indian – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Mon, 03 Nov 2025 15:24:33 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg indian – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 अमेरिका के साथ व्यापार सौदा अब सिरदर्द बन गया है : कांग्रेस https://demo.theshikshanews.com/amerika-ke-saath-vyaapaar-sauda-ab-siradard-ban-gaya-hai-kaangres/ https://demo.theshikshanews.com/amerika-ke-saath-vyaapaar-sauda-ab-siradard-ban-gaya-hai-kaangres/#respond Mon, 03 Nov 2025 15:24:33 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5605 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। कांग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता संबंधी दावा एक बार फिर से किए जाने के बाद सोमवार को सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार सौदा अब तक नहीं हो सका और यह अब सिरदर्द बन गया है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि ट्रंप ने यह दावा 57 बार किया है।
रमेश ने एक अमेरिकी चैनल के साथ ट्रंप के साक्षात्कार से संबंधित एक वीडियो साझा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘एक समय था जब हमें बताया गया था कि भारत नवंबर, 2025 में क्वाड शिखर सम्मेलन (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत) की मेजबानी करेगा। अब ऐसा नहीं हो रहा है।’
⁠उन्होंने कहा कि एक समय था जब बताया गया था कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले शुरुआती पक्षों में से एक होगा, लेकिन यह कथित सौदा एक सिरदर्द की माफिक बन गया है जबकि अमेरिका को निर्यात में गिरावट आई है, जिससे यहां आजीविका का नुकसान हुआ है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने 57वीं बार दोहराया है कि ऑपरेशन सिन्दूर को अचानक और अप्रत्याशित रूप से क्यों और कैसे रोका गया। उस रोक की पहली घोषणा वाशिंगटन से हुई, न कि नई दिल्ली से।’
अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार यह दावा भी कर चुके हैं कि उन्होंने इस साल मई में शुल्क (टैरिफ़) की धमकी देकर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था।
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि इस साल मई में पाकिस्तानी सैन्य अभियान महानिदेशक ( डीजीएमओ) द्वारा संपर्क किए जाने पर सैन्य कार्रवाई रोकने पर विचार हुआ था।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/amerika-ke-saath-vyaapaar-sauda-ab-siradard-ban-gaya-hai-kaangres/feed/ 0
कमजोरों को दबाने की राजनीति लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा : खरगे https://demo.theshikshanews.com/kamajoron-ko-dabaane-kee-raajaneeti-lokatantr-ke-lie-gambheer-khatara-kharage/ https://demo.theshikshanews.com/kamajoron-ko-dabaane-kee-raajaneeti-lokatantr-ke-lie-gambheer-khatara-kharage/#respond Fri, 10 Oct 2025 18:03:48 +0000 https://www.khabariya.com/?p=5317 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों पर लगातार हमलों से स्पष्ट है कि देश में कमजोर वर्गों को दबाने की राजनीति चल रही है जो लोकतंत्र के लिए घातक है।
श्री खरगे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा “नरेन्द्र मोदी जी, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, 2013 से 2023 के बीच दलितों के खिलाफ़ अपराधों में 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आदिवासियों के खिलाफ़ 91 फीसदी अपराध बढ़ें हैं। हरियाणा में आईपीएस अधिकारी से जातिगत भेदभाव, हरिओम वाल्मीकि की प्रताड़ना, मुख्य न्यायाधीश पर हमला और उसको जायज़ ठहराने की भाजपाई सोच और भाजपा शासित राजस्थान के सवाई माधोपुर ज़िले में दलित बुजुर्ग महिला कमला देवी रैगर पर अत्याचार…ये सभी ताज़ा घटनाएँ सिर्फ़ अलग-अलग वारदातें नहीं हैं, बल्कि आरएसएस–भाजपा की सामंतवादी सोच का खतरनाक प्रदर्शन है।”
