Chief Minister – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Fri, 21 Nov 2025 04:56:46 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Chief Minister – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 भाजपा की बैसाखी के साथ नीतीश दसवीं बार बने बिहार के मुख्यमंत्री https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-kee-baisaakhee-ke-saath-neeteesh-dasaveen-baar-bane-bihaar-ke-mukhyamantree/ https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-kee-baisaakhee-ke-saath-neeteesh-dasaveen-baar-bane-bihaar-ke-mukhyamantree/#respond Fri, 21 Nov 2025 04:56:38 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5807 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna। दो दशक में दसवीं बार! श्री नीतीश कुमार ने लोकतंत्र की जननी कहीं जाने वाली भूमि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में गुरुवार को लगभग दो दशक में दसवीं बार शपथ लेकर देश की राजनीति में एक नया कीर्तिमान बनाया है।
ढ़लती उम्र, थकान और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के साथ-साथ लंबे समय तक शासन में रहने से लोकप्रियता में कमी की अटकलों को दरकिनार करते हुए हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में श्री कुमार ने राज्य की राजनीति में अपने निरंतर प्रभाव और जनता के भरोसे की एक बार फिर पुष्टि की। लगभग दो दशकों तक सत्ता में रहने के बाद इस चुनाव में वह अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे थे।
जातीय खानाजंगी और राजनीति के अपराधीकरण के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले बिहार प्रांत में ‘सुशासन बाबू’ के रूप में पहचान बनाने वाले और बिहार में अपनी स्वच्छ एवं ईमानदार छवि के कारण वह गठबंधन की राजनीति में एक मुख्य धुरी बने हुए हैं। हाल के समय में मीडिया से नीतीश से दूरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा ‘अचेत मुख्यमंत्री’ कहे जाने और प्रशासन पर नौकरशाही के हावी होने के आरोपों के बावजूद बिहार के मतदाताओं ने उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को इस बार एक ऐतिहासिक जनादेश दिया है।
बिहार में जनादेश की बहार में ‘नीतीशे कुमार’ पर जनता ने एक बार फिर ऐतबार जता दिया। छह महीने पहले तक जहां नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे और विपक्षी दल महागठबंधन मजबूत दिख रहा था, चुनाव नतीजों ने उनके खिलाफ तमाम अटकलें को हवा-हवाई साबित कर दिया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब भी बिहार के राजनीतिक रंगमंच के सबसे दमदार और सरदार अदाकार हैं। राजग की इस बार की जीत सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि बिहार की जनता की निरंतरता और स्थिरता की चाहत का प्रमाण है। जनता ने फिर से कहा है ,“बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार हैं…” नीतीश कुमार अपनी जनसभाओं, रैलियों में कहते , “2005 से पहले कुछ था… कोई काम किया है, ऊ लोग (राजद)….कोई शाम के बाद निकल पाता था… ।” नीतीश कहते रहे कि ‘सब हम लोग कितना काम किए जी…।’ श्री नीतीश कुमार का लगातार पांचवां विधानसभा चुनाव जीतना और 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना, भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है, खासकर हिंदी भाषी राज्यों में, जहां भारतीय लोकतंत्र में बदलाव की उम्मीद की जाती है, वहीं बिहार ने बार-बार दोहराये जाने वाले चेहरे पर अपना विश्वास दिखाया है।
इस बार राजग में भाजपा और जदयू ने बराबर-बराबर 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा और राजग ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में आगे रख कर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्री नीतीश कुमार की छवि का फायदा मिला। राजग ने 2010 के 200 से अधिक सीटों को जीतने के प्रदर्शन को दोहराया।
