BJP – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Tue, 20 Jan 2026 15:59:53 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg BJP – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 भाजपा में नेतृत्व बदलता है, संगठन की दिशा नहीं : मोदी https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-mein-netrtv-badalata-hai-sangathan-kee-disha-nahin-modee/ https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-mein-netrtv-badalata-hai-sangathan-kee-disha-nahin-modee/#respond Tue, 20 Jan 2026 15:59:53 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6139 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संगठन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक परिवार बताया है और कहा है कि पार्टी में नेतृत्व तो बदलता है, लेकिन इसकी दिशा नहीं बदलती।
श्री मोदी ने भाजपा के नये अध्यक्ष के चुनाव के उपलक्ष्य में पार्टी मुख्यालय पर मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। प्रधानमंत्री ने भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नबीन को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल का अध्यक्ष चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई और ‘शुभकामनाएं’ दीं और यह भी कहा कि खुद उनके लिए भाजपा का कार्यकर्ता होना बड़े गर्व की बात है। श्री मोदी ने कहा, “हमारी पार्टी में अध्यक्ष बदलते हैं, लेकिन आदर्श नहीं बदलते। नेतृत्व बदलता है, लेकिन दिशा नहीं बदलती।”
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा एक संस्कार है, भाजपा एक परिवार है। हमारे यहां ‘मेंबरशिप’ से भी ज्यादा ‘रिलेशनशिप’ होती है। भाजपा एक ऐसी परंपरा है, जो पद से नहीं, प्रक्रिया से चलती है। हमारे यहां पदभार एक व्यवस्था है और कार्यभार जीवन भर की जिम्मेदारी है।” श्री मोदी ने कहा, ‘‘हमारा नेतृत्व परंपरा से चलता है, अनुभव से समृद्ध होता है और जनसेवा एवं राष्ट्रसेवा के भाव से संगठन को आगे बढ़ाता है। भाजपा की शून्य से लेकर शिखर तक की यात्रा में यह सदैव प्रतिबिंबित होता रहा है।”
श्री मोदी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं का चरित्र और संस्कार ऐसा है कि उनके लिए ‘खुद से बड़ा दल और दल से बड़ा देश’ होता है। उन्होंने इसे भाजपा के हर कार्यकर्ता का संस्कार और जीवनमंत्र बताया और कहा, ‘‘इसी भाव के साथ बीते 11 वर्षों में हमने अनेक चुनौतियों पर विजय पाई है।” उन्होंने गत 11 वर्षों की भाजपा की यात्रा को जन-विश्वास अर्जित करने की अद्भुत यात्रा बताया और कहा कि पार्टी पर जनता-जनार्दन का भरोसा किस प्रकार सुदृढ़ हुआ है, यह हाल के विधानसभा चुनावों से लेकर स्थानीय निकाय चुनावों में भी देखने को मिला है।
इस दौरान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाये जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन बातों को कभी असंभव माना जाता था, आज ये हकीकत बन चुके हैं। श्री मोदी ने कहा, ‘‘दशकों तक हमारे आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक से जोड़कर देखा गया। लेकिन भाजपा की संवेदनशीलता, संस्कार और समानता की भावना ने आदिवासियों में भी सबसे पिछड़ी जनजातियों की पीड़ा तक को समझा और उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनायीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा के संगठनात्मक चुनाव एक व्यापक प्रक्रिया शत-प्रतिशत लोकतांत्रिक तरीके और भाजपा के संविधान की भावना के साथ आज विधिपूर्वक सम्पन्न हुए हैं। ‘संगठन पर्व’ का आज का यह विशाल आयोजन पार्टी की लोकतांत्रिक आस्था, संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ता केंद्रित सोच का प्रतीक है।
श्री मोदी ने कहा, लोगों को लगता होगा कि नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, 50 साल की छोटी आयु में मुख्यमंत्री बन गये। 25 साल से ये लगातार सरकार के प्रमुख रहे हैं। ये सब अपनी जगह है, लेकिन इन सबसे भी बड़ी चीज मेरे जीवन में है, मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूं। ये सबसे बड़ा गर्व है। जब बात पार्टी के विषयों पर आती है, तब मैं एक कार्यकर्ता हूं और माननीय नितिन नबीन जी मेरे बॉस हैं।”
श्री मोदी ने मंगलवार को कहा कि देश के लिए एक महत्वपूर्ण काल खंड के प्रारंभ में भाजपा का नेतृत्व नितिन नबीन जैसा युवा नेता संभाल रहा है, जिसमें भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री नबीन एक तरह से ‘मिलेनियल जेनरेशन’ के हैं और उन्होंने अपने आंखों के सामने भारत में बहुत बड़े बदलाव होते देखा है। उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्ष भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कालखंड है। इसमें विकसित भारत का निर्माण होना तय है।
पार्टी के निवर्तमान अध्यक्ष जे पी नड्डा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि श्री नबीन मूलत: कार्यकर्ता हैं, वैचारिक पृष्ठभूमि पर परिपक्व हैं और बहुत ही छोटी उम्र में पांच बार विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में भी विधायक हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे नौजवान, ऊर्जावान, प्रतिभावान व्यक्तित्व ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला है।” कार्यक्रम के मंच पर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सर्वश्री राजनाथ सिंह, अमित शाह और नितिन गडकरी तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी डॉ के लक्षमण उपस्थित थे।

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‘भ्रष्ट जनता पार्टी’?: राहुल ने विभिन्न राज्यों में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकारों पर हमला बोला https://demo.theshikshanews.com/bhrasht-janata-paartee-raahul-ne-vibhinn-raajyon-mein-bhaajapa-kee-dabal-injan-vaalee-sarakaaron-par-hamala-bola/ https://demo.theshikshanews.com/bhrasht-janata-paartee-raahul-ne-vibhinn-raajyon-mein-bhaajapa-kee-dabal-injan-vaalee-sarakaaron-par-hamala-bola/#respond Fri, 09 Jan 2026 12:46:21 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6088 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को भाजपा को ‘भ्रष्ट जनता पार्टी’ करार दिया और दावा किया कि विभिन्न राज्यों में उसकी डबल इंजन वाली सरकारों ने भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और अहंकार के जहर से लोगों का जीवन बर्बाद कर दिया है।
गांधी ने भाजपा को निशाना बनाते हुए उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड, उत्तर प्रदेश के उन्नाव बलात्कार कांड, इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों जैसी घटनाओं का जिक्र किया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने एक पोस्ट में कहा, ‘‘देश भर में ‘भ्रष्ट’ जनता पार्टी की डबल इंजन सरकारों ने जनता की ज़िंदगी तबाह कर दी है। भ्रष्टाचार के साथ सत्ता का दुरुपयोग और अहंकार का जहर भाजपा की राजनीति में ऊपर से नीचे तक फैल चुका है।’’
⁠कांग्रेस नेता ने कहा कि इनके तंत्र में गरीब, असहाय, मज़दूर और मध्यमवर्ग की ज़िंदगी सिर्फ़ आंकड़ा है और ‘विकास’ के नाम पर वसूली-तंत्र चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘उत्तराखंड में अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया लेकिन सवाल आज भी वही है: सत्ता का संरक्षण भाजपा के किस वीआईपी को बचा रहा है? कानून सबके लिए बराबर कब होगा?’’
गांधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव कांड में भी पूरा देश देख चुका है कि सत्ता के गुरूर में अपराधियों को कैसे बचाया गया और पीड़िता को न्याय के लिए कितनी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने दावा किया कि इंदौर में ज़हरीला पानी पीने से मौतें हों या गुजरात-हरियाणा-दिल्ली तक दूषित आपूर्ति की शिकायतें – हर तरफ़ बीमारियों का डर है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘राजस्थान की अरावली हो या प्राकृतिक संसाधन – जहां-जहां अरबपतियों का लालच और स्वार्थ पहुंचा, वहां-वहां नियमों को कुचल दिया गया। पहाड़ काटे जा रहे हैं, जंगल उजाड़े जा रहे हैं और जनता को बदले में मिल रहा है धूल, प्रदूषण और आपदा।’’ उन्होंने कहा कि खांसी के सिरप से बच्चों की मौतें, सरकारी अस्पतालों में नवजातों को मारते चूहे, सरकारी स्कूलों की गिरती छतें – यह ‘लापरवाही’ नहीं, भ्रष्टाचार की सीधी मार है।
गांधी ने कहा, ‘‘पुल गिरते हैं, सड़कें धंसती हैं, ट्रेन हादसों में परिवार मिट जाते हैं और भाजपा सरकार हर बार वही करती है: फोटो खिंचवाना, ट्वीट और मुआवज़े की औपचारिकता।’’ उन्होंने कहा कि मोदी का ‘डबल इंजन’ चल रहा है – लेकिन सिर्फ़ अरबपतियों के लिए। आम भारतीय के लिए ये भ्रष्टाचार की डबल इंजन सरकार विकास नहीं, तबाही की रफ्तार है – जो हर दिन किसी न किसी की ज़िंदगी कुचल रहा है।

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राहुल की आलोचना: 272 लोगों में कई भाजपा सदस्य, भ्रष्टाचार के आरोपी : कांग्रेस https://demo.theshikshanews.com/raahul-kee-aalochana-272-logon-mein-kaee-bhaajapa-sadasy-bhrashtaachaar-ke-aaropee-kaangres/ https://demo.theshikshanews.com/raahul-kee-aalochana-272-logon-mein-kaee-bhaajapa-sadasy-bhrashtaachaar-ke-aaropee-kaangres/#respond Sat, 22 Nov 2025 05:44:13 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5812 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। कांग्रेस ने कहा है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर जिन ‘तथाकथित’ 272 प्रतिष्ठित लोगों ने उनकी आलोचना की है,उनमें से कई का संबंध भाजपा तथा आरएसएस से है और कई पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज एक्स पर एक पोस्ट में शुक्रवार को कहा कि श्री गांधी ने पूरे सबूतों और तथ्यों के साथ भाजपा पर चुनाव आयोग के साथ मिलकर ‘वोट चोरी’ की बात कही थी लेकिन उस मामले को राजनीतिक महत्वाकांक्षा करार देते हुए जिन तथाकथित प्रतिष्ठित 272 नागरिकों ने श्री गांधी को गलत ठहराते हुए खुला पत्र लिखा है इनमें कई लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं और कई भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
पार्टी ने आरोप लगाया कि इन प्रतिष्ठित लोगों में ज्यादातर का संबंध भाजपा तथा आरएसएस से है इसलिए उन्होंने लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में एकजुट होने की बजाय लोकतंत्र को कमजोर करने में लगे लोगोंं के हित में दिलचस्पी दिखायी है।
पार्टी ने कहा कि लगभग 272 ‘प्रतिष्ठित’ आवाज़ें अचानक सामने आकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साध रही हैं, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उन्होंने सबूतों के साथ देशव्यापी वोट चोरी का पर्दाफ़ाश करने की हिम्मत कर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के सिंहासन की नींव हिला दी है।
कांग्रेस ने सवाल किया कि इन तथाकथित प्रतिष्ठित लोगों ने श्री गांधी के दावों के खिलाफ ही आवाज क्यों उठाई और इस मामले में पेश ‘वोट चोरी’ के स्पष्ट सबूतों को नज़रअंदाज़ क्यों किया है।
पार्टी का कहना है कि इन तथाकथित प्रतिष्ठित बुद्धिजीवियों में कुछ विवेकानंद फ़ाउंडेशन और इंडिया फ़ाउंडेशन से जुड़े हैं। इनमें से कई पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप रहे हैं लेकिन आज भाजपा से जुड़ते ही सब कुछ साफ़ हो सकता है।

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भाजपा की बैसाखी के साथ नीतीश दसवीं बार बने बिहार के मुख्यमंत्री https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-kee-baisaakhee-ke-saath-neeteesh-dasaveen-baar-bane-bihaar-ke-mukhyamantree/ https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-kee-baisaakhee-ke-saath-neeteesh-dasaveen-baar-bane-bihaar-ke-mukhyamantree/#respond Fri, 21 Nov 2025 04:56:38 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5807 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna। दो दशक में दसवीं बार! श्री नीतीश कुमार ने लोकतंत्र की जननी कहीं जाने वाली भूमि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में गुरुवार को लगभग दो दशक में दसवीं बार शपथ लेकर देश की राजनीति में एक नया कीर्तिमान बनाया है।
ढ़लती उम्र, थकान और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के साथ-साथ लंबे समय तक शासन में रहने से लोकप्रियता में कमी की अटकलों को दरकिनार करते हुए हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में श्री कुमार ने राज्य की राजनीति में अपने निरंतर प्रभाव और जनता के भरोसे की एक बार फिर पुष्टि की। लगभग दो दशकों तक सत्ता में रहने के बाद इस चुनाव में वह अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे थे।
जातीय खानाजंगी और राजनीति के अपराधीकरण के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले बिहार प्रांत में ‘सुशासन बाबू’ के रूप में पहचान बनाने वाले और बिहार में अपनी स्वच्छ एवं ईमानदार छवि के कारण वह गठबंधन की राजनीति में एक मुख्य धुरी बने हुए हैं। हाल के समय में मीडिया से नीतीश से दूरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा ‘अचेत मुख्यमंत्री’ कहे जाने और प्रशासन पर नौकरशाही के हावी होने के आरोपों के बावजूद बिहार के मतदाताओं ने उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को इस बार एक ऐतिहासिक जनादेश दिया है।
बिहार में जनादेश की बहार में ‘नीतीशे कुमार’ पर जनता ने एक बार फिर ऐतबार जता दिया। छह महीने पहले तक जहां नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे और विपक्षी दल महागठबंधन मजबूत दिख रहा था, चुनाव नतीजों ने उनके खिलाफ तमाम अटकलें को हवा-हवाई साबित कर दिया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब भी बिहार के राजनीतिक रंगमंच के सबसे दमदार और सरदार अदाकार हैं। राजग की इस बार की जीत सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि बिहार की जनता की निरंतरता और स्थिरता की चाहत का प्रमाण है। जनता ने फिर से कहा है ,“बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार हैं…” नीतीश कुमार अपनी जनसभाओं, रैलियों में कहते , “2005 से पहले कुछ था… कोई काम किया है, ऊ लोग (राजद)….कोई शाम के बाद निकल पाता था… ।” नीतीश कहते रहे कि ‘सब हम लोग कितना काम किए जी…।’ श्री नीतीश कुमार का लगातार पांचवां विधानसभा चुनाव जीतना और 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना, भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है, खासकर हिंदी भाषी राज्यों में, जहां भारतीय लोकतंत्र में बदलाव की उम्मीद की जाती है, वहीं बिहार ने बार-बार दोहराये जाने वाले चेहरे पर अपना विश्वास दिखाया है।
इस बार राजग में भाजपा और जदयू ने बराबर-बराबर 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा और राजग ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में आगे रख कर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्री नीतीश कुमार की छवि का फायदा मिला। राजग ने 2010 के 200 से अधिक सीटों को जीतने के प्रदर्शन को दोहराया।
