Indian Parliament – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Mon, 01 Dec 2025 14:40:44 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Indian Parliament – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 संसद को चुनावी हार-जीत की निराशा, अहंकार का अखाड़ा न बनने दें : मोदी https://demo.theshikshanews.com/sansad-ko-chunaavee-haar-jeet-kee-niraasha-ahankaar-ka-akhaada-na-banane-den-modee/ https://demo.theshikshanews.com/sansad-ko-chunaavee-haar-jeet-kee-niraasha-ahankaar-ka-akhaada-na-banane-den-modee/#respond Mon, 01 Dec 2025 14:40:44 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5907 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि उन्हें चुनावी हार-जीत के परिणामों से बाहर निकलकर इसकी निराशा या अहंकार का अखाड़ा संसद को नहीं बनाना चाहिए और जनता की आकांक्षाओं तथा लोकतंत्र की मर्यादाओं के अनुरूप संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि संसद का महत्वपूर्ण शीतकालीन सत्र शांतिपूर्ण ढंग से चलेगा और सभी सदस्य देश की प्रगति के लिए तथा चुने हुये प्रतिनिधियों को अपनी अभिव्यक्ति का अवसर देने के लिए सदन को चलाने में अपना सहयोग करेंगे।
श्री मोदी ने सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले संसद भवन परिसर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र तेज गति से आगे बढ़ रहा है और इसे और आगे बढ़ने की ऊर्जा देने का काम शीतकालीन सत्र करेगा, उन्हें ऐसा उन्हें विश्वास है। चुनावी हार जीत लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन संसदीय लोकतंत्र की मजबूती का दायित्व हम सबकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि निजी एजेंडे के लिए संसद की कार्यवाही बाधित नहीं होनी चाहिए। नये सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए और सदन के कार्यवाही बाधित कर उनके अवसर को छीना नहीं जाना चाहिए। इस नए सांसदों को अभिव्यक्ति का अवसर दीजिए अपनी निराशा और अपनी पराजय में सांसदों को बली मत बनने दिजिये।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के प्रति विश्वास मजबूत होता रहता है और ऐसा समय-समय पर कुछ न कुछ देखने को मिलता है। उन्होंने बिहार विधानसभा में हए भारी मतदान का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा के चुनाव में मतदान जिस रिकॉर्ड के साथ हुआ वह लोकतंत्र में नया विश्वास पैदा करता है। बड़ी बात यह है कि चुनाव में माता बहने ज्यादा हिस्सा ले रही हैं।
श्री मोदी ने कहा कि इस सत्र में यह पता चलना है कि संसद और संसद सदस्य देश के लिए क्या सोचते हैं। वे देश के लिए क्या करने वाले हैं और क्या कर रहे हैं। विपक्ष भी अपना दायित्व निभाए और मजबूत मुद्दे उठाकर लोकतंत्र को मजबूत बनाए। उसे पराजय की निराशा से बाहर आकर लोकतंत्र की मजबूती के लिए काम करना है लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि एकाध दल तो निराशा से बाहर ही नहीं आ पा रहे हैं, उनके बयानों से यही लगता है। पराजय से निराश होकर संसद को उसका अखाड़ा नहीं बनाना है और नहीं विजय के अहंकार में डूब कर अपने दायित्व को भूलना है।
उन्होंने कहा कि देश के लिए सबको मिलकर बेहतर काम करना चाहिए और सदन में इसका परिचय देना चाहिए। संसद में जब हंगामा होता है तो सदस्यों को अपनी बात कहने का मौका नहीं मिलता है। नये सांसदों को मौका देना चाहिए और उनके अनुभव और नयी पीढ़ी का जो जोश है उसका लाभ देश को मिलना चाहिए। संसद में ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए। नारे लगाने हैं तो पूरा देश खाली पड़ा है वहां नारे लगाए लेकिन संसद में नारे नहीं नीति पर बल देना चाहिए। नकारात्मकता भले ही किसी के काम कभी आ जाय है लेकिन देश के लिए सकारात्मक रूप से सोचना होगा और मर्यादा में रहकर काम करना होगा।
श्री मोदी ने कहा कि राज्यसभा के नए सभापति सीपी राधाकृष्णन पहली बार सदन की कार्यवाही का संचालन करेंगे उनके अनुभव का लाभ सबको मिलेगा ऐसा उनको विश्वास है।
उन्होने ने कहा कि पिछले कुछ समय से सदन को पराजय की बौखलाहट के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। सत्ता में रहने की बौखलाहट संसद में दिख रही है। जनता को अपनी बात नहीं बता पा रहे हैं और सारा गुस्सा सदन में उतार रहे हैं। यह नयी परंपरा शुरू की जा रही है और यह ठीक नहीं है। पिछले 10 सालों से जो खेल चल रहा है वह देश को स्वीकार नहीं है इसलिए रणनीति बदलने की उन्हें जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से शांतिपूर्ण तरीके से सदन को चलाने में सहयोग करने की अपील की और उन्हें उम्मीद है कि सभी सांसदों को सदन में अभिव्यक्ति का अवसर देंगे और अपनी पराजय की निराशा को सदन नारे लगाकर व्यक्त नहीं करेंगे।