कभी बिहार में भाजपा के बड़े भाई की भूमिका में रहे जदयू को इस बार छोटे भाई की भूमिका में देखा जा रहा था। चुनाव से पहले यह व्यापक रूप से माना जा रहा था कि श्री मोदी की स्थायी लोकप्रियता और भाजपा का राष्ट्रीय प्रभुत्व ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सबसे बड़ी ताकत होगी, जो श्री नीतीश कुमार की घटती लोकप्रियता की भरपाई कर सकती है। इस बार चुनाव परिणाम ने भाजपा-जदयू को बराबर का सहभागी साबित किया है।
इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार ने महिला मतदाताओं के बीच एक मजबूत सद्भावना अर्जित की है। बिहार की ‘दीदियों’ ने मजबूती से उनका हाथ थामे रखा। यह बात लंबे समय से मानी जाती रही है कि बिहार की महिलाएं 2005 से चली आ रही श्री नीतीश कुमार नेतृत्व वाली राजग सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं की वजह से उनसे खूब जुड़ी हुई हैं, लेकिन इस बार गेम-चेंजर बना चुनावी सीजन के दौरान 1.4 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को दिया गया, 10 हजार रुपये का नकद भुगतान।
‘दस-हजारिया’ लाभार्थी और जीविका दीदियां राजग की बड़ी जीत का असली इंजन बन गयीं। सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाली महिलाएं बड़ी संख्या में हैं और वे हर जाति, समुदाय और वर्ग से आती हैं। इस बार 71.6 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाला, जो पुरुषों (62.8 प्रतिशत) से करीब नौ प्रतिशत ज्यादा है।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी कल्याणकारी पहलों के माध्यम से महिला मतदाताओं ने उनके नेतृत्व के लिए एक स्थिर बल के रूप में काम किया है, जिससे उन्हें अन्य वर्गों के झटकों से बचाव मिला है। वर्ष 2020 के विपरीत, जहां जदयू के कैडर में भ्रम दिखा था, इस बार पार्टी की संगठनात्मक शक्ति अधिक प्रभावी ढंग से सक्रिय हुई। ग्रामीण नेताओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों पर आधारित उसके पारंपरिक कैडर ढांचे ने निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर भाजपा के साथ बेहतर समन्वय के साथ काम किया।नतीजों ने श्री नीतीश कुमार की उस क्षमता को भी दिखाया, जिसमें वे गठबंधन को अपना वोट ट्रांसफर कर सकते हैं। चाहे वह किसी भी गठबंधन में हों। उनके कई उलटफेरों के बावजूद, उनके निर्वाचन क्षेत्रों से संदेश साफ था, “आप जहां जाएंगे, हम भी वहीं जाएंगे।” विरोधियों की ओर से उनके स्वास्थ्य और शासन क्षमता पर लगातार हमलों ने उनके समर्थकों को पहले से कहीं ज्यादा मतदान केंद्रों तक पहुंचाया। ‘सुशासन बाबू’ होने के अलावा, नीतीश ‘मिस्टर क्लीन’ भी हैं। उनके मंत्रियों पर आरोप लगते हैं, लेकिन किसी ने भी नीतीश पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया है।
इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार के लिए, ‘टाइगर अभी ज़िंदा है’ का नारा सिर्फ एक राजनीतिक उद्घोष नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक वजूद और विश्वसनीयता का प्रमाण भी साबित हुआ।
बिहार में पटना जिले के बख्तिायारपुर में एक मार्च 1951 को एक साधारण परिवार में जन्मे नीतीश कुमार के पिता दिवंगत कविराज राम लखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और वैद्य थे। श्री कुमार बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज पटना में पढ़ायी के दौरान ही लोक नायक जयप्रकाश नारायण से प्रभावित होकर वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन में कूद पड़े थे। श्री कुमार पहली बार सियासत में 1977 में उतरे, जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन चुका था। इस दौर में जनता पार्टी मजबूती से उभरी और लगभग पूरे देश में वर्चस्व बनाया। श्री नीतीश कुमार हालांकि चुनावी राजनीति में बेहतर शुरुआत नहीं कर पाये। वर्ष 1977 का चुनाव हुआ तब वह जनता पार्टी के टिकट पर नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इसके बाद 1980 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा, तब उनके परिवार वालों ने उन पर राजनीति छोड़कर नौकरी के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया, लेकिन श्री कुमार नहीं माने और राजनीति में डटे रहे।
