Bihar – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Sun, 11 Jan 2026 10:41:11 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Bihar – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 नीतीश ने ऐतिहासिक गोलघर परिसर का भ्रमण कर वर्तमान स्थिति का लिया जायजा, अधिकारियों को दिये निर्देश https://demo.theshikshanews.com/neeteesh-ne-aitihaasik-golaghar-parisar-ka-bhraman-kar-vartamaan-sthiti-ka-liya-jaayaja-adhikaariyon-ko-diye-nirdesh/ https://demo.theshikshanews.com/neeteesh-ne-aitihaasik-golaghar-parisar-ka-bhraman-kar-vartamaan-sthiti-ka-liya-jaayaja-adhikaariyon-ko-diye-nirdesh/#respond Sun, 11 Jan 2026 10:41:11 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6098 NCR TODAY. Khabariya. New Patna।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को गोलघर परिसर का भ्रमण किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि इसका सौंदर्गीकरण एवं इसके रखरखाव को अच्छे ढंग से कराएं जिससे यह देखने में मनोरम लगे। मुख्यमंत्री श्री कुमार ने आज ऐतिहासिक गोलघर परिसर का भ्रमण कर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।
श्री कुमार ने भ्रमण के दौरान गोलघर परिसर पार्क, गोलघर के स्ट्रक्चर की स्थिति, लाइट एंड साउंड एवं लेजर शो आदि का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री श्री कुमार ने अधिकारियों को निर्देश देते हुये कहा कि गोलघर एक ऐतिहासिक धरोहर है, काफी संख्या में लोग इसे देखने आते हैं।
उन्होंने निर्देश दिया कि गोलघर परिसर के सौंदर्गीकरण एवं इसके रखरखाव को अच्छे ढंग से कराएं जिससे यह देखने में मनोरम लगे। वर्ष 2013 में यहाँ शुरू किए गए लाइट एंड साउंड तथा लेजर शो का नियमित रूप से संचालन हो, इससे लोगों को इतिहास के संबंध में जनकारी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि गोलघर की ऐतिहासिक महत्ता से यहां आनेवाले लोग अवगत हो सकें, इसके लिए यहां डिस्प्ले बोर्ड भी लगाकर प्रदर्शित करायें। गोलघर वास्तु कला का एक अदभुत नमूना है इसलिए इसके स्ट्रक्चर के रखरखाव का विशेष रूप से ख्याल रखें ताकि इसे और बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सके।
भ्रमण के दौरान जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद संजय कुमार झा, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. सहित सहत अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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भाजपा की बैसाखी के साथ नीतीश दसवीं बार बने बिहार के मुख्यमंत्री https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-kee-baisaakhee-ke-saath-neeteesh-dasaveen-baar-bane-bihaar-ke-mukhyamantree/ https://demo.theshikshanews.com/bhaajapa-kee-baisaakhee-ke-saath-neeteesh-dasaveen-baar-bane-bihaar-ke-mukhyamantree/#respond Fri, 21 Nov 2025 04:56:38 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5807 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna। दो दशक में दसवीं बार! श्री नीतीश कुमार ने लोकतंत्र की जननी कहीं जाने वाली भूमि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में गुरुवार को लगभग दो दशक में दसवीं बार शपथ लेकर देश की राजनीति में एक नया कीर्तिमान बनाया है।
ढ़लती उम्र, थकान और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के साथ-साथ लंबे समय तक शासन में रहने से लोकप्रियता में कमी की अटकलों को दरकिनार करते हुए हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में श्री कुमार ने राज्य की राजनीति में अपने निरंतर प्रभाव और जनता के भरोसे की एक बार फिर पुष्टि की। लगभग दो दशकों तक सत्ता में रहने के बाद इस चुनाव में वह अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे थे।
जातीय खानाजंगी और राजनीति के अपराधीकरण के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले बिहार प्रांत में ‘सुशासन बाबू’ के रूप में पहचान बनाने वाले और बिहार में अपनी स्वच्छ एवं ईमानदार छवि के कारण वह गठबंधन की राजनीति में एक मुख्य धुरी बने हुए हैं। हाल के समय में मीडिया से नीतीश से दूरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा ‘अचेत मुख्यमंत्री’ कहे जाने और प्रशासन पर नौकरशाही के हावी होने के आरोपों के बावजूद बिहार के मतदाताओं ने उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को इस बार एक ऐतिहासिक जनादेश दिया है।
बिहार में जनादेश की बहार में ‘नीतीशे कुमार’ पर जनता ने एक बार फिर ऐतबार जता दिया। छह महीने पहले तक जहां नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे और विपक्षी दल महागठबंधन मजबूत दिख रहा था, चुनाव नतीजों ने उनके खिलाफ तमाम अटकलें को हवा-हवाई साबित कर दिया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब भी बिहार के राजनीतिक रंगमंच के सबसे दमदार और सरदार अदाकार हैं। राजग की इस बार की जीत सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि बिहार की जनता की निरंतरता और स्थिरता की चाहत का प्रमाण है। जनता ने फिर से कहा है ,“बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार हैं…” नीतीश कुमार अपनी जनसभाओं, रैलियों में कहते , “2005 से पहले कुछ था… कोई काम किया है, ऊ लोग (राजद)….कोई शाम के बाद निकल पाता था… ।” नीतीश कहते रहे कि ‘सब हम लोग कितना काम किए जी…।’ श्री नीतीश कुमार का लगातार पांचवां विधानसभा चुनाव जीतना और 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना, भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है, खासकर हिंदी भाषी राज्यों में, जहां भारतीय लोकतंत्र में बदलाव की उम्मीद की जाती है, वहीं बिहार ने बार-बार दोहराये जाने वाले चेहरे पर अपना विश्वास दिखाया है।
इस बार राजग में भाजपा और जदयू ने बराबर-बराबर 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा और राजग ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में आगे रख कर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्री नीतीश कुमार की छवि का फायदा मिला। राजग ने 2010 के 200 से अधिक सीटों को जीतने के प्रदर्शन को दोहराया।
कभी बिहार में भाजपा के बड़े भाई की भूमिका में रहे जदयू को इस बार छोटे भाई की भूमिका में देखा जा रहा था। चुनाव से पहले यह व्यापक रूप से माना जा रहा था कि श्री मोदी की स्थायी लोकप्रियता और भाजपा का राष्ट्रीय प्रभुत्व ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सबसे बड़ी ताकत होगी, जो श्री नीतीश कुमार की घटती लोकप्रियता की भरपाई कर सकती है। इस बार चुनाव परिणाम ने भाजपा-जदयू को बराबर का सहभागी साबित किया है।
इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार ने महिला मतदाताओं के बीच एक मजबूत सद्भावना अर्जित की है। बिहार की ‘दीदियों’ ने मजबूती से उनका हाथ थामे रखा। यह बात लंबे समय से मानी जाती रही है कि बिहार की महिलाएं 2005 से चली आ रही श्री नीतीश कुमार नेतृत्व वाली राजग सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं की वजह से उनसे खूब जुड़ी हुई हैं, लेकिन इस बार गेम-चेंजर बना चुनावी सीजन के दौरान 1.4 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को दिया गया, 10 हजार रुपये का नकद भुगतान।
‘दस-हजारिया’ लाभार्थी और जीविका दीदियां राजग की बड़ी जीत का असली इंजन बन गयीं। सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाली महिलाएं बड़ी संख्या में हैं और वे हर जाति, समुदाय और वर्ग से आती हैं। इस बार 71.6 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाला, जो पुरुषों (62.8 प्रतिशत) से करीब नौ प्रतिशत ज्यादा है।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी कल्याणकारी पहलों के माध्यम से महिला मतदाताओं ने उनके नेतृत्व के लिए एक स्थिर बल के रूप में काम किया है, जिससे उन्हें अन्य वर्गों के झटकों से बचाव मिला है। वर्ष 2020 के विपरीत, जहां जदयू के कैडर में भ्रम दिखा था, इस बार पार्टी की संगठनात्मक शक्ति अधिक प्रभावी ढंग से सक्रिय हुई। ग्रामीण नेताओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों पर आधारित उसके पारंपरिक कैडर ढांचे ने निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर भाजपा के साथ बेहतर समन्वय के साथ काम किया।नतीजों ने श्री नीतीश कुमार की उस क्षमता को भी दिखाया, जिसमें वे गठबंधन को अपना वोट ट्रांसफर कर सकते हैं। चाहे वह किसी भी गठबंधन में हों। उनके कई उलटफेरों के बावजूद, उनके निर्वाचन क्षेत्रों से संदेश साफ था, “आप जहां जाएंगे, हम भी वहीं जाएंगे।” विरोधियों की ओर से उनके स्वास्थ्य और शासन क्षमता पर लगातार हमलों ने उनके समर्थकों को पहले से कहीं ज्यादा मतदान केंद्रों तक पहुंचाया। ‘सुशासन बाबू’ होने के अलावा, नीतीश ‘मिस्टर क्लीन’ भी हैं। उनके मंत्रियों पर आरोप लगते हैं, लेकिन किसी ने भी नीतीश पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया है।
इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार के लिए, ‘टाइगर अभी ज़िंदा है’ का नारा सिर्फ एक राजनीतिक उद्घोष नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक वजूद और विश्वसनीयता का प्रमाण भी साबित हुआ।
बिहार में पटना जिले के बख्तिायारपुर में एक मार्च 1951 को एक साधारण परिवार में जन्मे नीतीश कुमार के पिता दिवंगत कविराज राम लखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और वैद्य थे। श्री कुमार बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज पटना में पढ़ायी के दौरान ही लोक नायक जयप्रकाश नारायण से प्रभावित होकर वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन में कूद पड़े थे। श्री कुमार पहली बार सियासत में 1977 में उतरे, जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन चुका था। इस दौर में जनता पार्टी मजबूती से उभरी और लगभग पूरे देश में वर्चस्व बनाया। श्री नीतीश कुमार हालांकि चुनावी राजनीति में बेहतर शुरुआत नहीं कर पाये। वर्ष 1977 का चुनाव हुआ तब वह जनता पार्टी के टिकट पर नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इसके बाद 1980 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा, तब उनके परिवार वालों ने उन पर राजनीति छोड़कर नौकरी के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया, लेकिन श्री कुमार नहीं माने और राजनीति में डटे रहे।
इसके बाद श्री कुमार को पहली बार 1985 के विधानसभा चुनाव में हरनौत सीट से ही सफलता मिली और उसके बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में वह बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनकर लोकसभा पहुंचे। श्री कुमार 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बने। वर्ष 1991 के मध्यावधि चुनाव में वह फिर से लोकसभा के सदस्य चुने गये।
यही वह दौर था, जब इंजीनियर से नेता बने श्री नीतीश कुमार उभार पर आये। कभी पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के ‘छोटे भाई’ के तौर पर उनके विश्वासपात्र माने जाने वाले श्री नीतीश कुमार ने धीरे-धीरे पिछड़ी जातियों, खासकर कुर्मी-कुशवाहा समाज को अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया। इसके अलावा उन्होंने अति-पिछड़ा समाज (ईबीसी) के बीच भी पैठ बनायी। इस जातीय समीकरण को बिठाकर उन्होंने लालू यादव के समर्थन में खड़े यादव समुदाय की एकजुटता की काट खोजी।
श्री लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक मतभेद के कारण वर्ष 1994 में जनता दल से अलग होकर श्री कुमार ने जार्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में समता पार्टी बनाकर 1995 का विधानसभा चुनाव लड़ा तब उनकी पार्टी मात्र सात सीट पर ही जीत हासिल कर सकी। श्री कुमार ने इस हार से सबक लेते हुए लालू विरोधी मतों के विभाजन को रोकने के इरादे से वर्ष 1996 में भाजपा के साथ गठजोड़ कर लिया। उनका यह फार्मूला कामयाब रहा और उसका फायदा उन्हें आज तक मिल रहा है।
श्री कुमार वर्ष 1996 ,1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में विजयी हुए। श्री कुमार ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 1998 में रेल मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री का कार्य भार संभाला। 1999 में फिर बनी वाजपेयी सरकार में वह भूतल परिवहन और कृषि मंत्री बनाये गये। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा में उन्होंने राजग विधायक दल के नेता के रूप में मुख्यमंत्री पद की पहली बार शपथ ली, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले ही सात दिनों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। श्री कुमार के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका था।उसके बाद वह फिर से केन्द्र की राजनीति में लौट गये और वर्ष 2000 से लेकर 2004 तक वाजपेयी सरकार में मंत्री और रेल मंत्री रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में श्री कुमार ने दो सीटों से चुनाव लड़ा जिसमें वह बाढ़ से चुनाव हार गये लेकिन नालंदा सीट से विजयी हुए। उस साल केन्द्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार बनने के बाद श्री कुमार ने अपने आप को पूरी तरह बिहार की राजनीति पर केन्द्रित कर लिया। फरवरी 2005 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ तब किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और कोई भी दल सरकार बनाने में सफल नहीं रहा। नवम्बर 2005 में दुबारा हुए चुनाव में श्री कुमार के नेतृत्व वाले राजग को स्पष्ट बहुमत मिल गया और वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
