23-year legal battle – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com ( A Unit OF NCR Today News Paper Group ) Thu, 23 Oct 2025 03:21:06 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://demo.theshikshanews.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-Khabariya-Logo-Samal-32x32.jpg 23-year legal battle – खबरिया.com https://demo.theshikshanews.com 32 32 कोर्ट ने 23 साल की कानूनी लड़ाई के बाद रेलवे को दिया महिला को मुआवजा देने का निर्देश https://demo.theshikshanews.com/kort-ne-23-saal-kee-kaanoonee-ladaee-ke-baad-relave-ko-diya-mahila-ko-muaavaja-dene-ka-nirdesh/ https://demo.theshikshanews.com/kort-ne-23-saal-kee-kaanoonee-ladaee-ke-baad-relave-ko-diya-mahila-ko-muaavaja-dene-ka-nirdesh/#respond Thu, 23 Oct 2025 03:20:38 +0000 http://www.khabariya.com/?p=5419 NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2002 में एक रेल हादसे में अपने पति को खो चुकी महिला को वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद रेलवे से उचित मुआवजा दिलाने की व्यवस्था की। सायनोक्ता देवी के पति विजय सिंह के पास 21 मार्च 2002 को बख्तियारपुर स्टेशन से भागलपुर-दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से पटना जाने के लिए वैध रेलवे टिकट था, लेकिन डिब्बे के अंदर भारी भीड़ के कारण वह दुर्घटनावश बख्तियारपुर स्टेशन पर ही चलती ट्रेन से गिर गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
सायनोक्ता देवी ने इसके बाद पति की मौत का मुआवजा पाने के लिए करीब दो साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। उनके दावे को रेलवे दावा न्यायाधिकरण और पटना उच्च न्यायालय ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि मृतक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।
⁠सायनोक्ता देवी ने उच्च न्यायालय द्वारा उनके दावे को खारिज करने के आदेश के खिलाफ वकील फौजिया शकील के माध्यम से उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में रेलवे दावा न्यायाधिकरण और पटना उच्च न्यायालय की दलीलों को खारिज करते हुए आदेशों को ‘‘पूरी तरह से बेतुका’’, ‘‘काल्पनिक’’ और ‘‘रिकॉर्ड पर निर्विवाद तथ्यों के विपरीत’’ करार देते हुए रद्द कर दिया।
शीर्ष अदालत ने 2 फरवरी, 2023 के अपने आदेश में कहा था,‘‘यह तथ्य सामने आता है कि अपीलकर्ता के दावे को न्यायाधिकरण और उच्च न्यायालय दोनों ने केवल इस आधार पर स्वीकार नहीं किया कि मृतक मानसिक रूप से अस्वस्थ था और वह एक अज्ञात ट्रेन ने गिरा था।’’
न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि यदि मृतक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होती तो उसके लिए पटना की यात्रा के लिए वैध रेलवे टिकट खरीदना लगभग असंभव होता और वह अकेले ट्रेन में चढ़ने की कोशिश भी नहीं करता।
शीर्ष अदालत ने रेलवे को निर्देश दिया कि वह मृतक की पत्नी को दावा याचिका दायर करने की तारीख से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दो महीने के भीतर चार लाख रुपये का मुआवजा दे।
लेकिन दुर्भाग्यवश उच्चतम न्यायालय के इस आदेश की जानकारी महिला को नहीं मिल सकी क्योंकि उनके स्थानीय वकील का निधन हो गया था।
दूसरी ओर रेलवे ने आदेश का पालन करने का प्रयास किया और सायनोक्ता देवी को विभिन्न पत्र लिखे, लेकिन सही पता न होने के कारण उनसे कोई जवाब नहीं मिल सका।
ब्याज सहित मुआवजा देने में असमर्थ रेलवे ने महिला को मुआवजा देने संबंधी 2 फरवरी, 2023 के आदेश का पालन करने में अपनी लाचारी व्यक्त की और उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
इसमें कहा गया है कि पटना उच्च न्यायालय को भी 21 मार्च को सूचित किया गया था कि राशि पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है, लेकिन महिला ने मुआवजा प्राप्त करने के लिए बैंक विवरण नहीं दिया है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि महिला अपनी पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उस स्थान से चली गई है जहां वह दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के समय रह रही थी।
महिला को मुआवजा राशि देने के लिए उसका पता लगाने के लिए, शीर्ष अदालत ने कोलकाता में पूर्वी रेलवे के प्रधान मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक को उस क्षेत्र में व्यापक प्रसार वाले दो प्रमुख समाचार पत्रों (अंग्रेजी और हिंदी) में एक सार्वजनिक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने नालंदा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और बख्तियारपुर थाने के प्रभारी को निर्देश दिया कि वे भौतिक रूप से महिला के पते को सत्यापित करें और यदि वे उसका पता लगाने में सक्षम हों तो उसे उसके दावे की स्वीकृति और दी गई राशि प्राप्त करने के उसके अधिकार के बारे में सूचित करें।
पीठ ने नालंदा के एसएसपी को चार सप्ताह के भीतर इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की भी मदद ली और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को व्यक्तिगत रूप से उस स्थान पर जाने को कहा जहां उसका अंतिम बार निवास बताया गया था। अदालत ने सचिव से महिला के ठिकाने के बारे में पूछताछ कर और उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में सत्यापन कर चार सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा।
इस महीने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बृजेन्द्र चाहर ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि रेलवे और स्थानीय पुलिस द्वारा काफी प्रयास करने के बाद यह पाया गया कि महिला के गांव का नाम गलत दर्ज किया गया था, जिसके कारण उसे भेजे गए सभी पत्र उसे कभी प्राप्त नहीं हुए।
उन्होंने कहा कि अंततः स्थानीय पुलिस सही गांव ढूंढने में सफल रही और उन्होंने महिला तथा उसके परिवार के सदस्यों का भी पता लगा लिया है।
पीठ ने इसके बाद रेलवे अधिकारियों को स्थानीय पुलिस की सहायता से महिला को मुआवजा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया और स्थानीय थाना प्रभारी को रेलवे अधिकारियों के साथ जाकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मुआवजा राशि उसके बैंक खाते में जमा हो जाए।
पीठ ने मामले की सुनवाई 24 नवंबर को करने का निर्देश देते हुए कहा, ‘‘सरपंच और ग्राम पंचायत के अन्य निर्वाचित सदस्य अपीलकर्ता (महिला) की पहचान करेंगे और इस उद्देश्य के लिए रेलवे के अधिकारी कुछ आधिकारिक दस्तावेजों की प्रतियां भी प्राप्त कर सकते हैं, जिन्हें रिकॉर्ड में दर्ज करना आवश्यक हो सकता है। इसके बाद, इस अदालत में एक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।’’

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