Central Government – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Sat, 20 Dec 2025 05:25:17 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Central Government – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 वीआईपी दर्शन पर सुप्रिम आदेश, निर्णय केंद्र करे https://demo.theshikshanews.com/veeaeepee-darshan-par-suprim-aadesh-nirnay-kendr-kare/ https://demo.theshikshanews.com/veeaeepee-darshan-par-suprim-aadesh-nirnay-kendr-kare/#respond Sat, 20 Dec 2025 05:25:17 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6041 अशोक मधुप/वरिष्ठ पत्रकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मंदिरों में ‘वीआईपी दर्शन’ सुविधा को चुनौती देने वाली याचिका भले ही खारिज कर दी, किंतु इस याचिका पर कोर्ट द्वारा कही गई बातों की गूंज दूर तक जाएगी। यह गूंज केंद्र सरकार को विवश करेगी कि वह मंदिरों में हाने वाले वीवीआईपी दर्शन पर रोक लगाने वाला निर्णय लें । कार्ट की ये गूंज आने वाले समय में मंदिरों के वीवीआईपी दर्शन कर रोक लगाने का रास्ता प्रशस्त करेगी।
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह एक नीतिगत मामला है। इस पर केंद्र सरकार को विचार करना होगा। बेंच ने यह भी कहा कि वीआईपी के लिए ऐसा विशेष व्यवहार मनमाना है। यह याचिका मंदिरों की तरफ से वसूले जाने वाले वीआईपी दर्शन शुल्क को समाप्त करने की मांग कर रही थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बेंच इस मुद्दे से सहमत है, लेकिन अनुच्छेद 32 के तहत निर्देश जारी नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, ‘हालांकि हमारी राय है कि मंदिरों में प्रवेश के संबंध में कोई विशेष व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन हमें नहीं लगता कि यह अनुच्छेद 32 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने का उपयुक्त मामला है।’ यह आदेश में दर्ज किया गया लेकिन मामला सरकार के विचार के लिए छोड़ दिया गया।मुख्य न्यायधीश खन्ना ने कहा कि यह मामला कानून-व्यवस्था का प्रतीत होता है और याचिका इस पहलू पर होनी चाहिए थी। बेंच ने कहा, ‘हम स्पष्ट करते हैं कि याचिका खारिज होने से संबंधित अधिकारियों को जरूरत के हिसाब से कार्रवाई करने से नहीं रोका जाएगा।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, ‘आज 12 ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ इस प्रैक्टिस को फॉलो करते हैं। ये मनमाना और भेदभाव वाला है। यहां तक कि गृह मंत्रालय ने भी आंध्र प्रदेश से इसकी समीक्षा करने को कहा है। चूंकि, भारत में 60 प्रतिशत पर्यटन धार्मिक है, इसलिए ये भगदड़ की प्रमुख वजह भी है।’ सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका विजय किशोर गोस्वामी ने डाली थी। उन्होंने मंदिरों में अतिरिक्त शुल्क लेकर ‘वीआईपी दर्शन’ के चलन को आर्टिकल 14 के तहत समानता के अधिकार और आर्टिकल 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन बताया। उन्होंने दलील दी कि जो लोग इस तरह का शुल्क अदा करने में असमर्थ हैं, ये उनके खिलाफ भेदभाव है। याचिका में जोर देकर कहा गया था कि कई मंदिर 400 से 500 रुपये में लोगों के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था करते हैं। इससे आम श्रद्धालु और खासकर महिलाएं, स्पेशली एबल्ड लोग और सीनियर सिटिजंस को दर्शन में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह मामला देश भर के मंदिरों में आम लोगों और वीआईपी के बीच भेदभाव के मुद्दे को उठाता है। वीआईपी दर्शन की सुविधा से आम लोगों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है, जबकि वीआईपी आसानी से दर्शन कर लेते हैं।
ये एकजगह नही है,श्रृद्धालू को इस समस्या से सभी जगह रूबरू होना पड़ता है। जगह –जगह मंदिरों में इस समस्या का सामना करना पड़ा है। लगभग 40 साल पहले हम कोलकत्ता गए। कालिका जी मंदिर में हम श्रृद्धालुओं की लाइन में लगे थे कि हमारे एक साथी ने देखा और हमें इशारा कर अपने पास बुला लिया। यहां पुजारी पांच रूपया प्रति व्यक्ति लेकर सीधे दर्शन करा रहे थे। अभी वेट द्वारिका जाना हुआ। हम परिवार के छह सदस्य थे। एक पंडित जी ने हमसे पांच सौ रूपये लिए।अलग लाइन से हमें आराम से दर्शन कराए। भीड़− भाड़ भी बची।