Mamata – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Fri, 09 Jan 2026 12:43:21 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Mamata – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 ईडी ने आई-पैक छापेमारी मामले में ममता, शीर्ष पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच का अनुरोध किया https://demo.theshikshanews.com/ed-ne-aaee-paik-chhaapemaaree-maamale-mein-mamata-sheersh-pulis-adhikaariyon-ke-khilaaph-seebeeaee-jaanch-ka-anurodh-kiya/ https://demo.theshikshanews.com/ed-ne-aaee-paik-chhaapemaaree-maamale-mein-mamata-sheersh-pulis-adhikaariyon-ke-khilaaph-seebeeaee-jaanch-ka-anurodh-kiya/#respond Fri, 09 Jan 2026 12:43:21 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6085 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक तथा उसके निदेशक के खिलाफ कोलकाता में की गई छापेमारी के दौरान कथित तौर पर बाधा डालने को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की सीबीआई जांच का अनुरोध किया है।
याचिका में उसने यह भी अनुरोध किया है कि तलाशी के दौरान जिन सभी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को ‘‘अवैध और जबरन’’ तरीके से हटा लिया गया था, इन्हें तुरंत जब्त कर सील किया जाये, फॉरेंसिक रूप से सुरक्षित रखा जाये और फिर ईडी को सौंपा जाये। उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई किये जाने की उम्मीद है।
⁠कोयला घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले के तहत बृहस्पतिवार को आई-पैक के सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय और इसके संस्थापक तथा निदेशकों में से एक प्रतीक जैन के आवास पर तलाश अभियान चलाया गया। राज्य और दिल्ली में भी कुछ अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई थी।
ईडी ने बृहस्पतिवार को एक प्रेस बयान में आरोप लगाया था कि बनर्जी छापेमारी के दौरान कोलकाता के लाउडन रोड स्थित जैन के आवास पर आईं और ‘‘महत्वपूर्ण सबूत ले गईं’’ और आई-पैक के कार्यालय में भी उन्होंने ऐसा ही किया।
ईडी ने याचिका में दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कोयले की कथित चोरी से प्राप्त हवाला राशि के लगभग 20 करोड़ रुपये आई-पैक तक पहुंचे। यह संगठन 2021 से टीएमसी और राज्य सरकार को राजनीतिक परामर्श सेवाएं प्रदान कर रहा है। इसमें कहा गया है, ‘‘जांच के दौरान मिले ठोस सबूतों से पता चलता है कि हवाला चैनलों के माध्यम से आई-पैक को कम से कम 20 करोड़ रुपये की आपराधिक आय हस्तांतरित की गई थी।’’
याचिका में कहा गया है, ‘‘जांच को जारी रखते हुए और अपराध से प्राप्त धनराशि और उसके उपयोग का पता लगाने के लिए, कोयला तस्करी मामले के संबंध में आई-पैक और कुछ अन्य संस्थाओं के खिलाफ तलाश अभियान शुरू किया गया था।’’ इसमें कहा गया, ‘‘पीएमएलए के तहत जारी तलाशी अभियान में हस्तक्षेप न करने के लिए (ईडी अधिकारियों द्वारा) स्पष्ट अनुरोध किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री ने परिसर में प्रवेश किया।’’
याचिका में कहा गया है, ‘‘कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए, सुश्री ममता बनर्जी ने पुलिसकर्मियों की सहायता से अधिकृत अधिकारी के कब्जे से सभी डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ महत्वपूर्ण आपत्तिजनक दस्तावेजों को जबरन अपने कब्जे में ले लिया और दोपहर लगभग 12:15 बजे परिसर से चली गईं।’’
ईडी ने कहा कि उसके अधिकारियों को ‘‘अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन नहीं करने दिया गया और उनके कामकाज में बाधा डाली गई।’’ एजेंसी ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह जब्त किये गये डिजिटल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों तक किसी भी प्रकार की पहुंच बनाये जाने, इन्हें मिटाने या छेड़छाड़ को रोकने के लिए अंतरिम आदेश पारित करे।