उन्होंने कहा कि यह सिलसिला संविधान, सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला है। दलित, पिछड़े, आदिवासी और वंचित समाज को डराकर दबाने की यह राजनीति लोकतंत्र के लिए गम्भीर खतरा है।
श्री खरगे ने कहा, भारत संविधान से चलेगा,न कि किसी कट्टर विचारधारा के फरमान से। दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक और कमज़ोर वर्ग इसका ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं और आप इन पर अपनी आँखे बंद कर अपने ही तमाशों में व्यस्त हैं।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/kamajoron-ko-dabaane-kee-raajaneeti-lokatantr-ke-lie-gambheer-khatara-kharage/feed/ 0
देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया दशहरा पर्व https://demo.theshikshanews.com/desh-mein-harshollaas-ke-saath-manaaya-gaya-dashahara-parv/ https://demo.theshikshanews.com/desh-mein-harshollaas-ke-saath-manaaya-gaya-dashahara-parv/#respond Fri, 03 Oct 2025 04:27:10 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5223 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. New Delhi। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व गुरुवार को देश भर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर अनेक स्थानों पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले जलाये गये। इसके साथ ही मेघनाद और कुम्भकरण के पुतलों का भी दहन किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राजधानी में लाल किले के पास स्थित परेड ग्राउंड पर आयोजित दशहरा समारोह में शामिल हुईं। उन्होंने वहां प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाकर रावण दहन किया। श्रीमती मुर्मु ने इस अवसर लोगों को विजयादशमी की बधाई दी। उन्होंने इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बताया और कहा कि पहलगाम हमले के बाद हुआ ऑपरेशन सिंदूर भी इसी तरह बुराई पर अच्छाई की जीत है। उन्होंने कहा, “हम हर साल रावण जलाते हैं लेकिन हर साल रावण फिर जीवित हो जाता है। हमें अपने भीतर के रावण को दोबारा आने से रोकना होगा।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यहां आई पी एक्सटेन्शन में आयोजित दशहरा समारोह में शामिल होने का कार्यक्रम था लेकिन संभवत: भारी बारिश के कारण उनका कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक दशहरा समारोह में शामिल होना था लेकिन उन्हें भी अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में रामलीला ग्राउंड पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में सम्मिलित हुये। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में विजयदशमी के विशिष्ट पूजन के क्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को मंदिर की गोशाला में गोपूजन किया।
गोमाता के माथे पर तिलक लगाकर उनका आशीर्वाद लिया। पूजनोपरांत मुख्यमंत्री ने गोमाता को प्रेम और श्रद्धाभाव से गुड़, पूड़ी और चावल का लड्डू खिलाकर उनकी सेवा की।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के परेड ग्राउंड पर रावण दहन कार्यक्रम में शिरकत की। तेलंगाना में गुरुवार को विभिन्न स्थानों पर दशहरा उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया।तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विजयादशमी के अवसर पर राज्य के लोगों को शुभकामनायें दी हैं।महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी दुर्गा के मंदिरों में उमड़े और इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की। यह नवरात्र के समापन और राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सहित कई प्रमुख नेताओं ने जुबली हिल्स स्थित अपने आवास पर आयोजित आयुध पूजा कार्यक्रम में भाग लिया।