मुख्यमंत्री के रूप में विकास पुरुष की छवि बना चुके श्री कुमार के नेतृत्व में जब राजग ने 2010 का विधानसभा चुनाव लड़ा तो उसे दो-तिहाईबहुमत हासिल हुआ। श्री कुमार ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेवारी संभाली। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए श्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश किये जाने की कोशिशों के विरोध में भाजपा से 17 साल पुराना अपना नाता तोड़कर एक बड़ा राजनीतिक जोखिम उठाया। भाजपा से नाता टूटने के बाद अल्पमत में आयी अपनी सरकार को उन्होंने निर्दलीय और अन्य दलों के बाहर से समर्थन के बल पर किसी तरह से बचा कर रखा। इसके बाद जब वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ तो श्री कुमार की पार्टी जदयू को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए उन्होंने 17 मई 2014 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और अपने भरोसेमंद नेता जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनवा दिया, लेकिन छह माह के अंदर ही श्री कुमार को लगने लगा कि उन्होंने श्री मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ी राजनीतिक भूल कर दी। करीब 15 दिनों के राजनीतिक ड्रामे के बाद श्री मांझी ने इस्तीफा दिया और 22 फरवरी 2015 को श्री कुमार ने चौथी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला।
बिहार में 2015 का विधानभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था। वर्षों के सहयोगी भाजपा और जदयू इस बार फिर जुदा हो गये थे और 20 साल बाद दो पुराने दोस्त लालू प्रसाद यादव और श्री नीतीश कुमार साथ आ गये थे। श्री लालू प्रसाद और श्री नीतीश कुमार के इस महागठबंधन में कांग्रेस भी शामिल थी। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव चुनाव के नतीजे आने पर राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनी और श्री नीतीश कुमार पांचवी बार मुख्यमंत्री बने। इस बार श्री कुमार की सरकार करीब 20 महीने ही चल पाई। दरअसल सरकार के कार्यों में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का बढ़ते हस्तक्षेप की वजह से पहले से ही असहज महसूस कर रहे श्री कुमार को राजद से नाता तोड़ने का तब बहाना मिल गया जब लालू परिवार के खिलाफ मंत्री पद और सरकारी नौकरी के बदले जमीन-फ्लैट लिखवाने का मामला भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने उजागर किया तथा रेलवे टेंडर घोटाला की जांच शुरू हुई। इस पर श्री कुमार ने उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने को कहा, लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो श्री कुमार ने 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा भी दे दिया। इसके बाद तुरंत भाजपा ने श्री कुमार को समर्थन देने की घोषणा कर दी और 24 घंटे के अंदर ही श्री कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही फिर से बिहार में राजग सरकार की वापसी हो गयी।
वर्ष 2020 में एक बार फिर श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी। श्री नीतीश सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। अगस्त 2022 में हालांकि घटनाक्रम तेजी से बदले और श्री नीतीश कुमार ने राजग से अलग होने का फैसला कर लिया। श्री कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो गये और उनके नेतृत्व में नयी सरकार बनी। श्री कुमार आठवीं बार मुख्ममंत्री बने। श्री नीतीश कुमार महागठबंधन में गये लेकिन 17 माह में ही असहज महसूस करने लगे। जनवरी 2024 के आते-आते स्थितियां फिर से बदलने लगीं और नीतीश फिर से राजग में वापस लौट आये। श्री कुमार नवीं बार मुख्यमंत्री बने।
चौहत्तर साल के श्री नीतीश कुमार अपनी राजनीति का उफान देख चुके हैं। मुख्यमंत्री पद की दसवीं बार जिम्मेवारी संभालने जा रहे श्री कुमार ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन में अब तक अपनी शर्तों पर ही राजनीति की है।

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बिहार के बाद अब UP में भी SIR, राजनीतिक हलचल तेज https://demo.theshikshanews.com/bihaar-ke-baad-ab-up-mein-bhee-sir-raajaneetik-halachal-tej/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-ke-baad-ab-up-mein-bhee-sir-raajaneetik-halachal-tej/#respond Tue, 18 Nov 2025 07:22:06 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5805 बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी SIR को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लखनऊ में 17 नवम्बर 2025 को बाकायदा एक प्रेस कांफ्रेंस करके इसकी जानकारी , मुख्य निर्वाचन अधिकारी के प्रेस वार्ता के तुरंत बाद ही प्रदेश में राजनीतिक पार्टियों का बयान आना शुरू हो गया, इस रिपोर्ट के जरिये हम आपो बताएंगे की आने वाले चुनाव में वोट देने के लिए आपको क्या सावधानियां बरतनी होगी और इस पर राजनीतिक पार्टियों का क्या बयान है
एक रिपोर्ट – विजय मिश्र
आपको बता दे कि उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रदेश में कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर प्रगति की समीक्षा की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि, सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा राजनैतिक दलों के साथ बैठक कर उन्हें SIR की प्रक्रिया और आयोग के निर्देशों की जानकारी दे दी गई है। राजनैतिक दलों भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजनसमाज पार्टी तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा अपने जिला प्रतिनिधियों की सूची उपलब्ध करा दी गयी है। इनसे सम्पर्क कर बूथ लेबल एजेंट (BLA) नियुक्त करने का अनुरोध किया जाए, जो पुनरीक्षण कार्यों में बीएलओ का सहयोग करेंगे।
इस दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा समस्त जनपदों को निर्देशित किया गया कि, गणना प्रपत्रों को भरे जाने में BLO अपने बूथ के मतदाताओं की मदद करें साथ ही भरे हुए गणना प्रपत्र यथाशीघ्र एकत्र किया जाए तथा उसे बीएलओ एप के माध्यम से डिजिटाइज भी कराया जाए। एकत्रीकरण तथा डिजिटाइजेशन कार्य में कम प्रगति वाले जनपदों को विशेष अभियान चलाकर गणना प्रपत्र एकत्र कराने तथा उसको डिजिटाइज कराकर प्रगति में अपेक्षित सुधार लाने का निर्देश दिया गया। किसी भी परिस्थिति में तय समय सीमा के अंदर कार्य को सम्पन्न कराया जाए।
जनपदों को निर्देशित किया गया कि अपने बूथ लेवल अधिकारी को यह निर्देश जारी कर दें कि, वे बीएलओ ऐप का एडवांस वर्जन 8.75 प्ले स्टोर से डाउनलोड कर लें तथा जिन मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किया जा रहा है, उनको बीएलओ ऐप पर मार्क करते रहें, जिससे वितरण की प्रगति ऑनलाइन अपडेट हो सके। मतदाता voters.eci.gov.in पोर्टल पर जाकर अपने पंजीकृत मोबाइल नम्बर के माध्यम से अपना मतदाता पहचान पत्र संख्या डालकर गणना प्रपत्र ऑनलाईन भी भर सकते हैं। ऑनलाइन माध्यम से गणना प्रपत्र भरे जाने के संबध में वीडियो के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में व्यापक जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाने के निर्देश दिए गए। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
एंव सोशल मीडिया के माध्यम से भी इसका प्रचार प्रसार कराते हुए जनसामान्य को जानकारी उपलब्ध कराया जाए।
सबसे खास बात अब आपको अपने जिले में यह सुविधा मिलेगी , प्रत्येक जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय तथा निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण कार्यालय में हेल्प डेस्क की स्थापना के निर्देश निर्गत किए गए। इसका उद्देश्य मतदाताओं को विशेष प्रकार पुनरीक्षण के संबंध में सहायता प्रदान करना तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करना है। इन हेल्प डेस्क पर अनुभवी तथा दक्ष कार्मिकों को तैनात करने के भी निर्देश दिए हैं।
मतदाताओं को गणना प्रपत्र भरने में सहायता करने के लिए जनपद में एनएसएस, एनसीसी तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें मतदाताओं के बीच भेजकर गणना प्रपत्र भरे जाने में मतदाताओं की सहायता कराए जाने के भी निर्देश दिए।
सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) के दौरान दिन-प्रतिदिन की प्रगति को मीडिया के साथ साझा किया जाए तथा अपने सोशल मीडिया हैण्डल्स से भी इसको प्रसारित किया जाए। किसी भी भ्रामक/नकारात्मक पोस्ट का तत्काल संज्ञान लेते हुए तथ्यपरक उत्तर दिया जाय।
सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि, विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) के दौरान किसी भी स्तर पर कार्य में लापरवाही तथा दिये गये निर्देशों की अवहेलना पाये जाने पर कठोर कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने सभी राजनैतिक दलों और मतदाताओं से विशेष प्रगाड पुनरीक्षण अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की है।
वही निर्वाचन आयोग द्वारा SIR बनाने मे तेजी किये जाने के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है समाजवादी पार्टी की तरफ से उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस पर बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान कहा की “बीजेपी के लोग आधे घंटे के आधार बना देते हैं, हमारी मांग है इलेक्शन कमीशन और भारत सरकार से कि जो आधार कार्ड बने वो नकली न बन सके।”
राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव बेंगलुरु
वही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह सशक्त लोकतंत्र की नींव हैं ‘सत्यापित मतदाता’…आज विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतर्गत गोरखपुर में अपना गणना प्रपत्र स्वयं भरकर उपलब्ध कराया।
और साथ ही जनता से आवाहन भी किया ,आप सभी SIR फॉर्म अवश्य भरें। आपका यह छोटा सा प्रयास भारत के लोकतंत्र को मजबूत करेगा।
बहुजन समाज पार्टी भी SIR को लेकर विशेष सतर्क है एक बैठक में एसआईआर अभियान पर भी विस्तार से चर्चा हुई ।पार्टी को डर है कि इस अभियान में मुस्लिम और दलित वोटरों के नाम काटे जा सकते हैं। इसलिए कमेटियों को निर्देश दिया गया है कि वे बीएलओ पर नजर रखें और लोगों को फॉर्म भरने में मदद करें। बसपा का मानना है कि २००७ में जिस तरह दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम समाज के गठजोड़ से पूर्ण बहुमत मिला था, वही फॉर्मूला २०२७ में दोहराया जाएगा।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय ने SIR को लेकर कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने सभी धर्म व जाति के लोगों को एकजुट कर समाज को गुलदस्ते के रूप में स्थापित करने का काम किया था।उस गुलदस्ते को भाजपा उजाड़ने का काम कर रही है. भाजपा हर तरह से देश को तोड़ने में लगी है. प्रदेश प्रभारी ने कहा कि SIR पूरी तरह से बहकाने वाला और छलावा है. भाजपाई विपक्ष और जनता की बात नहीं सुनते। न्यायालय के आदेशों की भी अनदेखी हो रही है।मतदाताओं को उनके अधिकार से भी वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
जाहिर है बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी SIR को लेकर चर्चा तेज हों गई हैं , जिसे अपने राजनीतिक पार्टियां अपने अनुसार उसका विश्लेषण कर अपनी तैयारी में जुट रही है , प्रदेश में चुनाव तो 2027 में है लेकिन SIR ने इसकी हलचल अभी से शुरू कर दी है
लखनऊ से विजय मिश्र की रिपोर्ट

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बिहार के लिए चले स्पेशल ट्रेनों पर कपिल सिब्बल के सवाल https://demo.theshikshanews.com/bihaar-ke-lie-chale-speshal-trenon-par-kapil-sibbal-ke-savaal/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-ke-lie-chale-speshal-trenon-par-kapil-sibbal-ke-savaal/#respond Sun, 09 Nov 2025 16:44:58 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5721 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने बिहार विधानसभा चुनाव के पहले फेज से पहले 3 नवंबर को हरियाणा से बिहार के लिए चलाए गए स्पेशल ट्रेनों पर सवाल खड़े किये हैं। श्री सिब्बल ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सवाल किया कि क्या ये ट्रेनें विशेष सेवाओं के रूप में चलाई गईं? यदि हाँ, तो इन्हें हरियाणा से अभी क्यों चलाया गया, छठ के दौरान क्यों नहीं चलाया गया?
पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”मैं यहाँ पर एक बात पर प्रकाश डालने आया हूँ कि क्या चुनाव आयोग कोई कार्रवाई कर रहा है या भाजपा के सहयोगी के रूप में काम कर रहा है, जैसा कि कई लोग आरोप लगाते हैं।” उन्होंने कहा कि 3 नवंबर को लगभग 6 हज़ार लोगों को लेकर चार ट्रेनें हरियाणा से बिहार गईं, पहली दो करनाल से पानीपत होते हुए बरौनी और अगली दो गुरुग्राम से पटना होते हुए भागलपुर।
श्री सिब्बल ने सवाल उठाया कि ये लोग यात्रा क्यों कर रहे थे? उन्होंने कहा या तो यात्रा कर रहे लोग बिहार के असली मतदाता थे या किसी ‘सुनियोजित अभियान’ का हिस्सा थे। उन्होंने कहा, ”मैं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से पूछता हूँ क्या ये ट्रेनें विशेष सेवाओं के रूप में चलाई गईं?”
उन्ह0ोंने फिर सवाल किया, ”यदि हाँ, 0तो इन्हें हरियाणा से अभी क्यों चलाया गया, छठ के दौरान क्यों नहीं चलाया गया ?” श्री सिब्बल ने सवाल उठाया कि क्या हरियाणा के इन असली मतदाताओं को विशेष ट्रेनों की ज़रूरत थी या उन्हें ख़ास तौर पर बिहार में वोट देने के लिए भेजा गया था? उन्होंने चुनाव आयोग पर तंज कसते हुए कहा मुझे मालूम है चुनाव आयोग इस मसले पर कुछ नहीं करेगा क्योंकि चुनाव आयोग भाजपा से मिला हुआ है।
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने हरियाणा से बिहार चलाए गए स्पेशल ट्रेन के टाइमिंग पर सवाल उठाया है। उन्होंने संदेह जताया है कि बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान करने के लिए स्पेशल ट्रेन के जरिए लोगों को हरियाणा से बिहार भेजा गया है।

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बिहार : प्रथम चरण की 121 सीटों पर 65 प्रतिशत मतदान https://demo.theshikshanews.com/bihaar-pratham-charan-kee-121-seeton-par-65-pratishat-matadaan/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-pratham-charan-kee-121-seeton-par-65-pratishat-matadaan/#respond Thu, 06 Nov 2025 16:28:44 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5675 1314 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद

NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna।बिहार विधानसभा के प्रथम चरण के चुनाव में त्रिस्तरीय कड़ी सुरक्षा के बीच गुरुवार को 121 विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान में करीब 65 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर 1314 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में बंद कर दिया। प्रथम चरण के चुनाव में कुल तीन करोड़ 75 लाख 13 हजार 302 मतदाताओं के करीब 65 प्रतिशत वोटरों ने लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर बिहार के दो उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा विजय कुमार सिन्हा, महागठबंधन से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव,राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव समेत 1314 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद कर दिया।

voters standing in queue to cast their votes at a polling booth during the 1st phase of the Bihar Assembly Election 2025 at Patna Sahib in Patna, Bihar on November 06, 2025.

प्रथम चरण में 121 विधानसभा सीटों के लिये 45341 मतदान केंद्रों पर वोटिंग सुबह सात बजे शुरू हुयी। सुरक्षा कारणों से मुंगेर जिले की तीन सीटें तारापुर,मुंगेर और जमालपुर के अलावा सहरसा जिले की सिमरी बख्तिायारपुर ,महिषी और लखीसराय जिले की सूर्यगढ़ा सीट के 56 मतदान केन्द्रों पर मतदान शाम पांच बजे समाप्त हो गया, वहीं अन्य सीटों पर मतदान शाम छह बजे समाप्त हुआ।
आज के मतदान में जिन दिग्गजों की किस्मत का फैसला मतदाताओं ने किया उनमें राजग से दोनों उप मुख्यंमत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, 15 मंत्री विजय कुमार चौधरी,श्रवण कुमार,मंगल पाण्डे,मदन सहनी,नितिन नवीन,महेश्वर हजारी,सुनील कुमार,रत्नेश सदा,केदार प्रसाद गुप्ता, सुरेन्द्र मेहता,संजय सरावगी, डा. सुनील कुमार, जिवेश कुमार,राजू कुमार सिंह और कृष्ण कुमार मंटू के अलावा बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेन्द्र नारायण यादव, राम कृपाल यादव,श्याम रजक, अनंत सिह, अमरेन्द्र पांडेय, हरिनारायण सिंह, उमेश कुशवाहा और मैथिली ठाकुर शामिल हैं।
इसी तरह महागठबंधन से जिन दिग्गज नेताओं के भाग्य का फैसला मतदाताओं ने किया उनमें मुख्यमंत्री पद का चेहरा तेजस्वी यादव के अलावा अवध बिहारी चौधरी,डा. रामानंद यादव, वीणा देवी,ललित कुमार यादव,विजेन्द्र चौधरी, रेणु कुशवाहा, खेसारी लाल यादव,आलोक मेहता,भाई वीरेन्द्र, अनिरूद्ध यादव,अवधेश राय शामिल है।इसके अलावा तेज प्रताप यादव, आईपी गुप्ता, शिवदीप लांडे,आनंद मिश्रा, वी.के.रवि, जयप्रकाश सिंह, आर.के.मिश्रा, राम नारायण सिंह, पुष्पम प्रिया, के.सी. सिन्हा समेत अन्य उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला भी आज मतदाताओं ने ईवीएम में बंद कर दिया ।
प्रथम चरण के चुनाव में राजग के घटक जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के 57, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 48, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 13 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के दो उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। वहीं महागठबंधन के घटक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 71, कांग्रेस के 24, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा माले) के 14, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के छह,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पांच, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) के तीन-तीन उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में थे। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज से 118 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपना भाग्य आजमाया ।
बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा, जिसमें 122 सीटों के लिये मतदान कराया जायेगा। इसके बाद 14 नवंबर को मतगणना होगी और परिणाम घोषित किये जायेंगे। उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को इस वर्ष समाप्त हो रहा है।

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बिहार में प्रथम चरण के 121 विधानसभा क्षेत्र में थम गया प्रचार का शोर https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-pratham-charan-ke-121-vidhaanasabha-kshetr-mein-tham-gaya-prachaar-ka-shor/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-pratham-charan-ke-121-vidhaanasabha-kshetr-mein-tham-gaya-prachaar-ka-shor/#respond Tue, 04 Nov 2025 15:38:10 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5649 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna। बिहार में 121 विधानसभा सीटों पर प्रथम चरण में 06 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए आज शाम प्रचार का शोर थम गया और अब प्रत्याशी जनसम्पर्क के जरिये वोट जुटाने में लग गये हैं।
पहले चरण के चुनाव में राष्ट्रीय जनतंत्रिक गठबंधन (राजग) से जिन दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, उनमें दोनों उप मुख्यंमत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, 15 मंत्री विजय कुमार चौधरी,श्रवण कुमार,मंगल पाण्डे,मदन सहनी,नितिन नवीन,महेश्वर हजारी,सुनील कुमार,रत्नेश सदा,केदार प्रसाद गुप्ता, सुरेन्द्र मेहता,संजय सरावगी, डा. सुनील कुमार, जिवेश कुमार,राजू कुमार सिंह और कृष्ण कुमार मंटू के अलावा बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेन्द्र नारायण यादव, राम कृपाल यादव,श्याम रजक, अनंत सिह, अमरेन्द्र पांडेय, हरिनारायण सिंह, उमेश कुशवाहा और श्रेयसी सिंह शामिल हैं। इसी तरह महागठबंधन से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव के अलावा अवध बिहारी चौधरी,डा. रामानंद यादव, वीणा देवी,ललित कुमार यादव,विजेन्द्र चौधरी, रेणु कुशवाहा, खेसारी लाल यादव,आलोक मेहता,भाई वीरेन्द्र, अनिरूद्ध यादव,अवधेश राय के नाम शामिल है।इसके अलावा तेज प्रताप यादव, आईपी गुप्ता, शिवदीप लांडे,आनंद मिश्रा, वी.के.रवि, जयप्रकाश सिंह, आर.के.मिश्रा, राम नारायण सिंह, पुष्पम प्रिया, के.सी. सिन्हा समेत अन्य की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुयी है।
प्रथम चरण में 121 विधानसभा क्षेत्रों के मतदान में 06 नवंबर को 45341 मतदान केंद्रों पर तीन करोड़ 75 लाख 13 हजार 302 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर 122 महिला और 1192 पुरुष प्रत्याशी समेत कुल 1314 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में बंद कर देंगे। मतदाताओं में एक करोड़ 98 लाख 35 हजार 325 पुरुष, एक करोड़ 76 लाख 77 हजार 219 महिला और 758 तीसरे जेंडर के लोग शामिल हैं। पहले चरण के चुनाव में सबसे अधिक 20 उम्मीदवार कुढ़नी और मुजफ्फरपुर में वहीं भोरे, अलौली और परबत्ता में सबसे कम पांच प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे हैं।
प्रथम चरण में राज्य के जिन 121 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होना है उनमें उनमें आलमनगर,बिहारीगंज, सिंहेश्वर (सुरक्षित),मधेपुरा,सोनबर्षा (सुरक्षित),सहरसा,सिमरी बख्तियारपुर,महिषी,कुशेश्वरस्थान (सुरक्षित), गौराबौराम, बेनीपुर,अलीनगर,दरभंगा ग्रामीण,दरभंगा, हायाघाट,बहादुरपुर, केवटी,जाले, गायघाट , औराई, मीनापुर, बोचहां (सुरक्षित), सकरा (सुरक्षित), कुढ़नी, मुजफ्फरपुर,कांटी,बरुराज,पारू,साहेबगंज,बैकुंठपुर,
बरौली, गोपालगंज, कुचायकोट भोरे (सुरक्षित),हथुआ,सिवान,जीरादेई,दरौली सुरक्षित),रघुनाथपुर, दरौंधा,
बड़हरिया,गोरियाकोठी,महराजगंज,एकमा,मांझी,बनियापुर,तरैया, मढ़ौरा , छपरा, गरखा (सुरक्षित),
अमनौर,परसा,सोनपुर,हाजीपुर,लालगंज,वैशाली,महुआ,राजा पाकड़ (सुरक्षित), राघोपुर, महनार,पातेपुर (सुरक्षित), कल्याणपुर (सुरक्षित), वारिसनगर, समस्तीपुर,उजियारपुर, मोरवा, सरायरंजन, मोहिउद्दीननगर,
विभूतिपुर,रोसड़ा (सुरक्षित),हसनपुर, चेरिया बरियारपुर,बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी साहेबपुर कमाल,