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संसद सत्र: जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू https://demo.theshikshanews.com/sansad-satr-jastis-varma-ke-khilaaph-mahaabhiyog-kee-prakriya-shuroo/ https://demo.theshikshanews.com/sansad-satr-jastis-varma-ke-khilaaph-mahaabhiyog-kee-prakriya-shuroo/#respond Tue, 12 Aug 2025 15:26:48 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4728 लोकसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव स्वीकार कर समिति का किया गठन समिति की समय सीमा तय नहीं, यथा शीघ्र देगी अपनी रिपोर्ट
NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए कई सांसदों की तरफ से दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार, चेन्नई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता बीबी आचार्य शामिल हैं। समिति को रिपोर्ट देने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि समिति यथाशीघ्र अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। 146 सांसदों ने दिया था महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने तक जस्टिस वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव लंबित रहेगा। इससे पहले उन्होंने कहा कि 31 जुलाई को भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के 146 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव मिला है।
सदस्यों की तरफ से दिए गए इस प्रस्ताव में जस्टिस यशवंत वर्मा को न्यायाधीश जांच अधिनियम 1968 की धारा 3 के साथ संविधान के अनुच्छेद 124 (4) के साथ पठित अनुच्छेदों 217 और 218 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति को एक समावेदन प्रस्तुत करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ने 15 मार्च को न्यायमूर्ति वर्मा के दिल्ली स्थित आवास से जली हुई नकदी मिलने की घटना का पूरा विवरण भी पढ़ा। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर जले हुए नोट मिलने के बाद उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेज दिया गया था।
तथ्य गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं: बिरला लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान मामले से जुड़े तथ्य गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं। संसद को इस मुद्दे पर एक स्वर में बोलना चाहिए और देश की जनता को भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने का अपना संदेश भेजना चाहिए। इसके बाद उन्होंने जांच के लिए समिति के गठन का ऐलान किया। ओम बिरला ने कहा कि बेदाग चरित्र और वित्तीय एवं बौद्धिक ईमानदारी न्यायपालिका में आम आदमी के विश्वास की नींव है। उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है और न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 की धारा 3 (2) के अनुरूप जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति संसद में रिपोर्ट पेश करेगी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली समिति पूरे मामले की जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी।
जांच समिति न्यायाधीश को दोषी नहीं पाती है, तो आगे की कार्रवाई नहीं की जाती। समिति दोषी पाती है, तो सदन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकता है। सदन में प्रस्ताव पर बहस के दौरान न्यायाधीश (या उसके प्रतिनिधि) को अपना पक्ष रखने का अधिकार है। उसके बाद प्रस्ताव पर मतदान होता है। यदि मतदान करने वालों का दो-तिहाई समर्थन और सदन की कुल संख्या का बहुमत प्राप्त हो, तो प्रस्ताव पारित माना जाता है। इसके बाद यह प्रक्रिया दूसरे सदन में भी दोहराई जाती है। कौन हैं समिति के अध्यक्ष न्यायाधीश अरविंद कुमार?
न्यायाधीश अरविंद कुमार 16 वर्षों से अधिक समय तक न्यायाधीश रहे हैं। उन्होंने 13 फरवरी, 2023 को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। वह 13 जुलाई 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने इससे पहले गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया था। न्यायमूर्ति कुमार को 26 जून 2009 को कर्नाटक उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। सात दिसंबर, 2012 को उन्हें स्थायी नियुक्ति दी गई। 1987 में वकालत शुरू की 14 जुलाई 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति कुमार ने 1987 में वकालत शुरू की और 1999 में कर्नाटक उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता नियुक्त हुए। उन्हें 2005 में भारत का सहायक सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया।

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