government – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Thu, 06 Nov 2025 04:03:04 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg government – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 हरियाणा में 25 लाख वोटों की गड़बडी से बनायी गयी अवैध सरकार : राहुल https://demo.theshikshanews.com/hariyaana-mein-25-laakh-voton-kee-gadabadee-se-banaayee-gayee-avaidh-sarakaar-raahul/ https://demo.theshikshanews.com/hariyaana-mein-25-laakh-voton-kee-gadabadee-se-banaayee-gayee-avaidh-sarakaar-raahul/#respond Thu, 06 Nov 2025 03:52:36 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5663 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि देश में किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र नहीं, राज्य स्तर पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर वोटों की हेराफेरी हो रही है। इसी क्रम में हरियाणा विधानसभा चुनाव में 25 लाख वोटों में गड़बड़ी की गयी है।
श्री गांधी ने बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह जिस प्रमाण के साथ वोट चोरी का विवरण दे रहे हैं उससे साफ होता है कि हरियाणा में चुनाव नहीं हुए, बल्कि 100 फीसदी प्रमाणों से साबित होता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा तथा चुनाव आयोग ने मिलकर लोकतंत्र को ध्वस्त किया है। हरियाणा में वोटों की चोरी कर वहां भाजपा की सरकार बनाई है।
उनका कहना था कि वोट चोरी का यह काम बहुत गहरी साजिश और रणनीति के तहत किया गया है। इसके पुख्ता प्रमाण हैं कि पूरे राज्य में कैसे वोटों को चुराया गया है। उम्मीदवारों से हरियाणा में बहुत सारी शिकायतें उन्हें मिलती रहीं हैं और कई उम्मीदवारों ने अनियमितताओं की सूचना भी उस समय दी थी। इसी तरह से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मतदान हुआ है। इन सब राज्यों में भाजपा ने व्यवस्थित तरीके से वोट चोरी का काम करवा कर मतदान कराया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जिस तरह के प्रमाण कांग्रेस ने फर्जी वोटरों को लेकर जुटाए हैं उससे साफ हो गया है कि हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में मुख्यमंत्री लोकतांत्रिक तरीके से नहीं बने हैं। वोट चोरी करके उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी दी गई है। इन सब राज्यों में कांग्रेस की भारी जीत को हार में बदलने की योजना एक सोची समझी रणनीति के तहत बनी थी।
उन्होंने कहा “आश्चर्य की बात है कि एग्जिट पोल में हरियाणा में कांग्रेस की जीत की बात हो रही थी। एग्जिट पोल काफी सटीक होते हैं। हरियाणा के चुनावी इतिहास में पहली बार, डाक मत वास्तविक मतदान से भिन्न थे और राज्य के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। हमने सोचा कि चलो विवरण में चलते हैं। जब मैंने पहली बार यह विवरण देखा तो मुझे इस पर विश्वास नहीं हो रहा था और मैं सदमे में था इसलिए मैंने विवरण तैयार कर रही अपनी टीम से कई बार क्रॉस-चेक करने के लिए कहा।”
श्री गांधी ने हरियाणा में एक महिला का जिक्र किया और दावा किया कि यह महिला ब्राजील की है और वह एक मॉडल है जिसका नाम हरियाणा की मतदाता सूची में है। उसके नाम से बनाये गये फर्जी वोटर कार्ड पर दस बूथों पर 22 बार वोट डाले गये हैं। इसका मतलब है कि यह काम केंद्रीय स्तर पर हो रहा है इसलिए ब्राजील की महिला के नाम पर एक नहीं बल्कि 22 बार वोट डाले गये हैं। इस तरह हरियाणा में 25 लाख फर्जी वोट डाले गये।

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राजद-कांग्रेस सरकार की गलतियों से कोशी के लोग एक दशक तक उपेक्षित रहे: नरेंद्र मोदी https://demo.theshikshanews.com/raajad-kaangres-sarakaar-kee-galatiyon-se-koshee-ke-log-ek-dashak-tak-upekshit-rahe-narendr-modee/ https://demo.theshikshanews.com/raajad-kaangres-sarakaar-kee-galatiyon-se-koshee-ke-log-ek-dashak-tak-upekshit-rahe-narendr-modee/#respond Mon, 03 Nov 2025 17:04:21 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5630 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Sarhasa। बिहार में अपने चुनाव अभियान के दौरान सोमवार को सहरसा में प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद)-कांग्रेस सरकार की गलतियों से कोशी क्षेत्र के लोग एक दशक तक उपेक्षित रहे।