बेगूसराय,बखरी (सुरक्षित),अलौली(सुरक्षित),खगड़िया, बेलदौर,परबत्ता,तारापुर,मुंगेर, जमालपुर, सूर्यगढ़ा,
लखीसराय,शेखपुरा ,बरबीघा,अस्थावां, बिहारशरीफ,राजगीर (सुरक्षित), इस्लामपुर, हिलसा,नालन्दा,
हरनौत,मोकामा,बाढ़, बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार,पटना साहिब,फतुहा,दानापुर,मनेर,फुलवारी (सुरक्षित),मसौढ़ी (सुरक्षित),पालीगंज,बिक्रम,सन्देश, बड़हरा,आरा,अगिआंव(सुरक्षित),तरारी,जगदीशपुर,
शाहपुर,ब्रह्मपुर,बक्सर,डुमराँव और राजपुर (सुरक्षित) शामिल है।
पहले चरण के चुनाव के लिए राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, नितिन गडकरी, जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान, उपेन्द्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी,
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव,समेत कई दिग्गज नेताओं ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राजधानी पटना में रोड शो भी किया। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और वामदलों के महागठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार का जिम्मा मुख्य रूप से कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे,नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) प्रमुख मुकेश सहनी और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचर्य के कंधे पर था। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने दानापुर में पार्टी के उम्मीदवार के लिये रोड शो किया। जनसुराज से पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार किया।
प्रथम चरण में 06 नवंबर को मतदान का सामान्य समय सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक रहेगा। सुरक्षा कारणों से सिमरी बख्तिायारपुर ,महिषी और सूर्यगढ़ा के 56 मतदान केन्द्रों पर मतदान सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक ही चलेगा। प्रथम चरण के चुनाव में राजग के घटक जदयू के 57, भाजपा के 48, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 13 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के दो प्रत्याशी चुनावी अखाड़े में उतारे हैं। एक अन्य सीट मढ़ौरा में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रत्याशी भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री सीमा सिंह का नामांकन रद्द हो गया था।राजग ने इस सीट पर निर्दलीय अंकित कुमार को समर्थन दिया है।वहीं महागठबंधन के घटक राजद ने 71, कांग्रेस ने 24, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा माले) ने 14, भाकपा ने पांच, माकपा और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) ने तीन-तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये है। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने प्रथम चरण में 118 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे हैं।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरण में 06 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराया जाना है। 14 नवंबर को मतगणना होगी और चुनाव की प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी हो जायेगी। बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।

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बिहार चुनाव में इसबार भी हावी रहेगी जाति आधारित राजनीति https://demo.theshikshanews.com/bihaar-chunaav-mein-isabaar-bhee-haavee-rahegee-jaati-aadhaarit-raajaneeti/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-chunaav-mein-isabaar-bhee-haavee-rahegee-jaati-aadhaarit-raajaneeti/#respond Wed, 15 Oct 2025 14:57:53 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5359 इंद्र शेखर शाह/लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए बिगुल बजते ही प्रदेश के दो प्रमुख गठबंधनों राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और राष्ट्रीय जनता दल नीति महागठबंधन के साथ ही बिहार से राजनीति की शुरूआत कर रही जन सुराज पार्टी अपने अपने मुद्दों को लेकर लोगों के बीच पहुंच चुकी है तथा ये मुद्दे बिहार चुनाव को गर्म और जटिल बनाए हुए हैं। बेरोजगारी और पलायन युवाओं को प्रभावित कर रहे, जबकि जाति और वोटर लिस्ट विवाद पारंपरिक वोट बैंकों को प्रभावित कर सकते हैं। राजग “विकास” और “सुशासन” पर जोर दे रही, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) “ सामाजिक न्याय” और “नौकरी” के वादे पर जोर दे रहा जबकि जन सुराज नया विकल्प बनने की कोशिश में है। बिहार के लिए सबसे बड़े पर्व छठ पूजा के बाद 6 और 11 नवंबर की वोटिंग में टर्नआउट और ग्राउंड मूड निर्णायक होगा।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कई प्रमुख मुद्दे मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। ये मुद्दे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समीकरणों से जुड़े हैं और बिहार की ग्राउंड रियलिटी को दर्शाते हैं। बिहार में बेरोजगारी एक दीर्घकालिक और गंभीर है। 2023-24 के डेटा के अनुसार, बिहार में बेरोजगारी दर 6.8 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत (3.2 प्रतिशत) से दोगुनी है। युवा (15-29 आयु वर्ग) में बेरोजगारी 13-15 प्रतिशत तक है। इसके परिणामस्वरूप, लगभग 75 लाख बिहारी प्रवासी मजदूर दिल्ली, मुंबई, पंजाब और अन्य राज्यों में काम कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार बिहार की 40 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे है, जो रोजगार की कमी को और उजागर करता है।
राजद ने हर परिवार में एक नौकरी देने का वायदा किया है जो 2020 के उसके “10 लाख सरकारी नौकरी” के वादे का विस्तार है। युवा वोटर इस वादे को लेकर उत्साहित दिखते हैं, लेकिन इसे अव्यवहारिक भी कहते हैं क्योंकि इसके लिए लाखों करोड़ रुपये की जरूरत होगी जबकि बिहार का बजट ही तीन लाख करोड़ रुपये का है। इसके लिए वित्त पोषण कहां से किया जायेगा इसका कोई उल्लेख कहीं नहीं है। बिहार में बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण के बगैर सरकार राजस्व नहीं बढ़ा पायेगी। ऐसी स्थिति में इस तरह के वादे अव्यवहारिक ही है।
वहीं बिहार की नीतीश कुमार की सरकार दावा करती है कि 5 लाख सरकारी नौकरियां दी गईं और बिहार में औद्योगिक निवेश बढ़ा। हालांकि लोगों का कहना है कि “नौकरियां केवल कागज पर हैं” और ठोस औद्योगिक विकास नहीं हुआ। चुनाव प्रबंधक से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने बेरोजगारी को “बिहार की सबसे बड़ी बीमारी” कहा है और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने का वादा किया है। उनकी रैलियों में युवा भीड़ दिख रही है लेकिन ये भीड़ वोट में तब्दील होने पर ही जन सुराज पार्टी कोई बदलाव करने की स्थिति में होगी। हालाँकि अब तक जो रूख दिख रहा है उसमें जन सुराज पार्टी के भी बड़े पैमाने पर उलट फेर करने में सफल रहने की संभावना बहुत कम है। हालांकि बेरोजगारी को लेकर युवा वोटरों में कुछ नाराजगी दिख रही है लेकिन प्रधानमंत्रर नरेन्द्र मोदी के कारण राजग की स्थिति अभी तक बेहतर है।
बिहार की राजनीति में जाति एक केंद्रीय कारक है। 2023 की बिहार जाति जनगणना के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईबीसी) 36 प्रतिशत, ओबीसी 27 प्रतिशत, यादव 14 प्रतिशत और दलित 19 प्रतिशत मुख्य वोट बैंक हैं। ऊपरी जातियां भूमिहार और राजपूत 10 प्रतिशत हैं जबकि मुस्लिम 17 प्रतिशत हैं। राजद यादव और मुस्लिम समीकरण पर निर्भर। तेजस्वी यादव ने ईबीसी और दलितों को लुभाने के लिए “सामाजिक न्याय” और आरक्षण बढ़ाने की बात कही है।
राजग के नेतृत्वकर्ता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ईबीसी और कुर्मी आधार मजबूत है। उनकी “लव-कुश” (कुर्मी-कोइरी) रणनीति और ईबीसी को विशेष पैकेज देना वोटरों को आकर्षित कर रहा। भाजपा पी: ऊपरी जातियों और गैर-यादव ओबीसी पर फोकस कर रही है जबकि प्रशांत किशोर ने “जाति-मुक्त राजनीति” की बात कही है, लेकिन उनकी रैलियों में ईबीसी और ऊपरी जातियों की भागीदारी ज्यादा दिख रही।राजग विशेषकर भाजपा बिहार चुनाव को सुशासन बनाम जंगलराज बनाने की पूरी कोशिश कर रही है।इसके लिए नीतिश कुमार के कार्यकाल को सुशासन और विकास वाला बताया जा रहा है।
लेखक बिहार के मतदाता हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं

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कैसे होगा बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट ? https://demo.theshikshanews.com/kaise-hoga-bihaar-pharst-bihaaree-pharst/ https://demo.theshikshanews.com/kaise-hoga-bihaar-pharst-bihaaree-pharst/#respond Wed, 15 Oct 2025 14:53:08 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5356 कुमार समीर/ लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।
चुनाव का समय है। आपकी, हमारी पूछ बढ़नी शुरू हो गई है। खूब लुभावने वायदे, जुमले सुनने को मिलने शुरू हो गए हैं। कोई कहता है कि बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट, एक बिहारी सब पर भारी, बिहार IAS की फैक्ट्री है, बिहारी बहुत मेहनती होते हैं, बिहार लोकतंत्र की जननी है, बिहार का इतिहास बहुत ही गौरवपूर्ण रहा है आदि आदि।
आपको लगता है कि क्या इस तरह के जुमलों, वायदों से हर बिहारी को झूमना शुरू कर देना चाहिए ? क्या अपनी-अपनी नाप वाला 56 इंच का सीना तानकर हर बिहारी को इस चुनावी मौसम में कसीदे पढ़ने शुरू कर देने चाहिए ? सच कहें तो कृपया इसे गाली के इतर कुछ भी मत समझिए। इन जुमलों पर अगर आप झूमते हैं, तो आपकी चेतना जा चुकी है।
आप सोचिए, कल सारा देश बिहार पर ही अपनी उँगली उठायेंगे और कहेंगे, तुम नालायक़ों की वजह से हम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। वैसे अगर आपके पास कान है और थोड़ी भी चेतना बची है तो आप इसकी प्रतिध्वनि सुनने भी लगे होंगे। देश के विभिन्न राज्यों से बिहारियों के ख़िलाफ़ उठनेवाले स्वर इसी के उदाहरण हैं।
