investigating officials – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Tue, 13 Jan 2026 15:33:39 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg investigating officials – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 अफसरों की जांच के लिए पूर्व मंजूरी मामले पर आया खंडित फैसला https://demo.theshikshanews.com/aphasaron-kee-jaanch-ke-lie-poorv-manjooree-maamale-par-aaya-khandit-phaisala/ https://demo.theshikshanews.com/aphasaron-kee-jaanch-ke-lie-poorv-manjooree-maamale-par-aaya-khandit-phaisala/#respond Tue, 13 Jan 2026 15:33:39 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6118 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। सुप्रीम कोट ने सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार मामलों की जांच शुरू करने से पहले अनुमति लेने से संबंधित, भ्रष्टाचार रोधी कानून 2018 की धारा की संवैधानिक वैधता पर मंगलवार को खंडित निर्णय सुनाया। इस मुद्दे पर फैसला सुनाने वाली पीठ में शामिल जजों की अलग-अलग राय होने के चलते अब इस मामले को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष रखने का निर्देश दिया है ताकि इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए बड़ी पीठ गठित की जा सके। केंद्र ने जुलाई 2018 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में संशोधन करते हुए धारा 17ए का प्रावधान शामिल किया था। इसके अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में की गई सिफारिशों/आदेशों के लिए किसी भी लोकसेवक के खिलाफ ‘जांच या पूछताछ’ नहीं की जा सकती है। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान पीठ से कहा था कि ये प्रावधान भ्रष्टाचार विरोधी कानून को कमजोर करते हैं क्योंकि सरकार, जो सक्षम प्राधिकार है, से आमतौर पर मंजूरी नहीं मिलती है।
जस्टिस नागरत्ना का फैसला
धारा 17ए असंवैधानिक, इसे खत्म किया जाना चाहिए जस्टिस नागरत्ना ने अलग लिखे अपने फैसले में कहा कि किसी अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए पूर्व मंजूरी की जरूरत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मकसद के खिलाफ है क्योंकि यह जांच को रोकती है और भ्रष्ट अधिकारियों को बचाती है। उन्होंने कहा कि धारा 17ए असंवैधानिक है और इसे खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों में किसी भी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए कोई पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। पूर्व मंजूरी की जरूरत कानून के उद्देश्य के विपरीत है।
जस्टिस विश्वनाथन का फैसला
धारा 17ए वैध, ईमानदार अफसरों के हाथ मजबूत होंगे जस्टिस विश्वनाथन ने अपने फैसले में कहा कि पीसी एक्ट की धारा 17 खत्म करना बच्चे को नहाने के पानी के साथ बाहर फेंकने जैसा होगा और इलाज बीमारी से भी बदतर होगा। उन्होंने कहा कि धारा 17ए संवैधानिक रूप से वैध है, इस शर्त के अधीन कि मंजूरी का फैसला लोकपाल या राज्य के लोकायुक्त द्वारा किया जाना चाहिए। जस्टिस विश्वनाथन के कहा कि कानून का यह प्रावधान ईमानदार अधिकारियों के हाथों को मजबूत करेगा, लेकिन यह भी सुनिश्चित करेगा कि भ्रष्ट लोगों को सजा मिले। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान गारंटी देगा कि प्रशासनिक तंत्र देश की सेवा के लिए सबसे अच्छी प्रतिभा को आकर्षित करे।

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