Bangladesh – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Wed, 31 Dec 2025 04:17:06 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg Bangladesh – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 बंगलादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का ढाका के अस्पताल में निधन https://demo.theshikshanews.com/bangalaadesh-kee-poorv-peeem-khaalida-jiya-ka-dhaaka-ke-aspataal-mein-nidhan/ https://demo.theshikshanews.com/bangalaadesh-kee-poorv-peeem-khaalida-jiya-ka-dhaaka-ke-aspataal-mein-nidhan/#respond Wed, 31 Dec 2025 04:17:06 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6055 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और तीन दशकों से अधिक समय तक देश के राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहीं बेगम खालिदा जिया का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं।
उनके बेटे तारेक रहमान, जो स्वेच्छा से ब्रिटेन में निर्वासन में चले गए थे, चुनाव लड़ने और अपनी बीमार मां को देखने के लिए हाल ही में स्वदेश वापस लौटे थे। बेगम जिया ने नेतृत्व वाली बंगलादेश राष्ट्रवादी पार्टी ने उनके निधन की पुष्टि की। उनका निधन ढाका के एवरकेयर अस्पताल में आज सुबह छह बजे हुआ, जहां पिछले पांच हफ्तों से उनका इलाज चल रहा था।
पार्टी अधिकारियों ने कहा कि बेगम जिया को 23 नवंबर को दिल और फेफड़ों में गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें निमोनिया भी था और हाल के दिनों में उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। एक बयान में, बीएनपी ने कहा, “बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का आज सुबह 6:00 बजे फज्र की नमाज के तुरंत बाद निधन हो गया।”
उनकी मौत एक युग का अंत है और इससे उनकी पार्टी को चुनावी अभियान में मदद मिलने की संभावना है क्योंकि दिवंगत नेता के प्रति मतदाताओं की सहानुभूति बढ़ने की उम्मीद है। उनके पति जनरल जिया उर रहमान एक स्वतंत्रता सेनानी और देश के पूर्व सैन्य शासक थे।
बेगम जिया दो बार बंगलादेश की प्रधानमंत्री बनीं, पहली बार 1991 से 1996 तक और फिर 2001 से 2006 तक और वह लोकतांत्रिक चुनाव के माध्यम से इस पद पर आसीन होने वाली देश की पहली महिला थीं।

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बंगलादेश में रूढिवादी ताकतों के लंबे समय तक सक्रिय रहने की संभावना कम: पूर्व वायु सेना प्रमुख राहा https://demo.theshikshanews.com/bangalaadesh-mein-roodhivaadee-taakaton-ke-lambe-samay-tak-sakriy-rahane-kee-sambhaavana-kam-poorv-vaayu-sena-pramukh-raaha/ https://demo.theshikshanews.com/bangalaadesh-mein-roodhivaadee-taakaton-ke-lambe-samay-tak-sakriy-rahane-kee-sambhaavana-kam-poorv-vaayu-sena-pramukh-raaha/#respond Tue, 25 Nov 2025 16:56:00 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5847 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने कहा है कि बंगलादेश में शेख हसीना सरकार के अपदस्थ होने के बाद रूढ़िवादी ताकतें ज्यादा सक्रिय हुई हैं लेकिन इस बदलाव के लंबे समय तक बने रहने की संभावना नहीं है क्योंकि बंगलादेश का सामाजिक ताना-बाना स्वाभाविक रूप से उदार और शांतिप्रिय है।
पूर्व एयर चीफ मार्शल ने यूनीवार्ता को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि मौजूदा वैचारिक मंथन को सावधानी के साथ ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने दृढ़ता से कहा, ” बांग्लादेश के लोग स्वभाव से धर्मनिरपेक्ष और शांतिप्रिय हैं। इसलिए रूढ़िवादिता की ओर यह रुझान अल्पकालिक होगा।”
जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) जैसे आतंकवादी समूहों का उदय और 1971 के बंगलादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान का समर्थन करने वाले जमात-ए-इस्लामी की राजनीतिक वापसी ऐसे कुछ मुद्दे रहे हैं जिनसे पर्यवेक्षक चिंतित हैं।
पूर्व वायुसेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान के बंगलादेश के साथ खुफिया और सैन्य सहयोग बढ़ाने के नए सिरे से किए जा रहे प्रयासों पर करीब से नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा ,” पाकिस्तान अभी भी 1971 का बदला लेना चाहता है और इसके लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।”
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि इसके बावजूद बांग्लादेश की जनता अभी भी पाकिस्तानी सेना द्वारा 1971 में किए गए नरसंहार को भूली नहीं है। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रति भावनाएं इतनी नरम नहीं होंगी।’ उन्होंने सुझाव दिया कि पाकिस्तान और बंगलादेश की गठजोड़ बनाने की कोशिश को बंगलादेश की जनता से ही समर्थन नहीं मिलेगा।
पूर्व वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और यहां तक कि वैवाहिक सहित सीमा-पार गहरे संबंध हैं और ये राजनीतिक घटनाक्रमों के बावजूद जारी रहेंगे। हालाकि उन्होंने भारत के लिए सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा,” हमें खुफिया जानकारी जुटाने और पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा समर्थित विशिष्ट आतंकवादी समूहों को लक्षित करने के मामले में सक्रिय रहना होगा।”
पूर्व सैन्य अधिकारी ने विश्वास व्यक्त किया कि बांग्लादेश की मूल पहचान क्षणिक राजनीतिक उथल-पुथल पर हावी रहेगी। उन्होंने दोहराया,” मेरा मानना है कि बांग्लादेश स्वभाव से सहज रूप से धर्मनिरपेक्ष और शांतिप्रिय देश है।”
पूर्व एयर चीफ मार्शल ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए बम विस्फोट के तुरंत पहले दिल्ली के पास विस्फोटक रसायनों के एक जखीरे का पता चलने से बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। उन्होंने कहा, ” लाल किले पर हमला भारत में अस्थिरता पैदा करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा था, विशेष रूप से राजधानी के आसपास से बरामद किए गए रसायनों और विस्फोटक सामग्रियों को देखते हुए यह एक व्यापक साजिश की ओर इशारा करता है।”
पूर्व सैन्य अधिकारी ने सरकार प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की आवश्यकता पर जोर देकर कहा ,” हमें सरकार-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है। हमें भविष्य में भारतीय आर्थिक प्रतिष्ठानों का इस तरह के हमलों से बचाव करना होगा।” उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा आतंकवादी समूहों के लिए एक प्रमुख लक्ष्य बना हुआ है।
पूर्व वायुसेना प्रमुख ने भू-राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए आतंकवाद-विरोधी अभियानों में बाहरी समर्थन पर निर्भर न रहने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा, ” हमें आतंकवाद के खिलाफ इस युद्ध में बाहरी मदद पर निर्भर नहीं रहना चाहिए बल्कि अपने दम पर आगे बढ़ना चाहिए।”
पूर्व एयर चीफ एयर मार्शल की टिप्पणी आतंकवाद के उभरते खतरों को रेखांकित करती हैं और इस बात पर जोर देती हैं कि खुफिया सतर्कता को बनाए रखने, आत्मनिर्भर आतंक-विरोधी क्षमता विकसित करने और एक नपा-तुला लेकिन दृढ़ राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण अपनाए जाने की जरूरत है।

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