कभी आपने इस बात पर गौर किया है कि बिहार के बाहर अन्य राज्यों के लोगों में अधिकांश आपके प्रति क्यों सहानुभूति रखते हैं ? सहानुभूति कोई सकारात्मक शब्द नहीं है। अमूमन सहानुभूति उससे होती है जिसकी या तो दुर्गति हो रही होती है या फिर हो चुकी होती है। केरल, महाराष्ट्र या तमिलनाडु के लोगों के प्रति वैसी आम सहानुभूति नहीं दिखाई जाती क्योंकि उनकी माली हालत हम बिहारियों से हज़ार गुनी अच्छी है। हर तरह से वे हमसे बेहतर हैं।
मुगालते में नहीं रहें कि आप यानी बिहारी दूसरे राज्यों की जरूरत हैं। उनके बिना उन राज्यों का विकास संभव ही नहीं है। यह सब कुछ इन चुनावों में भी दोहराया जाएगा और आपको, हमको अहसास दिलाने की हर संभव कोशिश की जाएगी आप पूरे देश के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। लेकिन
आपको हकीकत पर ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले यह ज़रूरी है कि आप यह मानना शुरू कर दें कि वास्तव में आपकी स्थिति कैसी है ? और हां जब आप सही में खुद का आंकलन करेंगे तो महसूस करेंगे कि यह वैसी तो एकदम नहीं है जैसी आप सब समझ रहे हैं। आप जीवन के हर क्षेत्र में अपने ही देश में सबसे निचले पायदान पर पड़े हैं।
अब आप पूछेंगे कि अभी इस तरह का ज्ञान क्यों दिया जा रहा है। हां, बिल्कुल ठीक आप कह रहे हैं। जरूरी नहीं है कि चुनाव आपकी और हमारी सभी समस्याओं को सुलझा दे। पर यह ऐसे लोगों को जरूर आपकी सेवा में ला सकता है जो आपकी समस्या को ठीक से समझ रहा है और उससे आपको उबारने की मंशा उनमें है। कुछ पैसे वालों की चमकदार स्थिति पूरे बिहारियों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।
देश में हमारी और आपकी यानी बिहारियों की स्थिति क्या है उसकी एक संक्षिप्त बानगी पर गौर करें।
बिहार को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की दृष्टि से देखें तो देश में उसका स्थान 28 राज्यों में 14वां है। वहीं देश की 9% जनसंख्या वाले राज्य का देश के सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 2% से भी कम है। नतीजतन बिहार की 15.73% जनसंख्या ग़रीबी रेखा से नीचे है। यहाँ की प्रति व्यक्ति आय (2023-24) ₹ 59,637 है जबकि राष्ट्रीय औसत ₹1,72000 है।
इतना ही नहीं, बेरोज़गारी की दर बिहार में क़रीब 13% है। 15-29 साल के लोगों में बेरोज़गारी यहाँ 30% से भी अधिक है। और यह राष्ट्रीय औसत से तीन गुना है। वहीं वर्क फ़ोर्स में महिलाओं की भागीदारी बिहार में 10% से भी कम है।
सामाजिक दृष्टि से देखें तो बिहार की क़रीब 60% जनसंख्या 25 साल से कम उम्र के लोगों की है। बिहार में जन्म दर देश में सबसे अधिक है। बिहार में 71.2% पुरुष और 51.5% महिलाएँ साक्षर हैं (2011 की जनगणना के अनुसार)। बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी अभी भी 18 वर्ष से कम उम्र में हो जाती है। वहीं साक्षरता दर की बात करें तो बिहार में साक्षरता दर सबसे कम है। यहां साक्षरता दर 63.82 फीसदी है। सबसे कम साक्षरता के मामले में बिहार का नम्बर नीचे से अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान के बाद आता है।
बुनियादी सुविधाओं की भी यहां काफी कमी रही है। हर साल बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित होते हैं और उन्हें भारी नुक़सान उठाना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक 73.63 फीसदी लोग यानी तीन चौथाई लोग हर साल बाढ़ की विभीषिका और उसके दंश को झेलते हैं वहीं स्वच्छता सर्वेक्षण में भी बिहार के कई शहर औसत से भी काफी नीचे हैं। इसे दूसरे शब्दों में अगर कहा जाए तो बिहार के कई शहर सबसे गंदे शहरों में शामिल हैं। ऐसे ही बिहार के प्रमुख एक शहर सहरसा की बात करें तो उसे सबसे गंदे शहर की सूची में पिछले दिनों रखा गया था।
2024 और 2025 के नवीनतम आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार बिहार की स्थिति कई सामाजिक आर्थिक मापदंडों पर चिंताजनक बनी हुई है जो राज्य के बदतर हालात को पुष्ट करते हैं। ग़रीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कानून व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में बिहार को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
2025 की वेदांतु की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार प्रति व्यक्ति आय और गरीबी दूर के मामले में भारत का सबसे गरीब राज्य माना गया है। 2024 की इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बहुआयामी गरीबी वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा बिहार में बताई गई थी जहां 2022-23 में 26.59 फीसदी आबादी इस श्रेणी में गरीब थी।
साक्षरता के मामले में बिहार के लोग कहां खड़े हैं इसकी एक बानगी प्राडक्टिव लेबर फोर्स सर्वे 2023-24 के आंकड़ों से भी मिलती है जिसमें साफ साफ बताया गया है कि बिहार उन राज्यों में है जहां सबसे कम साक्षरता दर है। स्कूलों में भी कम नामांकन हैं। 2025 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि माध्यमिक स्तर पर बिहार में नामांकन दर 27.8 फीसदी है जो अन्य राज्यों की तुलना में बहुत ही कम है।
इतना ही नहीं, बिहार में बुनियादी ढांचे का अभाव है। बिहार के पास कमजोर शैक्षिक बुनियादी ढांचा है जो बढ़ती आबादी के लिए मांग और आपूर्ति के बीच एक बड़ा अंतर पैदा करता है। कमोबेश स्वास्थ्य सेवाओं का भी यही हाल है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की नवम्बर 2024 में जारी रिपोर्ट में भी बिहार की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला गया है। डाक्टरों की भारी कमी का जिक्र किया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रति व्यक्ति एक हजार लोगों पर एक डाक्टर की सिफारिश के विपरीत नवम्बर 2024 तक बिहार में प्रति 2148 लोगों पर एक एलोपैथिक डाक्टर था। नीति आयोग के चौथे स्वास्थ्य सूचकांक (2021) में बड़े राज्यों के बीच समग्र स्वास्थ्य प्रदर्शन के मामले में बिहार दूसरे सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में उभर कर सामने आया था।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार को गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जो राज्य की बद से बद्तर स्थिति को दर्शाता है। इसलिए बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट, एक बिहारी सब पर भारी जैसे जुमलों को सुनकर इतराने की जरूरत नहीं बल्कि हकीकत को जानकर उसमें सुधार लाने की जरूरत है।

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बिहार में अपने झूठे प्रचार अभियान के लिए राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिएः भाजपा https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-apane-jhoothe-prachaar-abhiyaan-ke-lie-raahul-gaandhee-ko-maaphee-maanganee-chaahieh-bhaajapa/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-apane-jhoothe-prachaar-abhiyaan-ke-lie-raahul-gaandhee-ko-maaphee-maanganee-chaahieh-bhaajapa/#respond Fri, 10 Oct 2025 05:46:35 +0000 https://www.khabariya.com/?p=5307 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा है कि राहुल गांधी को बिहार में अपने झूठे प्रचार अभियान के लिए माफी मांगनी चाहिए। भाजपा मुख्यालय में गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बिहार में घूम-घूमकर वोट चोरी के झूठे आरोप लगाए और उन्होंने विशेष पुर्ननिरीक्षण (एसआईआर) का विरोध किया था।
हमने तब भी कहा था कि राहुल गांधी एसआईआर का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे घुसपैठियों को संरक्षण देते हैं। उन्होंने कहा कि 8 अक्टूबर को बिहार चुनाव आयोग और वहां के अधिकारियों ने सूची सार्वजनिक की है। ये सूची स्पष्ट करती है कि कांग्रेस और आरजेडी के एक भी कार्यकर्ता ने, एक भी बूथ लेवल एजेंट ने बिहार में फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट पर एक भी अपील नहीं की है। इस जीरो अपील के आधार पर हम कह सकते हैं कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में उन्हें कोई विरोधाभास नहीं दिखा है।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि जो मुद्दा राहुल गांधी ने बिहार चुनाव में बनाने का प्रयास किया था, वो जमीन पर कोई मुद्दा है ही नहीं। यह राहुल गांधी के झूठे प्रचार का पूरी तरह से पर्दाफ़ाश करता है। प्रदीप भंडारी ने कहा कि जो मुद्दा राहुल गांधी उठाते हैं, उसमें न राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को विश्वास होता है और न ही कांग्रेस की बिहार यूनिट को। बिहार के अंदर राहुल गांधी का ये प्रोपेगेंडा पूरी तरह झूठा साबित हुआ। राहुल गांधी को बिहार की जनता से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए।
26/11 आतंकी हमले के सवाल पर प्रदीप भंडारी ने कहा कि आतंकी हमले का जवाब देने के लिए सेना पूरी तरह से तैयार थी लेकिन उन्हें रोका गया। पी. चिदंबरम को जवाब देना होगा कि यूपीए सरकार के अंदर वो कौन नेता था, जिसने 26/11 आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर हमारी सेना और वायुसेना को हमला करने से रोका था। इसका जवाब सोनिया गांधी को भी देना चाहिए क्योंकि उस समय वो यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री से भी अधिक शक्तिशाली थी। कांग्रेस ने हमेशा राष्ट्रीय हितों से ऊपर राजनीतिक हितों को आगे रखा है।

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बिहार में बीजेपी-नीतीश की बी टीम होगी आम आदमी पार्टी? https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-beejepee-neeteesh-kee-bee-teem-hogee-aam-aadamee-paartee/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-beejepee-neeteesh-kee-bee-teem-hogee-aam-aadamee-paartee/#respond Fri, 10 Oct 2025 05:08:59 +0000 https://www.khabariya.com/?p=5304 कुमार समीर
बिहार की राजनीति में आम आदमी पार्टी के बिहार विधान सभा चुनाव में प्रवेश का क्या मतलब है ? क्या उनका वहां ऐसा जनाधार है कि वह विधानसभा की 243 सीटों में से एक पर भी विजय हासिल करने वाली है ? राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी है तो फिर जल्दबाजी में आखिर बिहार चुनाव में उतरने का क्यों लिया गया फैसला ? क्या आप के अंदर मची भगदड़ को रोकने के लिए आनन-फानन में बिहार चुनाव में अपने प्रत्याशियों को उतारने का फैसला किया गया ?