इस दिन शमी पूजा, आयुध पूजा और वाहन पूजा जैसे अनुष्ठान किये गये। लोगों ने एक-दूसरे को शमी के पत्ते दिये, एक-दूसरे को बधाई दी और त्योहार की शुभकामनायें दीं। कई स्थानों पर रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया।शाम को राजधानी में हुई बारिश से दशहरा से जुड़े कार्यक्रमों में कुछ बाधा पड़ी, लेकिन रावण दहन कार्यक्रम संपन्न किये गये। बिहार की राजधानी पटना में भी बारिश की वजह से दशहरे पर होने वाले कार्यक्रमों में खलल पड़ी।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/desh-mein-harshollaas-ke-saath-manaaya-gaya-dashahara-parv/feed/ 0
जात-पात पर यूपी सरकार का स्वागत योग्य फैसला, पर… https://demo.theshikshanews.com/jaat-paat-par-yoopee-sarakaar-ka-svaagat-yogy-phaisala-par/ https://demo.theshikshanews.com/jaat-paat-par-yoopee-sarakaar-ka-svaagat-yogy-phaisala-par/#respond Tue, 23 Sep 2025 14:06:10 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5135 अर्जुन देशप्रेमी
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने जिस तरह से कदम उठाते हुए जाति व्यवस्था के सम्बन्ध में आदेश जारी किया है, उसके दूरगामी परिणाम संभव हैं, वशर्ते सरकार जातीय राजनीति और जाति आधारित अपने ही गठवंधन की पार्टियों के दवाब में न आ जाये। अगर सरकार किसी दवाब में नहीं आती है, तो यह देश के लिए एक बड़ा और बेहतर कदम होगा जिसके अच्छे परिणाम आने वाले वर्षों में दिखेंगे। पर इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार भी इस मामले में कुछ कदम उठाये।
दरअसल इलाहाबाद फैसला हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जो कदम उठाया है, उसके तहत उत्तर प्रदेश में अब जाति बताना महंगा पड़ेगा। यादव, ब्राह्मण-बनिया से लेकर तमाम जातियों के नाम पर रैलियां नहीं हो सकेंगी। इतना ही नहीं अब पुलिस एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो, सार्वजनिक स्थानों और सरकारी दस्तावेजों में जाति का उल्लेख नहीं होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जातिगत महिमामंडन को राष्ट्र-विरोधी करार देते हुए इसे समाप्त करने का आदेश दिया था। निर्देश के मुताबिक, सोशल मीडिया, इंटरनेट पर भी जाति का महिमामंडन या नफरत फैलाने वाले कंटेंट के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। आरोपी की पहचान के लिए पिता के साथ मां का नाम भी लिखा जाएगा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के क्राइम क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) में जाति वाले कॉलम को खाली छोड़ा जाएगा। गाड़ियों पर जाति का महिमंडन करना बैन होगा। नोटिस बोर्ड और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर जाति आधारित नारों या महिमामंडन या आलोचना बैन रहेगी। सिर्फ एससी/एसटी एक्ट जैसे मामलों में जाति का उल्लेख जरूरी होने के कारण इस आदेश से उसमें छूट रहेगी।
हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में जाति व्यवस्था को लेकर सख़्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि समाज में जातिगत महिमामंडन बंद किया जाना चाहिए। कोर्ट ने सरकारी दस्तावेज़ों, गाड़ियों और सार्वजनिक जगहों से भी जातियों का नाम, प्रतीक और निशान हटाने को कहा था।  कोर्ट का कहना था कि अगर देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो जाति व्यवस्था को ख़त्म करना होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता प्रवीण छेत्री की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जातिगत महिमामंडन ‘राष्ट्र-विरोधी’ है और वंश के बजाए संविधान के प्रति श्रद्धा ही देशभक्ति का सर्वोच्च रूप और राष्ट्र सेवा की सच्ची अभिव्यक्ति है।