इसके बाद श्री कुमार को पहली बार 1985 के विधानसभा चुनाव में हरनौत सीट से ही सफलता मिली और उसके बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में वह बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनकर लोकसभा पहुंचे। श्री कुमार 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बने। वर्ष 1991 के मध्यावधि चुनाव में वह फिर से लोकसभा के सदस्य चुने गये।
यही वह दौर था, जब इंजीनियर से नेता बने श्री नीतीश कुमार उभार पर आये। कभी पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के ‘छोटे भाई’ के तौर पर उनके विश्वासपात्र माने जाने वाले श्री नीतीश कुमार ने धीरे-धीरे पिछड़ी जातियों, खासकर कुर्मी-कुशवाहा समाज को अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया। इसके अलावा उन्होंने अति-पिछड़ा समाज (ईबीसी) के बीच भी पैठ बनायी। इस जातीय समीकरण को बिठाकर उन्होंने लालू यादव के समर्थन में खड़े यादव समुदाय की एकजुटता की काट खोजी।
श्री लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक मतभेद के कारण वर्ष 1994 में जनता दल से अलग होकर श्री कुमार ने जार्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में समता पार्टी बनाकर 1995 का विधानसभा चुनाव लड़ा तब उनकी पार्टी मात्र सात सीट पर ही जीत हासिल कर सकी। श्री कुमार ने इस हार से सबक लेते हुए लालू विरोधी मतों के विभाजन को रोकने के इरादे से वर्ष 1996 में भाजपा के साथ गठजोड़ कर लिया। उनका यह फार्मूला कामयाब रहा और उसका फायदा उन्हें आज तक मिल रहा है।
श्री कुमार वर्ष 1996 ,1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में विजयी हुए। श्री कुमार ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 1998 में रेल मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री का कार्य भार संभाला। 1999 में फिर बनी वाजपेयी सरकार में वह भूतल परिवहन और कृषि मंत्री बनाये गये। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा में उन्होंने राजग विधायक दल के नेता के रूप में मुख्यमंत्री पद की पहली बार शपथ ली, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले ही सात दिनों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। श्री कुमार के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका था।उसके बाद वह फिर से केन्द्र की राजनीति में लौट गये और वर्ष 2000 से लेकर 2004 तक वाजपेयी सरकार में मंत्री और रेल मंत्री रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में श्री कुमार ने दो सीटों से चुनाव लड़ा जिसमें वह बाढ़ से चुनाव हार गये लेकिन नालंदा सीट से विजयी हुए। उस साल केन्द्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार बनने के बाद श्री कुमार ने अपने आप को पूरी तरह बिहार की राजनीति पर केन्द्रित कर लिया। फरवरी 2005 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ तब किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और कोई भी दल सरकार बनाने में सफल नहीं रहा। नवम्बर 2005 में दुबारा हुए चुनाव में श्री कुमार के नेतृत्व वाले राजग को स्पष्ट बहुमत मिल गया और वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