ये ऐसे सवाल हैं जिसकी तह में जाएंगे तो आपको खुद ब खुद आभास हो जाएगा कि इस सबके पीछे का असली माजरा क्या है ? यह वही पार्टी जो कहा करती थी कि मजबूत संगठन खड़ा करने के बाद ही किसी प्रदेश में चुनाव में जाएगी । हां, हरियाणा राज्य जरूर अपवाद रहा है जहां मजबूत संगठन नहीं होने के बावजूद चुनाव में उतरी थी आम आदमी पार्टी।
जहां तक बिहार राज्य की बात है तो यहां संगठन खड़ा करने की कवायद पिछले 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले ही हो चुकी थी लेकिन तब यह कहकर 2020 में प्रत्याशियों को नहीं उतारा था कि बिहार भर में संगठन को और मजबूत करने के बाद ही चुनाव में जाया जाएगा। लेकिन 2025 में आखिर ऐसा क्या हो गया कि आनन-फानन में प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करनी शुरू कर दी ? यह गौर करने वाली बात है।
सच तो यह है कि बिहार में आम आदमी पार्टी के संगठन के अस्तित्व को बचाने की कवायद के तहत अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने पहली लिस्ट जारी की है। कहा जा रहा है कि पीके फैक्टर’ की वजह से आम आदमी पार्टी को चुनावी मैदान में उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
बता दें कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) उन दलों में से है जो इंडिया गठबंधन में आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ कई राष्ट्रीय मुद्दों पर एक जैसी राय रखते हैं। राजद बिहार में एनडीए को सत्ता से हटाने के लिए इंडिया गठबंधन की अगुवाई कर रही है। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी पहले ही 11 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर चुकी है और कहा जा रहा है कि जल्द ही दूसरी और तीसरी लिस्ट भी आने वाली है। आम आदमी पार्टी के सूत्रों की भी मानें तो पीके फैक्टर यानी प्रशांत किशोर का असर ही आम आदमी पार्टी को बिहार चुनाव में उतरने की असली वजह बना है।
हालांकि बिहार आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष राकेश यादव का कहना है कि ये फैसला बिहार के वोटरों को ‘विकल्प वाली राजनीति’ दिखाने के लिए लिया गया है। इसमें दो राय नहीं है कि आम आदमी पार्टी के संगठन महासचिव संदीप पाठक ने पहले घोषणा की थी कि पार्टी बिहार में चुनाव लड़ेगी। लेकिन जब तक उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं हुई थी, तब तक इसे लेकर संदेह था।
आम आदमी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि प्रशांत किशोर का असर आम आदमी पार्टी के संगठन पर दिखने लगा था। डर था कि पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता जन सुराज में चले जाएंगे। दरअसल, प्रशांत किशोर का जन सुराज मॉडल राजनीति का वही पैटर्न पेश कर रहा था जो आम आदमी पार्टी का मूल मॉडल यानी जनता से जुड़ी, साफ-सुथरी और मुद्दा आधारित राजनीति है। अब जन सुराज पार्टी एक मजबूत स्थिति में आ चुका है और एक विकल्प भी बन गया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता ने बताया कि आम आदमी पार्टी ने 2020 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। बिहार इकाई लगातार कह रही थी कि अगर पार्टी गोवा, गुजरात, हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव लड़ सकती है तो बिहार को क्यों छोड़ा जाए ? सच तो यह है कि आम आदमी पार्टी बिहार में राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसके कई नेता और कार्यकर्ता जन सुराज में शामिल हो गए थे। लेकिन अब जब पार्टी ने 2025 चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो उम्मीद है कि पार्टी के भीतर भगदड़ कम होगी और जो पुराने वरिष्ठ साथी पार्टी छोड़कर चले गए हैं उन्हें वापस लाने की कोशिश शुरू होगी।
बिहार इकाई आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष राकेश यादव का भी साफ मानना है कि जन सुराज का असर पार्टी पर पड़ा था। उन्होंने कहा कि करीब 50% कार्यकर्ता जो जन सुराज में चले गए थे, अब वापसी पर विचार कर रहे हैं। हमने चुनाव नहीं लड़ा इसलिए उन्होंने जन सुराज को विकल्प माना था। अब जब हमने पहली लिस्ट जारी की है तो उत्साह बढ़ गया है। यादव के मुताबिक पार्टी को करीब 6000 आवेदन मिले हैं। स्क्रूटनी चल रही है और जल्द ही दूसरी और तीसरी लिस्ट जारी की जाएगी जिनमें 30-40 उम्मीदवार हो सकते हैं।
पीके से अलग कैसे है उनकी पार्टी की राजनीति इस पर राकेश यादव का कहना है कि पीके के मुताबिक वो बिहार को एक वैकल्पिक राजनीति देंगे लेकिन उनका यह नारा हवा-हवाई जैसा ही है। लोगों ने दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी का गवर्नेंस मॉडल देखा है। स्कूलों और अस्पतालों पर केंद्रित शासन व्यवस्था के जो वादे पीके कर रहे हैं, हम उन्हें पहले ही लागू कर चुके हैं।
हालांकि सच तो यही है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी परफार्मेंस कहीं भी दिखाई देता हुआ नहीं दिख रहा है। हां, इससे राजद और आम आदमी पार्टी के रिश्ते पर जरूर असर पड़ता हुआ दिख रहा है। जब राजद ने दिल्ली विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था तो सवाल उठा था कि क्या आम आदमी पार्टी का बिहार चुनाव में उतरना दोनों पार्टियों के रिश्ते पर असर डालेगा? हालांकि आम आदमी पार्टी के विधायक व बिहार प्रभारी संजीव झा इसे नकारते हैं और उनका इस पर तर्क है कि हम हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव लड़े थे लेकिन कांग्रेस जीती। इससे हमारे रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ा। हम जहां-जहां चुनाव लड़ रहे हैं वहां अपनी शिक्षा और स्वास्थ्य की राजनीति का मॉडल पेश कर रहे हैं। बिहार में भी हमारी एंट्री असली मुद्दों पर फोकस वापस लाएगी।
वहीं राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में आम आदमी पार्टी चाहे जो भी तर्क़ दे लेकिन इस हकीकत से पीछे नहीं हटा जा सकता है कि पीके फैक्टर ने आम आदमी पार्टी को बिहार की चुनावी रेस में उतरने के लिए मजबूर कर दिया है और इसका फायदा एनडीए गठबंधन को मिलता हुआ दिख रहा है।
एक तरफ सत्ता में होने के कारण लोकलुभावन योजनाओं की घोषणाओं का फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है और उस पर आम आदमी पार्टी का चुनाव में जाने को एनडीए की बी टीम के रूप में देखा जा रहा है। हकीकत भले ही यह ना हो लेकिन जमीनी स्तर पर आम आदमी पार्टी को लेकर बिहार में यही मैसेज है स्थानीय लोगों के बीच। यानी एनडीए को अपनी लोकलुभावन घोषणाओं के साथ साथ आम आदमी पार्टी के चुनाव में उतरने का फायदा होता हुआ दिख रहा है।
कांफिडेंस से भरे एनडीए ने कहना शुरू कर दिया है कि ‘सुशासन बाबू’ की रणनीति की काट नहीं खोज पा रही है इंडिया गठबंधन और परिणामस्वरूप नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए एक बार फिर से सत्ता में आने की आशा कर रहा है। इसके लिए नीतीश की रणनीति अपने कोर वोटरों को साथ बनाए रखने की है। यह कोर वोटर है महिलाओं का।
एनडीए को लगता है कि अगर फिर से महिलाओं का साथ मिल गया तो सत्ता की सीढ़ी तक वह फिर पहुंच जाएगा। यही कारण है कि चुनाव से पहले एक करोड़ से अधिक महिलाओं को सरकार ने 10 हजार रुपये की बड़ी रकम एक साथ ट्रांसफर की है। लाखों और महिलाओं के खाते में पैसे जाने अभी बाकी हैं। उधर, तेजस्वी यादव की अगुआई में इंडी ब्लॉक अभी तक इसकी काट नहीं खोज पाया है। लेकिन उसने भी महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने का वादा किया है, जो नीतीश के दांव के आगे हल्का लग रहा है।
नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए कई अहम फैसले कर उन्हें अपने पक्ष में रखने की कोशिश की है। दरअसल, 2005 से अब तक महिलाएं और महादलित उनके साइलेंट कोर सपोर्ट रहे हैं। खासकर, महिला वोटर चुनाव में उनके लिए सबसे बड़ा X फैक्टर बनकर उभरती रही हैं।
नीतीश कुमार जब 2005 में सत्ता में आए थे तो उन्हें पता था कि राज्य की राजनीति जातीय समीकरण में उलझी है। इस समीकरण में उनकी जाति का पलड़ा भारी नहीं था। नीतीश की जाति राज्य में बड़ा आधार नहीं रखती थी। इसीलिए उन्होंने महिलाओं और महादलितों-अतिपिछड़ों के बीच पार्टी का विस्तार किया। तब से लेकर अब तक नीतीश की जीत में महिला वोटरों ने अहम भूमिका निभाई है। वह हर बार अपनी पार्टी के घोषणापत्र में महिलाओं के लिए खास वायदे भी करते रहे हैं। चुनाव में हर बार वह निर्णायक भी साबित होता रहा है।
2015 में उन्होंने शराबबंदी और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35% आरक्षण का वादा किया था। यह दांव सफल रहा। इसकी पुष्टि चुनाव बाद आए सर्वे से हुई। इनमें बताया गया कि 60% से अधिक महिलाओं ने उस चुनाव में नीतीश के पक्ष में वोट किया था। 2009 की जीत में स्कूल जाने वाली लड़कियों को साइकिल देने की घोषणा का अहम रोल था।
इसकी वजह यह भी है कि बिहार में महिलाओं की वोटिंग में शानदार बढ़ोतरी हुई है। 2020 में नीतीश ने ‘जीविका दीदी’ योजना पर फोकस किया, जो उनके लिए ब्रैंड एंबेसडर बनी। हालांकि उनके स्वास्थ्य को लेकर कुछ अफवाएं चल रही हैं उसका थोड़ा बहुत असर दिखाई देता हुआ जरूर दिख रहा है।
लेकिन नीतीश कुमार के करीबी रणनीतिकारों का दावा है कि हर बार चुनाव से पहले उनके बारे में नकारात्मक बातें होती हैं, लेकिन जब नतीजे आते हैं तो सभी हैरान हो जाते हैं। इन रणनीतिकारों का दावा है कि साइलेंट वोटर इस बार भी उनके साथ जुड़े रहेंगे। 2020 में भी जब तमाम सर्वे उनके खिलाफ बताए जा रहे थे, तब अंतिम परिणाम में इन्हीं महिलाओं ने नीतीश का किला किस‌ तरह बचा दिया था यह सबके सामने है।
लेकिन इंडी गठबंधन भी चुप नहीं बैठा है और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में नीतीश कुमार के इस मजबूत किले में माई-बहिन योजना की बदौलत सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वे हर महिला को 2,500 रुपये देने का वादा कर रहे हैं। वह नीतीश सरकार के महिलाओं के खाते में 10 हजार ट्रांसफर किए जाने की योजना को काउंटर करने के लिए वादा कर रहे हैं कि सत्ता में आए तो 2,500 रुपये की योजना को लागू करने के साथ ही हर महिला के खाते में पूरे साल का एकमुश्त 30 हजार रुपया एडवांस दे देंगे।