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ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में एसआईआर पर ‘गंभीर चिंताएं’ जतायी https://demo.theshikshanews.com/mamata-ne-mukhy-chunaav-aayukt-ko-likhe-patr-mein-esaeeaar-par-gambheer-chintaen-jataayee/ https://demo.theshikshanews.com/mamata-ne-mukhy-chunaav-aayukt-ko-likhe-patr-mein-esaeeaar-par-gambheer-chintaen-jataayee/#respond Mon, 05 Jan 2026 11:45:08 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6062 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Kolkata। कोलकाता, 04 जनवरी (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कड़ा पत्र लिखा है।
सुश्री बनर्जी ने एसआईआर को ‘एक गंभीर और महत्वपूर्ण चिंता’बताते हुए पत्र में लिखा कि जिस अनुचित जल्दबाजी में बिना पर्याप्त तैयारी या ग्राउंडवर्क के यह काम किया जा रहा है, वह मौलिक रूप से गलत है तथा भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और उसके राज्य-स्तरीय अधिकारियों की ओर से पूरी तरह से स्पष्टता और योजना की कमी है।


उन्होंने अपने पत्र में एसआईआर के तर्क और उसके कार्यान्वयन दोनों पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया ने मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों के बीच व्यापक भ्रम पैदा किया है।
उन्होंने “तार्किक विसंगतियों” के तहत चिह्नित बड़ी संख्या में प्रविष्टियों पर यह तर्क देते हुए चिंता जतायी कि ऐसे वर्गीकरण बिना पर्याप्त पारदर्शिता या मतदाताओं को स्पष्ट संचार के किए गए थे। उन्होंने कहा, “तथाकथित तार्किक विसंगतियों जैसे वर्तनी की त्रुटियों, उम्र से संबंधित भिन्नताओं आदि को दूर करने के नाम पर ईसीआई ने ऐसे सभी मतदाताओं के दस्तावेजों के सत्यापन का निर्देश दिया है। ऐसे मामलों में जहां ये प्रमाण पत्र अन्य जिलों या राज्यों के अधिकारियों द्वारा जारी किए गए हैं, सत्यापन संबंधित जारी करने वाले अधिकारियों द्वारा किया जाना आवश्यक है। ऐसा लगता है कि इस दृष्टिकोण का उद्देश्य इस प्रक्रिया में देरी करना है, क्योंकि ऐसे अंतर-जिला या अंतर-राज्य सत्यापन कई मामलों में निर्धारित समय के भीतर पूरा करना संभव नहीं होगा। इससे वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने और उनके मताधिकार से वंचित होने की संभावना है।”
ईसीआई के निर्देशों की स्पष्टता पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “चौंकाने वाली बात यह है कि महत्वपूर्ण निर्देश लगभग दैनिक आधार पर अक्सर व्हाट्सएप संदेशों और टेक्स्ट संदेशों जैसे अनौपचारिक माध्यमों से जारी किए जा रहे हैं। ऐसी अनौपचारिकता और मनमानी सटीकता, पारदर्शिता या जवाबदेही के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ती है। इस प्रक्रिया में कोई भी त्रुटि, अस्पष्टता या अनिश्चितता गंभीर विसंगतियों को जन्म दे सकती है, जिसमें वास्तविक मतदाताओं के संभावित मताधिकार से वंचित होना शामिल है।
चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा, “आईटी सिस्टम के गलत इस्तेमाल से और ईआरओ की जानकारी या मंज़ूरी के बिना मतदाताओं के नाम हटाने के गंभीर आरोप भी हैं, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सक्षम वैधानिक अधिकारी हैं। इससे गंभीर सवाल उठते हैं कि ऐसे कामों को किसने मंज़ूरी दी और किसके सुपरविज़न या निर्देश पर ये किए गए हैं तथा इसके सुपरविज़न या निर्देश के तहत किए गए किसी भी गैर-कानूनी काम के लिए किसे पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने इस काम की ‘असामान्य जल्दबाजी’पर भी चिंता जताई और कहा कि यह संशोधन 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय के करीब किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि मतदाता सूची संशोधन में किसी भी मनमानी से चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा कम हो सकता है और आयोग से आग्रह किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रक्रियात्मक कमियों के कारण किसी भी योग्य मतदाता को वोट देने के अधिकार से वंचित न किया जाए।

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