मुख्यमंत्री के रूप में विकास पुरुष की छवि बना चुके श्री कुमार के नेतृत्व में जब राजग ने 2010 का विधानसभा चुनाव लड़ा तो उसे दो-तिहाईबहुमत हासिल हुआ। श्री कुमार ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेवारी संभाली। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए श्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश किये जाने की कोशिशों के विरोध में भाजपा से 17 साल पुराना अपना नाता तोड़कर एक बड़ा राजनीतिक जोखिम उठाया। भाजपा से नाता टूटने के बाद अल्पमत में आयी अपनी सरकार को उन्होंने निर्दलीय और अन्य दलों के बाहर से समर्थन के बल पर किसी तरह से बचा कर रखा। इसके बाद जब वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ तो श्री कुमार की पार्टी जदयू को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए उन्होंने 17 मई 2014 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और अपने भरोसेमंद नेता जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनवा दिया, लेकिन छह माह के अंदर ही श्री कुमार को लगने लगा कि उन्होंने श्री मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ी राजनीतिक भूल कर दी। करीब 15 दिनों के राजनीतिक ड्रामे के बाद श्री मांझी ने इस्तीफा दिया और 22 फरवरी 2015 को श्री कुमार ने चौथी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला।
बिहार में 2015 का विधानभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था। वर्षों के सहयोगी भाजपा और जदयू इस बार फिर जुदा हो गये थे और 20 साल बाद दो पुराने दोस्त लालू प्रसाद यादव और श्री नीतीश कुमार साथ आ गये थे। श्री लालू प्रसाद और श्री नीतीश कुमार के इस महागठबंधन में कांग्रेस भी शामिल थी। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव चुनाव के नतीजे आने पर राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनी और श्री नीतीश कुमार पांचवी बार मुख्यमंत्री बने। इस बार श्री कुमार की सरकार करीब 20 महीने ही चल पाई। दरअसल सरकार के कार्यों में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का बढ़ते हस्तक्षेप की वजह से पहले से ही असहज महसूस कर रहे श्री कुमार को राजद से नाता तोड़ने का तब बहाना मिल गया जब लालू परिवार के खिलाफ मंत्री पद और सरकारी नौकरी के बदले जमीन-फ्लैट लिखवाने का मामला भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने उजागर किया तथा रेलवे टेंडर घोटाला की जांच शुरू हुई। इस पर श्री कुमार ने उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने को कहा, लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो श्री कुमार ने 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा भी दे दिया। इसके बाद तुरंत भाजपा ने श्री कुमार को समर्थन देने की घोषणा कर दी और 24 घंटे के अंदर ही श्री कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही फिर से बिहार में राजग सरकार की वापसी हो गयी।
वर्ष 2020 में एक बार फिर श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी। श्री नीतीश सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। अगस्त 2022 में हालांकि घटनाक्रम तेजी से बदले और श्री नीतीश कुमार ने राजग से अलग होने का फैसला कर लिया। श्री कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो गये और उनके नेतृत्व में नयी सरकार बनी। श्री कुमार आठवीं बार मुख्ममंत्री बने। श्री नीतीश कुमार महागठबंधन में गये लेकिन 17 माह में ही असहज महसूस करने लगे। जनवरी 2024 के आते-आते स्थितियां फिर से बदलने लगीं और नीतीश फिर से राजग में वापस लौट आये। श्री कुमार नवीं बार मुख्यमंत्री बने।
चौहत्तर साल के श्री नीतीश कुमार अपनी राजनीति का उफान देख चुके हैं। मुख्यमंत्री पद की दसवीं बार जिम्मेवारी संभालने जा रहे श्री कुमार ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन में अब तक अपनी शर्तों पर ही राजनीति की है।