इंडिया गठबंधन महिला वोटरों का डेटा बनाकर उन तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। इसका गणित है कि अगर इसमें कुछ हद तक भी सेंध लगाने में सफलता मिल गई तो सियासी संतुलन उसके पक्ष में आ जाएगा। मगर सवाल यह है कि क्या विपक्षी गठबंधन नीतीश के कोर वोटरों के किले में सेंध लगा पाएगा ? अगर ऐसा करने में इंडी गठबंधन सफल हुआ तो उसका असर विधानसभा चुनाव परिणाम पर भी पड़ेगा, इसे नकारा नहीं जा सकता है। इंतजार रहेगा काउंटिंग वाले दिन का जिस दिन नेताओं के दावों की सच्चाई सामने आ जाएगी।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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बिहार : पप्पू यादव का आरोप, भाजपा की तारीख पर आयोग करा रहा चुनाव https://demo.theshikshanews.com/bihaar-pappoo-yaadav-ka-aarop-bhaajapa-kee-taareekh-par-aayog-kara-raha-chunaav/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-pappoo-yaadav-ka-aarop-bhaajapa-kee-taareekh-par-aayog-kara-raha-chunaav/#respond Tue, 07 Oct 2025 03:03:59 +0000 https://www.khabariya.com/?p=5261 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। चुनाव आयोग ने सोमवार को आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को प्रस्तावित है, वहीं मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। चुनाव तारीख आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। पूर्णियां से निर्दलीय सांसद और कांग्रेस नेता पप्पू यादव ने चुनाव आयोग और भाजपा में सांठगांठ का आरोप लगाया और दावा किया कि भाजपा की तारीख पर चुनाव हो रहा है।
पूर्णियां सांसद पप्पू यादव ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “आयोग अपने मन से कुछ नहीं करती है। उनकी पूरी प्रक्रिया बीजेपी द्वारा होती है। जब भाजपा पूरी प्रक्रिया अपना लेती है, उसके बाद आयोग किसी मोर्चा या संगठन के तहत उनसे पूछती है कि चुनाव कब कराना है, फिर इसकी तारीख का ऐलान होता है।”
पप्पू यादव ने कहा, “रेलवे से लोगों को ढोकर बिहार ले जाना, छठ पूजा के लिए सप्लीमेंट्री बस देना और फिर उसी हिसाब से चुनाव की डेट आना स्पष्ट रूप से दिखाता है कि चुनाव आयोग क्या कर रही है। मेट्रो बनी नहीं लेकिन उसका उद्घाटन किया जा रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग का एक ही एजेंडा भाजपा की सरकार बनाने का है, इसके अलावा आयोग के पास कोई दूसरा एजेंडा नहीं है।”
उन्होंने कहा कि आज चुनाव एक औपचारिकता रह गई है, उसी में उनके खिलाफ लड़ना है। आज एक फ्रंट नहीं बल्कि कई फ्रंट बन गए हैं, जिसमें चुनाव आयोग भी है।
पूर्णियां सांसद ने कांग्रेस की तैयारी को लेकर कहा, “लगातार एक साल से कांग्रेस की तैयारी चल रही है। हम चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन अगर वोट की चोरी हो तो फिर क्या कहा जा सकता है? उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक चल रहा है और जनता हमें चुनाव जिताने का मन बना चुकी है।”
बता दें कि चुनाव आयोग के अनुसार बिहार की 243 सीटों पर दो चरणों में मतदान कराए जाएंगे। पहले चरण के लिए मतदान 6 नवंबर को 121 सीटों पर होगा, वहीं दूसरे चरण में 122 सीटों पर 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

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बिहार : क्या ख़त्म होगी जाति आधारित राजनीति ? https://demo.theshikshanews.com/bihaar-kya-khatm-hogee-jaati-aadhaarit-raajaneeti/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-kya-khatm-hogee-jaati-aadhaarit-raajaneeti/#respond Mon, 06 Oct 2025 06:03:59 +0000 https://www.khabariya.com/?p=5242 कुमार समीर
जाति आधारित राजनीति के लिए जाने जाने वाले बिहार में यह क्या देखने को मिल रहा है ? क्या यहां जाति आधारित राजनीति ख़त्म होने जा रही है ? इस सवाल को सुनकर आप जरूर आश्चर्यचकित होंगे कि घोर जातिवादी राजनीति करने वाले बिहार में यह क्या संभव है ? एक बार में तो हर किसी का यही ज़वाब होगा कि यह बिल्कुल भी संभव नहीं है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बिहार में जातिवाद आधारित राजनीति खत्म होने की शुरुआत हो चुकी है और इसे शुरू करने वाला और कोई नहीं बल्कि घोर जातिवादी राजनीति करने वाले दल ही हैं। आने वाले कुछ सालों में इसका असर साफ तौर पर दिखाई भी देने लगेगा।
जी हां, बिहार का यह नया रुख पूरे देश में अलख जगाने का काम कर सकता है। इसकी शुरुआत हो चुकी है क्योंकि यहां (बिहार) की राजनीति में पहली बार जाति की जगह क्लास (वर्ग) का महत्व बढ़ता दिख रहा है। सरकारी योजनाओं में महिलाओं, किसानों और पेंशनभोगियों को क्लास के रूप में संबोधित किया जा रहा है। मसलन शिक्षा में मुफ्त योजनाओं की ही बात करें तो दिन का भोजन, साइकिल तथा स्कूल यूनिफॉर्म वितरण में जाति नहीं देखी जा रही है। इसका असर भी दिखने लगा है। छात्रों के विकास को जहां बढ़ावा मिल रहा है वहीं महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।
इस तरह की पहल के बाद कहा जा सकता है कि बिहार में अब ठोस आकार ले रहा है जाति को क्लास (वर्ग) में बदलने का प्रयास। राजनीतिक दलों की घोषणाओं और केंद्र-राज्य सरकार की नीतियों पर गौर करें तो इसका आभास होना शुरू हो जाएगा। हालांकि यह भी सच है कि जाति के क्लास में बदलने के प्रयास का यह प्रारंभिक दौर है। इसलिए जाति और क्लास (वर्ग) -दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। जाति का आग्रह जैसे-जैसे कम होगा, वर्ग मजबूत होने लगेगा। यहां सबसे अच्छी बात यह है कि इस बदलाव की पहल सरकार की ओर से हो रही है। वहीं विपक्षी दल भी इसका विरोध नहीं बल्कि अनुसरण ही कर रहे हैं। इसे महिलाओं के मामले में देखें। पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण से शुरुआत हुई जो अब सभी के लिए है।
बिहार की सभी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत पद आरक्षित कर दिए गए हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2006-07 में जब बालिकाओं के लिए पोशाक और किताब की योजना शुरू की तो इसमें सबको समाहित किया गया। जाति-धर्म के आधार पर किसी बालिका को इस योजना से बाहर नहीं किया गया। इसका विस्तार बालकों के बीच भी हुआ। फिर साइकिल देने का निर्णय लिया गया। अब तो उन्हें मैट्रिक से लेकर पीजी तक की परीक्षाओं में पास होने पर भी अधिकतम 75 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
शिक्षा से जुड़ी मुफ्त योजनाओं का असर यह हुआ कि बच्चों का विकास छात्र वर्ग के रूप में होने लगा। यूनिफार्म ने बड़ा बदलाव किया। पहले स्कूली बच्चों के पोशाक से ही उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पता चलता था। बच्चों के बीच श्रेष्ठता और हीनता का भाव भी पनपता था। 20 वर्ष पहले जिन बच्चों को इस योजना का लाभ मिला, वे आज के युवा हैं। मतदाता भी हैं। हाल-फिलहाल सभी परिवारों की एक महिला को स्वरोजगार के लिए 10 हजार रुपये देने की योजना बनी।
बताते चलें कि घोषणा यह की गई है कि 10 हजार रुपये से सफलतापूर्वक कारोबार प्रारंभ करने वाली महिलाओं को आने वाले दिनों में दो लाख रुपये तक दिए जाएंगे। दिसंबर तक इस योजना के अंतर्गत एक करोड़ 80 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिए जाएंगे। महिलाएं इस योजना का लाभ एक क्लास (वर्ग) की तरह ले रही हैं। बदलाव यह आया है कि विरोधी दल की ओर से जो घोषणाएं हो रही हैं, उनमें भी महिलाओं के साथ एक क्लास (वर्ग) की तरह व्यवहार किया जा रहा है। इस योजना के दायरे में एक करोड़ 79 लाख महिलाएं हैं।
किसान और पेंशनधारियों को भी एक क्लास (वर्ग) के रूप में आज केंद्र और राज्य सरकार एक क्लास (वर्ग) के रूप में संबोधित कर रही हैं। उन्हें प्रोत्साहन के लिए खाते में राशि भेजी जा रही है। किसान सम्मान निधि के रूप में सभी किसानों के खाते में प्रति वर्ष छह-छह हजार रुपये प्रधानमंत्री की ओर से दिए जा रहे हैं।
किसानों को कृषि यंत्रों के लिए अनुदान दिए जा रहे हैं। अनाजों की खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुविधा सभी किसानों को दी जा रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने के मामले में भी जातीय भेद समाप्त किया गया है। यहां भी आर्थिक आधार को रखा गया है।
इतना ही नहीं, आयकर दाता और पहले से किसी योजना के तहत पेंशन पा रहे लोगों को छोड़कर 60 वर्ष और उससे अधिक के नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन की परिधि में ले आया गया है। इसने बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन का आधार दिया है।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वालों की कुल संख्या एक करोड़ 40 लाख से अधिक है। सरकारी सेवाओं में आरक्षण को लेकर समाज के एक हिस्से में बड़ा असंतोष था। जातीय संरचना में ऊंची श्रेणी में रहने के बावजूद गरीबों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता था।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देकर इस समूह को भी संतुष्ट किया गया है। इसके कारण आरक्षण की सुविधा हासिल करने वाला भी एक अलग क्लास (वर्ग) बन गया है। रोजगार और नौकरी की मांग ऐसी है, जिसकी पूर्ति के लिए युवा एक क्लास (वर्ग) की तरह सड़क पर उतर रहे हैं।
इसे बदलाव की बयार ही कह सकते है कि अब जाति नहीं, गरीबी देखने की बात उठनी शुरू हो गई है। दो वर्ष पहले सभी दलों की पहल पर जाति आधारित गणना हुई। पता चला कि राज्य में 94 लाख से अधिक ऐसे परिवार हैं, जिनकी मासिक आय छह हजार रुपये या उससे कम है।
सरकार ने ऐसे परिवार को कारोबार के लिए दो लाख रुपये देने का नीतिगत निर्णय लिया है। यहां भी जाति के बदले क्लास (वर्ग) को लाभ पहुंचाने के लक्ष्य को देखा जा सकता है। सरकारें पहले भी गरीब कल्याण के लिए योजनाएं चलाती रही हैं, लेकिन वह समाज के सभी गरीबों के लिए नहीं होती थीं। शुरुआत अनुसूचित जाति और जनजाति से होती थी, जो पिछड़े वर्गों तक आकर ठहर जाती थी। उन योजनाओं में लाभ लेने के लिए किसी जाति का होना जरूरी होता था।
समय के साथ इस तरह के बदलाव को हर तबका स्वीकार कर रहा है, यह सबसे बड़ी और सकारात्मक बात है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि सरकार और सभी राजनीतिक दल अगर इसी तरह से इस अच्छी पहल का समर्थन करते रहे तो वह दिन दूर नहीं होगा जब सबका साथ, सबका विकास हर वर्ग, हर समुदाय महसूस करने लगेगा।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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बिहार में एसआईआर के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 7.42 करोड़ मतदाता डालेंगे वोट https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-esaeeaar-ke-baad-phainal-votar-list-jaaree-7-42-karod-matadaata-daalenge-vot/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-esaeeaar-ke-baad-phainal-votar-list-jaaree-7-42-karod-matadaata-daalenge-vot/#respond Tue, 30 Sep 2025 16:16:50 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5199 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी। अंतिम मतदाता सूची में लगभग 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। निर्वाचन आयोग इस कार्य को सफल बनाने के लिए बिहार के सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त करता है। अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित हुई, जिसमें लगभग 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