इसी के बाद राज्य सर्कस्र ने आदेश जारी किये हैं। पर इन कदमों के बाद भी सवाल है कि क्या इसपर सचमुच में अमल हो पायेगा? अगर पिछले कुछ उदाहरणों को देखें तो ऐसा नहीं लगता है कि यह कारगर हो पायेगा। जातियों के दलदल में फंसे देश में ऐसी मुहिमें अक्सर दम तोड़ती रही हैं। इसके उलट देश के नेता अपने कार्यों से देश को जातियों में बांटने का काम ही करते रहते हैं जिनमे देश के प्रधानमंत्री के पद पर बैठने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह जैसे नेता भी हैं जिन्होंने सत्ता के लिए देश को एक झटके में सैकड़ों जातियों के आग के हवाले कर दिया था।
बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र ने 1982 के आसपास अपने नाम से मिश्र हटा लिया ताकि जाति प्रथा को ख़तम किया जा सके। उनके आह्वान पर हजारों बच्चों के नाम से जातिसूचक शब्द (सरनेम) हटाये गए। पर वही डॉ जगन्नाथ वोटों के लोभ में फिर से डॉ जगन्नाथ मिश्र बन गए जो जीवनपर्यंत बने रहे। बिहार के एक और मुख्यमंत्री पहले लालू प्रसाद थे। आज भी उनका सरकारी नाम लालू प्रसाद ही है। पर उन्होंने अपने नाम को लालू यादव ही प्रचलित किया। इसके बाद तो विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल कमीशन के नाम पर जो जातीय ज़हर बोया उसका परिणाम आजतक देश भुगत रहा है।
कई दशक पहले चौधरी चरण सिंह ने लोक सेवक के नाम के आगे जाति का उल्लेख न करने का प्रस्ताव लाया था। कांग्रेस ने फरवरी 1951 में तय किया कि पार्टी का कोई भी सदस्य किसी भी जातीय संस्था या संगठन से नहीं जुड़ेगा। यही हाल कम्युनिस्ट दलों का भी था। कांग्रेस ने तो नारा दिया था – “जात पर न पात पर मुहर लगेगी हाथ पर।” पर आज वही कांग्रेस जातीय जनगणना के लिए मरी जा रही है। इसी तरह चौधरी चरण सिंह के उत्तराधिकारियों ने ही जातीय गोलबंदी की। जातिवाद के धुर विरोधी चौधरी चरण सिंह की विरासत संभालने वाले राजनीतिक दलों ने जातीय संगठनों के बूते ही अपने दलों का विस्तार किया। आज देश में ज्यादातर दलों का आधार ही उनका जातीय समीकरण है। राजद और सपा का तो समीकरण ही मुस्लिम-यादव है। मायावती, चंद्रशेखर रावण, रामविलास पासवान-चिराग पासवान का समीकरण दलित हैं। ऐसे ही अनेक और दल हैं जो जाति के बिना राजनीति कर ही नहीं सकते हैं। अभी कुछ दिनों पूर्व ही उत्तर प्रदेश में एक जाति विशेष के विधायकों ने अपना एक मंच बनाया था। मजे की बात कि इसमें भाजपा समेत सभी दल के उसी जाति के विधायक पहुंचे। धीरे-धीरे यह प्रक्रिया साहित्य, कला व पत्रकारिता के क्षेत्र में भी आने लगेगी। दिन-ब-दिन जाति का यह स्वरूप भयानक होता जा रहा है।
लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ का दंभ भरने वाले समाचार पत्रों और चैनलों क हाल यह है कि ये चुनावों के समय ही नहीं, पूरे साल कहाँ किस जाति के कितने वोटर हैं, के आधार पर ही विश्लेषण में लगे रहते हैं। इसके बिना इनका पेट ही नहीं भरता है। इसी आंकड़े के आधार पर ये अपने को ज्ञानी मानते हैं। इसी तरह हर खबर के पीछे जात खोजते हैं कि मरने वाला किस जाति का था, मारने वाला किस जाति का था, बलात्कार किस जाति की महिला का हुआ और किस जाति के मर्द ने बलात्कार किया। किस जाति को कितना मंत्री पद मिला, तो किस जाति के कितने लोग किस नौकरी में लगे। अगर केंद्र सिर्फ मीडिया में जाति-जाति के रटंत पर रोक लगा दे, तो काफी हद तक देश में फ़ैल रहे जातीय उन्माद पर रोक लग सकती है। पर सवाल है कि क्या केंद्र इस पर कुछ सोचेगा? इसी तरह के आदेश जारी करेगा? या उत्तर प्रदेश सरकार का ताज़ा फैसले कुछ समय बाद अपनी स्वाभाविक मौत मर जायेगा?