कभी बिहार में भाजपा के बड़े भाई की भूमिका में रहे जदयू को इस बार छोटे भाई की भूमिका में देखा जा रहा था। चुनाव से पहले यह व्यापक रूप से माना जा रहा था कि श्री मोदी की स्थायी लोकप्रियता और भाजपा का राष्ट्रीय प्रभुत्व ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सबसे बड़ी ताकत होगी, जो श्री नीतीश कुमार की घटती लोकप्रियता की भरपाई कर सकती है। इस बार चुनाव परिणाम ने भाजपा-जदयू को बराबर का सहभागी साबित किया है।
इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार ने महिला मतदाताओं के बीच एक मजबूत सद्भावना अर्जित की है। बिहार की ‘दीदियों’ ने मजबूती से उनका हाथ थामे रखा। यह बात लंबे समय से मानी जाती रही है कि बिहार की महिलाएं 2005 से चली आ रही श्री नीतीश कुमार नेतृत्व वाली राजग सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं की वजह से उनसे खूब जुड़ी हुई हैं, लेकिन इस बार गेम-चेंजर बना चुनावी सीजन के दौरान 1.4 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को दिया गया, 10 हजार रुपये का नकद भुगतान।
‘दस-हजारिया’ लाभार्थी और जीविका दीदियां राजग की बड़ी जीत का असली इंजन बन गयीं। सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाली महिलाएं बड़ी संख्या में हैं और वे हर जाति, समुदाय और वर्ग से आती हैं। इस बार 71.6 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाला, जो पुरुषों (62.8 प्रतिशत) से करीब नौ प्रतिशत ज्यादा है।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी कल्याणकारी पहलों के माध्यम से महिला मतदाताओं ने उनके नेतृत्व के लिए एक स्थिर बल के रूप में काम किया है, जिससे उन्हें अन्य वर्गों के झटकों से बचाव मिला है। वर्ष 2020 के विपरीत, जहां जदयू के कैडर में भ्रम दिखा था, इस बार पार्टी की संगठनात्मक शक्ति अधिक प्रभावी ढंग से सक्रिय हुई। ग्रामीण नेताओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों पर आधारित उसके पारंपरिक कैडर ढांचे ने निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर भाजपा के साथ बेहतर समन्वय के साथ काम किया।नतीजों ने श्री नीतीश कुमार की उस क्षमता को भी दिखाया, जिसमें वे गठबंधन को अपना वोट ट्रांसफर कर सकते हैं। चाहे वह किसी भी गठबंधन में हों। उनके कई उलटफेरों के बावजूद, उनके निर्वाचन क्षेत्रों से संदेश साफ था, “आप जहां जाएंगे, हम भी वहीं जाएंगे।” विरोधियों की ओर से उनके स्वास्थ्य और शासन क्षमता पर लगातार हमलों ने उनके समर्थकों को पहले से कहीं ज्यादा मतदान केंद्रों तक पहुंचाया। ‘सुशासन बाबू’ होने के अलावा, नीतीश ‘मिस्टर क्लीन’ भी हैं। उनके मंत्रियों पर आरोप लगते हैं, लेकिन किसी ने भी नीतीश पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया है।
इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार के लिए, ‘टाइगर अभी ज़िंदा है’ का नारा सिर्फ एक राजनीतिक उद्घोष नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक वजूद और विश्वसनीयता का प्रमाण भी साबित हुआ।
बिहार में पटना जिले के बख्तिायारपुर में एक मार्च 1951 को एक साधारण परिवार में जन्मे नीतीश कुमार के पिता दिवंगत कविराज राम लखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और वैद्य थे। श्री कुमार बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज पटना में पढ़ायी के दौरान ही लोक नायक जयप्रकाश नारायण से प्रभावित होकर वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन में कूद पड़े थे। श्री कुमार पहली बार सियासत में 1977 में उतरे, जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन चुका था। इस दौर में जनता पार्टी मजबूती से उभरी और लगभग पूरे देश में वर्चस्व बनाया। श्री नीतीश कुमार हालांकि चुनावी राजनीति में बेहतर शुरुआत नहीं कर पाये। वर्ष 1977 का चुनाव हुआ तब वह जनता पार्टी के टिकट पर नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इसके बाद 1980 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा, तब उनके परिवार वालों ने उन पर राजनीति छोड़कर नौकरी के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया, लेकिन श्री कुमार नहीं माने और राजनीति में डटे रहे।
इसके बाद श्री कुमार को पहली बार 1985 के विधानसभा चुनाव में हरनौत सीट से ही सफलता मिली और उसके बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में वह बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनकर लोकसभा पहुंचे। श्री कुमार 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बने। वर्ष 1991 के मध्यावधि चुनाव में वह फिर से लोकसभा के सदस्य चुने गये।
यही वह दौर था, जब इंजीनियर से नेता बने श्री नीतीश कुमार उभार पर आये। कभी पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के ‘छोटे भाई’ के तौर पर उनके विश्वासपात्र माने जाने वाले श्री नीतीश कुमार ने धीरे-धीरे पिछड़ी जातियों, खासकर कुर्मी-कुशवाहा समाज को अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया। इसके अलावा उन्होंने अति-पिछड़ा समाज (ईबीसी) के बीच भी पैठ बनायी। इस जातीय समीकरण को बिठाकर उन्होंने लालू यादव के समर्थन में खड़े यादव समुदाय की एकजुटता की काट खोजी।
श्री लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक मतभेद के कारण वर्ष 1994 में जनता दल से अलग होकर श्री कुमार ने जार्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में समता पार्टी बनाकर 1995 का विधानसभा चुनाव लड़ा तब उनकी पार्टी मात्र सात सीट पर ही जीत हासिल कर सकी। श्री कुमार ने इस हार से सबक लेते हुए लालू विरोधी मतों के विभाजन को रोकने के इरादे से वर्ष 1996 में भाजपा के साथ गठजोड़ कर लिया। उनका यह फार्मूला कामयाब रहा और उसका फायदा उन्हें आज तक मिल रहा है।
श्री कुमार वर्ष 1996 ,1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में विजयी हुए। श्री कुमार ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 1998 में रेल मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री का कार्य भार संभाला। 1999 में फिर बनी वाजपेयी सरकार में वह भूतल परिवहन और कृषि मंत्री बनाये गये। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा में उन्होंने राजग विधायक दल के नेता के रूप में मुख्यमंत्री पद की पहली बार शपथ ली, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले ही सात दिनों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। श्री कुमार के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका था।उसके बाद वह फिर से केन्द्र की राजनीति में लौट गये और वर्ष 2000 से लेकर 2004 तक वाजपेयी सरकार में मंत्री और रेल मंत्री रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में श्री कुमार ने दो सीटों से चुनाव लड़ा जिसमें वह बाढ़ से चुनाव हार गये लेकिन नालंदा सीट से विजयी हुए। उस साल केन्द्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार बनने के बाद श्री कुमार ने अपने आप को पूरी तरह बिहार की राजनीति पर केन्द्रित कर लिया। फरवरी 2005 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ तब किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और कोई भी दल सरकार बनाने में सफल नहीं रहा। नवम्बर 2005 में दुबारा हुए चुनाव में श्री कुमार के नेतृत्व वाले राजग को स्पष्ट बहुमत मिल गया और वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