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नीतीश को डुबाने की चाल चल रहे हैं प्रधानमंत्री, अपने किसी ‘चेले’ को मुख्यमंत्री बना देंगे: खरगे https://demo.theshikshanews.com/neeteesh-ko-dubaane-kee-chaal-chal-rahe-hain-pradhaanamantree-apane-kisee-chele-ko-mukhyamantree-bana-denge-kharage/ https://demo.theshikshanews.com/neeteesh-ko-dubaane-kee-chaal-chal-rahe-hain-pradhaanamantree-apane-kisee-chele-ko-mukhyamantree-bana-denge-kharage/#respond Mon, 03 Nov 2025 15:12:55 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5599 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna/Vaishali। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को डुबाने की चाल रहे हैं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की फिर से सरकार बनने पर वह अपने किसी ‘चेले’ को मुख्यमंत्री बना देंगे तथा नीतीश को घर बैठा देंगे।


उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में यह कटाक्ष भी किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नीतीश को इस तरह ‘‘गायब’’ कर दिया है कि अब उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का नाम ही नहीं लिया जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने पटना में रविवार को हुए प्रधानमंत्री के रोडशो का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘नीतीश जी कहां थे, नहीं दिखे। राजग सरकार बनाने की बात करने वालों ने उन्हें गायब कर दिया। इतना गायब कर दिए, उनको मुख्यमंत्री बनाने का नाम नहीं लेते।’’
⁠खरगे ने आरोप लगाया, ‘‘चुनाव के बाद क्या होगा, मैं नहीं कह सकता। मोदी जी नीतीश जी को डुबाने की चाल चल रहे हैं।’’ उन्होंने बाद में एक बयान में कहा कि नीतीश कुमार को ‘हाईजैक’ कर लिया गया है और चुनाव के बाद उन्हें दूध से मक्खी की तरह बाहर निकाल दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री के रोडशो में जनता दल (यू) की तरफ से पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह शामिल हुए थे।
इससे पहले, खरगे ने वैशाली में एक जनसभा में कहा, ‘‘अब ये (नीतीश) मोदी की गोद में बैठे हैं। यह लिखकर रख लो वह (प्रधानमंत्री) नीतीश को मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे। वह अपने किसी चेले को बना देंगे और कहेंगे कि नीतीश जी, आपकी तबियत ठीक नहीं है, आप घर बैठकर आराम करिए, हम आपकी औषधि का इंतजाम करते हैं।’’
राजद द्वारा कांग्रेस की कनपटी पर ‘कट्टा रखकर’ मुख्यमंत्री पद छीनने संबंधी प्रधानमंत्री के आरोपों पर खरगे ने संवाददाता सम्मेलन में तंज कसा, ‘‘क्या जब राजद ने कांग्रेस की कनपट्टी पर कट्टा रखा, तो नरेन्द्र मोदी वहां मौजूद थे? ’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री कैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। न कांग्रेस को कोई डरा सकता है न कांग्रेस किसी से डरने वाली है। हमारा महागठबंधन सम्मान और दोस्ती के साथ आगे बढ़ रहा है।’’
कांग्रेस अध्यक्ष ने राजग के घोषणापत्र को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘ये लोग घोषणापत्र जारी करने आए तो सिर्फ 36 सेकंड में प्रेस वार्ता ख़त्म कर दी। 20 साल से शासन में हैं दो मिनट तो रुक जाते।’’
खरगे ने कहा, ‘‘दो दशकों से बिहार में भाजपा-जद(यू) की सरकार है और 11 वर्ष से मोदी जी केंद्र में हैं। आज अगर मुद्दों की बात करें तो बिहार के लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्याएं, महंगाई, बेरोज़गारी, बढ़ता पलायन और आर्थिक असमानता है।’’
उन्होंने महागठबंधन के चुनावी वादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार बनने पर इन पर पूरी तरह अमल किया जाएगा।
खरगे ने कहा, ‘‘बिहार में चुनाव आते ही नीतीश जी ने महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये डाल दिए और सोचा कि महिलाएं इनको वोट दे देंगी। लेकिन बिहार के लोग इतने होशियार हैं कि कोई अगर उनके खाते में 10 लाख रुपये भी डालेगा, तब भी वह सोच-समझकर ही वोट देंगे।’’
उन्होंने सवाल किया कि 10 हजार रुपये देने की बात भाजपा-जद (यू) को 20 साल में याद क्यों नहीं आई?