ईसीआई के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची की भौतिक और डिजिटल प्रतियां राजनीतिक दलों के साथ साझा की जा रही हैं। कोई भी मतदाता इसे वोटर्स डॉट ईसीआई डॉट गॉव डॉट इन पर ऑनलाइन देख सकता है। यह एसआईआर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) बिहार, सभी 38 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ), 243 निर्वाचक निबंधन अधिकारियों (ईआरओ), 2,976 सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारियों (एईआरओएस), लगभग 1 लाख बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ), लाखों स्वयंसेवकों और सभी 12 प्रमुख राजनीतिक दलों की पूर्ण भागीदारी, जिसमें उनके जिला अध्यक्ष और उनके द्वारा नियुक्त 1.6 लाख से अधिक बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) शामिल हैं, के ईमानदार प्रयासों से सफल हुआ।
आयोग नियमित रूप से जागरूकता फैलाने और पूरी प्रक्रिया के दौरान अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑनलाइन मीडिया को भी धन्यवाद देता है। एसआईआर प्रक्रिया को समझाने और उन्हें पूरी जानकारी रखने के लिए राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की गईं। 20 जुलाई तक सीईओ, डीईओएस, ईआरओएस और बीएलओ ने पात्र मतदाताओं की पहचान करने के उद्देश्य से, मृत घोषित किए गए, जिनके गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुए, जो स्थायी रूप से पलायन कर गए, या जिनका पता नहीं लगाया जा सका, ऐसे मतदाताओं की बूथ-स्तरीय सूचियां राजनीतिक दलों के साथ साझा कर दी थीं।
ड्राफ्ट मतदाता सूची भी सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा की गई थी। साथ ही, ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल न किए गए नामों की सूची डीईओ या डीएम (जिलावार) के साथ-साथ सीईओ बिहार की वेबसाइट पर भी जनता के अवलोकन के लिए प्रदर्शित की गई थी।
एसआईआर प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और भारत के निर्वाचन आयोग के आदर्श वाक्य ‘कोई भी पात्र मतदाता छूटे नहीं और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो’ के अनुरूप की गई थी। अगर कोई पात्र व्यक्ति अभी भी मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने के लिए आवेदन करना चाहता है तो वह चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि से दस दिन पहले तक आवेदन जमा कर सकता है।
अगर कोई व्यक्ति फाइनल वोटर लिस्ट में प्रविष्टि के संबंध में ईआरओ के निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के तहत जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रथम अपील और सीईओ के समक्ष द्वितीय अपील दायर कर सकते हैं।

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बिहार में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-is-saal-aktoobar-navambar-mein-vidhaanasabha-chunaav-hone-kee-sambhaavana-hai/ https://demo.theshikshanews.com/bihaar-mein-is-saal-aktoobar-navambar-mein-vidhaanasabha-chunaav-hone-kee-sambhaavana-hai/#respond Wed, 17 Sep 2025 16:51:14 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5083 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को 75 वर्ष के हो गए। इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों और नेताओं ने उनके नेतृत्व की सराहना की तथा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस उपलक्ष्य में 15 दिन से ज्यादा समय के लिए ‘‘सेवा पखवाड़ा’’ शुरू किया है।
केंद्र और राज्यों की भाजपा शासित सरकारों ने दो अक्टूबर तक देश भर में स्वास्थ्य शिविर लगाने से लेकर स्वच्छता अभियान चलाने, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए मेलों और बुद्धिजीवियों के समागम तक कई तरह के जन संपर्क, कल्याण, विकास और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
मोदी स्वयं मध्यप्रदेश के धार जा रहे हैं, जहां वह महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत करेंगे।
वह जनजातीय आबादी पर केंद्रित एक कार्यक्रम सहित कई अन्य विकास कार्यक्रमों का शुभारंभ करेंगे और लोगों को संबोधित भी करेंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर बुधवार को बधाई दी और देश में बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने की संस्कृति का संचार करने के लिए उनकी प्रशंसा की।
मुर्मू ने प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा, ‘‘आज विश्व समुदाय भी आपके मार्गदर्शन में अपना विश्वास प्रकट कर रहा है।’’
राष्ट्रपति ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। परिश्रम की पराकाष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने असाधारण नेतृत्व से आपने देश में बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने की संस्कृति का संचार किया है।’’
उनका आभार व्यक्त करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार 140 करोड़ से अधिक नागरिकों की मदद से एक मजबूत, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए समर्पित रहेगी। उन्होंने उनके दृष्टिकोण और विचारों को प्रेरणादायक बताया।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है और एक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि देश के प्रति उनका अद्वितीय समर्पण और प्रतिबद्धता प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा है।
भाजपा नेताओं और अन्य दलों के सदस्यों ने मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं, जिन्होंने 2014 के बाद से अपनी पार्टी को अभूतपूर्व भौगोलिक विस्तार और चुनावी सफलता दिलाई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मोदी ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, राष्ट्र के प्रति समर्पण और अथक परिश्रम से देश को नई ऊर्जा दी है और उसे एक नई दिशा दिखाई है।
सिंह ने कहा कि उन्होंने विश्व स्तर पर भारत की क्षमता और सम्मान को बढ़ाया है और लोगों व गरीबों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री पिछले पांच दशक से भी अधिक समय से लोगों के कल्याण के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं और वह प्रत्येक नागरिक के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ के आदर्श वाक्य की जीवंत प्रेरणा हैं।
भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने समाज के हर वर्ग की प्रगति के लक्ष्य के साथ ‘‘आत्मनिर्भर और विकसित भारत’’ के निर्माण के लिए कई परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिली है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मोदी को विश्व का सबसे लोकप्रिय नेता बताया और कामना की कि उनके नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर बने और आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार को खत्म कर ‘‘विश्वगुरु’’ बने।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दी।
खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं।’ उन्होंने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु होने की कामना भी की।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना है।’
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा इस शहर के साथ खड़े रहे और पिछले 11 वर्षों में राष्ट्रीय राजधानी की जरूरतों का ध्यान रखा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई दी और उन्हें 140 करोड़ भारतीयों की आशाओं एवं आकांक्षाओं का पथप्रदर्शक बताया।
आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘140 करोड़ भारतीयों की आशाओं-आकांक्षाओं के संवाहक, वैश्विक मंच पर ‘नए भारत’ को अग्रिम पंक्ति में प्रतिष्ठित करने वाले, विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता, हम सभी के मार्गदर्शक, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करने वाले यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।’’
उत्तर प्रदेश में विपक्ष के नेता और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रधानमंत्री के लिए ‘‘स्वस्थ, सार्थक, सामंजस्यपूर्ण, समावेशी और सकारात्मक’’ जीवन की कामना की।
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई दी।
अभिनेत्री से नेता बनीं हेमा मालिनी ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को एक ‘परिवर्तनकारी काल’ बताया जिसने भारत को एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया।
एक वीडियो संदेश में भाजपा सांसद ने कहा कि मोदी के ‘‘सबका साथ, सबका विकास’’ के दृष्टिकोण ने देश भर के नागरिकों को सशक्त बनाया है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी प्रधानमंत्री मोदी को 75वें जन्मदिन की बधाई दी।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि रेड्डी ने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्र की सेवा में निरंतर ऊर्जा की कामना की।
नायडू ने मोदी की सराहना करते हुए कहा कि वह सही समय पर सही नेता हैं, जिन्होंने स्पष्टता, दृढ़ संकल्प और सुधारों के साथ देश का मार्गदर्शन किया है, जिससे देश भर में सार्थक बदलाव आया है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर बधाई दी और कहा कि पूर्वोत्तर राज्य ने उनके नेतृत्व में कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
शर्मा ने कहा कि असम सरकार बुधवार से शुरू हो रहे सप्ताह को प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ‘सेवा सप्ताह’ के रूप में मनाएगी, जो सेवा, करुणा और जन कल्याण को समर्पित होगा।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और मेघालय के मुख्यमंत्री सी. के. संगमा ने भी मोदी को जन्मदिन की बधाई दी।
खांडू ने कहा कि प्रधानमंत्री का दूरदर्शी नेतृत्व साहस और सावधानी के साथ भारत के भविष्य को आकार दे रहा है।
संगमा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को उनके 75वें जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं… मेघालय के लोगों की ओर से, मैं आपके निरंतर समर्थन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं और आपके स्वास्थ्य, खुशी और दीर्घायु के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं।
जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद मोदी भारत के तीसरे सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री हैं और निर्बाध कार्यकाल के मामले में दूसरे स्थान पर हैं।

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