मुख्यमंत्री के रूप में विकास पुरुष की छवि बना चुके श्री कुमार के नेतृत्व में जब राजग ने 2010 का विधानसभा चुनाव लड़ा तो उसे दो-तिहाईबहुमत हासिल हुआ। श्री कुमार ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेवारी संभाली। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए श्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश किये जाने की कोशिशों के विरोध में भाजपा से 17 साल पुराना अपना नाता तोड़कर एक बड़ा राजनीतिक जोखिम उठाया। भाजपा से नाता टूटने के बाद अल्पमत में आयी अपनी सरकार को उन्होंने निर्दलीय और अन्य दलों के बाहर से समर्थन के बल पर किसी तरह से बचा कर रखा। इसके बाद जब वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ तो श्री कुमार की पार्टी जदयू को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए उन्होंने 17 मई 2014 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और अपने भरोसेमंद नेता जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनवा दिया, लेकिन छह माह के अंदर ही श्री कुमार को लगने लगा कि उन्होंने श्री मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ी राजनीतिक भूल कर दी। करीब 15 दिनों के राजनीतिक ड्रामे के बाद श्री मांझी ने इस्तीफा दिया और 22 फरवरी 2015 को श्री कुमार ने चौथी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला।
बिहार में 2015 का विधानभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था। वर्षों के सहयोगी भाजपा और जदयू इस बार फिर जुदा हो गये थे और 20 साल बाद दो पुराने दोस्त लालू प्रसाद यादव और श्री नीतीश कुमार साथ आ गये थे। श्री लालू प्रसाद और श्री नीतीश कुमार के इस महागठबंधन में कांग्रेस भी शामिल थी। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव चुनाव के नतीजे आने पर राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनी और श्री नीतीश कुमार पांचवी बार मुख्यमंत्री बने। इस बार श्री कुमार की सरकार करीब 20 महीने ही चल पाई। दरअसल सरकार के कार्यों में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का बढ़ते हस्तक्षेप की वजह से पहले से ही असहज महसूस कर रहे श्री कुमार को राजद से नाता तोड़ने का तब बहाना मिल गया जब लालू परिवार के खिलाफ मंत्री पद और सरकारी नौकरी के बदले जमीन-फ्लैट लिखवाने का मामला भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने उजागर किया तथा रेलवे टेंडर घोटाला की जांच शुरू हुई। इस पर श्री कुमार ने उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने को कहा, लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो श्री कुमार ने 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा भी दे दिया। इसके बाद तुरंत भाजपा ने श्री कुमार को समर्थन देने की घोषणा कर दी और 24 घंटे के अंदर ही श्री कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही फिर से बिहार में राजग सरकार की वापसी हो गयी।
वर्ष 2020 में एक बार फिर श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी। श्री नीतीश सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। अगस्त 2022 में हालांकि घटनाक्रम तेजी से बदले और श्री नीतीश कुमार ने राजग से अलग होने का फैसला कर लिया। श्री कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो गये और उनके नेतृत्व में नयी सरकार बनी। श्री कुमार आठवीं बार मुख्ममंत्री बने। श्री नीतीश कुमार महागठबंधन में गये लेकिन 17 माह में ही असहज महसूस करने लगे। जनवरी 2024 के आते-आते स्थितियां फिर से बदलने लगीं और नीतीश फिर से राजग में वापस लौट आये। श्री कुमार नवीं बार मुख्यमंत्री बने।
चौहत्तर साल के श्री नीतीश कुमार अपनी राजनीति का उफान देख चुके हैं। मुख्यमंत्री पद की दसवीं बार जिम्मेवारी संभालने जा रहे श्री कुमार ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन में अब तक अपनी शर्तों पर ही राजनीति की है।

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देश को बांटने की कोशिश कर रहे भाजपा-आरएसएस एकजुट कर रहा इंडिया गठबंधन: राहुल गांधी https://demo.theshikshanews.com/desh-ko-baantane-kee-koshish-kar-rahe-bhaajapa-aareses-ekajut-kar-raha-indiya-gathabandhan-raahul-gaandhee/ https://demo.theshikshanews.com/desh-ko-baantane-kee-koshish-kar-rahe-bhaajapa-aareses-ekajut-kar-raha-indiya-gathabandhan-raahul-gaandhee/#respond Sun, 09 Nov 2025 16:42:21 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5716 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Kishanganj। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि देश को बांटने का प्रयास कर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा और देश को जोड़ने का संकल्प लिए हुए ‘इंडिया’ गठबंधन की विचारधारा के बीच इस समय सीधी लड़ाई है।
बिहार के किशनगंज में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हम नफरत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान खोलना चाहते हैं। नरेन्द्र मोदी जी के खून में नफरत है, लेकिन मेरे खून में देश को एकजुट करने का जज्बा है।”
उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस समाज में डर व घृणा का माहौल बनाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “वे चाहते हैं कि लोग एक-दूसरे से डरें, नफरत करें, ताकि वे सत्ता में बने रहें।”
गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा “ वह बिहार आकर कहते हैं कि यहां उद्योग लगाने के लिए जमीन नहीं है। लेकिन जब अदाणी की बात आती है, तो उन्हें जमीन दी जाती है। बिहार में एक भी फूड प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है, जबकि यहां के किसानों के पास अपार संभावनाएं हैं।”
कांग्रेस नेता ने बिहार की गौरवशाली शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य कभी ज्ञान और शिक्षा का केंद्र था। उन्होंने कहा, “नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान था, जहां विदेश से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। आज उसी बिहार को बेरोजगारी, गरीबी और पलायन के लिए जाना जाता है, जो अत्यंत दुखद है।”
गांधी ने कहा कि भाजपा सरकार के नौ वर्ष के शासनकाल में केवल कुछ उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का काम हुआ है, जबकि आम जनता की स्थिति लगातार खराब हुई है। उन्होंने कहा, “वे कहते हैं कि ‘सबका साथ, सबका विकास’, लेकिन सच्चाई यह है कि उनका पूरा ध्यान कुछ गिने-चुने लोगों के विकास पर है।”
गांधी ने दावा किया कि बिहार की जनता इस बार भाजपा और राजग को करारा जवाब देगी और ‘इंडिया’ गठबंधन को भारी समर्थन मिलेगा। गांधी ने कहा, “बिहार के लोग समझ चुके हैं कि विकास केवल नारों से नहीं, नीयत और नीतियों से होता है।”
गांधी बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले कई जिलों में प्रचार कर रहे हैं। मंच पर कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। सभा में भारी भीड़ उमड़ी और गांधी के भाषण के दौरान ‘इंडिया जीतेगा’ और ‘नफरत छोड़ो, मोहब्बत से जोड़ो’ के नारे लगते रहे।