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘जनता जानती है कि यह चुनावी घोषणा है।’’
खरगे ने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी युवाओं के लिए गंभीर नहीं हैं।
उनका कहना था, ‘‘रोजगार के नाम पर मोदी पहले कहते थे कि ‘पकौड़ा तलो’ और अब कहते हैं ‘रील बनाओ’। नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। उन्हें ठोस कदम उठाना चाहिए और लोगों को बताना चाहिए कि वे आगे क्या करने वाले हैं।’’
महागठबंधन की तरफ से उप मुख्यमंत्री पद के लिए सिर्फ एक नाम घोषित करने से जुड़े सवाल पर खरगे ने कहा कि सरकार बनने पर इस बारे में फैसला होगा कि कितने उप मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे।

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महागठबंधन ने तेजस्वी को मुख्यमंत्री और सहनी को उप मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया https://demo.theshikshanews.com/mahaagathabandhan-ne-tejasvee-ko-mukhyamantree-aur-sahanee-ko-up-mukhyamantree-ka-chehara-ghoshit-kiya/ https://demo.theshikshanews.com/mahaagathabandhan-ne-tejasvee-ko-mukhyamantree-aur-sahanee-ko-up-mukhyamantree-ka-chehara-ghoshit-kiya/#respond Thu, 23 Oct 2025 14:52:31 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5437 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna। महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से दो सप्ताह पहले बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव को औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया।
इसके साथ ही, विकाशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक मुकेश सहनी को उप मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया गया और यह भी कहा गया कि सरकार बनने पर समाज के अन्य वर्गों से भी उप मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे।
हालांकि, विपक्षी गठबंधन की तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि महागठबंधन के सत्ता में आने पर कुल कितने उप मुख्यमंत्री होंगे।
⁠तेजस्वी यादव का नाम घोषित करके महागठबंधन के घटक दलों ने अपने अंतर्विरोधों को समाप्त करने और एकता का संदेश देने का प्रयास किया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महागठबंधन के घटक दलों के प्रमुख नेताओं के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में तेजस्वी के नाम की घोषणा की। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक गहलोत ने कहा कि तेजस्वी यादव के नाम की घोषणा से जुड़ा निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की सहमति से लिया गया है।
पटना के एक होटल में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, “हमने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी से परामर्श के बाद, साथ ही सभी सहयोगी दलों की सहमति से तेजस्वी यादव जी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने का निर्णय लिया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर ‘इंडिया’ गठबंधन सत्ता में आता है, तो मुकेश सहनी उप मुख्यमंत्री होंगे।
गहलोत ने यह भी कहा कि बिहार की सामाजिक संरचना के मद्देनजर सहनी के अलावा समाज के अन्य वर्गों से भी उप मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि महागठबंधन की सरकार बनने पर उसमें कितने उप मुख्यमंत्री होंगे।
समर्थकों के बीच ‘सन ऑफ मल्लाह’ के नाम से मशहूर सहनी निषाद जाति से आते हैं। निषाद बिहार में अति पिछड़े वर्ग की श्रेणी में आते हैं।
कांग्रेस के कुछ नेताओं ने यह मांग भी दोहराई कि यदि महागठबंधन सत्ता में आता है, तो किसी मुस्लिम या दलित नेता को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए।
गहलोत ने राजद नेता तेजस्वी की तारीफ करते हुए कहा, “तेजस्वी एक नौजवान हैं, जिनका लंबा भविष्य है। जनता हमेशा उन्हीं के साथ रहती है जिनमें प्रतिबद्धता और ईमानदारी होती है। पिछली बार इन्होंने जो रोजगार के वादे किए थे, उन्हें निभाने की दिशा में काम किया।”
उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी जी और इन्होंने (तेजस्वी) ने मिलकर जो यात्रा (वोटर अधिकार यात्रा) की थी उसका बहुत असर हुआ है।आने वाले वक़्त में राहुल जी भी आएंगे और प्रियंका जी भी बिहार आएंगी।’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को यह स्पष्ट करने चुनौती दी कि मुख्यमंत्री पद के लिए उसका चेहरा कौन है?