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

]]>
https://demo.theshikshanews.com/jaat-paat-par-yoopee-sarakaar-ka-svaagat-yogy-phaisala-par/feed/ 0
जनसंख्या नियंत्रण पर तीन बच्चों की सीमा जरूरी : मोहन भागवत https://demo.theshikshanews.com/janasankhya-niyantran-par-teen-bachchon-kee-seema-jarooree-mohan-bhaagavat/ https://demo.theshikshanews.com/janasankhya-niyantran-par-teen-bachchon-kee-seema-jarooree-mohan-bhaagavat/#respond Thu, 28 Aug 2025 16:29:46 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4886 नई दिल्ली, 28 अगस्त (वेब वार्ता)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण और संतुलन समाज तथा राष्ट्र के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर परिवार को अधिकतम तीन बच्चों तक सीमित रहना चाहिए ताकि जनसंख्या पर्याप्त और नियंत्रित बनी रहे।
डॉ. भागवत विज्ञान भवन में गुरुवार को तीन दिवसीय व्याख्यान शृंखला ‘100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज’ के तीसरे दिन जिज्ञासा समाधान सत्र में प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि केवल संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसके पीछे का इरादा भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा, “जनसंख्या से ज्यादा इरादा क्या है, यह महत्वपूर्ण है। जनसंख्या में असमानता कभी-कभी गंभीर परिणाम देती है, यहां तक कि विभाजन जैसी परिस्थितियां भी पैदा कर सकती है। हमें इस पर गहराई से विचार करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि भारत में जनसंख्या असंतुलन का एक कारण जबरन या लालच देकर किए गए मतांतरण भी हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “धर्म व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन यदि किसी को बलपूर्वक बदला जाता है तो यह गलत है। इसे रोकना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।”
घुसपैठ के विषय पर सरसंघचालक ने कहा कि हर देश की तरह भारत के भी अपने कानून और सीमित संसाधन हैं। ऐसे में अवैध प्रवास स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है, लेकिन समाज को भी सजग होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अवैध प्रवासियों की पहचान करनी होगी, शिकायत करनी होगी और उन्हें रोजगार नहीं देना चाहिए। यदि रोजगार देना है तो सबसे पहले अपने ही देश के नागरिकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”
डॉ. भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत में सभी नागरिकों को रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि कोई व्यक्ति कानूनी रूप से अनुमति लेकर आता है तो उसे काम मिल सकता है, लेकिन अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने जन्म दर को नियंत्रित रखने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि 2.1 का आंकड़ा सभ्यता को बनाए रखने के लिए आदर्श माना जाता है, जो व्यवहारिक रूप से तीन बच्चों के बराबर है। उन्होंने कहा, “बच्चे तीन होने चाहिए और उससे ज्यादा नहीं। यह विचार सभी को स्वीकार करना होगा। संसाधनों का संतुलित उपयोग और समाज में स्थिरता बनाए रखने के लिए जनसंख्या का नियंत्रित रहना आवश्यक है।”
डॉ. भागवत ने भाषा और संस्कृति पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जन्मी सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। उन्होंने कहा कि व्यवहार और संपर्क के लिए एक सामान्य भारतीय भाषा होनी चाहिए, पर वह विदेशी भाषा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अंग्रेजी सीखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन अपनी मातृभाषा और संस्कृति का त्याग नहीं करना चाहिए।”

]]>
https://demo.theshikshanews.com/janasankhya-niyantran-par-teen-bachchon-kee-seema-jarooree-mohan-bhaagavat/feed/ 0
जेल से सरकार चलाने की इज़ाज़त दे दी जाये? https://demo.theshikshanews.com/jel-se-sarakaar-chalaane-kee-izaazat-de-dee-jaaye/ https://demo.theshikshanews.com/jel-se-sarakaar-chalaane-kee-izaazat-de-dee-jaaye/#respond Tue, 26 Aug 2025 15:25:11 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4861 अर्जुन देशप्रेमी

सरकार ने संविधान (130वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया है, जिसमें प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और अन्य मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ़्तार और हिरासत में रखने पर पद से हटाने का प्रस्ताव है।
हालाँकि इस विधेयक को समीक्षा के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है। पर इसे लेकर विपक्षी दलों में भारी विरोध देखा जा रहा है। इसपर विपक्ष ने जिस तरह से आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उसे नज़रंदाज़ भी नहीं किया जा सकता। दूसरी तरफ सरकार की मंशा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। दोनों ही पक्ष अपने अपने तर्कों में सही दिखते हैं।
पर सवाल जस का तस है कि क्या जेल से सरकार चलाई जा सकती है? अगर हाँ, तो यह कहाँ तक न्यायोचित होगा? और नहीं, तो फिर ऐसा कानून क्यों नहीं आना चाहिए? प्रश्न यह भी है कि क्या पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर कोई बीच का रास्ता निकालेंगे?