श्री मोदी ने कहा कि कोशी क्षेत्र के जिलों सहरसा, पूर्णिया, सुपौल, अररिया और मधेपुरा की उपेक्षा पर सबसे पहली नजर अटल बिहारी वाजपेयी की केंद्र सरकार की पड़ी थी। इसके बाद उनकी सरकार ने 2003 कोशी पुल का शिलान्यास किया जो इस क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। उन्होंने कहा कि 2005 में बिहार ने राजद की सरकार सत्ता से बाहर हो गयी और नीतीश कुमार की सुशासन वाली सरकार ने प्रदेश मे कमान सम्हाला। उंस समय 2004 में केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार जा चुकी थी और कांग्रेस पार्टी के नेता नए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राजद की बैशाखी ले कर सरकार चला रहे थे। उन्होंने कहा कि 2005 में बिहार की सत्ता से बाहर होने के बाद आगबाबूली राजद की सरकार ने केंद्र की सरकार पर दबाव डाला कि वह बिहार में विकास की गति को अवरुद्ध कर दे और इसी वजह से कोशी नदी के ऊपर बन रहे विशाल पुल का निर्माण भी ठप हो गया उन्होंने कहा कि 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनने के बाद पुनः कोशी पुल का निर्माण शुरू हुआ और 2020 में इसका शुभारंभ हुआ। उन्होंने कहा कि राजद-कांग्रेस की मिलीभगत और उपेक्षा के कारण कोशी क्षेत्र के विकास की गति बनने वाला एक पुल 17 वर्षों तक शुभारंभ की बाट जोहता रहा। उन्होंने कहा कि इस पुल के बनने के बाद कोशी के बहुत से इलाकों की मिथिला के कई इलाकों से दूरी 300 किलोमीटर तक घट गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोशी इलाके में बाढ़ सबसे बड़ी समस्या है। हर साल इस इलाके में जानमाल का बड़ा नुकसान ोता है।
उन्होने कहा कि करीब 11000 करोड़ की परियोजनाओं की स्वीकृति के साथ इस समस्या के निदान की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कोशी, बागमती, गंडक बेसिन बनाया जा रहा है, जिसके बाद यहां एक सुरक्षा कवच बन जायेगा। उन्होंने कहा कि अभिशाप को वरदान का रूप दिया जा रहा है और जिस पानी से लोगों की जिंदगियां चली जाती थी, उसी से करीब दो लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई की जाएगी।
श्री मोदी ने कहा कोशी का पानी अब मखाना किसानों की जिंदगी बनेगा। मछुआरों जो मछली पालन के अवसर देगा। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि आज मखाना की माला पहना कर उनका स्वागत किया गया है। उन्होंने कहा कि मखाना अब बिहार और हिंदुस्तान ही नही दुनिया की रसोई का भाग बनेगा। उन्होने कहा कि आजकल जब वह विदेश जाते हैं तो सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को मखाना का एक पैकेट भेंट करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मखाना उत्पादनऔर मतस्य पालन मिथिला और कोशी की तकदीर बदल देंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में मखाना के विस्तार के लिए पहले ही मखाना बोर्ड की स्थापना कर दी गयी है और मतस्य उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए ‘जुब्बा सहनी मतस्य प्रोत्साहन योजना’ के तहत मछुआरों को 9000 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्ही की सरकार ने मतस्य उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार इसके लिए नया मंत्रालय बनाया था। उन्होंने कहा मतस्य उत्पादन के क्षेत्र में केंद्र और बिहार सरकार के प्रयास साफ दिख रहे हैं और कभी मछली का आयात करने वाला प्रदेश अब उसका निर्यात कर रहा है।

