against – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Sun, 11 Jan 2026 15:57:32 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg against – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 तलवारों की जगह दूसरे तरीकों से भारत के खिलाफ हो रहे षड्यंत्र : मोदी https://demo.theshikshanews.com/talavaaron-kee-jagah-doosare-tareekon-se-bhaarat-ke-khilaaph-ho-rahe-shadyantr-modee/ https://demo.theshikshanews.com/talavaaron-kee-jagah-doosare-tareekon-se-bhaarat-ke-khilaaph-ho-rahe-shadyantr-modee/#respond Sun, 11 Jan 2026 15:57:32 +0000 http://www.khabariya.com/?p=6107 NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Somnath। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां रविवार को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वह ताकतें मौजूद और पूरी तरह सक्रिय हैं, जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निर्माण का विरोध किया। आज तलवारों की जगह दूसरे तरीके से भारत के खिलाफ षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्य स्थल हैं। ये स्थल हमारे सामर्थ्य, प्रतिरोध और परंपरा के पर्याय रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने इनसे पल्ला झाड़ने की कोशिश की। उस इतिहास को भुलाने के कुत्सित प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, आज भी हमारे देश में वो ताकते मौजूद हैं, जो पूरी तरह सक्रिय हैं, जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निर्माण का विरोध किया। आज तलवारों की जगह दूसरे कुत्सित तरीकों से देश के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे या फिर रचे जा रहे हैं। इसलिए हमें ज्यादा सावधान रहना है, हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है। हमें एक रहना है, एकजुट रहना है, ऐसी हर ताकत को हराना है जो हमें बांटने की साजिशें रच रही हैं।
उन्होंने कहा कि जब हम अपनी आस्था से जुड़े रहते हैं, अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, पूरे स्वाभिमान के साथ अपनी विरासत का संरक्षण करते हैं, अपनी विरासत के प्रति सजग रहते हैं, तो हमारी सभ्यता की जड़ें भी मजबूत होती हैं। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर, मैंने भारत के लिए हजार साल का विराट स्वप्न सामने रखा था। मैंने ‘देव से देश’ के विजन के साथ आगे बढ़ने की बात कही थी। आज देश का सांस्कृतिक पुनर्जागरण करोड़ों देशवासियों में नया विश्वास भर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हर देशवासी के मन में विकसित भारत को लेकर एक भरोसा है। आज 140 करोड़ भारतीय भविष्य के लक्ष्यों को लेकर संकल्पित हैं। भारत अपने गौरव को नई बुलंदी देगा, हम गरीबी के खिलाफ अपनी लड़ाई में जीतेंगे, हम विकास की नई ऊंचाइयों को छुएंगे। पहले दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य, फिर उसके आगे का सफर, देश अब इसके लिए तैयार हो चुका है। और सोमनाथ मंदिर की ये ऊर्जा, हमारे इन संकल्पों को आशीर्वाद दे रही है।
उन्होंने कहा कि आज का भारत विरासत से विकास की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ में विकास भी विरासत भी ये भावना निरंतर साकार हो रही है। आज एक ओर, सोमनाथ मंदिर का सांस्कृतिक विस्तार, सोमनाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी की स्थापना, माधवपुर मेले की लोकप्रियता और उसके रंग, इनसे हमारी विरासत मजबूत हो रही है, गिर लायन के संरक्षण से इस क्षेत्र का प्राकृतिक आकर्षण बढ़ रहा है, तो वहीं, प्रभास पाटन क्षेत्र विकास के नए आयाम भी गढ़े जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केशोद एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। इससे देश-विदेश से श्रद्धालु सीधे सोमनाथ तक पहुंच सकेंगे। अहमदाबाद से वेरावल वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का समय कम हुआ है। इस क्षेत्र में यात्राधाम सर्किट का विकास भी किया जा रहा है। यानी, आज का भारत आस्था को स्मरण करने के साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और टेक्नॉलॉजी के जरिए उसे भविष्य के लिए सशक्त भी कर रहा है।
श्री मोदी ने कहा कि हमारी सभ्यता का संदेश कभी किसी को पराजित करने का नहीं रहा, बल्कि जीवन को संतुलन में रखने का रहा है। हमारे यहां आस्था की राह हमें घृणा की तरफ नहीं ले जाती। हमारे यहाँ शक्ति हमें विनाश करने का अहंकार नहीं देती। सोमनाथ जैसे तीर्थ ने हमें सिखाया है कि, सृजन का मार्ग लंबा होता है, लेकिन वही स्थायी होता है, चिरंजीव होता है।
उन्होंने कहा कि तलवार की नोक पर कभी दिलों को नहीं जीता जा सकता, जो सभ्यताएं दूसरों को मिटाकर आगे बढ़ना चाहती हैं, वे स्वयं समय में खो जाती हैं। इसीलिए, भारत ने दुनिया को ये नहीं सिखाया कि दूसरे को हराकर कैसे जीता जाए, बल्कि ये सिखाया कि कैसे दिलों को जीतकर जिया जाए। ये विचार आज दुनिया की जरूरत हैं। सोमनाथ की हजार वर्षों की गाथा पूरी मानवता को ये सीख दे रही है। इसलिए आइए, हम संकल्प करें, हम विकास की ओर आगे बढ़ें, कदम से कदम मिलाकर चलें, कंधे से कंधा मिलाकर चलें, मन से मन को जोड़कर चलें, लक्ष्य को ओझल दिए हुए बिना हम चलते चलें, और साथ ही अपने अतीत और अपनी विरासत से भी जुड़े रहें।