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हरित पटाखों को उच्चतम न्यायालय की मंजूरी: भाजपा ने कहा कि पार्टी सही साबित हुई https://demo.theshikshanews.com/harit-pataakhon-ko-uchchatam-nyaayaalay-kee-manjooree-bhaajapa-ne-kaha-ki-paartee-sahee-saabit-huee/ https://demo.theshikshanews.com/harit-pataakhon-ko-uchchatam-nyaayaalay-kee-manjooree-bhaajapa-ne-kaha-ki-paartee-sahee-saabit-huee/#respond Wed, 15 Oct 2025 16:01:13 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5362 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) में हरित पटाखों की बिक्री और उपयोग को मंजूरी दिए जाने से पार्टी का यह रुख सही साबित हुआ है कि पिछली ‘आप’ (आम आदमी पार्टी) सरकार ने अदालत में ऐसे तर्क पेश किए थे जिनके कारण पटाखों पर प्रतिबंध लगा।
भाजपा ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली ‘आप’ सरकार की सनातन धर्म के प्रति मंशा बेईमान थी।
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कुछ शर्तों के साथ राजधानी में हरित पटाखों पर लगे प्रतिबंध में ढील दी। अदालत ने कहा कि हरित पटाखों की बिक्री 18 से 21 अक्टूबर तक ही करने की अनुमति होगी और उनका उपयोग दीवाली से एक दिन पहले और दीवाली के दिन सुबह छह बजे से सात बजे तक और रात आठ बजे से 10 बजे तक सीमित रहेगा।
⁠दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि शीर्ष अदालत का यह फैसला उनकी पार्टी के रुख को सही साबित करता है।
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, ‘हम लंबे समय से कह रहे हैं कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसे तर्क पेश किए जिनके कारण उच्चतम न्यायालय ने पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया। दिल्ली की जनता ने अब सही सरकार चुनी है। वायु प्रदूषण के कई कारण हैं और वर्तमान सरकार उन्हें सुलझाने के लिए काम कर रही है। यह सनातनियों की जीत है।’
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि यह अदालत का आदेश वर्तमान दिल्ली सरकार द्वारा की गई ‘सकारात्मक सिफारिश’ के कारण संभव हो पाया।
मनोज तिवारी ने आरोप लगाया, ‘पहले ‘आप’ सरकार अदालत को नकारात्मक सिफारिशें देती थी और हरित पटाखों पर भी प्रतिबंध लगाना चाहती थी। ‘आप’ की मंशा सनातन धर्म और उसके त्योहारों के प्रति बेईमान थी।’
दिल्ली के कला एवं संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने इस फैसले को ‘बदलाव का प्रतिबिंब’ बताया।
कपिल मिश्रा ने कहा, ‘सरकार बदलने के बाद हिंदू त्योहारों पर प्रतिबंध रुक गया है। पिछली सरकार ने दीवाली मनाने के अधिकार की रक्षा के लिए कभी अदालत का रुख नहीं किया। हमने जनता के विचार प्रस्तुत किए और अब त्योहार को हरित पटाखों के साथ पारंपरिक तरीके से मनाया जा सकता है।’
इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि इस फैसले ने दीवाली समारोह के ‘गौरव को बहाल’ किया है।
प्रवेश वर्मा ने कहा, ‘सालों से दिल्ली के लोगों को यह महसूस कराया गया था कि दीवाली मनाना अपराध है। शीर्ष अदालत का यह आदेश हमारी परंपराओं को जिम्मेदारी से मनाने की रोशनी, गौरव और स्वतंत्रता वापस लाता है।’
पटाखों पर प्रतिबंध में ढील देते हुए आज भारत के प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा, ‘हमें एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, इसे संयम से अनुमति देनी होगी जबकि पर्यावरण से कोई समझौता नहीं करना होगा।’
‘आप’ नेता और दिल्ली के पूर्व पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने उम्मीद जताई कि भाजपा सरकार वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए काम करना जारी रखेगी।
गोपाल राय ने कहा, ‘हमने प्रदूषण कम करने की पूरी कोशिश की। दीवाली के दौरान हरित पटाखों की अनुमति देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के साथ, हमें उम्मीद है कि दिल्ली सरकार नियमों का पालन करेगी और त्योहार के दौरान वायु गुणवत्ता में सुधार की दिशा में काम करना जारी रखेगी।’

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बिहार में अपने झूठे प्रचार अभियान के लिए राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिएः भाजपा https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-apane-jhoothe-prachaar-abhiyaan-ke-lie-raahul-gaandhee-ko-maaphee-maanganee-chaahieh-bhaajapa/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-apane-jhoothe-prachaar-abhiyaan-ke-lie-raahul-gaandhee-ko-maaphee-maanganee-chaahieh-bhaajapa/#respond Fri, 10 Oct 2025 05:46:35 +0000 https://www.khabariya.com/?p=5307 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा है कि राहुल गांधी को बिहार में अपने झूठे प्रचार अभियान के लिए माफी मांगनी चाहिए। भाजपा मुख्यालय में गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बिहार में घूम-घूमकर वोट चोरी के झूठे आरोप लगाए और उन्होंने विशेष पुर्ननिरीक्षण (एसआईआर) का विरोध किया था।
हमने तब भी कहा था कि राहुल गांधी एसआईआर का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे घुसपैठियों को संरक्षण देते हैं। उन्होंने कहा कि 8 अक्टूबर को बिहार चुनाव आयोग और वहां के अधिकारियों ने सूची सार्वजनिक की है। ये सूची स्पष्ट करती है कि कांग्रेस और आरजेडी के एक भी कार्यकर्ता ने, एक भी बूथ लेवल एजेंट ने बिहार में फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट पर एक भी अपील नहीं की है। इस जीरो अपील के आधार पर हम कह सकते हैं कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में उन्हें कोई विरोधाभास नहीं दिखा है।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि जो मुद्दा राहुल गांधी ने बिहार चुनाव में बनाने का प्रयास किया था, वो जमीन पर कोई मुद्दा है ही नहीं। यह राहुल गांधी के झूठे प्रचार का पूरी तरह से पर्दाफ़ाश करता है। प्रदीप भंडारी ने कहा कि जो मुद्दा राहुल गांधी उठाते हैं, उसमें न राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को विश्वास होता है और न ही कांग्रेस की बिहार यूनिट को। बिहार के अंदर राहुल गांधी का ये प्रोपेगेंडा पूरी तरह झूठा साबित हुआ। राहुल गांधी को बिहार की जनता से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए।
26/11 आतंकी हमले के सवाल पर प्रदीप भंडारी ने कहा कि आतंकी हमले का जवाब देने के लिए सेना पूरी तरह से तैयार थी लेकिन उन्हें रोका गया। पी. चिदंबरम को जवाब देना होगा कि यूपीए सरकार के अंदर वो कौन नेता था, जिसने 26/11 आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर हमारी सेना और वायुसेना को हमला करने से रोका था। इसका जवाब सोनिया गांधी को भी देना चाहिए क्योंकि उस समय वो यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री से भी अधिक शक्तिशाली थी। कांग्रेस ने हमेशा राष्ट्रीय हितों से ऊपर राजनीतिक हितों को आगे रखा है।

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बिहार में बीजेपी-नीतीश की बी टीम होगी आम आदमी पार्टी? https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-beejepee-neeteesh-kee-bee-teem-hogee-aam-aadamee-paartee/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-beejepee-neeteesh-kee-bee-teem-hogee-aam-aadamee-paartee/#respond Fri, 10 Oct 2025 05:08:59 +0000 https://www.khabariya.com/?p=5304 कुमार समीर
बिहार की राजनीति में आम आदमी पार्टी के बिहार विधान सभा चुनाव में प्रवेश का क्या मतलब है ? क्या उनका वहां ऐसा जनाधार है कि वह विधानसभा की 243 सीटों में से एक पर भी विजय हासिल करने वाली है ? राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी है तो फिर जल्दबाजी में आखिर बिहार चुनाव में उतरने का क्यों लिया गया फैसला ? क्या आप के अंदर मची भगदड़ को रोकने के लिए आनन-फानन में बिहार चुनाव में अपने प्रत्याशियों को उतारने का फैसला किया गया ?