उन्होंने दावा किया, ‘‘महाराष्ट्र में कहा गया कि एकनाथ शिंदे के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा और बाद में किसी और को मुख्यमंत्री बना दिया, यही बात यहां (बिहार) लागू हो रही है।’ मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा, ‘‘यह हमारे लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं था, लेकिन चूंकि मीडिया में कई तरह की अटकलें चल रही थीं, इसलिए हमने इसे स्पष्ट करना जरूरी समझा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महागठबंधन ने जो भरोसा मुझ पर जताया है, उसके लिए मैं सभी दलों का आभारी हूं। यह भरोसा बिहार की जनता का भी है। अब हमारा एक ही लक्ष्य है 20 साल पुरानी निकम्मी सरकार को उखाड़ फेंकना।’’
राजद नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 20 साल के शासन और 11 साल की मोदी सरकार के बावजूद बिहार देश का सबसे गरीब राज्य बना हुआ है। न उद्योग हैं, न रोजगार। बिना घूस के कोई काम नहीं होता। अफसर मंत्री से ज्यादा ताकतवर हो गए हैं और जनता की आवाज दबा दी गई है। तेजस्वी ने राजग पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘‘‘इनके पास न कोई विजन है, न ब्लूप्रिंट। ये लोग हमारी योजनाओं की नकल करते हैं। हमने पेंशन 1500 रुपए करने की बात कही, तो नीतीश कुमार ने 1100 रुपए देने की घोषणा कर दी।’’ उन्होंने अपने इस वादे को दोहराया कि राज्य के जिन परिवारों में सरकारी नौकरी नहीं है, उनमें एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी। साथ ही जीविका कम्युनिटी मोबलाइजर को 30,000 रुपए और जीविका ‘दीदी’ को 2,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। उन्होंने वादा किया कि महागठबंधन की सरकार बनते ही सभी संविदा कर्मियों को स्थायी किया जाएगा।
उनका कहना था कि वह मुख्यमंत्री बनने या सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि बिहार को बदलने के लिए काम कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने दावा किया, ‘‘भाजपा नीतीश जी के साथ अन्याय कर रही है। अमित शाह कई बार कह चुके हैं कि नीतीश जी मुख्यमंत्री नहीं होंगे। अगर भाजपा में इतना आत्मविश्वास है तो वह अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का नाम क्यों नहीं बताती? नीतीश जी की खराब सेहत का फायदा उठाकर उनके अपने ही लोग पार्टी को कमजोर कर रहे हैं।’’ उन्होंने राजग पर तंज कसते हुए कहा, ‘हमारा तो संयुक्त संवाददाता सम्मेलन भी हो गया, लेकिन हम लोग नीतीश कुमार के साथ जो राजग में अन्याय हो रहा है, वो देख रहे हैं। राजग का एक भी संयुक्त संवाददाता सम्मेलन नहीं हुआ है, न ही संयुक्त रूप से उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है। हम कह रहे हैं कि वो नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे। अमित शाह ने तो ये संदेश भी दे दिया है। हमेशा आप मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करते हैं लेकिन इस बार आप घोषणा क्यों नहीं कर रहे।’’
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, “हमने अपनी ओर से नेतृत्व का चेहरा घोषित कर दिया है। अब यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की जिम्मेदारी है कि वह यह बताए कि अगर वह सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा।”
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि राजग विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ेगा, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह विधायक दल तय करेगा। इस बयान को कई लोग इस रूप में देख रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब बिहार में अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री देखना चाहती है। यह एकमात्र हिंदी भाषी राज्य है जहां अब तक भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं रहा है।
इधर, राजग ने ‘इंडिया’ गठबंधन की इस घोषणा पर तंज कसते हुए कहा कि एकजुटता दिखाने की कोशिशों के बावजूद, गठबंधन के भीतर दरारें साफ नजर आ रही हैं। भाजपा ने महागठबंधन के संवाददाता सम्मेलन के दौरान लगाए गए उस पोस्टर की तस्वीर अपने ‘एक्स’ हैंडल पर साझा की, जिसमें तेजस्वी यादव की बड़ी तस्वीर थी, लेकिन विपक्षी गठबंधन के किसी अन्य नेता की तस्वीर नहीं थी।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा, “दलित और अति पिछड़े वर्ग राहुल गांधी की वजह से ‘इंडिया’ गठबंधन को वोट देंगे। पोस्टर में उनकी तस्वीर होनी चाहिए थी। भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य जैसे सहयोगियों की तस्वीरें भी पोस्टर में शामिल की जानी चाहिए थीं।”
