Lessons from Nepal – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Tue, 16 Sep 2025 15:16:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Lessons from Nepal – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 नेपाल से सबक: वंशवादी राजनीति से बचे भारत https://demo.theshikshanews.com/nepaal-se-sabak-vanshavaadee-raajaneeti-se-bache-bhaarat/ https://demo.theshikshanews.com/nepaal-se-sabak-vanshavaadee-raajaneeti-se-bache-bhaarat/#respond Tue, 16 Sep 2025 15:16:58 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5063 अर्जुन देशप्रेमी
नेपाल में कथित क्रांति को लेकर पिछले एक सप्ताह के दौरान बहुत कुछ लिखा गया है और कहा गया है। भारत को इससे सबक लेने की बातें भी कही जा रही हैं। भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार और नरेन्द्र मोदी को खासकर नसीहतें दी जा रही हैं। और यह सही भी है कि सरकार को नेपाल के पिछले हफ्ते से घटनाक्रम से सबक लेना भी चाहिए।
खासकर बेरोजगारी, और वंशवाद की राजनीति से क्योंकि भाजपा के भीतर भी वंशवाद की जड़ें हैं और वह देर सबेर भाजपा के लिए खतरनाक भी हो सकती है। दरअसल नेपाल में जो कुछ भी हुआ है, उसके पीछे का कारण वंशवाद यानि अपने अपने बच्चों को ही सबकुछ देने, उनको आगे बढ़ाने की प्रवृति का ही परिणाम है।
इसे “नेपोकिड्स” का नाम दिया गया है और इसी के खिलाफ नेपाल पूरी तरह से जला है। इस बात को स्वयं नेपाल की नवनियुक्त प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने 15 सितम्बर को अपने बयान में स्वीकारा भी है। चूँकि सुश्री कार्की नेपाल की मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं, सो उनकी इस स्वीकारोक्ति को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता है कि इस पुरे प्रकरण के पीछे वंशवादी राजनीति और प्रवृति ही रही है। इसी का परिणाम था कि नेताओं के बच्चे बेहद विलासितापूर्ण जीवन जी रहे थे, भ्रष्टाचार हो रहा था और उसपर सरकार निष्क्रिय थी। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री देउबा के घर के अंदर सुरंग में रुपयों के गट्ठर मिले।
देउबा के बेटे का बहुत ही बड़ा और भव्य पांच सितारा होटल से लेकर अकूत संपत्ति थी। पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड का जो कम्युनिस्ट नेता है, उनका बड़ा शॉपिंग मॉल था, तो प्रधानमंत्री ओली की बेपनाह संपत्तियों और राजशाही जिंदगी थी।
राजशाही से निकले नेता खुद को वामपंथी बताते थे, पर उन्होंने अकूत धन संपत्ति अपने भ्रष्टाचार से अर्जित की। एक के बाद एक चंद परिवारों से ही नए नेता आये, क्योंकि इन्होंने अपने परिवार से बाहर किसी को अपनी पार्टी में शीर्ष पर आने नहीं दिया, न ही सत्ता का भागीदार बनने दिया।
पारिवारिक रूप से प्रधानमंत्री का बेटा प्रधानमंत्री बनता रहा, मंत्री के बेटे मंत्री बनते रहे। इनके परिवार के लोग ही सरकारी पदों पर बैठाए जाते रहे, भले ही वे निकम्मे क्यों न हों।
शरीर भले न साथ दे रहा हो, नेपाल के लोगों ने सत्ता पकड़े रहना ही अपना काम समझा। सरकारी ठेके भी अक्सर नेताओं के रिश्तेदारों और उनके दोस्तों को मिल जाते थे। नेपाल के लगभग हर सौदे में 70 प्रतिशत कमीशन नेताओं ने लिया और अपने बच्चों के नाम पर देश विदेश में लगाया, उनके ऐशो आराम पर लुटाया। आम जनता के लिए वहां कुछ नहीं बचा, हालात ये थे कि ओड़िसा में निकली 135 वेकेंसियों के लिए नेपाल से 3000 से ज्यादा लड़के आ गए।