दरअसल यह बिल आया ही है एक ऐसी स्थिति से निपटने के लिए जिसकी कल्पना हमारे संविधान निर्माताओं ने शायद नहीं की थी। अगर उन्होंने सपने में भी उस स्थिति की कल्पना की होती तो वे संविधान में इससे निपटने के लिए कोई न कोई व्यवस्था जरूर कर देते। पर अब स्थिति यह है कि तमाम नैतिकताओं को ताखे पर रखकर नेता लोग जेल से सरकार चलाने पर उतारू हो गए हैं।
परिपाटी यह रही है कि जब भी किसी मंत्री या मुख्यमंत्री या केंद्रीय मंत्री की गिरफ्तारी की स्थिति बनती थी, मंत्री खुद ही इस्तीफा दे देते थे या फिर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री अपने मंत्री से इस्तीफा ले लेते थे या उसे बर्खास्त कर देते थे। जब वे जेल से बाहर आते थे तब दुबारा पद पर आ जाते थे।
इसी तरह मुख्यमंत्री भी ऐसी स्थिति होने पर खुद से इस्तीफ़ा दे देते थे और जेल से बाहर आने पर फिर मुख्यमंत्री बन जाते थे। पर हाल के वर्षों में ऐसा हुआ कि मंत्री और मुख्यमंत्री जेल में महीनों रहे, पर पद से इस्तीफ़ा नहीं दिया। जेल में रहे और मुख्यमंत्री या मंत्री के तौर पर रहे। इस दौरान राज्यों का भले ही बेडा गर्क क्यों न होता रहा हो।
सबसे बड़ा उदाहरण अरविन्द केजरीवाल का ही है जो 177 दिनों तक जेल में रहे, पर मुख्यमंत्री का पद नहों छोड़ा। अदालतों में लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक गई। पर संविधान और कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था जो इन्हें बाध्य करता की वे पद छोड़ते या बर्खास्त कर दिए जाते या फिर सुप्रीम कोर्ट इन्हें पद छोड़ने के लिए कोई आदेश या निर्देश दे पाता। ऐसा ही अरविन्द केजरीवाल के दो मंत्रियों और तमिलनाडु के एक मंत्री के मामले में भी हुआ। थक हारकर कोर्ट को इंगित करना पड़ा कि इस सम्बन्ध में कानून होना चाहिए। और इसी क्रम में केंद्र सरकार विधेयक (बिल) लेकर आयी है जिसपर पूरा विपक्ष हंगामा कर रहा है।
विधेयक के अनुसार, यदि किसी मंत्री को पाँच या अधिक वर्षों की सज़ा वाले अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक गिरफ़्तार और हिरासत में रखा जाता है, तो उसे 31वें दिन पद से हटाना अनिवार्य है। यदि किसी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को लगातार 30 दिनों तक गिरफ़्तार और हिरासत में रखा जाता है, तो विधेयक के अनुसार उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफ़ा देना होगा।
यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो वे स्वतः ही पद से हट जाएँगे। समान परिस्थितियों का सामना करने वाले अन्य केंद्रीय या राज्य मंत्रियों के लिए, विधेयक अलग निष्कासन प्रक्रियाओं को निर्दिष्ट करता है जिसके अनुसार केंद्रीय मंत्रियों को प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जाएगा जबकि राज्य के मंत्रियों को राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर हटाएँगे। विधेयक में प्रावधान है कि यदि कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री राष्ट्रपति या राज्यपाल को किसी मंत्री को हटाने की सलाह नहीं देता है, तो 30 दिनों की नज़रबंदी के बाद वह मंत्री स्वतः ही पद से हट जाएगा।
इसी विधेयक का विपक्षी दलों द्वारा विरोध किया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि सत्ता पक्ष जब चाहेगा किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ अपनी एजेंसियों से मुकदमे लदवाकर उसे 30 दिन तक हिरासत में रखवा देगा और जमानत नहीं होने देगा।
ऐसे में निर्दोष होने के बाद भी उस मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ेगा या उसे हटा दिया जायेगा। एक तरह से यह विरोधियों के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जायेगा। इस कानून का दुरुपयोग सत्ता पक्ष करेगा।