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तेलंगाना: सरकारी बस और ट्रक की टक्कर में 18 लोगों की मौत, 15 घायल https://demo.theshikshanews.com/telangaana-sarakaaree-bas-aur-trak-kee-takkar-mein-18-logon-kee-maut-15-ghaayal/ https://demo.theshikshanews.com/telangaana-sarakaaree-bas-aur-trak-kee-takkar-mein-18-logon-kee-maut-15-ghaayal/#respond Mon, 03 Nov 2025 16:17:59 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5623 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Hyderabad। तेलंगाना के रंगारेड्डी ज़िले में हैदराबाद-बीजापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोमवार सुबह एक सरकारी बस और बजरी से लदे ट्रक की जोरदार टक्कर के बाद 18 लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है।
पुलिस ने बताया कि चेवेल्ला मंडल में मिर्ज़ागुडा के पास तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम की एक बस और बजरी से लदे एक ट्रक आमने सामने टकरा गए। यह बस लगभग 70 यात्रियों को लेकर बस तंदुर इलाके से हैदराबाद जा रही थी। ट्रक पर लदी बजरी के बस पर गिरने से आगे की छह सीटें पर बैठी सवारियां पूरी तरह से कुचल गईं। अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
घायलों को इलाज के लिए चेवेल्ला के सरकारी क्षेत्रीय अस्पताल और पास के निजी अस्पतालों में ले जाया गया। दुर्घटना के बाद चेवेल्ला-विकाराबाद मार्ग पर कई घंटों तक यातायात बाधित रहा। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया गया है और घटना की जाँच शुरू कर दी है।
राज्य के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को समय-समय पर स्थिति की पूरी जानकारी देते रहने के साथ राहत कार्यों में तेजी लाने और पीड़ितों और उनके परिवारों की सहायता के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को भी कहा। श्री रेड्डी ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि सभी घायल यात्रियों को तुरंत हैदराबाद पहुँचाया जाए और उन्हें सर्वोत्तम संभव चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।

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बसपा का जादू कायम है… सपा पर सीधा हमला और योगी सरकार की तारीफ https://demo.theshikshanews.com/basapa-ka-jaadoo-kaayam-hai-sapa-par-seedha-hamala-aur-yogee-sarakaar-kee-taareeph/ https://demo.theshikshanews.com/basapa-ka-jaadoo-kaayam-hai-sapa-par-seedha-hamala-aur-yogee-sarakaar-kee-taareeph/#respond Fri, 10 Oct 2025 06:20:07 +0000 https://www.khabariya.com/?p=5313 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्‍ट्रीय राजनीति में एक वक्‍त पर बहुजन समाज पार्टी की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती थी, लेकिन गुजरते वक्‍त के साथ बसपा राष्‍ट्रीय राजनीति से जैसे गायब ही हो गई।
समय के साथ पार्टी का प्रभाव धीरे-धीरे सिमटता गया. लोकसभा और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में लगातार झटकों ने बसपा को हाशिए पर ला खड़ा किया। हालांकि गुरुवार को लखनऊ में हुई मायावती की रैली में उमड़ी भारी भीड़ ने न सिर्फ पार्टी को नई ऊर्जा दी, बल्कि मायावती के आत्मविश्वास को भी फिर से जगा दिया है। यह भीड़ बताती है कि बसपा का जादू कायम है। रैली में बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा पर कांशीराम का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा ने सत्ता में आते ही कासगंज जिले का नाम बदल दिया था। मायावती ने दलित समाज से एकजुट होकर जागरूक रहने की अपील की और सपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि सपा ने बाबा साहेब को भारत रत्न नहीं दिया। मायावती ने संबोधन में कहा, कि यूपी में कासगंज जिले का नाम मान्यवर कांशीराम नगर के नाम से रखा था। जैसे ही समाजवादी पार्टी सत्ता में आई, उन्होंने नाम बदल दिया।