वैसे दर्शन में दो से तीन घंटे लगते पांच सौ रूपये में आधा घंटा में दर्शन कर मंदिर से बाहर आ गए। करीब दस साल पहले हम गुजरात में अम्बा जी गए थे। दर्शन की लाइन में लगे थे कि कर्मचारियों ने यह कह कर हमके रोक दिया कि दर्शन का समय समाप्त हो गया, जबकि कुछ अन्य को लगातार प्रदेश दिया जा रहा। किसी तरह हम अन्यों वाली पंक्ति में शामिल हुए। तब दर्शन हुए। दर्शन भी बड़े आराम से हुए। काफी समय हम मंदिर में रूके , जबकि ऐसा पहले संभव नही था। इस तरह का भेदभाव हमें कई जगह देखने को मिला। उज्जैन में तो आप पंडित को पांच सौ के आसपास रूपये दीजिए।वह मंदिर के गर्भ गृह में ले जाकर पूजन अर्चन कराते हैं। जो ये रकम नही देते वे गर्भगृह के बाहर ही दूर से दर्शन कर तृप्त हो जाते हैं।ओंकारेश्वर में तो पंडित जी पूजा भी आराम से और श्रद्धालुओं की पंक्ति से अलग लेकर कराते हैं। मथुरा जी के बांके बिहारी मंदिर में सुपरिम आदेश से यह व्यवस्था रूकी है, अन्यथा लगभग सभी मंदिरों की हालत ऐसी ही है।
सुपरिम कोर्ट ने याचिका तो खारिज कर दी, किंतु इस वीआईपी दर्शन पर रोक वाली गेंद केंद्र सरकार के पाले में यह कह कर डाल दी । बेंच ने कहाकि बेंच इस मुद्दे से सहमत है, लेकिन अनुच्छेद 32 के तहत निर्देश जारी नहीं कर सकती। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह एक नीतिगत मामला है। इस पर केंद्र सरकार को विचार करना होगा। बेंच ने यह भी कहा कि वीआईपी के लिए ऐसा विशेष व्यवहार मनमाना है।
सुपरिम कोर्ट का यह निर्देश अब केंद्र सरकार को विवश करेगा कि मंदिरों में आम आदमी के साथ हो रहे भेदभाव को रोके और बांके बिहारी मंदिर की तरह पैसा लेकर कराए जा रहे वीआईपी दर्शन की व्यवस्था खत्म करे। व्यवस्था अयोध्या जी के श्रीराम मंदिर जैसी हो, जहां श्रद्धालू बिना भेदभाव आराम से 25−30 मिनट में दर्शन कर बाहर आ सके।

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केंद्र सरकार ने पीएम गतिशक्ति योजना के तहत पांच मुख्य प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन किया https://demo.theshikshanews.com/kendr-sarakaar-ne-peeem-gatishakti-yojana-ke-tahat-paanch-mukhy-projekts-ka-moolyaankan-kiya/ https://demo.theshikshanews.com/kendr-sarakaar-ne-peeem-gatishakti-yojana-ke-tahat-paanch-mukhy-projekts-ka-moolyaankan-kiya/#respond Fri, 17 Oct 2025 14:52:30 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5404 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। पीएम गतिशक्ति योजना के तहत नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप ने शुक्रवार को पांच इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन किया, जिसमें दो हाइवे प्रोजेक्ट्स, दो रेलवे प्रोजेक्ट्स और एक मेट्रो रेल प्रोजेक्ट शामिल था, यह प्रोजेक्ट्स एकीकृत मल्टीमॉडल इन्फ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक और सामाजिक नोड्स के लिए अंतिम-मील कनेक्टिविटी और ‘संपूर्ण-सरकार’ दृष्टिकोण के पीएम गतिशक्ति सिद्धांतों के अनुरूप थे।
रेलवे प्रोजेक्ट्स में कर्नाटक में होसपेट और बल्लारी के बीच 65 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को चौगुना करना शामिल है। यह प्रोजेक्ट राज्य के सबसे औद्योगिक और खनिज-समृद्ध गलियारों में से एक को टारगेट करता है, जिसका उद्देश्य मौजूदा मार्गों पर भीड़भाड़ कम करना, माल ढुलाई क्षमता बढ़ाना और होसपेट-बल्लारी औद्योगिक क्षेत्र के तेज आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
होसापेट-बल्लारी क्षेत्र खनन, इस्पात उत्पादन, बिजली उत्पादन और सीमेंट निर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। लौह अयस्क, कोयला, इस्पात और सीमेंट जैसी थोक वस्तुओं की भारी आवाजाही के कारण मौजूदा दोहरी लाइन लगभग पूरी क्षमता पर चल रही है।
दूसरी प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में गोंदिया से जबलपुर तक 230.5 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का दोहरीकरण शामिल है। मौजूदा एकल-लाइन सेगमेंट में अकसर रुकावटें आती हैं, जिसके परिणामस्वरूप परिचालन धीमा, लंबा टर्नअराउंड समय और माल ढुलाई में देरी होती है। यह गलियारा पूर्वी और मध्य भारत के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है, जो उद्योगों, कृषि और खनिज-समृद्ध क्षेत्रों को सहयोग प्रदान करता है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग 921 के महवा-मंडावर 50 किलोमीटर लंबे सेगमेंट के चौड़ीकरण और अपग्रेडेशन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव की घोषणा की है। वर्तमान में, यह सेगमेंट 4-लेन राजमार्ग के रूप में कार्य करता है, लेकिन लगातार बढ़ते वाहनों के आवागमन और व्यापार एवं ट्राजिट गलियारे के रूप में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को देखते हुए, इसकी क्षमता का विस्तार करना आवश्यक हो गया है।