वहीं, केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा, “हमारा चुनाव प्रचार पूरे जोर पर है, मेरी आवाज रैलियां करते-करते बैठ गई है, लेकिन ‘इंडिया’ गठबंधन के नेता अभी तक कमरे से बाहर नहीं निकले हैं।”
जनता दल (यू) के प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें “लॉलीपॉप थमाया गया एक नाराज़ बच्चा” कहा जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तेजस्वी ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रचार अभियान की कमान संभाली थी, तब गठबंधन को “भारी पराजय” का सामना करना पड़ा था।

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रक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री ने किया ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का लोकार्पण https://demo.theshikshanews.com/raksha-mantree-va-mukhyamantree-ne-kiya-dron-mainyuphaikcharing-yoonit-ka-lokaarpan/ https://demo.theshikshanews.com/raksha-mantree-va-mukhyamantree-ne-kiya-dron-mainyuphaikcharing-yoonit-ka-lokaarpan/#respond Sat, 30 Aug 2025 16:40:03 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4914 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को नोएडा पहुंचे। दोनों नेताओं ने सेक्टर-81 स्थित राफी मोहिब ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और रक्षा उपकरण एवं इंजन टेस्ट फैसिलिटी का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बढ़ती रक्षा क्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए अत्याधुनिक ड्रोन, एयरक्राफ्ट इंजन और एयरोस्पेस टेस्ट फैसिलिटी देश के लिए बड़ी उपलब्धि है।
भारत 1947 से लगातार चुनौतियों का सामना करता आ रहा है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने युद्ध के नए दौर में देश की सामर्थ्य और शक्ति का प्रदर्शन किया है। आपके पास ताकत है तो दुनिया आपके सामने नतमस्तक होती है। शास्त्र और शस्त्र दोनों का बेहतर समन्वय होगा तो शांति कायम होगी। उन्होंने शेर और बकरी का उदाहरण देते हुए कहा कि शेर सामर्थ्य और राज दोनों का प्रतीक है। सीएम योगी ने महाराणा प्रताप की वीरता का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तर प्रदेश में नौ ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां संचालित हैं।
राज्य सरकार ने साढ़े 12 हजार एकड़ भूमि डिफेंस कॉरिडोर के लिए उपलब्ध कराई है, जिसमें आगरा, अलीगढ़, झांसी, चित्रकूट और कानपुर शामिल हैं। साथ ही लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल की यूनिट स्थापित की गई है, जिसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ की मुस्कुराहट तब और बढ़ेगी जब वहां से ब्रह्मोस मिसाइल दुश्मन पर निशाना साधेगी।
उन्होंने नई ड्रोन यूनिट को बधाई देते हुए आश्वस्त किया कि यूपी सरकार देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह यूनिट देश को समर्पित है और डिफेंस सिस्टम में साइंटिफिक रिवॉल्यूशन का प्रतीक है। 2017 में महज 10 लोगों के साथ कंपनी की शुरुआत हुई थी और आज 3,600 से ज्यादा वैज्ञानिक व इंजीनियर यहां काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका या चीन का कोई भी डिफेंस सिस्टम इस कंपनी के बने ड्रोन को डिटेक्ट नहीं कर सकता।
इसे देश की सबसे इनोवेटिव एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सिस्टम दुश्मन में दहशत पैदा करने वाला है। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था इतनी खराब थी कि यहां उद्योग लगाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, लेकिन आज योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य निवेशकों की पहली पसंद बन गया है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि ड्रोन अब सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए कहा कि विरोध झेलने के बावजूद भारत ने हमेशा नई राह बनाई है। मात्र 14 महीनों में इस कंपनी और डीआरडीओ के बनाए प्रोडक्ट्स ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल हुए। संकल्प, साहस और विज्ञान के मेल से ही यह संभव हो पाया और सेना के जवानों की वीरता का भी जिक्र किया जाना चाहिए।

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