CJI – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Wed, 08 Oct 2025 04:26:32 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg CJI – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 पीएम मोदी ने सीजेआई पर हमले की कोशिश की निंदा की, गवई के संयम को सराहा https://demo.theshikshanews.com/peeem-modee-ne-seejeaee-par-hamale-kee-koshish-kee-ninda-kee-gavee-ke-sanyam-ko-saraaha/ https://demo.theshikshanews.com/peeem-modee-ne-seejeaee-par-hamale-kee-koshish-kee-ninda-kee-gavee-ke-sanyam-ko-saraaha/#respond Wed, 08 Oct 2025 04:26:32 +0000 https://www.khabariya.com/?p=5271 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। बीते रोज सीजेआई जस्टिस बीआर गवई के सामने जूता उछाने की घटना की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा है कि इस तरह के कृत्यों की हमारे समाज में कोई जगह नहीं है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने सीजेआई के धैर्य और संयम की सराहना की है। प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने सीजेआई गवई से बात की है और स्पष्ट कहा है कि हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, आज सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन पर (सीजेआई गवई पर) हुए हमले से हर भारतीय नाराज़ है। हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है। यह पूरी तरह से निंदनीय है। प्रधानमंत्री मोदी ने संकट की इस घड़ी में जस्टिस गवई द्वारा दिखाए गए संयम और धैर्य की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, मैंने न्यायमूर्ति गवई द्वारा ऐसी स्थिति का सामना करते हुए प्रदर्शित की गई शांति और संयम की सराहना की। यह न्याय के मूल्यों और हमारे संविधान की भावना को मजबूत करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बता दें यह घटना तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक 71 वर्षीय वकील ने अचानक सीजेआई गवई पर जूता फेंक दिया, जिससे कोर्ट रूम में अफरा-तफरी मच गई। वकील को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। कोर्ट रूम से बाहर ले जाते समय उसने चिल्लाकर कहा, भारत सनातन धर्म के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह घटना सीजेआई की उस टिप्पणी के कुछ ही हफ्तों बाद हुई है, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश में क्षतिग्रस्त विष्णु प्रतिमा की बहाली से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कथित तौर पर विवादास्पद टिप्पणी की थी कि जाओ और स्वयं देवता से पूछो।

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गवई बने भारत (supreme court) के पहले बौद्ध और दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-supreme-court-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%8c%e0%a4%a6/ https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-supreme-court-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%8c%e0%a4%a6/#respond Wed, 14 May 2025 15:48:16 +0000 http://www.khabariya.com/?p=1214 वेबवार्ता. खबरिया न्यूज. एनसीआर टुडे. नई दिल्ली। न्यायमूर्ति बी आर गवई ने बुधवार को भारत (supreme court) के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वह देश के पहले बौद्ध और दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं। इससे पहले न्यायमूर्ति के जी बालकृष्णन दलित समुदाय से पहले सीजेआई बने थे। (CJI) न्यायमूर्ति गवई को राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथ दिलाई। गवई ने हिंदी में शपथ ली। उन्होंने सीजेआई संजीव खन्ना की जगह ली है जो मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए हैं। न्यायमूर्ति बी आर गवई को 24 मई, 2019 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। उनका कार्यकाल छह महीने से अधिक समय का होगा और वह 23 नवंबर तक पद पर रहेंगे। शपथ ग्रहण से एक दिन पहले बार एंड बेंच को दिए साक्षात्कार में गवई ने कहा था कि मैं हमेशा सामाजिक और आर्थिक न्याय का पक्षधर रहा हूं। उन्होंने बताया कि न्यायपालिका में लंबित मामलों की संख्या को कम करना और निचली अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में है।


न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट (supreme court) से लेकर निचली अदालतों तक लंबित मामलों की समस्या को प्राथमिकता से हल करना चाहता हूं। उच्च न्यायालयों का बुनियादी ढांचा बेहतर है, लेकिन निचली अदालतों में अब भी समस्याएं हैं। उन्होंने माना कि उनका कार्यकाल केवल छह महीनों का है, इसलिए वे कोई बड़े वादे नहीं करना चाहते, लेकिन जो भी कर सकें, व्यावहारिक रूप से काम करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में मामलों की सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया लंबित मामलों को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां अभी दो दिन गैर-महत्वपूर्ण मामलों और एक दिन नियमित मामलों के लिए होता है, जिससे नियमित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि वह अपने सहयोगी न्यायाधीशों के साथ इस पर चर्चा करेंगे और व्यावहारिक समाधान खोजने की कोशिश करेंगे।
हाल ही में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के घर कैश बरामद होने के मामले पर टिप्पणी करते हुए गवई ने कहा कि 900 न्यायाधीशों में से ऐसे मामलों की संख्या बहुत कम है, लेकिन इतनी भी बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। जनता हमारे ऊपर भरोसा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इन-हाउस जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की प्रक्रिया को तय नियमों के तहत ही देखेंगे। केंद्र सरकार द्वारा कॉलेजियम की सिफारिशों पर निर्णय में हो रही देरी को लेकर न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि वे सरकार के साथ संवाद स्थापित कर लंबित नियुक्तियों को जल्द से जल्द निपटाना चाहेंगे।
उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन इसके साथ योग्यता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अगर कोई न्यायाधीश के परिवार से है, लेकिन योग्य है, तो केवल संबंध के कारण उसे नकारा नहीं जा सकता। न्यायमूर्ति गवई ने माना कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में दलित प्रतिनिधित्व तय करने के लिए पदोन्नत किया गया था। उन्होंने कहा कि विविधता से यह फायदा होता है कि विभिन्न पृष्ठभूमियों से आने वाले न्यायाधीश समाज की जमीनी हकीकतों को बेहतर समझते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम हाईकोर्ट कॉलेजियमों से अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों, खासकर महिलाओं को प्राथमिकता देने की अपील कर रहा है।
गवई ने कहा कि कोई भी न्यायाधीश आलोचनाओं से प्रभावित होकर निर्णय नहीं लेता है। एक न्यायाधीश को केवल अपने विवेक और कानून के आधार पर फैसला करना चाहिए, न कि आलोचनाओं के डर से। उन्होंने कहा कि मैं सोशल मीडिया नहीं देखता। मैं न इंस्टाग्राम पर हूं, न एक्स पर। अगर आपका विवेक कहता है कि आप सही हैं, तो किसी की आलोचना से डरने की जरूरत नहीं है।
पूर्व सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में शुरू की गई तकनीकी पहल को जारी रखने की बात करते हुए गवई ने कहा कि हम इसे आगे बढ़ाते रहेंगे। हमारे पास एक अनुभवी तकनीकी अधिकारी है जो एनआईसी से हैं और नई सुविधाओं पर काम कर रहे हैं। न्यायमूर्ति गवई ने साफ कहा कि वह सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी सरकारी पद को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं सीजेआई पद छोड़ने के बाद कोई सरकारी पद नहीं स्वीकार करूंगा।

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