मायावती ने कहा, इमरजेंसी के दौरान संविधान को कुचला गया। बाबा साहेब को संसद नहीं पहुंचने दिया था। सपा ने कांशीराम का हमेशा अपमान किया। दलित समाज को जागरूक होना होगा। मायावती ने भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, “हम वर्तमान सरकार के आभारी हैं क्योंकि समाजवादी पार्टी सरकार के विपरीत, इस स्थान पर आने वाले लोगों से एकत्र किए गए धन को वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा दबाया नहीं गया है… जब हम सत्ता में थे, और यह स्मारक स्थल बनाया गया था, तो हमने उन लोगों के लिए टिकट प्रदान करने का फैसला किया जो इसे देखना चाहते थे, और इससे उत्पन्न राजस्व का उपयोग अन्य चीजों पर नहीं किया जाएगा, बल्कि इसका उपयोग लखनऊ में बने पार्कों और अन्य स्मारक स्थलों के रखरखाव के लिए किया जाएगा। मायावती ने कहा, कि आप बसपा शासनकाल में बने कांशीराम स्मारक पर उन्हें श्रद्धांजलि देने आए हैं।
इस स्मारक के कुछ हिस्सों की समय पर मरम्मत नहीं हो पाई थी, जिसके कारण आप उन्हें पुष्पांजलि अर्पित नहीं कर पाए थे। लेकिन अब जबकि इसका अधिकांश भाग पूरा हो चुका है, आपने अपने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और लाखों की संख्या में कांशीराम को श्रद्धांजलि देने आए हैं

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जेल से सरकार चलाने की इज़ाज़त दे दी जाये? https://demo.theshikshanews.com/jel-se-sarakaar-chalaane-kee-izaazat-de-dee-jaaye/ https://demo.theshikshanews.com/jel-se-sarakaar-chalaane-kee-izaazat-de-dee-jaaye/#respond Tue, 26 Aug 2025 15:25:11 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4861 अर्जुन देशप्रेमी

सरकार ने संविधान (130वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया है, जिसमें प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और अन्य मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ़्तार और हिरासत में रखने पर पद से हटाने का प्रस्ताव है।
हालाँकि इस विधेयक को समीक्षा के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है। पर इसे लेकर विपक्षी दलों में भारी विरोध देखा जा रहा है। इसपर विपक्ष ने जिस तरह से आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उसे नज़रंदाज़ भी नहीं किया जा सकता। दूसरी तरफ सरकार की मंशा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। दोनों ही पक्ष अपने अपने तर्कों में सही दिखते हैं।
पर सवाल जस का तस है कि क्या जेल से सरकार चलाई जा सकती है? अगर हाँ, तो यह कहाँ तक न्यायोचित होगा? और नहीं, तो फिर ऐसा कानून क्यों नहीं आना चाहिए? प्रश्न यह भी है कि क्या पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर कोई बीच का रास्ता निकालेंगे?
दरअसल यह बिल आया ही है एक ऐसी स्थिति से निपटने के लिए जिसकी कल्पना हमारे संविधान निर्माताओं ने शायद नहीं की थी। अगर उन्होंने सपने में भी उस स्थिति की कल्पना की होती तो वे संविधान में इससे निपटने के लिए कोई न कोई व्यवस्था जरूर कर देते। पर अब स्थिति यह है कि तमाम नैतिकताओं को ताखे पर रखकर नेता लोग जेल से सरकार चलाने पर उतारू हो गए हैं।
परिपाटी यह रही है कि जब भी किसी मंत्री या मुख्यमंत्री या केंद्रीय मंत्री की गिरफ्तारी की स्थिति बनती थी, मंत्री खुद ही इस्तीफा दे देते थे या फिर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री अपने मंत्री से इस्तीफा ले लेते थे या उसे बर्खास्त कर देते थे। जब वे जेल से बाहर आते थे तब दुबारा पद पर आ जाते थे।
इसी तरह मुख्यमंत्री भी ऐसी स्थिति होने पर खुद से इस्तीफ़ा दे देते थे और जेल से बाहर आने पर फिर मुख्यमंत्री बन जाते थे। पर हाल के वर्षों में ऐसा हुआ कि मंत्री और मुख्यमंत्री जेल में महीनों रहे, पर पद से इस्तीफ़ा नहीं दिया। जेल में रहे और मुख्यमंत्री या मंत्री के तौर पर रहे। इस दौरान राज्यों का भले ही बेडा गर्क क्यों न होता रहा हो।
सबसे बड़ा उदाहरण अरविन्द केजरीवाल का ही है जो 177 दिनों तक जेल में रहे, पर मुख्यमंत्री का पद नहों छोड़ा। अदालतों में लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक गई। पर संविधान और कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था जो इन्हें बाध्य करता की वे पद छोड़ते या बर्खास्त कर दिए जाते या फिर सुप्रीम कोर्ट इन्हें पद छोड़ने के लिए कोई आदेश या निर्देश दे पाता। ऐसा ही अरविन्द केजरीवाल के दो मंत्रियों और तमिलनाडु के एक मंत्री के मामले में भी हुआ। थक हारकर कोर्ट को इंगित करना पड़ा कि इस सम्बन्ध में कानून होना चाहिए। और इसी क्रम में केंद्र सरकार विधेयक (बिल) लेकर आयी है जिसपर पूरा विपक्ष हंगामा कर रहा है।
