CJi Indai – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Thu, 16 Oct 2025 15:35:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg CJi Indai – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 अटॉर्नी जनरल ने सीजेआई से दुर्व्यवहार करने वाले वकील पर आपराधिक अवमानना केस चलाने की मंजूरी दी https://demo.theshikshanews.com/atornee-janaral-ne-seejeaee-se-durvyavahaar-karane-vaale-vakeel-par-aaparaadhik-avamaanana-kes-chalaane-kee-manjooree-dee/ https://demo.theshikshanews.com/atornee-janaral-ne-seejeaee-se-durvyavahaar-karane-vaale-vakeel-par-aaparaadhik-avamaanana-kes-chalaane-kee-manjooree-dee/#respond Thu, 16 Oct 2025 15:35:38 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5390 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। सर्वोच्च अदालत में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई से दुर्व्यवहार मामले ने अब नया कानूनी मोड़ ले लिया है। भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने आरोपी वकील राकेश किशोर के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी है। यह मंजूरी सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष विकास सिंह की अर्जी पर दी गई।
आर. वेंकटरमणी ने स्वीकृति पत्र में कहा कि उन्होंने इस घटना से संबंधित सभी दस्तावेजों और तथ्यों का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया है। वकील राकेश किशोर का व्यवहार न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(सी) के तहत आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है।
वेंकटरमणी ने कहा, “राकेश किशोर के कार्य और उनके कथन न केवल अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले हैं, बल्कि वे सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा और अधिकार को कमजोर करने के उद्देश्य से किए गए प्रतीत होते हैं। इस तरह का आचरण न्याय प्रणाली की नींव पर चोट करता है और इससे जनता का विश्वास न्यायपालिका से डगमगा सकता है, विशेष रूप से जब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत से जुड़ा हो।”
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अदालत की अवमानना करने या न्यायाधीशों को निशाना बनाने को औचित्य नहीं ठहरा सकता। उन्होंने कहा, “जजों की ओर कोई वस्तु फेंकना या अदालत की कार्यवाही पर चिल्लाना अदालत की गरिमा का गंभीर अपमान है।”
अटॉर्नी जनरल ने यह भी स्पष्ट किया कि वकील राकेश किशोर द्वारा दी गई किसी भी तरह की सफाई या कारण इस अशोभनीय और अपमानजनक व्यवहार को सही नहीं ठहरा सकते। उन्होंने इसे ‘रूल ऑफ लॉ’ और न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला बताया।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अब तक वकील राकेश किशोर ने अपने व्यवहार के प्रति कोई पश्चाताप या खेद नहीं जताया है। उनकी बाद की टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपने कृत्य के लिए कोई पछतावा नहीं दिखाया।
अटॉर्नी जनरल ने कहा, “मैं न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(1) (बी) के तहत अपनी सहमति प्रदान करता हूं ताकि राकेश किशोर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ की जा सके।” अटॉर्नी जनरल का यह निर्णय अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा, जिसके बाद अदालत यह तय करेगी कि राकेश किशोर के खिलाफ औपचारिक सुनवाई कब और कैसे शुरू की जाएगी।

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संवाद के जरिये मतभेदों को दूर करने का रास्ता है मध्यस्थता : बी.आर गवई https://demo.theshikshanews.com/sanvaad-ke-jariye-matabhedon-ko-door-karane-ka-raasta-hai-madhyasthata-bee-aar-gavee/ https://demo.theshikshanews.com/sanvaad-ke-jariye-matabhedon-ko-door-karane-ka-raasta-hai-madhyasthata-bee-aar-gavee/#respond Sun, 28 Sep 2025 16:27:40 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5190 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Bhubaneswar।भारत के प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई ने कहा कि मध्यस्थता और मुक्त संवाद मतभेदों को बातचीत के जरिये दूर करने, तनाव को सौहार्द में बदलने और पक्षों के बीच सद्भाव बहाल करने के रास्ते हैं।
भुवनेश्वर में शनिवार को हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय मध्यस्थता सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सदियों से विभिन्न समाजों में मध्यस्थता की प्रथा चली आ रही है और मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के बनने के बाद इसे कानूनी मान्यता मिली है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “मैं यह कहना चाहूंगा कि हमारी शांति तभी भंग होती है जब हम झगड़े या असहमति को सुनने, समझने और उसे सुलझाने की ईमानदारी से कोशिश करने से इनकार कर देते हैं। संघर्ष को अगर रचनात्मक तरीके से निपटाया जाए तो वह आगे बढ़ने का अवसर बन सकता है।’’ उन्होंने कहा कि यह अधिनियम न्याय को सहभागितापूर्ण, समान और सुलभ बनाता है, साथ ही अदालतों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को भी कम करने में मदद करता है।
राज्यपाल हरिबाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण मझी, ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हरीश कुमार टंडन और उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति इस समारोह में उपस्थित थे।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल कंभमपति ने कहा कि मध्यस्थता केवल विवाद सुलझाने के लिए नहीं है, बल्कि यह विश्वास कायम करने, रिश्तों को बचाने और सामाजिक सौहार्द कायम करने का भी तरीका है। राज्यपाल ने कहा, “मध्यस्थता एक पुरानी प्रथा है जो बातचीत और आम सहमति पर आधारित है। इससे मतभेद दूर होते हैं, रिश्ते सुधरते हैं और न्यायसंगत व स्थायी समाधान मिलता है।”
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने न्यायिक सुधारों और वैकल्पिक विवाद समाधान के प्रति ओडिशा की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन मध्यस्थता को भारत की न्याय प्रणाली का मुख्य आधार बनाने के प्रयासों को और मजबूत करेगा, जिससे कानूनी प्रक्रिया में दक्षता, समावेशिता और विश्वास सुनिश्चित होगा।
न्यायमूर्ति टंडन ने कहा कि ओडिशा ने मध्यस्थता सेवाओं के विस्तार के लिए सार्थक कदम उठाए हैं। उच्चतम न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “हमारे बुजुर्ग कभी बरगद के पेड़ के नीचे इकट्ठा होकर विवादों को सुलझाते थे ताकि फिर से सौहार्द स्थापित हो सके। 2023 का मध्यस्थता अधिनियम उसी भावना को दर्शाता है।”

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