ये ऐसे सवाल हैं जिसकी तह में जाएंगे तो आपको खुद ब खुद आभास हो जाएगा कि इस सबके पीछे का असली माजरा क्या है ? यह वही पार्टी जो कहा करती थी कि मजबूत संगठन खड़ा करने के बाद ही किसी प्रदेश में चुनाव में जाएगी । हां, हरियाणा राज्य जरूर अपवाद रहा है जहां मजबूत संगठन नहीं होने के बावजूद चुनाव में उतरी थी आम आदमी पार्टी।
जहां तक बिहार राज्य की बात है तो यहां संगठन खड़ा करने की कवायद पिछले 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले ही हो चुकी थी लेकिन तब यह कहकर 2020 में प्रत्याशियों को नहीं उतारा था कि बिहार भर में संगठन को और मजबूत करने के बाद ही चुनाव में जाया जाएगा। लेकिन 2025 में आखिर ऐसा क्या हो गया कि आनन-फानन में प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करनी शुरू कर दी ? यह गौर करने वाली बात है।
सच तो यह है कि बिहार में आम आदमी पार्टी के संगठन के अस्तित्व को बचाने की कवायद के तहत अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने पहली लिस्ट जारी की है। कहा जा रहा है कि पीके फैक्टर’ की वजह से आम आदमी पार्टी को चुनावी मैदान में उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
बता दें कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) उन दलों में से है जो इंडिया गठबंधन में आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ कई राष्ट्रीय मुद्दों पर एक जैसी राय रखते हैं। राजद बिहार में एनडीए को सत्ता से हटाने के लिए इंडिया गठबंधन की अगुवाई कर रही है। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी पहले ही 11 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर चुकी है और कहा जा रहा है कि जल्द ही दूसरी और तीसरी लिस्ट भी आने वाली है। आम आदमी पार्टी के सूत्रों की भी मानें तो पीके फैक्टर यानी प्रशांत किशोर का असर ही आम आदमी पार्टी को बिहार चुनाव में उतरने की असली वजह बना है।
हालांकि बिहार आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष राकेश यादव का कहना है कि ये फैसला बिहार के वोटरों को ‘विकल्प वाली राजनीति’ दिखाने के लिए लिया गया है। इसमें दो राय नहीं है कि आम आदमी पार्टी के संगठन महासचिव संदीप पाठक ने पहले घोषणा की थी कि पार्टी बिहार में चुनाव लड़ेगी। लेकिन जब तक उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं हुई थी, तब तक इसे लेकर संदेह था।
आम आदमी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि प्रशांत किशोर का असर आम आदमी पार्टी के संगठन पर दिखने लगा था। डर था कि पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता जन सुराज में चले जाएंगे। दरअसल, प्रशांत किशोर का जन सुराज मॉडल राजनीति का वही पैटर्न पेश कर रहा था जो आम आदमी पार्टी का मूल मॉडल यानी जनता से जुड़ी, साफ-सुथरी और मुद्दा आधारित राजनीति है। अब जन सुराज पार्टी एक मजबूत स्थिति में आ चुका है और एक विकल्प भी बन गया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता ने बताया कि आम आदमी पार्टी ने 2020 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। बिहार इकाई लगातार कह रही थी कि अगर पार्टी गोवा, गुजरात, हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव लड़ सकती है तो बिहार को क्यों छोड़ा जाए ? सच तो यह है कि आम आदमी पार्टी बिहार में राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसके कई नेता और कार्यकर्ता जन सुराज में शामिल हो गए थे। लेकिन अब जब पार्टी ने 2025 चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो उम्मीद है कि पार्टी के भीतर भगदड़ कम होगी और जो पुराने वरिष्ठ साथी पार्टी छोड़कर चले गए हैं उन्हें वापस लाने की कोशिश शुरू होगी।
बिहार इकाई आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष राकेश यादव का भी साफ मानना है कि जन सुराज का असर पार्टी पर पड़ा था। उन्होंने कहा कि करीब 50% कार्यकर्ता जो जन सुराज में चले गए थे, अब वापसी पर विचार कर रहे हैं। हमने चुनाव नहीं लड़ा इसलिए उन्होंने जन सुराज को विकल्प माना था। अब जब हमने पहली लिस्ट जारी की है तो उत्साह बढ़ गया है। यादव के मुताबिक पार्टी को करीब 6000 आवेदन मिले हैं। स्क्रूटनी चल रही है और जल्द ही दूसरी और तीसरी लिस्ट जारी की जाएगी जिनमें 30-40 उम्मीदवार हो सकते हैं।
पीके से अलग कैसे है उनकी पार्टी की राजनीति इस पर राकेश यादव का कहना है कि पीके के मुताबिक वो बिहार को एक वैकल्पिक राजनीति देंगे लेकिन उनका यह नारा हवा-हवाई जैसा ही है। लोगों ने दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी का गवर्नेंस मॉडल देखा है। स्कूलों और अस्पतालों पर केंद्रित शासन व्यवस्था के जो वादे पीके कर रहे हैं, हम उन्हें पहले ही लागू कर चुके हैं।
हालांकि सच तो यही है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी परफार्मेंस कहीं भी दिखाई देता हुआ नहीं दिख रहा है। हां, इससे राजद और आम आदमी पार्टी के रिश्ते पर जरूर असर पड़ता हुआ दिख रहा है। जब राजद ने दिल्ली विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था तो सवाल उठा था कि क्या आम आदमी पार्टी का बिहार चुनाव में उतरना दोनों पार्टियों के रिश्ते पर असर डालेगा? हालांकि आम आदमी पार्टी के विधायक व बिहार प्रभारी संजीव झा इसे नकारते हैं और उनका इस पर तर्क है कि हम हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव लड़े थे लेकिन कांग्रेस जीती। इससे हमारे रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ा। हम जहां-जहां चुनाव लड़ रहे हैं वहां अपनी शिक्षा और स्वास्थ्य की राजनीति का मॉडल पेश कर रहे हैं। बिहार में भी हमारी एंट्री असली मुद्दों पर फोकस वापस लाएगी।
वहीं राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में आम आदमी पार्टी चाहे जो भी तर्क़ दे लेकिन इस हकीकत से पीछे नहीं हटा जा सकता है कि पीके फैक्टर ने आम आदमी पार्टी को बिहार की चुनावी रेस में उतरने के लिए मजबूर कर दिया है और इसका फायदा एनडीए गठबंधन को मिलता हुआ दिख रहा है।
एक तरफ सत्ता में होने के कारण लोकलुभावन योजनाओं की घोषणाओं का फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है और उस पर आम आदमी पार्टी का चुनाव में जाने को एनडीए की बी टीम के रूप में देखा जा रहा है। हकीकत भले ही यह ना हो लेकिन जमीनी स्तर पर आम आदमी पार्टी को लेकर बिहार में यही मैसेज है स्थानीय लोगों के बीच। यानी एनडीए को अपनी लोकलुभावन घोषणाओं के साथ साथ आम आदमी पार्टी के चुनाव में उतरने का फायदा होता हुआ दिख रहा है।
कांफिडेंस से भरे एनडीए ने कहना शुरू कर दिया है कि ‘सुशासन बाबू’ की रणनीति की काट नहीं खोज पा रही है इंडिया गठबंधन और परिणामस्वरूप नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए एक बार फिर से सत्ता में आने की आशा कर रहा है। इसके लिए नीतीश की रणनीति अपने कोर वोटरों को साथ बनाए रखने की है। यह कोर वोटर है महिलाओं का।
एनडीए को लगता है कि अगर फिर से महिलाओं का साथ मिल गया तो सत्ता की सीढ़ी तक वह फिर पहुंच जाएगा। यही कारण है कि चुनाव से पहले एक करोड़ से अधिक महिलाओं को सरकार ने 10 हजार रुपये की बड़ी रकम एक साथ ट्रांसफर की है। लाखों और महिलाओं के खाते में पैसे जाने अभी बाकी हैं। उधर, तेजस्वी यादव की अगुआई में इंडी ब्लॉक अभी तक इसकी काट नहीं खोज पाया है। लेकिन उसने भी महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने का वादा किया है, जो नीतीश के दांव के आगे हल्का लग रहा है।
नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए कई अहम फैसले कर उन्हें अपने पक्ष में रखने की कोशिश की है। दरअसल, 2005 से अब तक महिलाएं और महादलित उनके साइलेंट कोर सपोर्ट रहे हैं। खासकर, महिला वोटर चुनाव में उनके लिए सबसे बड़ा X फैक्टर बनकर उभरती रही हैं।
नीतीश कुमार जब 2005 में सत्ता में आए थे तो उन्हें पता था कि राज्य की राजनीति जातीय समीकरण में उलझी है। इस समीकरण में उनकी जाति का पलड़ा भारी नहीं था। नीतीश की जाति राज्य में बड़ा आधार नहीं रखती थी। इसीलिए उन्होंने महिलाओं और महादलितों-अतिपिछड़ों के बीच पार्टी का विस्तार किया। तब से लेकर अब तक नीतीश की जीत में महिला वोटरों ने अहम भूमिका निभाई है। वह हर बार अपनी पार्टी के घोषणापत्र में महिलाओं के लिए खास वायदे भी करते रहे हैं। चुनाव में हर बार वह निर्णायक भी साबित होता रहा है।
