध्यात्मिक बंधन है। हमारे संबंधों की असली गहराई और व्यापकता हमारे लोगों के बीच संपर्क में दिखाई पड़ती है।”
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच अध्यात्मिक संबंधों का उल्लेख करते हएु कहा कि अगले वर्ष भगवान बुद्ध के दो महान शिष्यों — सारिपुत्र और मौद्गल्या-यन के पवित्र अवशेष भारत से मंगोलिया भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत मंगोलिया की ‘गंदन मॉनेस्टेरी’ में एक संस्कृत शिक्षक भी भेेजेगा ताकि वहां के बौद्ध ग्रंथों का गहराई से अध्ययन किया जा सके और प्राचीन ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाया जा सके
श्री मोदी ने मंगोलिया में बौद्ध धर्म के लिए नालंदा विश्वविद्यालय की अहम भूमिका का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि नालंदा और ‘गंदन मॉनेस्टेरी’ को साथ जोड़कर हम इस ऐतिहासिक संबधो में एक नई उर्जा लायेंगे।
इस अवसर पर दोनों नेताओं ने वृक्षारोपण भी किया। श्री मोदी ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति हुरेलसुख ने अपनी स्वर्गीय माताजी के नाम पर जो वटवृक्ष लगाया है, वह आने वाली कई पीढ़ियों तक हमारी गहरी मित्रता और पर्यावरण के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रहेगा।”

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