पूरा होने के बाद, नया महवा-मंडावर सेगमेंट राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेगा, जिससे राज्य की सीमाओं के पार निर्बाध संपर्क स्थापित होगा।
दूसरी हाइवे प्रोजेक्ट में पटना महानगर क्षेत्र में अनीसाबाद से दीदारगंज तक 13.37 किलोमीटर लंबे छह-लेन एलिवेटेड रोड और एक सर्विस रोड का निर्माण शामिल है।
यह प्रोजेक्ट बिहार को पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाले क्षेत्रीय व्यापार गलियारों को सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, साथ ही बाजारों, औद्योगिक समूहों और लॉजिस्टिक केंद्रों तक बेहतर पहुंच प्रदान करके आर्थिक केंद्रों के विकास को भी सुगम बनाएगा।
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने जयपुर मेट्रो चरण 2 के विकास का प्रस्ताव रखा है, जो प्रह्लादपुरा से टोडी मोड़ तक 42.8 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर होगा। इस परियोजना में 36 स्टेशन शामिल होंगे – 34 एलिवेटेड और दो भूमिगत – जो हल्दी घाटी गेट, सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, एसएमएस अस्पताल, अंबाबाड़ी और विद्याधर नगर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को कवर करेंगे।
टोंक रोड और सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र के साथ संरेखण जयपुर के प्रमुख विकास क्षेत्रों से संपर्क को मजबूत करेगा।
यह कॉरिडोर चांदपोल स्टेशन पर चालू पूर्व-पश्चिम लाइन से और जयपुर जंक्शन मेट्रो स्टेशन पर एक फुटओवर ब्रिज के माध्यम से जुड़ेगा, जिससे रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डे तक पहुंच आसान हो जाएगी। इससे यातायात की भीड़भाड़ कम होने, वाहनों का उपयोग कम होने, प्रदूषण कम होने और ईंधन की खपत कम होने की उम्मीद है।

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बुजुर्ग दंपति से 1.50 करोड़ रुपए की ठगी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस https://demo.theshikshanews.com/bujurg-dampati-se-1-50-karod-rupe-kee-thagee-supreem-kort-ne-kendr-sarakaar-ko-jaaree-kiya-notis/ https://demo.theshikshanews.com/bujurg-dampati-se-1-50-karod-rupe-kee-thagee-supreem-kort-ne-kendr-sarakaar-ko-jaaree-kiya-notis/#respond Fri, 17 Oct 2025 14:36:18 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5402 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। हरियाणा के अंबाला में एक सीनियर सिटीजन को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 1.50 करोड़ रुपए ठगे जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कोर्ट की सहायता करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर केंद्र सरकार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), हरियाणा सरकार और साइबर क्राइम विभाग, अंबाला को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार और पुलिस अधीक्षक, साइबर क्राइम अंबाला को अब तक की गई जांच की पूरी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे मामलों में जल्द से जल्द कठोर कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों के फर्जी हस्ताक्षरों वाले न्यायिक आदेश से न्यायपालिका पर जनता के विश्वास पर गहरी चोट पहुंचती है।
कोर्ट ने कहा कि यह मामला कोई अकेला मामला नहीं है। मीडिया में कई बार ऐसी खबरें छपी हैं और देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी खबरें लगातार आ रही हैं। इसलिए इस पर जल्द से जल्द कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
अंबाला में हरियाणा रोडवेज की रिटायर्ड ऑडिटर शशिबाला सचदेव और उनके पति को ठगों ने 3 से 16 सितंबर के बीच निशाना बनाया था। साइबर ठगों ने सीबीआई के फर्जी अधिकारी बनकर व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल किया और सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश दिखाकर उन्हें डराया।
साइबर ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने का डर दिखाकर 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा था। इस दौरान ठगों ने बुजुर्ग दंपति से 1.50 करोड़ रुपए ठग लिए।
मामले का खुलासा तब हुआ जब तनाव में आए बुजुर्ग दंपति की तबियत बिगड़ी और उन्होंने अपनी बेटी को पूरी कहानी बताई। इसके बाद साइबर थाने में केस दर्ज कराया गया था।

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