विपक्ष के इस दावे में दम भी है, यह हवा हवाई नहीं है। जिस तरह से मुकदमे लादे जा सकते हैं और लादे भी गए हैं, उससे यह आशंका बलवती होती है। पर सवाल है कि सिर्फ इस शंका के कारण जेल से सरकार चलाने की छूट मिलनी चाहिए? और सवाल तो यह भी है कि क्या कांग्रेस या तीसरे मोर्चों की सरकारों के दौरान कोई ऐसा कानून नहीं बना है जिसका दुरुपयोग नहीं हुआ है, या दुरुपयोग नहीं हो रहा है? सच तो यह है कि देश में शायद ही ऐसा कोई कानून बना हो जिसका दुरुपयोग न हुआ हो या न हो रहा हो। एससी/एसटी एक्ट, दहेज निषेध अधिनियम आदि इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इनके दुरुपयोग की गाथाएं हर गली-मोहल्ले में सुनाई देती हैं।
ऐसे ही दूसरे लगभग सभी कानूनों में है। और फिर तो दुरुपयोग के डर से कभी कोई कानून बनना ही नहीं चाहिए। यदि जनता के लिए बने कानूनों के दुरुपयोग को अगर नज़रंदाज़ किया गया है तो फिर नेताओं के लिए बनने वाले कानून के दुरुपयोग की शंका को नज़रंदाज़ क्यों नहीं किया जा सकता है। और फिर देश में क़ानून का ही राज है।
आपको लगता है कि इस कानून का दुरुपयोग किया गया है तो कोर्ट में अपनी बात रखिये, 30 दिन के भीतर कोर्ट से जमानत या राहत ले लीजिये, बने रहिये पद पर। इस दौरान आपकी पार्टी का कोई दूसरा नेता मंत्री या मुख्यमंत्री बना रहेगा। और कोर्ट यदि जमानत या राहत नहीं देती तो पद छोडिये। इसमे समस्या क्या है? और फिर, यह कानून तो सभी दलों पर लागू होगा।
भाजपा जब विपक्ष में जायेगी तब उनपर भी यही बात लागू होगी। फिर इससे डरना क्यों? जब भाजपा नहीं डर रही है तो विपक्ष क्यों डर रहा है? या विपक्ष मान रहा है कि वह कभी भी केंद्र की सत्ता में आयेगा ही नहीं, आजीवन केंद्र की सत्ता में भाजपा ही रहेगी? या ऐसा कानून बनाने ही नहीं दिया जाये और जेल से सरकार चलाने की इज़ाज़त दे दी जाये?
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

]]>
https://demo.theshikshanews.com/jel-se-sarakaar-chalaane-kee-izaazat-de-dee-jaaye/feed/ 0
भारतीय क्रिकेट टीम पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने पहुंची ब्रिटेन https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%9a-%e0%a4%9f/ https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%9a-%e0%a4%9f/#respond Sat, 07 Jun 2025 14:58:11 +0000 http://www.khabariya.com/?p=3717 Webvarta. Khabariya. NCR Today. Landon। भारतीय क्रिकेट टीम आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) 2025-27 चरण की शुरुआत करने इंग्लैंड के खिलाफ अपनी बहुप्रतीक्षित पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने लंदन पहुंच गई है।
शुक्रवार रात मुंबई से रवाना हुई भारतीय क्रिकेट टीम शुभमन गिल की अगुवाई में आज ब्रिटेन पहुंच गई। रोहित शर्मा के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद शुभमन गिल को टीम का कप्तान और ऋषभ पंत को उप-कप्तान बनाया गया है।
तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी के नाम वाली इस श्रृंखला का पहला टेस्ट 20 जून को लीड्स के हेडिंग्ले में शुरू होगा, उसके बाद एजबेस्टन (दो से छह जुलाई), लॉर्ड्स (10-14 जुलाई), ओल्ड ट्रैफर्ड (23-27 जुलाई) और द ओवल (चार से आठ अगस्त) में मैच खेले जाएंगे।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया है जिसमें भारतीय के खिलाड़ी मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ हवाई अड्डे पर नजर आ रहे हैं। साझा किये गये एक वीडियो में साई सुदर्शन ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना अच्छा है, विशेषकर टेस्ट सीरीज में। ब्रिटेन में आपका स्वागत है।”
इस दौरे पर सबकी नजर है क्योंकि भारतीय क्रिकेट एक महत्वपूर्ण बदलाव का दौर में है। इंग्लैंड पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम में अनुभव और युवाओं के मिश्रण है। भारतीय टीम अपने डब्ल्युटीसी अभियान को मजबूती से शुरूआत करते हुए इंग्लैंड की धरती पर चुनौती पेश करना चाहेगी।

]]>
https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%9a-%e0%a4%9f/feed/ 0