श्री मोदी ने कहा कि हम आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी चेतना को संभाले रखें। आइए, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व जैसे आयोजनों से प्रेरणा लेते हुए, विकसित होने के मार्ग पर तेजी से चलें। हर चुनौती को पार करते हुए, हम अपने लक्ष्य तक पहुंचें और ये कार्यक्रम आज तो शुरू हो रहा है, हमें हजार साल का स्मरण देश के कोन-कोने में करना है, दुनिया को हमारी विरासत का परिचय करवाना है, हमें 75 साल का ये नया पर्व भी मनाना है। हम 2027 मई तक इसको मनाते रहें, जन-जन को जगाते रहें , जगा हुआ देश सपनों को साकार करने के लिए चलता रहे, इसी कामना के साथ, एक बार फिर समस्त देशवासियों को मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

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संसद सत्र: जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू https://demo.theshikshanews.com/sansad-satr-jastis-varma-ke-khilaaph-mahaabhiyog-kee-prakriya-shuroo/ https://demo.theshikshanews.com/sansad-satr-jastis-varma-ke-khilaaph-mahaabhiyog-kee-prakriya-shuroo/#respond Tue, 12 Aug 2025 15:26:48 +0000 http://www.khabariya.com/?p=4728 लोकसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव स्वीकार कर समिति का किया गठन समिति की समय सीमा तय नहीं, यथा शीघ्र देगी अपनी रिपोर्ट
NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए कई सांसदों की तरफ से दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार, चेन्नई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता बीबी आचार्य शामिल हैं। समिति को रिपोर्ट देने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि समिति यथाशीघ्र अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। 146 सांसदों ने दिया था महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने तक जस्टिस वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव लंबित रहेगा। इससे पहले उन्होंने कहा कि 31 जुलाई को भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के 146 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव मिला है।
सदस्यों की तरफ से दिए गए इस प्रस्ताव में जस्टिस यशवंत वर्मा को न्यायाधीश जांच अधिनियम 1968 की धारा 3 के साथ संविधान के अनुच्छेद 124 (4) के साथ पठित अनुच्छेदों 217 और 218 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति को एक समावेदन प्रस्तुत करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ने 15 मार्च को न्यायमूर्ति वर्मा के दिल्ली स्थित आवास से जली हुई नकदी मिलने की घटना का पूरा विवरण भी पढ़ा। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर जले हुए नोट मिलने के बाद उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेज दिया गया था।
तथ्य गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं: बिरला लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान मामले से जुड़े तथ्य गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं। संसद को इस मुद्दे पर एक स्वर में बोलना चाहिए और देश की जनता को भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने का अपना संदेश भेजना चाहिए। इसके बाद उन्होंने जांच के लिए समिति के गठन का ऐलान किया। ओम बिरला ने कहा कि बेदाग चरित्र और वित्तीय एवं बौद्धिक ईमानदारी न्यायपालिका में आम आदमी के विश्वास की नींव है। उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है और न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 की धारा 3 (2) के अनुरूप जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति संसद में रिपोर्ट पेश करेगी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली समिति पूरे मामले की जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी।
जांच समिति न्यायाधीश को दोषी नहीं पाती है, तो आगे की कार्रवाई नहीं की जाती। समिति दोषी पाती है, तो सदन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकता है। सदन में प्रस्ताव पर बहस के दौरान न्यायाधीश (या उसके प्रतिनिधि) को अपना पक्ष रखने का अधिकार है। उसके बाद प्रस्ताव पर मतदान होता है। यदि मतदान करने वालों का दो-तिहाई समर्थन और सदन की कुल संख्या का बहुमत प्राप्त हो, तो प्रस्ताव पारित माना जाता है। इसके बाद यह प्रक्रिया दूसरे सदन में भी दोहराई जाती है। कौन हैं समिति के अध्यक्ष न्यायाधीश अरविंद कुमार?
न्यायाधीश अरविंद कुमार 16 वर्षों से अधिक समय तक न्यायाधीश रहे हैं। उन्होंने 13 फरवरी, 2023 को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। वह 13 जुलाई 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने इससे पहले गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया था। न्यायमूर्ति कुमार को 26 जून 2009 को कर्नाटक उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। सात दिसंबर, 2012 को उन्हें स्थायी नियुक्ति दी गई। 1987 में वकालत शुरू की 14 जुलाई 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति कुमार ने 1987 में वकालत शुरू की और 1999 में कर्नाटक उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता नियुक्त हुए। उन्हें 2005 में भारत का सहायक सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया।

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