विधेयक के अनुसार, यदि किसी मंत्री को पाँच या अधिक वर्षों की सज़ा वाले अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक गिरफ़्तार और हिरासत में रखा जाता है, तो उसे 31वें दिन पद से हटाना अनिवार्य है। यदि किसी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को लगातार 30 दिनों तक गिरफ़्तार और हिरासत में रखा जाता है, तो विधेयक के अनुसार उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफ़ा देना होगा।
यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो वे स्वतः ही पद से हट जाएँगे। समान परिस्थितियों का सामना करने वाले अन्य केंद्रीय या राज्य मंत्रियों के लिए, विधेयक अलग निष्कासन प्रक्रियाओं को निर्दिष्ट करता है जिसके अनुसार केंद्रीय मंत्रियों को प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जाएगा जबकि राज्य के मंत्रियों को राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर हटाएँगे। विधेयक में प्रावधान है कि यदि कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री राष्ट्रपति या राज्यपाल को किसी मंत्री को हटाने की सलाह नहीं देता है, तो 30 दिनों की नज़रबंदी के बाद वह मंत्री स्वतः ही पद से हट जाएगा।
इसी विधेयक का विपक्षी दलों द्वारा विरोध किया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि सत्ता पक्ष जब चाहेगा किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ अपनी एजेंसियों से मुकदमे लदवाकर उसे 30 दिन तक हिरासत में रखवा देगा और जमानत नहीं होने देगा।
ऐसे में निर्दोष होने के बाद भी उस मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ेगा या उसे हटा दिया जायेगा। एक तरह से यह विरोधियों के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जायेगा। इस कानून का दुरुपयोग सत्ता पक्ष करेगा।
विपक्ष के इस दावे में दम भी है, यह हवा हवाई नहीं है। जिस तरह से मुकदमे लादे जा सकते हैं और लादे भी गए हैं, उससे यह आशंका बलवती होती है। पर सवाल है कि सिर्फ इस शंका के कारण जेल से सरकार चलाने की छूट मिलनी चाहिए? और सवाल तो यह भी है कि क्या कांग्रेस या तीसरे मोर्चों की सरकारों के दौरान कोई ऐसा कानून नहीं बना है जिसका दुरुपयोग नहीं हुआ है, या दुरुपयोग नहीं हो रहा है? सच तो यह है कि देश में शायद ही ऐसा कोई कानून बना हो जिसका दुरुपयोग न हुआ हो या न हो रहा हो। एससी/एसटी एक्ट, दहेज निषेध अधिनियम आदि इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इनके दुरुपयोग की गाथाएं हर गली-मोहल्ले में सुनाई देती हैं।
ऐसे ही दूसरे लगभग सभी कानूनों में है। और फिर तो दुरुपयोग के डर से कभी कोई कानून बनना ही नहीं चाहिए। यदि जनता के लिए बने कानूनों के दुरुपयोग को अगर नज़रंदाज़ किया गया है तो फिर नेताओं के लिए बनने वाले कानून के दुरुपयोग की शंका को नज़रंदाज़ क्यों नहीं किया जा सकता है। और फिर देश में क़ानून का ही राज है।
आपको लगता है कि इस कानून का दुरुपयोग किया गया है तो कोर्ट में अपनी बात रखिये, 30 दिन के भीतर कोर्ट से जमानत या राहत ले लीजिये, बने रहिये पद पर। इस दौरान आपकी पार्टी का कोई दूसरा नेता मंत्री या मुख्यमंत्री बना रहेगा। और कोर्ट यदि जमानत या राहत नहीं देती तो पद छोडिये। इसमे समस्या क्या है? और फिर, यह कानून तो सभी दलों पर लागू होगा।
भाजपा जब विपक्ष में जायेगी तब उनपर भी यही बात लागू होगी। फिर इससे डरना क्यों? जब भाजपा नहीं डर रही है तो विपक्ष क्यों डर रहा है? या विपक्ष मान रहा है कि वह कभी भी केंद्र की सत्ता में आयेगा ही नहीं, आजीवन केंद्र की सत्ता में भाजपा ही रहेगी? या ऐसा कानून बनाने ही नहीं दिया जाये और जेल से सरकार चलाने की इज़ाज़त दे दी जाये?
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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