2015 में उन्होंने शराबबंदी और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35% आरक्षण का वादा किया था। यह दांव सफल रहा। इसकी पुष्टि चुनाव बाद आए सर्वे से हुई। इनमें बताया गया कि 60% से अधिक महिलाओं ने उस चुनाव में नीतीश के पक्ष में वोट किया था। 2009 की जीत में स्कूल जाने वाली लड़कियों को साइकिल देने की घोषणा का अहम रोल था।
इसकी वजह यह भी है कि बिहार में महिलाओं की वोटिंग में शानदार बढ़ोतरी हुई है। 2020 में नीतीश ने ‘जीविका दीदी’ योजना पर फोकस किया, जो उनके लिए ब्रैंड एंबेसडर बनी। हालांकि उनके स्वास्थ्य को लेकर कुछ अफवाएं चल रही हैं उसका थोड़ा बहुत असर दिखाई देता हुआ जरूर दिख रहा है।
लेकिन नीतीश कुमार के करीबी रणनीतिकारों का दावा है कि हर बार चुनाव से पहले उनके बारे में नकारात्मक बातें होती हैं, लेकिन जब नतीजे आते हैं तो सभी हैरान हो जाते हैं। इन रणनीतिकारों का दावा है कि साइलेंट वोटर इस बार भी उनके साथ जुड़े रहेंगे। 2020 में भी जब तमाम सर्वे उनके खिलाफ बताए जा रहे थे, तब अंतिम परिणाम में इन्हीं महिलाओं ने नीतीश का किला किस‌ तरह बचा दिया था यह सबके सामने है।
लेकिन इंडी गठबंधन भी चुप नहीं बैठा है और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में नीतीश कुमार के इस मजबूत किले में माई-बहिन योजना की बदौलत सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वे हर महिला को 2,500 रुपये देने का वादा कर रहे हैं। वह नीतीश सरकार के महिलाओं के खाते में 10 हजार ट्रांसफर किए जाने की योजना को काउंटर करने के लिए वादा कर रहे हैं कि सत्ता में आए तो 2,500 रुपये की योजना को लागू करने के साथ ही हर महिला के खाते में पूरे साल का एकमुश्त 30 हजार रुपया एडवांस दे देंगे।
इंडिया गठबंधन महिला वोटरों का डेटा बनाकर उन तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। इसका गणित है कि अगर इसमें कुछ हद तक भी सेंध लगाने में सफलता मिल गई तो सियासी संतुलन उसके पक्ष में आ जाएगा। मगर सवाल यह है कि क्या विपक्षी गठबंधन नीतीश के कोर वोटरों के किले में सेंध लगा पाएगा ? अगर ऐसा करने में इंडी गठबंधन सफल हुआ तो उसका असर विधानसभा चुनाव परिणाम पर भी पड़ेगा, इसे नकारा नहीं जा सकता है। इंतजार रहेगा काउंटिंग वाले दिन का जिस दिन नेताओं के दावों की सच्चाई सामने आ जाएगी।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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लद्दाख के लोगों, संस्कृति पर भाजपा और आरएसएस हमला कर रहे: राहुल गांधी https://demo.theshikshanews.com/laddaakh-ke-logon-sanskrti-par-bhaajapa-aur-aareses-hamala-kar-rahe-raahul-gaandhee/ https://demo.theshikshanews.com/laddaakh-ke-logon-sanskrti-par-bhaajapa-aur-aareses-hamala-kar-rahe-raahul-gaandhee/#respond Sun, 28 Sep 2025 16:32:23 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5193 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. New Delhi. Laddaakh। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को आरोप लगाया कि लद्दाख के लोगों, संस्कृति और परंपराओं पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आरएसएस द्वारा हमला किया जा रहा है। उन्होंने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की भी वकालत की।
गांधी की यह टिप्पणी लेह में हुई हिंसा के मद्देनजर आई है। लेह में बुधवार को हुई हिंसा में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार लोग मारे गये थे और कई अन्य घायल हो गये। तब से, दंगों में संलिप्तता के आरोप में 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया है और राजस्थान की जोधपुर जेल में रखा गया है।
गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘लद्दाख के अद्भुत लोगों, संस्कृति और परंपराओं पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) हमला कर रहे हैं।’’ लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, ‘‘लद्दाख के लोगों ने आवाज उठाई। भाजपा ने चार युवकों की जान लेकर और सोनम वांगचुक को जेल में डालकर जवाब दिया। हत्या बंद करो। हिंसा बंद करो। धमकी देना बंद करो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लद्दाख को आवाज दीजिए। उन्हें छठी अनुसूची दीजिए।’’
अधिकारियों ने बताया कि हिंसा प्रभावित लेह में रविवार को लगातार पांचवें दिन कर्फ्यू लगा रहा और उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता प्रतिबंधों में ढील देने के बारे में फैसला करने के लिए सुरक्षा समीक्षा बैठक करेंगे। राज्य का दर्जा देने और लद्दाख में छठी अनुसूची के विस्तार के मुद्दे पर केंद्र के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) द्वारा आहूत बंद के दौरान बुधवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। शनिवार को लेह में कर्फ्यू में चार घंटे की ढील दी गई थी।

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राहुल ने यात्रा की ‘क्रांति’ के पूरे देश में फैलने का दावा किया, अखिलेश ने भाजपा को हराने का आह्वान किया https://demo.theshikshanews.com/akhilesh-ne-bhaajapa-ko-haraane-ka-aahvaan-kiya/ https://demo.theshikshanews.com/akhilesh-ne-bhaajapa-ko-haraane-ka-aahvaan-kiya/#respond Sun, 31 Aug 2025 03:14:06 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4925 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Saran/Bhojpur (Bihar). New Delhi।  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ शनिवार को कहा कि बिहार में शुरू हुई यह ‘क्रांति’ पूरे देश में फैलने जा रही है और अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को वोट और चुनाव की ‘चोरी’ नहीं करने दी जाएगी। राहुल गांधी और बिहार के महागठबंधन के नेताओं को इस यात्रा के 14वें दिन समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव का भी समर्थन मिला। यात्रा में शामिल होने के बाद यादव ने बिहार की जनता का आह्वान किया कि वे उसी तरह भाजपा को ‘मगध’ (बिहार) में भी हराए, जैसे पिछले लोकसभा चुनाव में लोगों ने उसे ‘अवध’ (उत्तर प्रदेश) में हराया था।
यात्रा का आज 14वां दिन था और आगामी सोमवार को पटना में ‘विशाल पैदल’ मार्च से पहले वाहन के जरिए यह आखिरी दिन की यात्रा थी।
यात्रा में रविवार को अवकाश का दिन है। सासाराम से 17 अगस्त को शुरू हुई यह 16-दिवसीय यात्रा एक सितंबर (सोमवार) को पटना में ‘‘विशाल पैदल मार्च’’ के साथ समाप्त होगी। बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सारण से इस यात्रा का हिस्सा बने।
राहुल गांधी, अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव और महागठबंधन के कुछ अन्य नेता एक खुली जीप पर सवार थे और उन्होंने जगह-जगह उत्साही भीड़ का अभिवादन स्वीकार किया। अखिलेश यादव से पहले, द्रमुक नेता एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री तथा पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस यात्रा में शामिल हो चुके हैं। राहुल गांधी ने यात्रा में शामिल होने के लिए अखिलेश यादव का धन्यवाद किया।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘दो भाई, वोट चोरों की तबाही! वोटर अधिकार यात्रा में शामिल होकर, तेजस्वी, मुझे और ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी नेताओं को अपना समर्थन देने के लिए आपका बहुत धन्यवाद, अखिलेश जी।’ यात्रा के 14वें दिन का समापन आरा (भोजपुर) में एक जनसभा के साथ हुआ।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘बिहार से ही क्रांति शुरू होती है। आपने दिखाया कि बिहार से ही यह क्रांति, वोटर अधिकार यात्रा शुरू हुई और यह पूरे देश में फैलने जा रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह चोरी सिर्फ आपके वोट की नहीं, बल्कि आपके अधिकार की चोरी है और आपके भविष्य की चोरी है।’’
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), ‘‘अदाणी और अंबानी की सरकार चलाते हैं, ’’ इसलिए वे चाहते हैं कि गरीबों की आवाज इस देश में नहीं सुनी जाए और दबाई जाए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने साफ कह दिया कि पूरे देश में गरीब युवाओं की आवाज गूंजेगी और हम बिहार में एक वोट भी चोरी नहीं होने देंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम बिहार का चुनाव इन्हें चोरी नहीं करने देंगे।’’
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग को ‘जुगाड़ आयोग’ बना दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों का हवाला देते हुए कहा, ‘हम लोगों ने मिलकर अवध में हराया था, इस बार मगध में भारतीय जनता पार्टी को हराने की जिम्मेदारी आपकी है।’