भ्रष्टाचार को एक उदाहरण से समझें। 1991 में नेपाली कांग्रेस सरकार ने मिस्र की कंपनी से 1.8 करोड़ डॉलर में एक वीआईपी हेलिकॉप्टर खरीदा जिसकी कीमत 40 लाख डॉलर थी। डील के बाकी बचे 1.4 करोड़ डॉलर का कमीशन तत्कालीन प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के रिश्तेदारों को मिला। 1999 में ऑस्ट्रिया से एक बोइंग 767 विमान 4.5 करोड़ डॉलर में लीज पर लिया गया था।
इसमे लगभग 70 प्रतिशत घपला था। घपलों घोटालों से त्रस्त नेपाल का यह हाल हो गया कि वहां इंडस्ट्री चौपट होने लगीं, रोजगार घटने लगे, युवाओं को काम की तलाश में भारत से लेकर मलेशिया और खाड़ी देशों का रुख करना पड़ा। नेपाल में भ्रष्टाचार इस कदर फैला है कि करप्शन के इंडेक्स में 180 देशों में वह 130 वें पायदान पर आ गया। बीते तीन दशक में लगभग 68 लाख नेपाली नागरिकों को विदेशों में काम करने के लिए जाना पड़ा।
अब आते हैं भारत के मामले में। पड़ोसी नेपाल की तरह ही भारत में भी वंशवाद चरम पर है। भाजपा और जदयू जैसी एक दो पार्टियों को छोड़ दें तो भारत में लगभग सभी बड़ी पार्टियाँ वंशवाद से घिरी हैं। आप नाम लीजिये और पता चल जायेगा कि इनकी दूसरी या तीसरी या चौथी पीढ़ी ही इन पार्टियों के शीर्ष पर हैं।
यही नहीं, यह भी दिखेगा कि आने वाले दशकों में भी इनके बच्चे ही इन पार्टियों के मुखिया बने रहेंगे और वही शासन करते रहेंगे, भले ही उनके दादा, नाना, चाचा, मामा, पिता, माता, बुआ, ससुर, आदि पर घपले घोटालों के कितने ही मुक़दमे क्यों न
रहे हों। यहाँ तक कि उनको भ्रष्टाचार के जुर्म में सज़ा ही क्यों न हुई हो।
वंशवाद में तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सबसे आगे है। इनके सबसे बड़े नेता वंशवाद की चौथी पीढ़ी से हैं और उनपर कई मुकदमे चल रहे हैं, जिनमे भ्रष्टाचार का बड़ा मुकदमा भी शामिल है।
जिन दलों में वंशवाद है और जिन्होंने जमकर देश को लूटा है, जिनकी आज की संपत्ति अरबों खरबों में है, उनमें कई दल ऐसे भी हैं, जो सत्ता पक्ष के साथ हैं और सत्ता का मज़ा ले रहे हैं। उनपर कोई उंगुली भी नहीं उठा रहा है। उनके भ्रष्टाचार के मुकदमों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो रही है।
इनके मुकदमे वर्षों तो छोिड़ये, दशकों से लंबित हैं। जिनकों सज़ा हुई है, उनकों भी जमानत मिली हुई है और वे मज़े से राजनीति कर रहे हैं, अपने वंश को आगे बढ़ा रहे हैं और मुख्यमंत्री बनवाने में लगे हैं, जनता जाए भांड में। जो पार्टियाँ सत्ता में नरेन्द्र मोदी के साथ हैं, उनपर तो कार्रवाई होने से रही।
इसमे भी इंडी गठवंधन को ज्यादा सोचने की जरूरत है जहाँ स्थिति ज्यादा खराब है। शीर्ष पर वहां लगभग सभी दल वंशवादी राजनीति ही कर रहे हैं। भाजपा में तो फिलहाल शीर्ष स्तर पर वंशवाद नहीं है, पर उसके नीचे वहां भी वंशवाद काफी है।
जबतक नरेन्द्र मोदी हैं तबतक तो बचाव है। पर भाजपा को अभी से इसपर सतर्क रहने की जरूरत है। अब समय है कि ये सारी पार्टियाँ अपने गिरेवाँ में झांकें और अपने भीतर आवश्यक सुधार करें, वरना भारत नेपाल से बहुत दूर नहीं है।
हालाँकि भारत में नेपाल जितने खराब हालात नहीं हैं, परन्तु वंशवादी राजनीति कि जो राजनीति भारत में है, वह नेपाल से अलग नहीं है। ऐसे में भारत में यदि नेपाल की तरह का कोई आन्दोलन देर सबेर हो जाये और देश में उथल पुथल मच जाये,तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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