यादव ने तेजस्वी का समर्थन करते हुए कहा, ‘बिहार की जनता ने यह भी देखा है कि जहां युवा पलायन करते थे, उन्हें तेजस्वी ने नौकरी-रोजगार दिया था। इस बार भाजपा का पलायन होने जा रहा है।’ सपा अध्यक्ष ने 1990 में लालकृष्ण आडवाणी को रथयात्रा निकाले जाने के समय समस्तीपुर में गिरफ्तार किए जाने के प्रकरण का परोक्ष रूप से हवाला दिया और कहा, ‘एक बार पहले भी इसी बिहार ने भाजपा का रथ रोका था, इस बार भी बिहार की जनता उनका रथ रोकेगी।’
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा और कहा, ‘जो लोग हमें और आपको डरा रहे हैं, वह आजकल सबसे ज्यादा ट्रंप (अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) से डर रहे हैं। टैरिफ लगाकर हमारे तमाम कारोबारी के सामने संकट पैदा किया।’
राजद नेता तेजस्वी यादव ने सभा में कहा, ‘भाजपा के लोग आपका हक छीनना चाहते हैं, लेकिन हमें मिलकर वोट के अधिकार के लिए लड़ना है। बिहार में बदलाव लाना है और महागठबंधन की सरकार बनानी है।’
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि बिहार के लोगों ने राहुल गांधी और महागठबंधन के अन्य नेताओं की इस यात्रा को अभूतपूर्व समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा एसआईआर के नाम पर किए जा रहे लोकतंत्र के विनाश के खिलाफ आशा की किरण बनकर सामने आई।
वेणुगोपाल ने बताया कि यह यात्रा 25 जिलों में 110 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी और इसमें 1300 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की गई।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘यात्रा बिहार के जन आंदोलनों के समृद्ध इतिहास में एक मील का पत्थर रही है।’
यात्रा का समापन सोमवार को पटना के गांधी मैदान स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से पटना उच्च न्यायालय के निकट बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा तक मार्च निकालकर होगा। इसमें राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, महागठबंधन के अन्य नेता और समर्थक शामिल होंगे।
यह यात्रा रोहतास, औरंगाबाद, गयाजी, नवादा, शेखपुरा, नालंदा, लखीसराय, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, भोजपुर और कुछ अन्य क्षेत्रों से गुजरी।

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जनसंख्या नियंत्रण पर तीन बच्चों की सीमा जरूरी : मोहन भागवत https://demo.theshikshanews.com/janasankhya-niyantran-par-teen-bachchon-kee-seema-jarooree-mohan-bhaagavat/ https://demo.theshikshanews.com/janasankhya-niyantran-par-teen-bachchon-kee-seema-jarooree-mohan-bhaagavat/#respond Thu, 28 Aug 2025 16:29:46 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4886 नई दिल्ली, 28 अगस्त (वेब वार्ता)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण और संतुलन समाज तथा राष्ट्र के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर परिवार को अधिकतम तीन बच्चों तक सीमित रहना चाहिए ताकि जनसंख्या पर्याप्त और नियंत्रित बनी रहे।
डॉ. भागवत विज्ञान भवन में गुरुवार को तीन दिवसीय व्याख्यान शृंखला ‘100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज’ के तीसरे दिन जिज्ञासा समाधान सत्र में प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि केवल संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसके पीछे का इरादा भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा, “जनसंख्या से ज्यादा इरादा क्या है, यह महत्वपूर्ण है। जनसंख्या में असमानता कभी-कभी गंभीर परिणाम देती है, यहां तक कि विभाजन जैसी परिस्थितियां भी पैदा कर सकती है। हमें इस पर गहराई से विचार करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि भारत में जनसंख्या असंतुलन का एक कारण जबरन या लालच देकर किए गए मतांतरण भी हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “धर्म व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन यदि किसी को बलपूर्वक बदला जाता है तो यह गलत है। इसे रोकना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।”
घुसपैठ के विषय पर सरसंघचालक ने कहा कि हर देश की तरह भारत के भी अपने कानून और सीमित संसाधन हैं। ऐसे में अवैध प्रवास स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है, लेकिन समाज को भी सजग होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अवैध प्रवासियों की पहचान करनी होगी, शिकायत करनी होगी और उन्हें रोजगार नहीं देना चाहिए। यदि रोजगार देना है तो सबसे पहले अपने ही देश के नागरिकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”
डॉ. भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत में सभी नागरिकों को रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि कोई व्यक्ति कानूनी रूप से अनुमति लेकर आता है तो उसे काम मिल सकता है, लेकिन अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने जन्म दर को नियंत्रित रखने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि 2.1 का आंकड़ा सभ्यता को बनाए रखने के लिए आदर्श माना जाता है, जो व्यवहारिक रूप से तीन बच्चों के बराबर है। उन्होंने कहा, “बच्चे तीन होने चाहिए और उससे ज्यादा नहीं। यह विचार सभी को स्वीकार करना होगा। संसाधनों का संतुलित उपयोग और समाज में स्थिरता बनाए रखने के लिए जनसंख्या का नियंत्रित रहना आवश्यक है।”
डॉ. भागवत ने भाषा और संस्कृति पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जन्मी सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। उन्होंने कहा कि व्यवहार और संपर्क के लिए एक सामान्य भारतीय भाषा होनी चाहिए, पर वह विदेशी भाषा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अंग्रेजी सीखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन अपनी मातृभाषा और संस्कृति का त्याग नहीं करना चाहिए।”

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अंकिता हत्याकांड में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य समेत तीनों को उम्र कैद की सजा https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-2/ https://demo.theshikshanews.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-2/#respond Sat, 31 May 2025 05:39:20 +0000 http://www.khabariya.com/?p=3262 वेबवार्ता. खबरिया न्यूज. एनसीआर टुडे. कोटद्वार। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने शुक्रवार को सजा का एलान करते हुए मुख्य आरोपी पुलकित आर्य समेत तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनायी।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने आज सजा का एलान किया। भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्या के पुत्र एवं ऋषिकेश के वनंतरा रिसाॅर्ट के मालिक पुलकित आर्य को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 और 354 के तहत दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
जबकि रिसाॅर्ट के प्रबंधक सौरभ भाष्कर और अंकित गुप्ता को साक्ष्य मिटाने के मामले में भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 302 और 201 के तहत दोषी ठहराते हुए दोनों को भी आजीवन कारावास की सजा सुनायी है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अवनीश नेगी के अनुसार तीनों को हत्या का दोषी करार दिया गया है और उम्रकैद की सजा सुनाई गयी है। उल्लेखनीय कि वर्ष 2022 में अंकिता हत्याकांड सामने आया था।
अंकिता ऋषिकेश के पास वनंतरा रिसाॅर्ट में रिसेप्सनिष्ट के पद पर तैनात थी। वह 18 सितम्बर, 2022 को यकायक लापता हो गयी थी। दो दिन बाद 24 सितम्बर को उसका शव चीला बैराज से बरामद हुआ था। हत्या का आरोप वनंतरा रिसाॅर्ट के मालिक पुलकित आर्य, सौरभ भाष्कर और अंकित गुप्ता पर लगा था।
इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में लोगों ने रोष व्यक्त किया था। प्रदेश सरकार ने भी मामले को विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दिया था। एसआईटी ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अदालत के बाहर आज सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही सुबह से ही अदालत परिसर में भीड़ जमा हो गयी। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिये बेरिकेटिंग की व्यवस्था की, लेकिन भीड़ ने बेरिकेटिंग को तोड़ दिया। पुलिस ने हालांकि समय रहते भीड़ पर नियंत्रण पा लिया था।

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